बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार
पार्ट 4
विवान- मेरे अपाहिज होने की एक झुठी खबर ने उससे उसका प्यार भुला दिया। प्यार में वो फायदा और नुकसान देखने लगी।
सुहानी- मैं मानती हूं कि स्वाती ने जो किया वो गलत था। कम से कम उसे आपसे मिलकर सच को जानना चाहिए था। पर उसने ऐसा नहीं किया। पर उसकी गलती की सजा आप न सिर्फ अपने आप को बल्कि आप से जुड़े लोगों को भी दे रहे हैं। यह भी गलत है।
विवान- मेरे लिए अब कुछ गलत और सही मायने नहीं रखता। कोई भी व्यक्ति मेरे बारे में क्या सोचता है या मेरे लिए क्या राय बनाता है मुझे इस बात से कोई लेना-देना नहीं है।
सुहानी- पर ऐसा कब तक करेंगे। आप फिर से एक शुरूआत कर सकते हैं।
विवान- प्यार को लेकर हमेशा से लड़कों को बदनाम किया जाता रहा है। कि लड़के धोखेबाज होते हैं। लड़कियों का फायदा उठाते हैं और फिर छोड़कर चले जाते हैं। हमेशा ये बुराई लड़कों के हिस्सों में ही आई है। प्यार की शुरूआत में इस बात को लेकर ही उसे जज भी किया जाता है। फिर पता चलता है कि धोखेबाज लड़का नहीं लड़की थी। उसके बाद भी दोष लड़के को ही दिया जाता है और कहा जाता है कि तुम्हारी ही कुछ कमी रही होगी, लड़कियां कभी साथ नहीं छोड़ती। पर सब गलत है। रिश्ता शुरू होने के साथ शर्ते लागू कर दी जाती है। फिर जब साथ निभाने की बारी आती है तो लड़कियों का परिवार, लड़के की हैसियत, अच्छा घर, सुखी जीवन की इच्छा, तुमसे अच्छा और भी कई कारण निकल आते हैं लड़कियों की ओर से और फिर एक रिश्ता टूट जाता है। रिश्ते की शुरूआत में यह सब चीजें नजर नहीं आती हैं पर बाद में सब कुछ इतना महत्वपूर्ण हो जाता है कि रिश्ता खत्म हो जाता है। यहां लड़कियां मतलब के लिए प्यार का दिखावा करती है, करती वही है जो उन्हें करना होता है। बातें करेगी सच्चे प्यार की, पर जब प्यार निभाने की बारी आती है तो सैकड़ों बहाने बनाकर चल देती है। क्या कभी सोचती है कि जिस इंसान के साथ उन्होंने इतना लंबा समय बिताया है उसके दिल पर क्या गुजरेगी। क्या लड़के इंसान नहीं होते है? मानता हूं कि कुछ लड़के गलत हो सकते हैं, पर हर लड़का गलत होगा ये तो नहीं कर सकते। अगर कुछ लड़के लड़कियों का फायदा उठाते हैं तो कुछ प्यार करना और निभाना भी जानते हैं। लड़कियों की चंद खोखली बातों के कारण उस इंसान का दिल तो हमेशा के लिए टूट जाता है ना। कुछ रिश्ते भगवान बनाकर भेजता है और उनसे जोड़ता है। पर प्यार का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता होता है, जिसे हम खुद अपनी पसंद और मर्जी से चुनते है। भगवान के बने रिश्ते तो हम जिंदगी भर निभाते हैं, पर खुद के बने रिश्तों को क्यों तोड़कर चले जाते हैं। भगवान के बने रिश्तों में कोई दरार आ जाए या कोई गलतफहमी बन जाए तो पुरजोर कोशिश करते हैं कि वह गलतफहमी दूर हो जाए, पर अपने बनाए रिश्तों को तोड़ने में एक मिनट की भी देरी नहीं करते हैं। ये रिश्ता था या कोई सौदा कि बात नहीं बनी तो सौदा खत्म। कभी जिस इंसान के साथ हमेशा जीने मरने की कसमें खाते हो, हर सुख-दुख में उसका साथ देने का वादा करते हो, उस इंसान को तब जब खासकर उसे आपी जरूरत हो अपनी फायदे के लिए छोड़कर चले जाते हो? बस यही होता है लड़कियों का प्यार?
