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 लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 5 Missing- after all, who is looking for ...

 लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 5


लापता- आखिर किसकी तलाश है... पहला पार्ट यहां पढ़े

अब तक आपने पढ़ा...

मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और कमिश्नर और विदेश मंत्री किसी बात को लेकर खासे परेशान है। वे उस समस्या का समाधान चाहते हैं। उनकी समस्या एक मिशन में खोया हुआ व्यक्ति है, जिसकी मिलना उनके और सरकार के लिए बहुत जरूरी है। मिशन सोरम सरकार का एक गुप्त मिशन हुआ करता था। परंतु बाद में इसे बंद कर दिया गया। इस मिशन से जुड़े सभी लोगों की एक बस धमाके में मौत हो गई थी, परंतु इनमें से एक बच निकला था। उस बचे हुए व्यक्ति के बारे में सरकार को 10 साल से कोई सुराग नहीं मिला था। उसकी तलाश का जिम्मा कमिश्नर के कहने पर मुख्यमंत्री मिहिर राजपूत को सौंपते हैं। मिहिर भी अपने मिशन पर निकल जाता है, परंतु उस अब तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। मिशन के दौरान उसे एक बंजारों के वैध के बारे में पता चलता है, जो उस धमाके के बारे में ज्यादा जानकारी दे सकता है, परंतु उस वैध का भी कोई अता पता नहीं है। मिहिर को लगता है कि शायद अब उसका मिशन पूरा नहीं हो पाएगा। 

अब आगे...

मिहिर वापस अपने शहर आ जाता है। यहां आकर सबसे पहले वो अपने दो विश्वासपात्र लोगों को उस वैध का फोटो देकर उसकी तलाश में  लगा देता है। उसके दोनों खास व्यक्ति भी अपने काम के लिए निकल जाते हैं। हालांकि वो उन दोनों इस संबंध में खास हिदायत भी देता है कि इस काम के संबंध में किसी को पता नहीं चलना चाहिए। साथ ही यह भी कहता है कि उसे हर हाल में उस वैध की जानकारी चाहिए। वैध कहां है, कैसा है, क्या करता है,  यदि जिंदा नहीं है तो कब मौत हुई उसकी, मौत से पहले उसके साथ कौन था, वो क्या करता था, अगर कोई उसके साथ था वो अब कहां और क्या करता है? ऐसे ही कई सवालों के जवाब खोजने के लिए मिहिर के वो दोनों व्यक्ति जा चुके हैं। इधर मिहिर मिशन के बारे में सोच रहा है और वो तय करता है कि मिशन सोरम को जो हेड था, एक बार उसके बारे में भी जानकारी जुटाई जानी चाहिए। इसलिए वो कमिश्नर को काॅल करता है। 

लापता- आखिर किसकी तलाश है... दूसरा पार्ट यहां पढ़े 

कमिश्नर आनंद- हां, मिहिर बोलो। 

मिहिर- सर मैं आपसे मिलना चाहता हूं। 

कमिश्नर आनंद- ओके तुम मेरे घर आ जाओ। 

कुछ ही देर में मिहिर कमिश्नर के घर पहंुच जाता है।

कमिश्नर आनंद- हां मिहिर बोलो क्या हुआ ?

मिहिर- सर, मिशन केतु के बारे में मेरा प्रयास जारी है, पर मुझे मिशन सोरम से संबंधित कुछ जानकारी भी चाहिए। 

कमिश्नर आनंद- जितनी जानकारी हमारे पास थी, वह हम तुम्हें बता चुके हैं मिहिर। इससे ज्यादा जानकारी तो मेजर राघव ही दे सकते थे, जो अब इस दुनियां में नहीं है। उनके साथ ही मिशन सोरम से संबंधित जानकारी खत्म हो गई है। 

मिहिर- क्या मुझे उनके घर जाने की इजाजत मिल सकती है सर? 

कमिश्नर आनंद- बिल्कुल मिल सकती है, पर मुझे नहीं लगता कि तुम्हें वहां कुछ मिलेगा, क्योंकि पहले भी कई लोग उनके घर जा चुके हैं। 

मिहिर- तो मैं भी एक बार खुद की तस्सली करना चाहूंगा सर। 

कमिश्नर आनंद- ठीक है मिहिर तुम चले जाओ, वहां तुम्हें हमारा एक एसआई विजय सिंह मिलेगा। 

मिहिर- ठीक है सर। अब मैं चलता हूं। जल्द ही आपसे फिर मुलाकात करूंगा। 

कमिश्नर आनंद- ठीक है मिहिर।  जल्द से जल्द केतु के बारे में कोई खबर दो। 

इसके बाद मिहिर वहां से चला जाता है और अगले दिन सुबह वह मेजर राघव के घर पहंुच जाता है। वहां उसे एसआई विजय सिंह भी मिल जाता है। हालांकि मेजर का घर पूरी तरह से उथल पुथल जैसे कोई तलाशी लेकर गया हो।

मिहिर- विजय सिंह ? 

विजय सिंह- जी, हां आप मिहिर राजपूत? 

मिहिर- जी, हां। आप जानते हैं मुझे? 

लापता- आखिर किसकी तलाश तीसरा पार्ट यहां पढ़े 



विजय सिंह- नहीं सर। पर कल रात कमिश्नर साहब का फोन आया था मेरे पास कि आप यहां आने वाले हैं। 

मिहिर- ओके, पर विजय ये सब क्या है? 

विजय सिंह- सर अब तो इसकी आदत सी हो गई है। हर 10 से 15 दिन में यहां कोई आता है, कुछ तलाश करने की कोशिश करता है और शायद खाली हाथ लौट जाता है। 

मिहिर- पर? 

विजय सिंह- पहले दो चार बार शिकायत की थी मैंने। उसके बाद तो बड़े अधिकारियों ने भी इस पर ध्यान देना बंद कर दिया। अब जब भी कोई घर को इस हाल में छोड़कर जाता है तो कुछ मजदूर बुलाता हूं और फिर से पहले जैसा कर देता हूं। 

मिहिर- चलो ये भी अच्छा है। तो क्या मैं अंदर जाकर देख सकता हूं। 

विजय सिंह- बिल्कुल देखिए सर। आज तो सब बहुत आराम से देख सकते हैं आप। 

मिहिर- हां, देख सकता हूं। पर जो देखना चाहता हूं वह अगर मुझे मिल जाए तो अच्छा है।

इसके बाद मिहिर घर के अंदर चला जाता है। वह घर के हर कमरे को बड़े गौर से देखता है। करीब एक घंटे तक वह घर की तलाश लेता है, पर उसे वहां कुछ नहीं मिलता है। तभी विजय भी घर में आ जाता है। 

विजय सिंह- तो कुछ मिला सर। 

मिहिर- नहीं विजय। लगता है यहां कुछ नहीं है। पर विजय ये तलाशी लेने वाला यहां अब तक कितनी बार आ चुका है। 

विजय सिंह- यही कोई 10 से 12 बार। 

मिहिर- 10 से 12 बार आ चुका है और फिर भी बार-बार आ रहा है। इसका मतलब यहां कुछ तो है, जो न उसे मिल रहा है ना ही हमारी किसी टीम को मिला है। 

विजय सिंह- मुझे भी कुछ ऐसा ही लगता है सर। पर आखिर जो कुछ भी है वो है कहां। क्योंकि कम से कम 20 बार यहां तलाशी ली जा चुकी है, पर आज तक किसी को भी यहां कुछ नहीं मिला है। 

मिहिर- अगर किसी को नहीं मिला है तो फिर हमें उसे तलाश करना ही होगा विजय। क्योंकि यहां ऐसा कुछ तो है जो किसी के लिए बहुत जरूरी है। 

विजय सिंह- हां सर। पर वो जो कुछ भी है वो आखिर है कहां ?

मिहिर- इसी घर में। आओ एक बार फिर से कोशिश करते हैं। 

लापता- आखिर किसकी तलाश चौथा पार्ट यहां पढ़े 



इसके बाद दोनों फिर से घर के हर कमरे की बड़ी पैनी नजरों के साथ तलाशी लेते है। घर मेंने स्टोर रूम में विजय पहुंच जाता है। वहां भी सारा सामान बिखरा पड़ा था। उस कमरे की भी तलाशी लेने के बाद मिहिर उस कमरे से बाहर निकल कर उसका दरवाजा बंद करता है। अचानक उसे कुछ अहसास होता है और वह फिर से दरवाजा खोलता है। दो से तीन बा रवह दरवाजा बंद करता है और फिर खोलता है। इसी बीच विजय भी वहां आ जाता है। मिहिर मुस्कुरा रहा था। 

विजय सिंह- सर, आप मुस्कुरा रहे हैं, लगता है आपको कुछ मिल गया है यहां। 

मिहिर- शायद। जो अब तक किसी को नहीं मिला वो शायद हमें मिल गया है विजय। आओ। पर एक काम करो सबसे पहले तुम घर के बाकि सारे खिड़की दरवाजे बंद कर दो। 

विजय दरवाजे और खिड़की बंद कर आता है। फिर विजय और मिहिर कमरे में फिर से जाते हैं। मिहिर कमरे में बनी एक अलमारी के हिस्से को देखता है और फिर उसके साथ कुछ करता है, तभी वह अलमारी एक साइड की ओर खुल जाती है। हालांकि लंबे समय से बंद रहने के कारण वह कुछ जाम हो गई थी, इस कारण विजय और मिहिर दोनों ताकत लगाकर उसे खोलते है। अलमारी खोलने के बाद उन्हें वहां एक कमरा नजर आता है। कमरे में जाकर मिहिर और विजय चैंक जाते हैं क्योंकि वह खुफिया कमरा था। कमरे में काफी सारी अखबारों की कटिंग के साथ ही एक कंप्यूटर, फोन, कैमरा, कुछ हथियार रखे हुए थे। मिहिर सारा सामान देखता है। वहां उसे कुछ सीडी भी मिलती है। मिहिर और विजय वहां से सारा सामान एक बड़े से बैग में रखते हुए और फिर उस कमरे से बाहर आ जाते हैं। उस अलमारी को फिर से पहले की तरह बंद कर देते हैं। 


 लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 4 Missing- after all, who is looking for ...

  लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 4

लापता- आखिर किसकी तलाश है... पहला पार्ट यहां पढ़े

जंबो काका- सच कहूं तो मुझे अब तक यही लगता है कि उस धमाके में कोई तो बचा था। पर कौन बचा, कैसे बचा, कहां गया कुछ पता ही नहीं चला। 

मिहिर- काका उस धमाके के समय ऐसा कुछ था जो आम तौर पर नहीं होता। 

जंबो काका- ऐसा तो कुछ नहीं था, पर हां उस समय यहां पास में ही एक बंजारों का डेरा हुआ करता था। धमाके के कुछ दिन वह भी रातों रात गायब हो गया। एक ही रात में बंजारे कहा चले गए कुछ पता ही नहीं चला। 

मिहिर- धमाके से कितने दिन बाद वो बंजारे यहां से चले गए थे काका? 

जंबो काका- ठीक से तो कुछ याद नहीं पर शायद 20 या 25 दिन रहे होंगे। 

मिहिर- और कुछ काका ?

जंबो काका- नहीं ऐसा तो कुछ नहीं। हां, याद आया। धमाका होने के कुछ ही देर बाद वहां एक काले रंग की बडत्री सी कार आई थी और फिर तुरंत ही चली गई। 

मिहिर- उस कार के बारे में कुछ याद है काका ?

जंबो काका- नहीं अब तो यह 15 बरस पुरानी बात है। इतना कहां याद रहता है। पर हां एक बात है कि उस कार पर पीछे शीशे पर बहुत सारे गोले बने हुए थे। 

मिहिर- गोले ? 

जंबो काका- हां गोले, मुझे तो कुछ समझ नहीं आया। 

मिहिर- अच्छा काका वो बंजारों का जो डेरा था उसके बारे में कुछ पता है क्या आपको ?

जंबो काका- बहुत तो नहीं पता पर इतना पता है कि उन बंजारों का जो सरदार था उसका नाम हीरा था। उसके डेरे में करीब 200 लोग थे। कभी यहां तो कभी कहां। ऐसे ही घूमते रहते थे। वो कहता था कि उसने अपने डेरे के साथ पूरा भारत घूम लिया है। 

मिहिर- ठीक है काका। आपने मेरी बहुत मदद की है, आपको धन्यवाद। 

जंबो काका से जानकारी हासिल कर मिहिर वहां से निकल जाता है। वहां से वह अपना अगला सफर शुरू करता है। अब वह बंजारों के सरदार हीरा के बारे में पता लगाना चाहता है। इस कारण वह अब उस हादसे वाले स्थान के आसपास के गांवों में हीरा के बारे में जानकारी जुटाता है। हालांकि उसे आसपास के गांव में कोई जानकारी नहीं मिलती है। हीरा की तलाश में वह कई गांवों में पहुंच जाता है। आखिरकार एक गांव में उसे हीरा के बारे में जानकारी मिलती है। गांव से उसे पता चलता है कि प्रदेश की बॉर्डर पर फिलहाल उनका डेरा जमा है। बारिश होने वाली है, इस कारण पूरी बारिश में वे लोग घूमते नहीं है इस कारण वे लोग कम से कम तीन महीने वहीं रहेंगे। वहां हीरा मिल सकता है। मिहिर अब प्रदेश की बॉर्डर का सफर तय करता है। दो दिन के बाद वह उस जगह पहुंच जाता है, जहां बंजारों का डेरा लगा था। मिहिर बंजारों के डेरे में पहुंचकर उनके सरदार हीरा से मिलने की इच्छा जाहिर करता है। कुछ ही देर में वो हीरा के सामने था। हालांकि हीरा उसे रात को आराम करने का कहता है और वो जिस भी काम से वहां आया है, उसके बारे में सुबह बात करने की कह देता है। इसके बाद मिहिर आराम करने के लिए चला जाता है। लंबा सफर तय करने के कारण वो यूं भी थक चुका था। अगले दिन मिहिर एक बार फिर हीरा के सामने होता है। 


लापता- आखिर किसकी तलाश है... दूसरा पार्ट यहां पढ़े 

हीरा - अब बताओ बाबू क्या मदद चाहिए हीरा की ?

मिहिर- बात कुछ पुरानी है इसलिए आपको शायद थोड़ा दिमाग पर जोर देना पड़े। 

हीरा- कोई बात नहीं। बात बताओ। 

मिहिर- आज से 15 साल पहले काशीपुर गांव के पास सड़क पर एक बस में हादसा में हुआ था। मुझे उसके बारे में ही कुछ जानना है। 

हीरा- हां, याद है बाबू। उस हादसे को कैसे भूल सकते हैं। इतना तेज धमाका मैंने आज तक नहीं सुना है। 

मिहिर- मैं वहीं जानना चाहता हूं कि आखिर उस दिन हुआ क्या था ? 

हीरा- बाबू धमाके से पहले क्या हुआ यह तो नहीं पता, पर जैसे ही धमाका हुआ मैं और मेरे डेरे के लोग जो उस सड़क से कुछ ही दूर पर थे, दौड़कर बस के पास पहुंचे। हम जब वहां पहुंचे तो बस पूरी तरह से जल गई थी। उस बस में जितने भी लोग सवार थे, सभी जिंदा जल गए थे। 

मिहिर- पर क्या आपने वहां कुछ अलग देखा था ?

हीरा- अलग था या नहीं यह मुझे नहीं पता पर जब हम लोग वहां पहुंचे थे, तो एक बड़ी सी गाड़ी वहां से जा रही थी। उसके शीशे पर कुछ गोले बने हुए थे। 

मिहिर- और कुछ ?

हीरा- और तो ऐसा कुछ खास नहीं था। 

मिहिर- उस धमाके के बाद कुछ हुआ हो? 

हीरा- धमाके के बाद तो ये समझ लो बहुत कुछ हुआ था। पता नहीं कौन-कौन से लोग आकर हमसे पूछताछ करते रहते थे। आखिर में हमको वो जगह ही छोड़ना पड़ी। अब देखों 15 साल बाद तुम आ गए पूछताछ करने के लिए। आखिर उस धमाके में ऐसा क्या हो गया था कि 15 साल बाद भी पूछताछ कर रहे हो। 

मिहिर- बहुत कुछ हो सकता है हीरा जी अगर उस धमाके का राज नहीं खुला तो। वैसे और कोई खास बात याद है आपको उस धमाके के बारे में या धमाके के बाद। 

हीरा- बात तो है, पर पता नहीं वो तुम्हारे काम की है या नहीं। 

मिहिर- कौन सी बात ?

हीरा- हमारे डेरे में एक वैध हुआ करते थे। हादसे के बाद वे काफी गुमसुम रहने लगे थे। कोई 15 दिन वो अचानक लापता हो गए। उसके बाद से उनकी कोई खबर नहीं है। 

मिहिर- लापता हो गए मतलब ?

हीरा- मतलब ये बाबू कि रात को वो मुझसे मिलकर गए थे। मेरी तबीयत उस दिन कुछ खराब थी तो मैंने दवा मंगाई थी। वो ही दवा देने आ गए थे। कुछ देर मेरे पास बैठे, मुझे दवा दी और फिर चले गए। सुबह मैंने फिर उनसे दवा मंगाई तो वो डेरे में नहीं थे। हमने आसपास काफी खोजा पर उनका कुछ पता नहीं चला। 


लापता- आखिर किसकी तलाश तीसरा पार्ट यहां पढ़े 

मिहिर- आप बता रहे थे कि वो कुछ गुमसुम रहते थे, उसका कुछ पता चला था आपको ?

हीरा- नहीं। वो ही अचानक लापता हो गए तो उनके गुमसुम रहने का कारण भी पता नहीं चल पाया। हां, पर एक बात है वो धमाके के बाद से पूरा दि नही डेरे से गायब रहते थे। कोई पूछता तो कह देते थे कि पास के जंगल में गया था बूटिया देखने। पर यहां से जंगल तो बहुत दूर है। 

मिहिर- मतलब आपको उनके बारे में कुछ नहीं पता ? 

हीरा- नहीं। 

मिहिर- उनका कोई फोटो है आपके पास ? 

हीरा- हां एक बार हम मेला गए थे तो बड़ी जिद करके उनका भी एक फोटो लिया था, वहीं है। पर वो तो बहुत पुराना है। 

मिहिर- कोई बात नहीं आप दिखा तो दीजिए। 


हीरा उस वैध का फोटो लाता है और मिहिर अपने मोबाइल में उसका एक फोटो खींच लेता है। उसके बाद वह हीरा से विदा लेकर वहां से चल देता है। डेरे से कुछ दूर जाकर कमिश्नर को फोन करता है और अभी तक की सारी जानकारी उसे देता है। फोन कट करने के बाद मिहिर सोचता है कि हो न हो उस वैध को उस धमाके के बारे में कुछ ऐसा पता था, जिसके कारण वह गुमसुम रहता था और सारा दिन डेरे से गायब रहता था। आखिर ऐसी कौन सी बात है, जो उन्हें डरा रही थी। फिर अचानक एक दिन लापता हो गए। कोई बात तो जरूर है। डेरे से ऐसे कोई व्यक्ति कैसे गायब हो सकता है ? मिहिर को अब अपने मिशन को आगे बढ़ाने के लिए उस वैध को तलाश करना जरूरी था। क्योंकि अब मिहिर के मिशन को आगे का रास्ता उस वैध से ही मिल सकता था। पर समस्या यह थी कि वैध को आखिर कहां और कैसे तलाश किया जाए, क्योंकि उस वैध गायब हुए भी 15 साल बीत चुके हैं। मिशन केतु मिहिर के लिए बहुत मुश्किल मिशन साबित होने वाला था। क्योंकि उन सब बातों का पता लगाना था जो 15 साल पहले हो चुकी है। ऐसे में उन बातों से जुड़ा कोई भी सुराग मिलना अब बहुत मुश्किल है। 


 लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 3 Missing- after all, who is looking for ...

 लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 3


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कमिश्नर के घर से निकलकर मिहिर सीधे अपने घर पर आ जाता है। वह घर पर उस फाइल को बहुत बारिकी से पढ़ता है, जो फाइल उसे कमिश्नर ने दी थी। इस फाइल में केतु के गायब होने सेलेकर अब तक उसकी तलाश के लिए क्या किया गया और क्या मिला इसकी पूरी जानकारी थी। इस फाइल में उन लोगों के नाम भी शामिल थे, जो इससे पहले इस केस को देख चुके हैं। मिहिर काफी देर तक उस फाइल को पढ़ता है। फिर वह तय करता है कि केतु की तलाश के लिए वह अकेला ही निकलेगा। हालांकि केतु के साथ ही उसे यह भी पता करना था कि बस में विस्फोट किसने कराया था। क्योंकि सरकार का प्लान फेल हुआ और किसी और ने बस में विस्फोट कराया, इसका मतलब साफ है कि सरकार के अलावा कोई और भी है  या था, जो उन कमांडो के बारे में जानता था। या हो सकता है कि उसे मिशन सौरम के बारे में भी पूरी जानकारी हो। ऐसे में ये संभावना भी बनती है कि अगर उसे कमांडो और मिशन सौरम के बारे में जानकारी हो, उसने ही बस में विस्फोट कराया हो तो उसे उन देशों की खुफिया जानकारी भी हासिल कर ली हो, जिस देश वो कमांडो तैनात किए गए थे। यह भी संभव है कि केतु ने ही विस्फोट कराया हो और खुद विस्फोट से पहले बचकर भाग निकला हो। ऐसी कई संभावनाओं और आशंकाओं के बारे में मिहिर सोच रहा था। 

अगले दिन मिहिर मिशन केलिए तैयार था। हालांकि अब सोचना यह था कि मिशन की शुरूआत कहां से करना है। पहले वह केतु के बारे में जानकारी जुटाए या उस व्यक्ति के बारे में जिसने उस बस में विस्फोट कराया था। यदि मिहिर उस विस्फोट को कराने वाले व्यक्ति का पता लगाता है तो संभावना है कि उसे उस व्यक्ति से केतु के बारे में भी कोई जानकारी मिल जाए। पर सवाल यहां यह भी था कि यदि वह व्यक्ति केतु ही है तो फिर तो उसके दोनों मिशन एक साथ पूरे हो सकते हैं। यह भी हो सकता है कि केतु और विस्फोट करने वाला व्यक्ति अलग-अलग हो और केतु और वह दोनों आपस में मिले हो? केतु केमिल जाने से उस व्यक्ति के बारे में भी जानकारी मिल जाए? इसलिए मिहिर अब केतु को पहले तलाश करने का तय करता है। हालांकि उसके सामने अब एक सवाल और आकर खड़ा हो गया था कि आखि रवह केतु की तलाश कहां से शुरू करें क्योंकि उसके पास केतु के नाम के अलावा कुछ नहीं है। उसकी कोई सूरत भी उसके सामने नहीं है। काफी सोचने के बाद वह तय करता है कि जहां विस्फोट हुआ था मिशन की शुरूआत भी वहीं से करना चाहिए। यह सोचकर वह उस जगह के लिए निकल जाता है जहां 15 साल पहले उस बस में विस्फोट हु आ था। हालांकि उस जगह पर निकलने से पहले वह कमिश्नर आनंद सुपात्रे को फोन कर सूचना दे देता है।

लंबा सफर तय करने के बाद मिहिर आखिर उस जगह पर पहुंच जाता है जहां 15 साल पहले उस बस में विस्फोट हुआ था। हालांकि हादसे को 15 साल हो चुके थे तो अब वहां उस विस्फोट से जुड़ा कोई भी सुराग मिलने की उम्मीद लगभग न के बराबर थी। बस यही बात को सोचकर मिहिर उस जगह को एक बार देखता है और फिर से वहां से आगे निकल जाता है। कुछ दूर चलने के बाद वह सड़क से नीचे की ओर चला जाता है। वहां भी वो कुछ दूर चलता है, तब उसे एक आदमी दिखाई पड़ता है। वह उसके पास जाता है। 


लापता- आखिर किसकी तलाश है... दूसरा पार्ट यहां पढ़े 

मिहिर- आप यही रहते हैं क्या ? 

आदमी- जी हां, साहब और हमारा नाम बिसवा है। 

मिहिर- तो बिसवा तुम यहां कब से रह रहे हो? 

बिसवा- हम तो पैदा ही यही हुए है साहब। पर आप यह क्यों पूछ रहे हैं? रास्ता भटक गए हो क्या ?

मिहिर- अभी कैसे भटक सकता हूं रास्ता, अभी तो रास्ते पर चलना शुरू ही किया है। 

बिसवा- क्या मतलब साहब, हम कुछ समझे नहीं।

मिहिर- वो छोड़ो ये बताओ यहां कोई बस्ती या गांव है क्या? जहां तुम रहते हो? 

बिसवा- हां साहब, ये छोटी पहाड़ी के पीछे हमारा एक छोटा सा गांव है। 

मिहिर- कितने लोग रहते हैं वहां ? 

बिसवा- यही कोई 40-45 घर है साहब, ज्यादा लोग नहीं रहते हैं।

मिहिर- अच्छा ये बताओ आज से करीब 15 साल पहले यहां एक बस में धमाका हुआ था, उसके बारे में तुम्हें कुछ पता है ?

बिसवा- 15 साल पहले... हमें तो कुछ याद नहीं है साहब। और उस समय तो हम इस ओर आते भी नहीं थे। 

मिहिर- कोई ऐसा है जो मुझे उस धमाके के बारे में कुछ बता सके ?

बिसवा- पर साहब आप 15 साल पहले हुए धमाके के बारे में अब क्यों पूछ रहे हैं ?

मिहिर- अरे, जो पूछ रहा हूं वो बताओ। 

बिसवा- हमें कुछ नहीं पता साहब, जय राम जी की। 

मिहिर- अरे तुम तो गुस्सा हो गए। मैं तो ऐसे ही कह रहा था। बताओ कोई है ऐसा जो मुझे उस धमाके के बारे में बता सके ?

बिसवा- गुस्सा कहां साहब। हम कहां गुस्सा करेंगे। ढोर चराने वाले गुस्सा करके कर भी क्या लेंगे। 

मिहिर- हां तो फिर बताओ। 

बिसवा- हमारे गांव में एक जंबो काका है, शायद वो आपको कुछ बता दे। 

मिहिर- जंबो काका ?

बिसवा- हां साहब जंबो काका। 

मिहिर- पर ये कैसा नाम है। 

बिसवा- वो क्या है ना साहब एक तो वो बहुत बुढ़े हैं और बहुत लंबे भी है, इस कारण सब उन्हें जंबो काका ही कहते हैं। 

मिहिर- अच्छा तो फिर तुम्हारे गांव का रास्ता कौन सा है ?

बिसवा- ये सामने जो आप छोटी पहाड़ी देख रहे हैं ना साहब, इसके पास से एक पगडंडी गई है, बस उस पर सीधे चलते जाओ, हमारे गांव पहुंच जाओगे। 

मिहिर- कितनी दूर है तुम्हारा गांव ?

बिसवा- बस यही कोई 10 या 12 किलोमीटर। 

मिहिर- 10 या 12 किलोमीटर बस ?

बिसवा- हां, साहब, हम तो रोज जानवरों को लेकर आते हैं। 

मिहिर- ठीक है बिसवा। आपका बहुत बहुत धन्यवाद। 

बिसवा- अरे साहब धन्यवाद काहे का। हम कहां कुछ करे हैं? अच्छा हम भी चलते हैं, देखे हमारे जानवर कहां हैं ?

मिहिर- ठीक है बिसवा। 


मिहिर यहां से बिसवा केबताए रास्ते की ओर चल पड़ता है। पहाड़ी रास्ता होने के कारण वह पैदल उस रास्ते पर गया था इस कारण उसे रात हो जाती है। गांव में पहुंचने के बाद उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करें। इस कारण एक खाली जगह पर वह रूक जाता है और रात को वहीं सो जाता है। दिन भर के सफर के कारण उसे थकान हो चुकी थी, इस कारण वह जल्दी ही सो जाता है। अगले दिन वह सुबह उठता है और फिर अपने मिशन के लिए चल पड़ता है। गांव में वह कुछ लोगों से जंबो काका का पता पूछता है। पर कोई उसे ठीक नहीं बता पाता कि आखिर जंबो काका कहां मिलेंगे। फिर एक गांव का ही बंदा उसे कहता है कि छोटी पहाड़ी पर जाकर देख लो अगर गांव में नहीं है तो जंबो काका पहाड़ी पर ही बैठे होंगे। मिहिर फिर पहाड़ी पर चढ़ता है। पहाड़ी पर पहुंचने के बाद उसे दूर एक बुजुर्ग नजर आता है वह समझ जाता है कि हो न हो यही जंबो काका है। मिहिर उनके पास जाकर उन्हें आवाज देता है। करीब दो या तीन आवाज के बाद वह बुजुर्ग व्यक्ति उसे पलटकर देखता है। जंबो काका काफी बुढ़े हो चुके थे। फिर भी वे पहाड़ी पर चढ़ जाते थे, यह सोचकर मिहिर को कुछ आश्चर्य होता है। फिर वह उनसे बात करने की कोशिश करता है। वो कोई जवाब नहीं देते हैं। हालांकि गांव वालों ने बताया था कि जंबो काका हमेशा गुस्से में रहते हैं। किसी से ठीक से बात नहीं करते हैं। खासकर अंजान लोगों से तो बिल्कुल ही बात नहीं करते हैं। मिहिर भी बात करता ही रहता है।  

मिहिर- काका कैसे हो? 

जंबो काका- कौन है तू ? क्यों परेशान कर रहा है ?

मिहिर- काका मैं बहुत दूर से आया हूं। 

जंबो काका- तो ?

