लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 2
लापता- आखिर किसकी तलाश है... पहला पार्ट यहां पढ़े
दो दिन बीत गए थे और मुख्यमंत्री अनलि देशमुख भी दिल्ली से वापस लौट आते हैं। सीएम के आने की सूचना मिलने के बाद कमिश्नर आनंद सुपात्रे मिहिर को साथ लेकर सीएम अनिल देशमुख के सामने पहुंच जाते हैं। सीएम के सामने भी मिहिर के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया था। वह तनकर खड़ा हुआ था। क्योंकि उसे यह पता था कि उसे जो भी काम दिया जाएगा वह उसे पूरा कर ही लेगा।
मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- तो आप है मिहिर राजपूत ?
मिहिर- जी सर।
मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- कमिश्नर साहब ने आपकी बहुत तारीफ की है। मैं आपको जो काम सौपने जा रहा हूं वह काम आपको हर हाल में पूरा करना है।
मिहिर- जी सर, मैं अपनी ओर से पूरी कोशिश करूंगा।
मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- मुझे कमिश्नर साहब ने बताया है कि आप अपने तरीके से काम करते हैं। मुझे इससे एतराज नहीं है, पर इस काम में मुझे रिजल्ट चाहिए।
मिहिर- जी सर।
मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- काम के बारे में बाकि सारी जानकारी आपको कमिश्नर साहब दे देंगे। मैं फिलहाल इतना बता सकता हूं कि ये काम बहुत महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाला है। एक तरह से यह मिशन है, जिसकी जानकारी आपको, मुझे, कमिश्नर साहब, गृहमंत्री और विदेश मंत्री को है। इसलिए इस बारे में किसी को जानकारी भी नहीं मिलना चाहिए।
मिहिर- जी सर।
मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- सो बेस्ट ऑफ लक ऑफिसर। अब आप जा सकते हैं।
मिहिर- थैक्यू सर।
मिहिर के जाने के बाद सीएम और कमिश्नर आपस में कुछ देर बात करते हैं। तब तक मिहिर सीएम के केबिन के बाहर खड़े होकर कमिश्नर का इंतजार कर रहा होता है। कुछ ही देर में कमिश्नर बाहर आते हैं और मिहिर के साथ सीधे अपने घर पहुंच जाते हैं। मिहिर को थोड़ा आश्चर्य होता कि ऑफिस के जबह कमिश्नर साहब घर पर क्यों आए हैं? इसके बाद दोनों कमिश्नर के घर के अंदर चले जाते हैं। वहां भी कमिश्नर मिहिर को एक अलग कमरे में ले जाते हैं।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- आओ मिहिर बैठों। मैं दो मिनट में आता हूं।
मिहिर- जी सर।
कमिश्नर उसी कमरे में एक दीवार की ओर बढ़ते हैं। वहां एक तस्वीर को हटाते है। वहां एक लॉकर था, जिसे वो खोलते हैं और एक फाइल हाथ में लेकर फिर से मिहिर के पास आ जाते हैं।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- मिहिर सीएम ने तुम्हें बता ही दिया है कि यह मिशन कितना महत्वपूर्ण है। इसलिए इस मिशन को तुम्हें बहुत सतर्क रहकर पूरा करना होगा। ऐसा कोई मिशन सरकार चला रही है, इसकी जानकारी किसी को नहीं मिलना चाहिए। अगर इस मिशन से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक होती है तो समझ लो कि यह मिशन फेल हो सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस मिशन में फेल होने की कोई गुंजाइश नहीं है। बहुत सोच समझकर मैंने तुम्हें इस मिशन के लिए सिलेक्ट किया है।
मिहिर- जी सर। मैं पूरी कोशिश करूंगा। वैसे मिशन क्या है सर?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- वहीं बता रहा हूं मिहिर। इस मिशन में तुम्हें एक व्यक्ति की तलाश करना है।
मिहिर- बस एक आदमी? सर ये काम तो कोई भी कर सकता था।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- अगर कोई भी कर सकता तो मैं तुम्हारा नाम क्यों लेता मिहिर। अब मिशन के बारे में सूनो।