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 2 यहां पढ़े
इतना बोलने के बाद विवान एक बार फिर चुप हो जाता है। कुछ देर के लिए दोनों के बीच खामोशी छा जाती है। एक ओर जहां सुहानी के दिमाग में विवान की अब तक सारी बातें घूम रही थी, वहीं विवान एक बार फिर अपनी पुरानी यादों में खो चुका था। दोनों अब तक खामोश थे।
सुहानी- आप सही कह रहे हैं। पर मैं फिर भी कहूंगी कि आप अब भी गलत कर रहे हैं। स्वाती ने गलत किया है, पर सजा आप खुद को दे रहे हैं।
विवान- सुहानी जी मै। एक खिलौना हूं। और खिलौन की मर्जी नहीं होती है कि उसे किसी का दिल बहलाना है या नहीं। कोई भी, कभी भी खिलौने से खेलकर अपना दिल बहला सकता है और जब दिल बहल जाए तो छोड़कर जा सकता है। जैसा कि स्वाती ने किया है। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उसके इस व्यवहार के कारण मुझे कितना बुरा लगा होगा। क्योंकि रिश्ते के उस समय को मैंने भी पूरी ईमानदारी से निभाया था। मैंने तो प्यार ही किया था। मुझसे जो हो सकता था वो मैंने किया था। हां, वक्त और परिस्थितियों पर मेरा वश नहीं है, कभी अच्छा तो कभी बुरा हो सकता है, पर रिश्तें को बनाए रखना तो हमारे बस में था। बुरे वक्त में अच्छे की ओर चल देना ये सिर्फ लड़कियां ही कर सकती हैं। उसे जो अच्छा लगा उसने वो किया, मुझे जो अच्छा लग रहा है वो मैं कर रहा हूं।
सुहानी- पर ये ठीक नहीं है विवान जी।
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 3 यहां पढ़े
विवान- क्या सही और क्या गलत मुझे नहीं पता। मै। तो कहता हूं कि दिल तोड़ने के पहले सिर्फ एक बार सोचा होता। कि यही सब उसके साथ होता तो क्या होता। कहना हर किसी के लिए आसान होता है कि सब भूलकर आगे बढ़ो, पर सब भूल जाना ही आसान नहीं होता है। प्यार के सच्चे और झुठे होने की धारणा मुझे नहीं पता, पर इतना पता है कि आज भी मुझे हर पल, हर बात में उसकी कमी महसूस होती है। पहले हर बात में वो शामिल हुआ करती थी, आज भी चाहता हूं कि वो शामिल हो। पर उसे इन बातों से फर्क नहीं पड़ता है, उसके लिए अब उसका परिवार, पैसा, रूतबा, लोगों की बातें ही मायने रखती है। उसे इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि मैं कहां हूं, मैं क्या कर रहा हूं, मेरे क्या हाल है? उसके सिर में कभी दर्द होता था तो मैं कुछ भी करने के लिए तैयार रहता था, मेरा एक्सीडेंट हो गया और उसने ठीक होने के बाद एक बार फोन करके पूछा भी नहीं कि अब तुम्हारे क्या हाल है। खैर जाने दीजिए सुहानी जी जितनी बात करूंगा उतनी ही लंबी होती जाएगी। मुझे मेरे हाल पर छोड़ दीजिए।
इतना कहने के बाद विवान वहां से चल देता है। सुहानी वहीं खड़ी रहती है। सुहानी विवान को तब तक देखती रहती है, जब तक कि वो उसकी आंखों से ओझल नहीं हो जाता। इसके बाद सुहानी कॉलेज आती है। वह अपन क्लास में पहुंचती है। हालांकि उसका ध्यान क्लास में ना होकर अब भी विवान की बातों पर ही था। विवान के कहे हर शब्द उसके कानों में गूंज रहे थे। वह सोच रही थी कि एक तरह से विवान का कहना सही है कि कोई किसी से प्यार करें और फिर उसे धोखा मिले तो उसे क्या करना चाहिए। इंसान आखिर टूट ही जाएगा। प्यार करने वाला ही उसे फिर से संभाल सकता है। पर विवान को वो संभाले तो कैसे। अब ऐसा लगने लगा था कि सुहानी विवान से प्यार करने लगी थी। वह मन ही मन तय करती है कि वह स्वाती से मिलेगी। चाहे इसके लिए उसे नागपुर ही क्यों ना जाना पड़े। वह एक बार स्वाती से जरूर बात करेगी। ऐसे ही सोचती हुए वह कॉलेज खत्म होने के बाद अपने घर पहुंच जाती है और अगले दिन नागपुर जाने के लिए तैयारी शुरू कर देती है।