मिहिर- मुझे आपसे कुछ बात करना है। 

जंबो काका- मुझे कोई बात नहीं करना, तू जा यहां से। इतना कहकर वह एक छोटा सा पत्थर उठाकर मिहिर पर फेंक देते हैं। 

मिहिर- काका बहुत जरूरी बात करना है। 

इस अब बार जंबो काका मिहिर को घूरकर देखते हैं। 

मिहिर- हां, काका बहुत जरूरी बात है। इसलिए तो इतनी दूर से आया हूं। गांव में किसी ने बताया था कि बस आप ही मेरी मदद कर सकते हो। 

जंबो काका- क्या है ?

मिहिर- काका करीब 15 साल पहले आपके गांव के बाहर वाली सड़क पर एक बस में धमाका हुआ था। उसके बारे में आपको क्या पता है ?

मिहिर की बात को सुनकर जंबो काका एकदम से उसका चेहरा देखते हैं। फिर वह सोचने लगते हैं, पर वह बोलते कुछ नहीं है। मिहिर एक बार फिर उनके सामने अपना सवाल दोहराता है, पर इस बार भी काका कुछ नहीं बोलते हैं। मिहिर कई बा रवह सवाल करता है। 

जंबो काका- मुझे कुछ नहीं पता तू जा यहां से। 


मिहिर- नहीं काका। आपकी खामोशी ने मुझे बता दिया है कि आप कुछ तो जानते हो उस हादसे के बारे में। आप बता नहीं रहे हो। 

जंबो काका- नहीं मुझे कुछ नहीं पता। 

मिहिर- काका मैं बहुत दूर से आया हूं। उस हादसे के बारे में पता करना मेरे लिए बहुत जरूरी है। मैं तो आपके बेटे जैसा हूं आप मेरी मदद नहीं करोगे ?

मिहिर की इस बात को सुनकर कुछ देर के लिए चुप हो जाते हैं। फिर वह उठते हैं और वहां से चलना शुरू कर देते हैं। मिहिर भी उनके पीछे चल देता है। पहाड़ी की चोटी पर पहुंचकर जंबो काका उस सड़क की ओर देखने लगते हैं, जहां 15 साल वो हादसा हुआ था। काफी देर तक देखने के बाद बाबा मिहिर को देखते हैं। 

जंबो काका- हां, बहुत जोर का धमाका हुआ था। आग निकल रही थी। वैसी आग मैंने आज तक नहीं देखी। कोई नहीं बचा होगा उसमें। 

मिहिर- याद करो काका। शायद कोई बचा हो ?

जंबो काका- तुझे पता है कि उसमें कोई बचा था ?

मिहिर- ऐसा मुझे लगता है काका कि उस धमाके में कोई तो बचा था। 


 लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 2 Missing- after all, who is looking for ...

 लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 2


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दो दिन बीत गए थे और मुख्यमंत्री अनलि देशमुख भी दिल्ली से वापस लौट आते हैं। सीएम के आने की सूचना मिलने के बाद कमिश्नर आनंद सुपात्रे मिहिर को साथ लेकर सीएम अनिल देशमुख के सामने पहुंच जाते हैं। सीएम के सामने भी मिहिर के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया था। वह तनकर खड़ा हुआ था। क्योंकि उसे यह पता था कि उसे जो भी काम दिया जाएगा वह उसे पूरा कर ही लेगा। 

मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- तो आप है मिहिर राजपूत ?

मिहिर- जी सर। 

मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- कमिश्नर साहब ने आपकी बहुत तारीफ की है। मैं आपको जो काम सौपने जा रहा हूं वह काम आपको हर हाल में पूरा करना है। 

मिहिर- जी सर, मैं अपनी ओर से पूरी कोशिश करूंगा। 

मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- मुझे कमिश्नर साहब ने बताया है कि आप अपने तरीके से काम करते हैं। मुझे इससे एतराज नहीं है, पर इस काम में मुझे रिजल्ट चाहिए। 

मिहिर- जी सर। 

मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- काम के बारे में बाकि सारी जानकारी आपको कमिश्नर साहब दे देंगे। मैं फिलहाल इतना बता सकता हूं कि ये काम बहुत महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाला है। एक तरह से यह मिशन है, जिसकी जानकारी आपको, मुझे, कमिश्नर साहब, गृहमंत्री और विदेश मंत्री को है। इसलिए इस बारे में किसी को जानकारी भी नहीं मिलना चाहिए। 

मिहिर- जी सर। 

मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- सो बेस्ट ऑफ लक ऑफिसर। अब आप जा सकते हैं। 

मिहिर- थैक्यू सर। 

मिहिर के जाने के बाद सीएम और कमिश्नर आपस में कुछ देर बात करते हैं। तब तक मिहिर सीएम के केबिन के बाहर खड़े होकर कमिश्नर का इंतजार कर रहा होता है। कुछ ही देर में कमिश्नर बाहर आते हैं और मिहिर के साथ सीधे अपने घर पहुंच जाते हैं। मिहिर को थोड़ा आश्चर्य होता कि ऑफिस के जबह कमिश्नर साहब घर पर क्यों आए हैं? इसके बाद दोनों कमिश्नर के घर के अंदर चले जाते हैं। वहां भी कमिश्नर मिहिर को एक अलग कमरे में ले जाते हैं। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- आओ मिहिर बैठों। मैं दो मिनट में आता हूं। 

मिहिर- जी सर। 

कमिश्नर उसी कमरे में एक दीवार की ओर बढ़ते हैं। वहां एक तस्वीर को हटाते है। वहां एक लॉकर था, जिसे वो खोलते हैं और एक फाइल हाथ में लेकर फिर से मिहिर के पास आ जाते हैं।

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- मिहिर सीएम ने तुम्हें बता ही दिया है कि यह मिशन कितना महत्वपूर्ण है। इसलिए इस मिशन को तुम्हें बहुत सतर्क रहकर पूरा करना होगा। ऐसा कोई मिशन सरकार चला रही है, इसकी जानकारी किसी को नहीं मिलना चाहिए। अगर इस मिशन से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक होती है तो समझ लो कि यह मिशन फेल हो सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस मिशन में फेल होने की कोई गुंजाइश नहीं है। बहुत सोच समझकर मैंने तुम्हें इस मिशन के लिए सिलेक्ट किया है। 

मिहिर- जी सर। मैं पूरी कोशिश करूंगा। वैसे मिशन क्या है सर? 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- वहीं बता रहा हूं मिहिर। इस मिशन में तुम्हें एक व्यक्ति की तलाश करना है। 

मिहिर- बस एक आदमी? सर ये काम तो कोई भी कर सकता था। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- अगर कोई भी कर सकता तो मैं तुम्हारा नाम क्यों लेता मिहिर। अब मिशन के बारे में सूनो। 

मिहिर- सॉरी सर। बताइए। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- करीब 15 साल पक्ष और विपक्ष की सहमति से एक फोर्स तैयार किया गया था। इस फोर्स में 10 लोग शामिल थे। इन सभी 10 जवानों को बहुत स्पेशल ट््रेनिंग देकर चलता-फिरता हथियार बनाया गया था। ये 10 लोग अगर एक साथ हो तो हजारों पर भारी पड़ सकते थे। इन सभी को एक मिशन के तहत तैयार किया गया था। मिशन का नाम था सौरम। सौरम नाम भी हमारे सौरमंडल से लिया गया था। मिशन के सभी सदस्यों के नाम भी हमारे ग्रहों के नाम पर ही रखे गए थे। 

मिहिर- इनका मिशन क्या था सर? 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- इनका मिशन बहुत खास था। हमारे दुश्मन मुल्कों के संबंध में इन्हें हर तरह की जानकारी जुटाना थी। ये सारी बहुत खुफिया थी। इसलिए इनका काम बहुत खतरनाक था। अगर इनमें से कोई पकड़ा जाता तो फिर वह हमेशा के लिए अपनी पहचान खो देता। इस मिशन को इस तरह से ही तैयार किया गया था। सरकारी होकर भी ये लोग सरकारी नहीं थे। इन सभी को अलग-अलग देशों में भेजा गया था। ये वहां अपनी एक नई पहचान लेकर रह रहे थे। परंतु जब भी कभी इनसे बात होती थी इनके कोड वर्ड यानि कि इन्हें ग्रहों के जो नाम दिए गए थे उसी नाम से होती थी। 

मिहिर- ओके सर। ये सच में बहुत खतरनाक मिशन था। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- हां, मिहिर। बहुत खतरनाक। आज से लगभग 11 साल पहले जब केंद्र और हमारे राज्य में सरकार बदली तब राजनीतिक विवादों के कारण इस मिशन को बंद करना पड़ा। ये सभी लोग अपने देश आ पाते उसके पहले इंस्ताबुल में हमारा एक कमांडो पकड़ा गया। हालांकि बाकि कमांडों यहां आ गए। उस कमांडों का क्या हुआ इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है। 

मिहिर- ओह तो उस कमांडों के बारे में जानकारी जुटाना है मुझे। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- नहीं मिहिर। जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि मिशन फेल होता तो ये लोग अपनी पहचान खो देते। ऐसा ही उस कमांडो के साथ हुआ है। हालांकि ये तय है कि वह कमांडो अब जिंदा नहीं है। इंस्तांबुल में उसकी बहुत पहले ही मौत हो चुकी है। उसके पकड़े जाने के बाद ही वहां की सरकार ने उसे सरेआम फांसी दे दी थी, ऐसी हमारी इंटेलीजेंट की रिपोर्ट कहती है। 

मिहिर- तो फिर मुझे करना क्या है सर? 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- बाकि नौ कमांडों के भारत आ जाने के बाद हाई लेवल पर इस बात पर बहस होने लगी कि इन कमांडों के रहने से देश के लिए खतरा है। क्योंकि इनके कारण देश की सुरक्षा पर आंच आ सकती है। इस कारण हाई लेवल पर यह तय किया गया कि इन कमांडों की हर तरह की पहचान मिटा दी जाए। इसके लिए इन्हें खत्म करना होगा। 

मिहिर- क्या ? पर ऐसा कैसे कर सकते हैं सर? इन कमांडो ने अपनी जान पर खेलकर दूसरे देशों की खुफिया जानकारी जुटाने का काम किया था। तो उन्हें मारा कैसे जा सकता था। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- देश की सुरक्षा के लिए यह कठोर निर्णय लेना पड़ा था मिहिर। हालांकि कोई भी दिल से यह नहीं चाहता था, पर देश की सुरक्षा के मद्देनजर इस निर्णय को सर्वमान्य किया गया था। 