मिहिर- सॉरी सर। बताइए।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- करीब 15 साल पक्ष और विपक्ष की सहमति से एक फोर्स तैयार किया गया था। इस फोर्स में 10 लोग शामिल थे। इन सभी 10 जवानों को बहुत स्पेशल ट््रेनिंग देकर चलता-फिरता हथियार बनाया गया था। ये 10 लोग अगर एक साथ हो तो हजारों पर भारी पड़ सकते थे। इन सभी को एक मिशन के तहत तैयार किया गया था। मिशन का नाम था सौरम। सौरम नाम भी हमारे सौरमंडल से लिया गया था। मिशन के सभी सदस्यों के नाम भी हमारे ग्रहों के नाम पर ही रखे गए थे।
मिहिर- इनका मिशन क्या था सर?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- इनका मिशन बहुत खास था। हमारे दुश्मन मुल्कों के संबंध में इन्हें हर तरह की जानकारी जुटाना थी। ये सारी बहुत खुफिया थी। इसलिए इनका काम बहुत खतरनाक था। अगर इनमें से कोई पकड़ा जाता तो फिर वह हमेशा के लिए अपनी पहचान खो देता। इस मिशन को इस तरह से ही तैयार किया गया था। सरकारी होकर भी ये लोग सरकारी नहीं थे। इन सभी को अलग-अलग देशों में भेजा गया था। ये वहां अपनी एक नई पहचान लेकर रह रहे थे। परंतु जब भी कभी इनसे बात होती थी इनके कोड वर्ड यानि कि इन्हें ग्रहों के जो नाम दिए गए थे उसी नाम से होती थी।
मिहिर- ओके सर। ये सच में बहुत खतरनाक मिशन था।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- हां, मिहिर। बहुत खतरनाक। आज से लगभग 11 साल पहले जब केंद्र और हमारे राज्य में सरकार बदली तब राजनीतिक विवादों के कारण इस मिशन को बंद करना पड़ा। ये सभी लोग अपने देश आ पाते उसके पहले इंस्ताबुल में हमारा एक कमांडो पकड़ा गया। हालांकि बाकि कमांडों यहां आ गए। उस कमांडों का क्या हुआ इसकी हमें कोई जानकारी नहीं है।
मिहिर- ओह तो उस कमांडों के बारे में जानकारी जुटाना है मुझे।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- नहीं मिहिर। जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि मिशन फेल होता तो ये लोग अपनी पहचान खो देते। ऐसा ही उस कमांडो के साथ हुआ है। हालांकि ये तय है कि वह कमांडो अब जिंदा नहीं है। इंस्तांबुल में उसकी बहुत पहले ही मौत हो चुकी है। उसके पकड़े जाने के बाद ही वहां की सरकार ने उसे सरेआम फांसी दे दी थी, ऐसी हमारी इंटेलीजेंट की रिपोर्ट कहती है।
मिहिर- तो फिर मुझे करना क्या है सर?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- बाकि नौ कमांडों के भारत आ जाने के बाद हाई लेवल पर इस बात पर बहस होने लगी कि इन कमांडों के रहने से देश के लिए खतरा है। क्योंकि इनके कारण देश की सुरक्षा पर आंच आ सकती है। इस कारण हाई लेवल पर यह तय किया गया कि इन कमांडों की हर तरह की पहचान मिटा दी जाए। इसके लिए इन्हें खत्म करना होगा।
मिहिर- क्या ? पर ऐसा कैसे कर सकते हैं सर? इन कमांडो ने अपनी जान पर खेलकर दूसरे देशों की खुफिया जानकारी जुटाने का काम किया था। तो उन्हें मारा कैसे जा सकता था।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- देश की सुरक्षा के लिए यह कठोर निर्णय लेना पड़ा था मिहिर। हालांकि कोई भी दिल से यह नहीं चाहता था, पर देश की सुरक्षा के मद्देनजर इस निर्णय को सर्वमान्य किया गया था।
मिहिर- ओके सर। फिर क्या हुआ।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- फिर इन सभी कमांडों को विशेष सेल ले जाने का कहकर एक बस में बैठाया गया। इनके साथ हमारे कुछ अधिकारी भी उस बस में सवार थे। हालांकि हम कुछ कर पाते उसके पहले ही बस में ब्लास्ट हो गया। बस में सवार सभी लोग मारे गए।