सुहानी- मैं मानती हूं कि स्वाती ने जो किया वो गलत था। कम से कम उसे आपसे मिलकर सच को जानना चाहिए था। पर उसने ऐसा नहीं किया। पर उसकी गलती की सजा आप न सिर्फ अपने आप को बल्कि आप से जुड़े लोगों को भी दे रहे हैं। यह भी गलत है।
विवान- मेरे लिए अब कुछ गलत और सही मायने नहीं रखता। कोई भी व्यक्ति मेरे बारे में क्या सोचता है या मेरे लिए क्या राय बनाता है मुझे इस बात से कोई लेना-देना नहीं है।
सुहानी- पर ऐसा कब तक करेंगे। आप फिर से एक शुरूआत कर सकते हैं।
विवान- प्यार को लेकर हमेशा से लड़कों को बदनाम किया जाता रहा है। कि लड़के धोखेबाज होते हैं। लड़कियों का फायदा उठाते हैं और फिर छोड़कर चले जाते हैं। हमेशा ये बुराई लड़कों के हिस्सों में ही आई है। प्यार की शुरूआत में इस बात को लेकर ही उसे जज भी किया जाता है। फिर पता चलता है कि धोखेबाज लड़का नहीं लड़की थी। उसके बाद भी दोष लड़के को ही दिया जाता है और कहा जाता है कि तुम्हारी ही कुछ कमी रही होगी, लड़कियां कभी साथ नहीं छोड़ती। पर सब गलत है। रिश्ता शुरू होने के साथ शर्ते लागू कर दी जाती है। फिर जब साथ निभाने की बारी आती है तो लड़कियों का परिवार, लड़के की हैसियत, अच्छा घर, सुखी जीवन की इच्छा, तुमसे अच्छा और भी कई कारण निकल आते हैं लड़कियों की ओर से और फिर एक रिश्ता टूट जाता है। रिश्ते की शुरूआत में यह सब चीजें नजर नहीं आती हैं पर बाद में सब कुछ इतना महत्वपूर्ण हो जाता है कि रिश्ता खत्म हो जाता है। यहां लड़कियां मतलब के लिए प्यार का दिखावा करती है, करती वही है जो उन्हें करना होता है। बातें करेगी सच्चे प्यार की, पर जब प्यार निभाने की बारी आती है तो सैकड़ों बहाने बनाकर चल देती है। क्या कभी सोचती है कि जिस इंसान के साथ उन्होंने इतना लंबा समय बिताया है उसके दिल पर क्या गुजरेगी। क्या लड़के इंसान नहीं होते है? मानता हूं कि कुछ लड़के गलत हो सकते हैं, पर हर लड़का गलत होगा ये तो नहीं कर सकते। अगर कुछ लड़के लड़कियों का फायदा उठाते हैं तो कुछ प्यार करना और निभाना भी जानते हैं। लड़कियों की चंद खोखली बातों के कारण उस इंसान का दिल तो हमेशा के लिए टूट जाता है ना। कुछ रिश्ते भगवान बनाकर भेजता है और उनसे जोड़ता है। पर प्यार का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता होता है, जिसे हम खुद अपनी पसंद और मर्जी से चुनते है। भगवान के बने रिश्ते तो हम जिंदगी भर निभाते हैं, पर खुद के बने रिश्तों को क्यों तोड़कर चले जाते हैं। भगवान के बने रिश्तों में कोई दरार आ जाए या कोई गलतफहमी बन जाए तो पुरजोर कोशिश करते हैं कि वह गलतफहमी दूर हो जाए, पर अपने बनाए रिश्तों को तोड़ने में एक मिनट की भी देरी नहीं करते हैं। ये रिश्ता था या कोई सौदा कि बात नहीं बनी तो सौदा खत्म। कभी जिस इंसान के साथ हमेशा जीने मरने की कसमें खाते हो, हर सुख-दुख में उसका साथ देने का वादा करते हो, उस इंसान को तब जब खासकर उसे आपी जरूरत हो अपनी फायदे के लिए छोड़कर चले जाते हो? बस यही होता है लड़कियों का प्यार?