मिहिर- ओके सर। फिर क्या हुआ। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- फिर इन सभी कमांडों को विशेष सेल ले जाने का कहकर एक बस में बैठाया गया। इनके साथ हमारे कुछ अधिकारी भी उस बस में सवार थे। हालांकि हम कुछ कर पाते उसके पहले ही बस में ब्लास्ट हो गया। बस में सवार सभी लोग मारे गए। 

मिहिर- ओह नो। पर ये विस्फोट कैसे हुआ सर और किसने किया? 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- वह तो नहीं पता सर। पर सबसे खास बात यह है कि बस में करीब 20 लोग सवार थे। विस्फोट के बाद जो लाशें मिली वो 19 थी। उनमें से एक लापता था। बहुत जांच के बाद पता चला कि जो लापता है उसका कोड नेम केतु था। वो इसलिए पता है क्योंकि जितने भी कमांडों थे उनकी बॉडी पर एक विशेष मार्क बनाया गया था। हर मार्क का उनके नाम से कनेक्शन था। हमें जितनी बॉडी मिली उनको देखने के बाद हमें केतु के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इसलिए पता चला कि केतु लापता है। 

मिहिर- ओके सर। फिर क्या हुआ। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- फिर यह हुआ कि केतु की तलाश में कई लोगों को लगाया गया, पर कोई भी केतु के बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं कर सका है। इसलिए अब ये काम तुम्हें सौंपा जा रहा है। अब तुम्हें केतु को जिंदा या मुर्दा हमारे सामने लाना होगा। इसके साथ ही तुम्हें यह भी पता करना होगा कि बस में विस्फोट किसने किया था?


मिहिर- सर इससे क्या फर्क पड़ता है कि बस में विस्फोट किसने किया। आप लोग भी उन कमांडो का मार ही देना चाहते थे? 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- हां, मिहिर। पर ये बात आज की तरह पहले भी सिर्फ पांच लोगों को ही पता थी तो फिर यह जानकारी लीक कैसे हुई और किसके पास हुई। क्योंकि अगर ये जानकारी लीक हुई है और जिसने विस्फोट कराया था, वह भी इन कमांडो के बारे में जानता ही होगा। इसलिए खतरा अब भी बरकरार है। 

मिहिर- ओके सर। पर सर केतु के बारे में कोई और जानकारी? 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- नहीं मिहिर। हमारे पास न उसकी कोई शक्ल ना सूरत है। उसका असली नाम क्या है, वो कौन था, कमांडो बनने से पहले वह क्या था, वह क्या करता था, वह दिखता कैसा था? हमें कुछ नहीं पता है। हमारे पास सिर्फ एक नाम है केतु। तुम्हें बस इस केतु को और बस में विस्फोट करने वाले का पता लगाना है। बस में विस्फोट करने वाले के साथ तुम जो चाहे कर सकते हो, पर यदि केतु अगर जिंदा है तो उसे तुम हमारे सामने जिंदा ही लेकर आओगे और यदि वह मर चुका है तो उसकी पूरी डिटेल हमें चाहिए कि विस्फोट के बाद वो कहां था, क्या करता था, किससे मिलता था ?

मिहिर- ओके सर। पर सिर्फ एक नाम के सहारे किसी को कैसे तलाश किया जा सकता है? कुछ तो जानकारी होना ही चाहिए ना सर। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- आसान होता तो यह काम मैं तुम्हें नहीं सौंपता मिहिर। मुझे तुम पर पूरा विश्वास है कि तुम इस मिशन को जरूर पूरा करोगे। 

मिहिर- जी सर। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि आपका यह विश्वास बरकरार रख सकूं। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- एक खास बात और मिहिर। तुम्हें इस मिशन के लिए ऑफिशियली कोई टीम नहीं मिलेगी। ऑफिशियली इस मिशन में तुम अकेले हो, पर यदि तुम्हें किसी की मदद चाहिए तो वो तुम अपने स्तर पर अरेंज कर सकते हो, पर इस बात का बहुत खास ध्यान रखना कि जिसकी भी मदद लो वो इस मिशन के बारे में कोई भी जानकारी लीक न करें, अगर ऐसा हुआ तो उसके साथ होने वाले हाल के लिए तुम जिम्मेदार रहोगे। तुम समझ गए होंगे कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं। 

मिहिर- जी सर, समझ गया। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- तो बेस्ट ऑफ लक मिहिर। तुम आज और अभी से इस मिशन पर हो। मुझे केतु चाहिए हर हाल में केतु चाहिए। 


 लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 1 Missing- after all, who is looking for ...

 लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 1



पहाड़ी रास्तों से होते हुए एक बस तेज गति से चली जा रही थी। बस में करीब 15-20 लोग सवार है। पहाड़ी रास्तों और उसके मोड़ पर भी बस की गति कम नहीं हो रही है। ऐसा नहीं है कि यह बस किसी पिकनिक के लिए जा रही है, पर बस से किसी प्रकार कोई आवाज भी नहीं आ रही है। पहाड़ी रास्तों को चीरने के बाद बस एक सुनसान जगह पर जाकर खड़ी हो जाती है, तभी एक तेज धमाके के साथ बस के परखच्चे उड़ जाते हैं। जिस तरह से धमाका हुआ है, उससे लगता नहीं है कि बस में सवार कोई भी व्यक्ति जिंदा बचा होगा। तेज धमाके के साथ ना जाने कितनी ही जिंदगी खत्म हो गई थी। 

10 साल बाद...

गृह मंत्रालय में मुख्यमंत्री अनिल देशमुख, गृह मंत्री विश्वास मोहिते, कमिश्नर आनंद सुपात्रे और विदेश मंत्री निहारिका मूले की महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। मीटिंग हॉल के माहौल को देखकर ही समझा जा सकता है कि मीटिंग का मुद्दा बहुत गंभीर है। 

मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- 10 साल हो गए हैं मिशन सोरम को बंद हुए, पर भी ये हमारे गले की हड्डी बना हुआ है। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि आखिर क्या उपाय किया जाए इसके लिए। 

गृहमंत्री विश्वास मोहिते- मुझे लगता है कि इस पर हमें एक बार फिर से सोचना होगा। इसे ऐसे ही छोड़ देने से काम नहीं चलेगा। केंद्र से इतना प्रेशर है कि हम अपने ही राज्य में पराए हुए जा रहे हैं। 

विदेश मंत्री निहारिका मूले - ऐसी कई मीटिंग हम कर चुके हैं, हर मीटिंग का नतीजा जीरो ही रहता है। समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। पुलिस का कोई प्रयास ही नजर नहीं आ रहा है। विश्वास जी आप तो बड़ी उम्मीदों और विश्वास के साथ आनंद जी को यहां लेकर आए थे, पर ये भी आपके विश्वास पर खरे नहीं उतरे हैं। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- पुलिस ने कोई काम नहीं किया, ऐसा नहीं है मेडम। मैंने और मेरी फोर्स ने हर संभव प्रयास कर लिया है, पर कोई सुराग ही नहीं मिल रहा है। हमें एक सुराग मिले तो हम आगे बढ़े। 

मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- देखिए ये आपसी मतभेद का समय नहीं है। हमें इस समस्या के बारे में हर हाल में कोई हल निकालना ही होगा। इसलिए यहां मतभेद छोड़िए और मसले पर आकर उसका कोई समाधान बताइए। 

गृहमंत्री विश्वास मोहिते- मोहिते साहब क्या हमारी फोर्स में ऐसा कोई काबिल ऑफिसर नहीं है, जो इस केस को सॉल्व कर सके? 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- है सर बिल्कुल है। पर वो थोड़ा सा सनकी है। उसका कोई केस आज तक पेंडिंग नहीं है। वह अपने हर काम को इतने परफेक्ट तरीके से करता है कि पर किंतु की कोई गुंजाइश ही नहीं रहती है। उसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि वह अपने काम को करने के लिए कोई रूल फॉलो नहीं करता है। अपने काम को करने के लिए वो खुद अपने रूल्स बनाता है और उसी के आधार पर काम को खत्म करता है। उसका हर काम अंजाम तक पहुंचता है, इसलिए मैंने आज तक उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया है, हां वार्न जरूर करता रहता हूं। 

मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- क्या आपको लगता है कि आपका यह ऑफिसर हमारे इस काम को भी निपटा सकता है? 

विदेश मंत्री निहारिका मूले - जी, हां मोहिते जी, क्योंकि अब इस मसले में किंतु, परंतु की कोई गुंजाइश नहीं बची है। अब इस समस्या का रिजल्ट चाहिए ही। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- मैं उस पर आंख बंद करके यकीन कर सकता हूं, बस मुझे चिंता है तो उसके काम करने के तरीके से। वो अपनी टीम खुद चुनता है और खुद ही उसे हैंडल भी करता है। 

मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- ठीक है आप उसे बुलाइए, मैं खुद उससे बात करूंगा। वैसे है कौन आपका ये ऑफिसर? 