मिहिर- ओह नो। पर ये विस्फोट कैसे हुआ सर और किसने किया?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- वह तो नहीं पता सर। पर सबसे खास बात यह है कि बस में करीब 20 लोग सवार थे। विस्फोट के बाद जो लाशें मिली वो 19 थी। उनमें से एक लापता था। बहुत जांच के बाद पता चला कि जो लापता है उसका कोड नेम केतु था। वो इसलिए पता है क्योंकि जितने भी कमांडों थे उनकी बॉडी पर एक विशेष मार्क बनाया गया था। हर मार्क का उनके नाम से कनेक्शन था। हमें जितनी बॉडी मिली उनको देखने के बाद हमें केतु के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। इसलिए पता चला कि केतु लापता है।
मिहिर- ओके सर। फिर क्या हुआ।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- फिर यह हुआ कि केतु की तलाश में कई लोगों को लगाया गया, पर कोई भी केतु के बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं कर सका है। इसलिए अब ये काम तुम्हें सौंपा जा रहा है। अब तुम्हें केतु को जिंदा या मुर्दा हमारे सामने लाना होगा। इसके साथ ही तुम्हें यह भी पता करना होगा कि बस में विस्फोट किसने किया था?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- हां, मिहिर। पर ये बात आज की तरह पहले भी सिर्फ पांच लोगों को ही पता थी तो फिर यह जानकारी लीक कैसे हुई और किसके पास हुई। क्योंकि अगर ये जानकारी लीक हुई है और जिसने विस्फोट कराया था, वह भी इन कमांडो के बारे में जानता ही होगा। इसलिए खतरा अब भी बरकरार है।
मिहिर- ओके सर। पर सर केतु के बारे में कोई और जानकारी?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- नहीं मिहिर। हमारे पास न उसकी कोई शक्ल ना सूरत है। उसका असली नाम क्या है, वो कौन था, कमांडो बनने से पहले वह क्या था, वह क्या करता था, वह दिखता कैसा था? हमें कुछ नहीं पता है। हमारे पास सिर्फ एक नाम है केतु। तुम्हें बस इस केतु को और बस में विस्फोट करने वाले का पता लगाना है। बस में विस्फोट करने वाले के साथ तुम जो चाहे कर सकते हो, पर यदि केतु अगर जिंदा है तो उसे तुम हमारे सामने जिंदा ही लेकर आओगे और यदि वह मर चुका है तो उसकी पूरी डिटेल हमें चाहिए कि विस्फोट के बाद वो कहां था, क्या करता था, किससे मिलता था ?
मिहिर- ओके सर। पर सिर्फ एक नाम के सहारे किसी को कैसे तलाश किया जा सकता है? कुछ तो जानकारी होना ही चाहिए ना सर।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- आसान होता तो यह काम मैं तुम्हें नहीं सौंपता मिहिर। मुझे तुम पर पूरा विश्वास है कि तुम इस मिशन को जरूर पूरा करोगे।
मिहिर- जी सर। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि आपका यह विश्वास बरकरार रख सकूं।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- एक खास बात और मिहिर। तुम्हें इस मिशन के लिए ऑफिशियली कोई टीम नहीं मिलेगी। ऑफिशियली इस मिशन में तुम अकेले हो, पर यदि तुम्हें किसी की मदद चाहिए तो वो तुम अपने स्तर पर अरेंज कर सकते हो, पर इस बात का बहुत खास ध्यान रखना कि जिसकी भी मदद लो वो इस मिशन के बारे में कोई भी जानकारी लीक न करें, अगर ऐसा हुआ तो उसके साथ होने वाले हाल के लिए तुम जिम्मेदार रहोगे। तुम समझ गए होंगे कि मैं क्या कहना चाह रहा हूं।
मिहिर- जी सर, समझ गया।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- तो बेस्ट ऑफ लक मिहिर। तुम आज और अभी से इस मिशन पर हो। मुझे केतु चाहिए हर हाल में केतु चाहिए।










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