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 2 यहां पढ़े
इतना बोलने के बाद विवान एक बार फिर चुप हो जाता है। कुछ देर के लिए दोनों के बीच खामोशी छा जाती है। एक ओर जहां सुहानी के दिमाग में विवान की अब तक सारी बातें घूम रही थी, वहीं विवान एक बार फिर अपनी पुरानी यादों में खो चुका था। दोनों अब तक खामोश थे।
सुहानी- आप सही कह रहे हैं। पर मैं फिर भी कहूंगी कि आप अब भी गलत कर रहे हैं। स्वाती ने गलत किया है, पर सजा आप खुद को दे रहे हैं।
विवान- सुहानी जी मै। एक खिलौना हूं। और खिलौन की मर्जी नहीं होती है कि उसे किसी का दिल बहलाना है या नहीं। कोई भी, कभी भी खिलौने से खेलकर अपना दिल बहला सकता है और जब दिल बहल जाए तो छोड़कर जा सकता है। जैसा कि स्वाती ने किया है। उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उसके इस व्यवहार के कारण मुझे कितना बुरा लगा होगा। क्योंकि रिश्ते के उस समय को मैंने भी पूरी ईमानदारी से निभाया था। मैंने तो प्यार ही किया था। मुझसे जो हो सकता था वो मैंने किया था। हां, वक्त और परिस्थितियों पर मेरा वश नहीं है, कभी अच्छा तो कभी बुरा हो सकता है, पर रिश्तें को बनाए रखना तो हमारे बस में था। बुरे वक्त में अच्छे की ओर चल देना ये सिर्फ लड़कियां ही कर सकती हैं। उसे जो अच्छा लगा उसने वो किया, मुझे जो अच्छा लग रहा है वो मैं कर रहा हूं।
सुहानी- पर ये ठीक नहीं है विवान जी।
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 3 यहां पढ़े
विवान- क्या सही और क्या गलत मुझे नहीं पता। मै। तो कहता हूं कि दिल तोड़ने के पहले सिर्फ एक बार सोचा होता। कि यही सब उसके साथ होता तो क्या होता। कहना हर किसी के लिए आसान होता है कि सब भूलकर आगे बढ़ो, पर सब भूल जाना ही आसान नहीं होता है। प्यार के सच्चे और झुठे होने की धारणा मुझे नहीं पता, पर इतना पता है कि आज भी मुझे हर पल, हर बात में उसकी कमी महसूस होती है। पहले हर बात में वो शामिल हुआ करती थी, आज भी चाहता हूं कि वो शामिल हो। पर उसे इन बातों से फर्क नहीं पड़ता है, उसके लिए अब उसका परिवार, पैसा, रूतबा, लोगों की बातें ही मायने रखती है। उसे इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि मैं कहां हूं, मैं क्या कर रहा हूं, मेरे क्या हाल है? उसके सिर में कभी दर्द होता था तो मैं कुछ भी करने के लिए तैयार रहता था, मेरा एक्सीडेंट हो गया और उसने ठीक होने के बाद एक बार फोन करके पूछा भी नहीं कि अब तुम्हारे क्या हाल है। खैर जाने दीजिए सुहानी जी जितनी बात करूंगा उतनी ही लंबी होती जाएगी। मुझे मेरे हाल पर छोड़ दीजिए।
इतना कहने के बाद विवान वहां से चल देता है। सुहानी वहीं खड़ी रहती है। सुहानी विवान को तब तक देखती रहती है, जब तक कि वो उसकी आंखों से ओझल नहीं हो जाता। इसके बाद सुहानी कॉलेज आती है। वह अपन क्लास में पहुंचती है। हालांकि उसका ध्यान क्लास में ना होकर अब भी विवान की बातों पर ही था। विवान के कहे हर शब्द उसके कानों में गूंज रहे थे। वह सोच रही थी कि एक तरह से विवान का कहना सही है कि कोई किसी से प्यार करें और फिर उसे धोखा मिले तो उसे क्या करना चाहिए। इंसान आखिर टूट ही जाएगा। प्यार करने वाला ही उसे फिर से संभाल सकता है। पर विवान को वो संभाले तो कैसे। अब ऐसा लगने लगा था कि सुहानी विवान से प्यार करने लगी थी। वह मन ही मन तय करती है कि वह स्वाती से मिलेगी। चाहे इसके लिए उसे नागपुर ही क्यों ना जाना पड़े। वह एक बार स्वाती से जरूर बात करेगी। ऐसे ही सोचती हुए वह कॉलेज खत्म होने के बाद अपने घर पहुंच जाती है और अगले दिन नागपुर जाने के लिए तैयारी शुरू कर देती है।








Great storyline
ReplyDeleteVery good
ReplyDeleteVery nice story
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