कमिश्नर आनंद सुपात्रे- मिहिर राजपूत। पिछले पांच सालों में ही उसने ऐसे-ऐसे काम कर दिए हैं, जिसे हमारे कई काबिल ऑफिसर्स पिछले कई सालों से पूरे नहीं कर पाए थे। दुनिया में उसका कोई नहीं है। इसलिए कभी डरता नहीं है। खुद पर इतना यकीन करता है कि हर मुश्किल उसे डरा नहीं पाती है। अपने तरीके से ही काम करता है, इस कारण हर काम में सफल होता है, क्योंकि इसे यह पता कि किसी भी काम को उसे किस तरीके से करना है। 

गृहमंत्री विश्वास मोहिते- मोहिते जी हमें तारीफ नहीं मिशन सोरम का केतु चाहिए। हालांकि ये मिशन मिहिर के लिए बहुत मुश्किल होगा, क्योंकि मिशन सोरम को भी 10 साल हो चुके हैं और उस घटना को भी। केतु अब कहां होगा, क्या कर रहा होगा, किस हाल में होगा, जिंदा होगा भी या नहीं। कुछ नहीं पता और उससे भी बड़ी बात यह है कि 10 साल पहले वो दिखता कैसा था, हमें यह भी नहीं पता है। 

विदेश मंत्री निहारिका मूले - हां, क्योंकि जो अधिकारी उस मिशन को पूरी तरह से हैंडल कर रहा था वह भी अब इस दुनियां में नहीं है। इसलिए उससे भी कोई जानकारी नहीं मिल सकती है कि आखिर केतु दिखता कैसा था ? 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- मैं ये सारी बातें जानता हूं, इसलिए ही मैंने मिहिर का नाम लिया है। इन परिस्थितियों में बस एक वो ही है, जो इस काम को किसी भी हाल में अंजाम तक पहंचाकर रहेगा। वो या तो हमें केतु के मारे जाने की खबर देगा या फिर केतु को हमारे सामने जिंदा लाकर खड़ा कर देगा। 

मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- तो फिर ठीक है, आप उसे जल्दी से यहां बुलवाइए। हालांकि मैं दो दिनों के लिए दिल्ली जा रहा हूं, उसके बाद आप खुद उसे लेकर मेरे पास आ जाना। मैं खुद उससे बात करना चाहता हूं। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- जी, सर। मैं दो दिन बाद मिहिर को लेकर हाजिर हो जाउंगा। 

इतना कहने के बाद कमिश्नर आनंद सुपात्रे वहां से चला जाता है और कुछ देर बात करने के बाद सीएम देशमुख, गृहमंत्री मोहिते और विदेश मंत्री निहारिका भी वहां से रवाना हो जाते हैं। 

दूसरी ओर मिहिर ब्लैंक जींस और ब्लू शर्ट में घूटनों के बल बैठा हुआ है। उसे कुछ लोगों ने घेर रखा है और सभी के हाथों में हथियार है। एक व्यक्ति ने मिहिर की सिर के बीचो बीच पिस्टल लगा रखी है। वो कभी भी मिहिर पर गोली सकता है, पर मिहिर के चेहरे में कोई डर, कोई घबराहट नजर नहीं आ रही है। जिस व्यक्ति ने मिहिर के सिर पर पिस्टल तानी हुई है, उसका नाम बिलावल है और वह हथियारों का बहुत बड़ा डीलर है। वह कई देशों में अपराधियों को हथियार सप्लाई करता है। मिहिर करीब छह महीने से उसे पकड़ने के लिए कोशिश कर रहा था। मिहिर को यह पता चल गया था कि बिलावल भारत आने वाला है और यहां उसकी एक बहुत बड़ी डील होने वाली है। इस कारण आज मिहिर और बिलावल आमने-सामने हैं। 

बिलावल- अगर तू यह समझ रहा है कि मिहिर कि सिर्फ तुझे पता था कि मैं भारत आने वाला हूं तो यह तेरी गलतफहमी है। तू छह महीने से मेरा पीछा कर रहा है यह मुझे पता है। यहां भी तू आया नहीं है, यहां तुझे आने दिया गया है। अब तू बता तू चाहता क्या है? 

मिहिर- (नजर उठाकर उसे देखते हुए) बस तेरी मौत, इससे कम में परवडे़गा नहीं। 


बिलावल- (जोर से हंसते हुए) तू मुझे मारना चाहता है। पर शायद तू भूल गया कि तू यहां बिना किसी हथियार के आया था और फिलहाल हम सभी के हाथों में हथियार है। बिलावल जब लोगों को हथियार दे सकता है, तो सोच कि बिलावल के पास कितने हथियार होंगे। 

मिहिर- मैं दुश्मन के इलाके में बिना हथियार ही घुसता हूं और दुश्मन के ही हथियार से दुश्मन का खात्मा कर बाहर आ जाता हूं। और फिर तेरे पास हथियार की कोई कमी नहीं है, तो तू खुद तय कर ले तू अपने कौन से हथियार से मरना पसंद करेगा। तू मरेगा ये तो पक्का है। 

बिलावल- (पिस्टल का जोर मिहिर के माथे पर बढ़ते हुए) सिर्फ एक सेंकड और तेरी खोपड़ी यहां खुल जाएगी। पर फिर भी तेरी बातें सुनकर मुझे हंसी आ रही है। 

मिहिर- हंस ले बिलावल, जोर से और जितना चाहे उतना हंस ले, क्योंकि ये तेरी आखिरी हंसी है। 

बिलावल- पिस्टल को लोड करता है और फिर से मिहिर पर तान देता है, तभी मिहिर के मोबाइल की रिंग बजती है। मिहिर कॉल उठाता है और कॉल था कमिश्नर आनंद सुपात्रे का। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- कहां हो मिहिर? 

मिहिर- एक मिशन पर हूं सर। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- कितनी देर लगेगी? 

मिहिर- कुछ बहुत जरूरी है क्या सर? 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- हां, बहुत जरूरी। अब बताओं कितनी देर लगेगी? 

मिहिर- बहुत जरूरी है तो 30 मिनिट मान लीजिए सर। 30 मिनिट में यहां काम खत्म कर निकल जाउंगा। 

कमिश्नर आनंद सुपात्रे- ठीक है, काम खत्म होते ही तुरंत मुझे मेरे ऑफिस में आकर मिलो। 

मिहिर- ठीक है सर, आप 30 मिनिट की उल्टी गिनती शुरू कर दीजिए, मैं आ ही रहा हूं। 

मिहिर फोन कट कर फिर से जेब में रखता है और एक बार नजर उठाकर बिलावल को देखता है। इसके बाद वहीं होता है, जिसके लिए मिहिर को जाना जाता है। करीब 15 मिनट में ही मिहिर बिलावल और उसकी गैंग का खात्मा कर देता है। फिर से जेब से फोन निकालकर हथियारों को जब्त करने के लिए कह देता है। इसके बाद वह बिलावल की बॉडी पर उसकी गन फैंकता है और कहता है कि तेरे हथियार तो अच्छे हैं, पर तुझे ही नहीं बचा सके। इसके बाद मिहिर वहां से सीधे कमिश्नर ऑफिस के लिए निकल जाता है। कुछ ही देर में मिहिर कमिश्नर के ऑफिस पहुंच जाता है। 


कमिश्नर  आनंद सुपात्रे- ये क्या हाल बना रखा है मिहिर ?

मिहिर- सर आपको बताया था ना कि एक मिशन पर हूं। आपने कहा जल्दी से मरे ऑफिस पहुंचो, तो आ गया। बताइए क्या काम है? 

कमिश्नर  आनंद सुपात्रे- हां, पर कम से कम हुलिया तो ठीक करके आते। 

मिहिर- अब जाकर कर लूंगा सर। आप पहले काम बताएं। 

कमिश्नर  आनंद सुपात्रे- तुम्हें चीफ मिनिस्टर ने बुलाया है। 

मिहिर- क्या चीफ मिनिस्टर ने? उन्हें मुझसे क्या काम आ गया? 

कमिश्नर  आनंद सुपात्रे- एक बहुत जरूरी काम है। और तुम्हारा नाम मैंने ही उन्हें बताया है, इसलिए वो तुमसे मिलना चाहते हैं। 

मिहिर- ठीक है सर। कब मिलना है उनसे? 

कमिश्नर  आनंद सुपात्रे- आज ही वो 2 दिन के लिए दिल्ली गए हैं, जैसे ही आएंगे मैं खुद तुम्हें उनके पास लेकर चलूंगा। 

मिहिर- ठीक है सर। 

कमिश्नर  आनंद सुपात्रे- अभी घर जाओ और अपना हुलिया सुधारों। वैसे तुम ऐसे कौन से मिशन पर थे कि तुम्हारा ये हाल हो गया। 

मिहिर- कुछ ही देर में आपको पूरी खबर मिल जाएगी सर। अब मैं चलता हूं। 


 बेताल The Silent Killer अंतिम भाग  बेताल The Silent Killer Last part

 बेताल The Silent Killer अंतिम भाग 



भौमिक को जब होश आता है तो वह खुद को एक कमरे में कुर्सी पर बंधा हुआ पाता है। होश में आने के बाद वह कमरे को गौर से देखता है पर यह उसके लिए एक अंजान जगह थी। ठीक उसकी कुर्सी सामने एक और कुर्सी रखी हुई थी, जिस पर एक लड़की को बांधा गया था, वह अब भी बेहोश थी। भौमिक को अब यह समझने में देर नहीं लगी थी कि बेहोश करने के बाद कोई व्यक्ति उसे उठाकर यहां लेकर आ गया है और उसे बांध दिया गया है। वह खुद को छुड़ाने की कोशिश करता है पर नाकाम होता है, क्योंकि उसे काफी मजबूत तरीके से बांधा गया था। तभी उसे किसी के चलने की आवाज आती है और वह फिर से बेहोश होने का नाटक करता है। आंखे बंद होने के बाद भी भौमिक कमरे में होने वाली हरकत को महसूस कर रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि कोई शख्स कमरे में आ चुका है। वह शख्स उसकी ओर बढ़ता है उसके बाल पकड़ता है और जोर से उसका सिर हिलाता है। 
शख्स : ओह, अब तक बेहोश है? एक लड़की मरने वाली है और एसीपी अब तक सोया हुआ है। वैसे भी अब तक 10 मर चुकी है तो इसने अब तक क्या कर लिया है, जो अब कुछ कर पाएगा? 
भौमिक- भौमिक उसकी आंखों में देखते हुए उन्हें तो नहीं बचा सका पर इसे मरने नहीं दूंगा। 
शख्स- ओह तो तुम होश हो एसीपी? मतलब नाटक कर रहे थे बेहोश होने। 
भौमिक- होश तो अब तेरे खोने वाले है, क्योंकि अब मैं होश में आ चुका हूं। पीछे से वार कर बेहोश तो कर दिया, पर अब तू वार नहीं कर पाएगा। 
शख्स- एसीपी मैं तुम्हें इज्जत दे रहा हूं और तुम मुझे तू-तू करके बात कर रहे हो। यह बात मुझे पसंद नहीं आई। 
भौमिक- तूने ऐसा कौन सा काम किया है, जिससे तुझे इज्जत मिले। 
शख्स - एसीपी साहब एक काम करो ये तू-तू करना बंद करो, मेरा नाम कुशाग्र है। मुझे मेरे नाम से ही बुला लो। 
भौमिक- पहले ये बताओ, तुम ये सब क्या कर रहे हो और क्यों कर रहे हो? 
कुशाग्र- अरे एसीपी तुम अब तक नहीं समझे? मुझे तो लगा था कि तुम्हें छोटा सा कोई सुराग मिलता है तो तुम पूरा केस सॉल्व कर देते हो। जबकि उस बाबा ने तो तुम्हें पूरी कहानी बता दी थी। 
भौमिक- मतलब वो तंत्र-मंत्र तुम कर रहे हो? इस जमाने में भी तुम तंत्र-मंत्र का मान रहे हो? 
कुशाग्र- तुम नहीं मानते एसीपी तो क्या हुआ, पर मैं तो मानता हूं। और भी कई लोग मानते हैं। उस बाबा को ही देख लो वह कैसे बंद घर में अंदर आ गया और बिना दरवाजा खोले बाहर चला गया। 
भौमिक- देखो तुम जो भी कर रहे हो वह गलत है। इसकी तुम्हें बहुत कड़ी सजा मिलेगी। 
कुशाग्र- सजा तो तब मिलेगी ना एसीपी, जब तुम मुझे पकड़ पाओगे। आज इस लड़की के खात्मे के साथ ही मेरी सिद्धी पूरी हो जाएगी और फिर मैं जो चाहू वो कर सकूंगा। इसलिए तुम ये ख्वाब देखना छोड़ दो एसीपी की तुम मुझे छू भी सकोगे। 
भौमिक- वो तो वक्त ही बताएगा कुशाग्र।

कुशाग्र - वक्त ? पर तुम्हारे पास वक्त कहां है एसीपी? वक्त तो अब मेरा है। बस थोड़ी सी देर और फिर......। 
इतना कहने के बाद कुशाग्र उस लड़की की ओर बढ़ने लगता है। हालांकि भौमिक उसे कई बार रोकने की कोशिश करता है पर बंधा होने के कारण वह कुछ कर नहीं पाता है। कुशाग्र उस लड़की को होश में लेकर आता है। लड़की होश में आते ही चीखने लगती है। इसके बाद कुशाग्र वहां से चला जाता है। इधर उस लड़की की नजर भौमिक पर पड़ती है, जो अब भी खुद को उस बंधन से आजाद करने की कोशिश करने में लगा था। लड़की भौमिक को अजीब नजरों से देखती है।
भौमिक- डरो मत, मेरा नाम भौमिक है और मैं एसीपी हूं। क्या तुम निकिता हो? 
निकिता- हां, पर आप यहां इस हाल में कैसे सर? 
भौमिक- वो सब बाद में। पहले ये बताओ, ये तुम्हारा घर है? 
निकिता- हां, सर। 
भौमिक- तो ये यहां क्या कर रहा है और यह अंदर कैसे आया? 
निकिता- पता नहीं सर। मैं तो जब रात को सो रही थी। तब मुझे मेरे बेड पर कुछ हलचल महसूस हुई। मेरी नींद खुली तो मेरी नजर इस पर गई। मैं कुछ कर पाती उसके पहले तो इसने मुझे कोई चीज सुंघाकर बेहोश कर दिया। 
भौमिक- पर ये अंदर आया कैसे? मेरे आदमी पूरे समय इस घर पर नजर रखे हुए थे। इस दौरान तो तुम गई और ऑफिस से वापस आई हो। इस समय में तुम्हारे घर पर कोई नहीं आया था। 
निकिता- मेरे घर पर आपके आदमी की नजर? मतलब आपको पता था कि मेरे साथ कुछ होने वाला है? आपके लोग मेरे घर पर नजर रखे हुए थे? 
भौमिक- ये सब मैं तुम्हें बाद में बताउंगा। पहले ये बताओ कि हम यहां से कैसे छूट सकते है? 
निकिता- मैं क्या बताउं सर मैं खुद भी तो यहां आपके सामने ही बंधी हुई हूं। 
तभी कुशाग्र फिर से उस कमरे में आता है। 
कुशाग्र - निकिता, अब तुम मेरी एक बात मानोगी। अब मैं जैसा कहूंगा, वैसा ही तुम्हें करना होगा। और एसीपी तुम तो जानते ही हो कि अगर इसने मेरा कहा नहीं माना तो इसके साथ क्या हो सकता है, इसलिए तुम ही इसे कह दो कि मैं जो कह रहा हूं वो ये करें। 
बेताल The Silent Killer चौथा भाग यहां पढ़े

भौमिक- देखो मैं तुम्हें फिर कह रहा हूं कि तुम यहां से बचकर नहीं जा सकते। इसलिए लड़की को छोड़ दो और खुद को मेरे हवाले कर दो। 
कुशाग्र- ओह एसीपी। मुझे तुम्हारे इस ज्ञान की जरूरत नहीं है। अभी तुम वो करो जो मैं तुम्हें करने के लिए कह रहा हूं। वरना तुम जानते हो कि मैं इस लड़की का क्या हाल करूंगा। 
भौमिक- नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा। 
कुशाग्र- ठीक है, तो मैं अपने तरीके से इस लड़की से करवा लूंगा। और मेरा तरीका तो तुम्हें पता ही एसीपी। 
निकिता- क्या मुझे कोई बताएगा कि यहां क्या हो रहा है? और यह कौन है? और क्या करवाना चाहता है मुझसे। 
भौमिक- निकिता तुम चुप रहो। ये जो कह रहा है वो बिल्कुल मत करना। मुझ पर भरोसा रखो, मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा। 
कुशाग्र- (हंसते हुए) ठीक है एसीपी तुम इस लड़की को बचाने की कोशिश करो और मैं.....
इतना कहने के बाद कुशाग्र निकिता के मुंह पर टैप लगा देता है, जिससे कि वह चिल्ला न सके। इसके बाद वह उसे कुर्सी से खोलता है और फिर उसे दूसरे कमरे में ले जाता है। हालांकि निकिता उससे छूटने का बहुत प्रयास करती है, पर उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी। कुछ ही देर में वहां एकदम खामोशी छा जाती है। इधर भौमिक किसी अनहोनी के बारे में सोच रहा था, तभी कुशाग्र फिर से बाहर आता है। इस बार वह भौमिक के मुंह पर टैप लगाकर और उसे और तेज बांध कर चला जाता है। कमरे में जाने के बाद निकिता के चीखने के आवाज आती है। भौमिक फिर से डर जाता है और इस बाद पूरी ताकत लगाकर वह खुद को छुड़ाने की कोशिश करता है। आखिरकार वह खुद को छुड़ाने में सफल हो जाता है। वह अपनी गन देखता है, पर उसे गन नहीं मिलती है। वह बिना गन के ही उस कमरे की ओर बढ़ जाता है। वह कमरा अब अंदर से बंद था। वह उसे खोलने की कोशिश करता है। जब कमरा नहीं खुलता है तो वह गेट को तोड़ने का फैसला करता है और दो या तीन धक्कों के बाद वह गेट टूट जाता है। वह अंदर देखता है तो कुशाग्र वहां घायल पड़ा हुआ था और निकिता के टेबल के पीछे छिपी हुई थी। वह कमरे में अंदर जाता है। उसे देखकर निकिता बाहर आ जाती है। भौमिक कुशाग्र को देखता है वह घायल था। फिर वो परमार को फोन करता है और फिर निकिता से बात करने के लिए उसके पास जाता है। तभी कुशाग्र उस पर हमला कर देता है। दोनों में काफी हाथापाई होती है, जिसमें कुशाग्र और भी ज्यादा घायल हो जाता है। 
भौमिक- डरो मत निकिता। तुमने जो भी किया अपनी सुरक्षा के लिए किया है। वैसे भी वो मरा नहीं है घायल है। 
निकिता-वो मेरे साथ........ इतना कहते हुए निकिता रोने लगी है। 
भौमिक- रो नहीं निकिता। मैं सब जानता हूं। 
निकिता- पर ये है कौन सर? और मुझे क्यों मारना चाहता है। 

भौमिक- तुमने अखबारों में एक सीरियल कीलर के बारे में पढ़ा होगा ना। ये वहीं है। हमें भी इसकी बहुत दिन से तलाश थी। हमें पता चला था कि तुम इसकी अगली शिकार हो, इस कारण हम तुम्हारे घर पर नजर रख रहे थे। रात को मैं खुद यहां था कि तभी किसी ने पीछे से मेरे सिर पर वार किया और मैं बेहोश हो गया। होश आया तो कुर्सी पर था। बाकि जो हुआ तुम्हारे सामने हुआ है। 
निकिता- जी, पर अब इसका क्या करना है। 
भौमिक- तुम उसकी चिंता छोड़ दो, मैंने फोन कर दिया है, मेरे लोग आते ही होंगे। 
कुछ ही देर में परमार वहां कुछ सिपाहियों के साथ आ जाता है। फिर वह कुशाग्र को लेकर हॉस्पिटल चले जाता है। फिर भौमिक भी अपने घर आ जाता है। तैयार होकर वह फिर से ऑफिस आ जाता है। घायल होने के बाद भी कुशाग्र पुलिस को बताता है कि बचपन से ही उसे हमेशा इग्नोर किया जाता था। इसलिए उसने मन में ठान लिया था ि कवह कुछ अलग करेगा। फिर बड़ा होने पर उसे एक तांत्रिक मिला, उसने उसे बेताल के बारे में बताया और बताया कि बेताल को सिद्ध करने से वो दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान बन सकता है। वो जो चाहे वह कर सकता है। उसने बेताल को सिद्ध करने की पूरी विधि भी बताई थी। उसी अनुसार वह बेताल को सिद्ध करने के लिए लड़कियों की बलि दे रहा था। उसने दो और लड़कियों की हत्या की बात कबूल की थी। उसका कहना था कि यदि वह निकिता की भी बलि चढ़ा देता तो उसकी सिद्धी पूरी हो जाती, पर भौमिक ने उसे रोक लिया। इधर भौमिक एक और केस को सॉल्व करने के बाद पेपरवेट को टेबल पर घुमा रहा था। 
 
  बेताल The Silent Killer छठा  भाग

  बेताल The Silent Killer छठा  भाग



एक ओर जहां भौमिक हर संभव प्रयास कर रहा था कि वो कातिल तक पहुंचे और उसे उसके जुर्म की सजा दिलाए, वहीं दूसरी ओर एक कत्ल और हो गया था। इस बार भी कातिल ने कोई सुराग नहीं छोड़ा था। इस कत्ल के बाद शहर में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। हर तरफ पुलिस को लेकर नारेबाजी हो रही थी। लगातार आठ कत्ल होने के बाद भी पुलिस कातिल तक नहीं पहुंच पा रही थी। वही भौमिक को उसके सीनियर अधिकारियों की लताड़ लग चुकी थी। भौमिक को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वो कातिल तक कैसे पहुंचे। उसके बाद कातिल के बारे में कोई सुराग नहीं था। हमेशा की तरह देर रात को भौमिक जब अपने घर पहुंचा तो एक बार फिर बाबा उसका उसके घर में उसका इंतजार कर रहा था। भौमिक जब बाबा को अपने घर मे देखता है तो उसके चेहरे पर एक चमक आ जाती है। इससे पहले की भौमिक बाबा से कुछ कहता बाबा ही भौमिक को कुछ कहता है। 

बाबा- हां, मैं जानता था कि तुम मुझसे फिर से मिलना चाहते हो। इसलिए ही यहां आ गया। वैसे तुमने उस पर्ची को पढ़कर अच्छा काम किया। 

भौमिक- पर आपने वहां का पता लिखा तो क्या आपको पता था कि वहां ऐसा कुछ है? 

बाबा- मुझे क्या पता है और क्या नहीं। यह तुम ना ही जानों तो अच्छा है। बस तुम्हारा काम हो गया ना? 

भौमिक- नहीं अभी मेरा काम नहीं हुआ है, क्योंकि वह कातिल अब भी आजाद घूम रहा है और वह फिर से कोई कत्ल कर सकता है। 

बाबा- करेगा, बिल्कुल करेगा। पर तुम चाहो तो उसे रोक सकते हो। 

भौमिक- मैं उसे हर हाल में रोकना चाहता हूं बाबा। पर आपको मेरी मदद करना होगी।

बाबा- ठीक है तो समाज की भलाई के लिए मैं तुम्हारी मदद करूंगा। पर मेरी एक शर्त है। 

भौमिक- वो क्या? 

बाबा- मैं सिर्फ तुम्हें रास्ता बताउंगा, तुम्हें उस रास्ते पर चलना होगा। मैं तुम्हारे साथ नहीं आउंगा। 

भौमिक- ठीक है बाबा। मैं उस कातिल को पकड़ना चाहता हूं बस। आप मुझे रास्ता बताइए। 

बाबा- ठीक है। इसके लिए तुम्हें अब दो दिन का इंतजार और करना होगा। 

भौमिक- पर बाबा ये इंतजार क्यों। अगर इन दो दिनों में फिर कोई कत्ल हुआ तो? 

बाबा- नहीं होगा। 

इतना कहने के बाद बाबा वहां से चला जाता है। इसके बाद भौमिक सो जाता है और अगले दिन फिर ऑफिस के लिए निकल पड़ता है। कुछ देर ऑफिस में काम करने के बाद एक बार फिर भौमिक और परमार उस पुराने घर की ओर चल पड़ते हैं, ताकि उन्हें कातिल के संबंध में कोई सुराग मिल सके। हालांकि काफी छानबीन के बाद भी उन्हें वहां कोई सुराग नहीं मिलता है। केस की छानबीन में ही दो दिन निकल जाते हैं। अब भौमिक को बाबा का बेसब्री से इंतजार था। हालांकि पूरा दिन बीत जाने के बाद भी बाबा उससे मिलने नहीं आया था। उस दिन भौमिक घर भी जल्दी पहुंच गया कि शायद बाबा उसे एक बार फिर घर पर ही मिले, काफी रात हो जाने के बाद भी बाबा नहीं आता है। आखिरकार सुबह 4 बजे के लगभग काफी इंतजार करने के बाद भौमिक सोने चला जाता है। अभी कुछ ही देर हुई थी कि एक आवाज ने भौमिक को जगा दिया। भौमिक उस बाबा को एक बार फिर अपने घर में देखकर चौंक जाता है। 

भौमिक- बाबा आप अंदर कैसे आ गए? मैं आपका इंतजार ही कर रहा था।

बाबा- मैंने तुम्हें पहले भी कहा था कि मैं कहीं भी आ-जा सकता हूं। और रही बात इंतजार की तो मैं यहां तुम्हारे लिए ही आया हूं। 

बाबा भौमिक को गौर से देखता है और उसके चेहरे पर एक मुस्कान आती है। बाबा की मुस्कान को देखकर भौमिक को कुछ आश्चर्य होता है पर वह कुछ कहता नहीं है। इस बीच बाबा एक बार एक पर्ची कमरे में रखी एक टेबल पर रखता है और फिर वहां से चला जाता है। बाबा के जाते ही भौमिक उठता है और उस पर्ची को खोलकर पढ़ता है। पर्ची पढ़ते ही भौमिक तैयार होता है और परमार को फोन लगाकर तुरंत ऑफिस पहुंचने के लिए कहता है और खुद भी ऑफिस के लिए निकल जाता है। भौमिक ऑफिस पहुंचता है और उसके कुछ ही देर बाद परमार भी वहां आ जाता है। परमार को लेकर भौमिक एक बार फिर ऑफिस से निकल जाता है। शहर की कुछ गलियों से होते हुए एक कॉलोनी में एक घर के सामने वह अपनी गाड़ी रूकवा देता है। 

परमार- सर, यहां क्या है? 

भौमिक- समझ लो परमार कि हमें हमारा गुनाहगार यही मिलने वाला है। 

परमार- मैं कुछ समझा नहीं सर? 

भौमिक- अभी तुम सिर्फ इतना करो परमार कि इस घर पर 24 घंटे, हर मिनट दो आदमियों की निगाह होना चाहिए। इस घर की हर एक मिनट की जानकारी हमारे पास होना चाहिए। 

परमार- ठीक है सर। पर ये घर है किसका। 

भौमिक- यह तो जब तुम नजर रखोगे तो तुम्हें खुद पता चल जाएगा। पर ध्यान रहे कि इस घर से तुम्हारी नजर हटना नहीं चाहिए। 

परमार- ओके सर। 


बेताल The Silent Killer चौथा भाग यहां पढ़े

परमार को इतना कहने के बाद भौमिक वहां से गाड़ी लेकर चला जाता है और परमार वहां खड़े होकर उस घर पर नजर रखने लगता है। हालांकि अभी सुबह के करीब 6.30 बजे थे, इस कारण उस कॉलोनी में कोई ज्यादा हलचल नजर नहीं आ रही थी। करीब 8.30 बजे उसे घर से एक लड़की निकलती है, जो गेट को लॉक कर निकल जाती है। इस बीच में परमार ने कुछ सिपाहियों को वहां बुला लिया था, वह उन्हें उस घर पर नजर रखने का कहकर उस लड़की के पीछे चला जाता है। इस दौरान वह भौमिक को फोन पर बता देता है कि वह उस लड़की के पीछे जा रहा है। लड़की एक ऑफिस पहुंच जाती है और परमार वहां से उस लड़की के संबंध में सारी जानकारी जुटा लेता है। उस लड़की की जानकारी वह भौमिक को फोन पर बता देता है। रात करीब 8.30 बजे वह लडत्रकी एक बार फिर अपने घर के लिए रवाना होती है और फिर अपने घर पर पहुंच जाती है और भौमिक भी उसके पीछे-पीछे वहां पहुंच जाता है। वह सिपाहियों से दिन भर की गतिविधि के बारे में जानकारी लेता है और दोनों सिपाही बताते हैं कि घर पर दिनभर ताला ही रहा है और इस दौरान उसके घर पर कोई नहीं आया। कॉलोनी में भी उन्हें कोई संदिग्ध नजर नहीं आया। कुछ ही देर में भौमिक भी वहां आ जाता है। 

भौमिक- परमार कुछ खास बात? 

परमार- नहीं सर। बस अभी निकिता अपने घर पर गई है। 

भौमिक- दिन भर में कुछ मिला? 

परमार- नहीं सर दिन भर ये दोनों यही थे और इन्होंने भी ऐसा कुछ खास नहीं देखा। 


 बेताल The Silent Killer पांचवा भाग यहां पढ़े

परमार की बात सुनने के बाद भौमिक सोच में पड़ जाता है कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आज पूरे में दिन में यहां कुछ भी नहीं हुआ। जबकि बाबा ने तो यही पता दिया था। पूरे दिन नजर रखने के बाद भी यहां कोई संदिग्ध नजर नहीं आया है और न ही यहां कोई हलचल हुई है। ये बात तो तय है कि लड़की अकेली रहती है। ऑफिस में काम करती है तो कातिल का अगला निशाना हो सकती है। एक तरह से वह सही जगह पर खड़ा है। शिकार यहां है तो शिकारी कहां गया? बाबा के हिसाब से कातिल को आसपास ही कहीं होना चाहिए था, पर वो आया क्यों नहीं? अब धीरे-धीरे रात भी बढ़ने लगी थी। भौमिक ने परमार और दोनों सिपाहियों को कुछ देर आराम करने के लिए भेज दिया और खुद वहीं खड़े होकर उस घर पर नजर रखने लगा। अब रात भरी काफी हो गई थी और एक रात पहले बाबा का इंतजार करने के कारण भौमिक सो नहीं पाया था, इस कारण उस पर भी थकान हावी होने लगी थी। अब वो उस घर के सामने से हटकर एक दीवार के पास जाकर खड़ा हो गया था, जिससे घर से दूर रहकर उस घर पर नजर रख सके। वह घर पर नजर रखे ही था कि तभी उसके सिर पर किसी भारी चीज से किसी ने वार किया और वो वही बेहोश हो गया।