गलती - द मिस्टेक - पार्ट 3

गलती - द मिस्टेक

पार्ट 3


विशाल के बेहोश होने के बाद भौमिक ने उसे अस्पताल के लिए रवाना करा दिया। विशाल के बेहोश हो जाने के कारण उसने किसी ओर से बात नहीं की और रात हो जाने के कारण वो अपने घर लौट आया था। वैसे भी देर रात पार्टी में होने के बाद वो उस हवेली पर पहुंच गया था और उसके बाद पूरा दिन केस की जानकारी और घटनास्थल पर छानबीन में कट गया था। इस कारण वो कुछ थक भी गया था। हालांकि घर आने के बाद भी उसके माइंड में केस की ही बातें चल रही थी। वो अब भी यही सोच रहा था कि आखिर उस हवेली में हुआ क्या होगा? क्यों ये 8 लोग उन 4 लोगों की हत्या का जुर्म अपने ऊपर ले रहे हैं और बाकि सभी को बेगुनाह बता रहे हैं? कातिल ने किस तरह से हत्या की है कि एक भी सुराग उसके हाथ नहीं लगा है। इन हत्याओं से कॉलेज स्टूडेंट्स का क्या लेना देना है? विशाल जो एक समय डरा हुआ बैठा था वो अचानक ही गुस्से में क्यों आ गया? डॉ. का परिवार उस हवेली में रात को क्यों गया था ? ऐसे ही कई सवाल उसके दिमाग में दौड़ रहे थे, परन्तु इन सवालों का फिलहाल उसके पास कोई जवाब नहीं था और इन्हीं सवालों के जवाब खोजने के लिए उसे अभी काफी मेहनत करनी थी। अगले दिन वो सुबह जल्दी ही अपने ऑफिस पहुंच गया था। स्पेशल सेल के पास खड़े होकर वो आठों संदिग्धों को देख रहा था। होश में आने के बाद देर रात को विशाल भी वापस आ गया था। आठों लोग बिल्कुल चुप थे। आपस में दोस्त होने के बाद भी उनके बीच कोई बात नहीं हो रही थी। भौमिक आठों लोगों को बारीकी से देख रहा था। हत्या को 36 घंटे से ज्यादा समय हो जाने के बाद भी आठों लोगों के चेहरे पर अब भी डर साफ नजर आ रहा था। जो जहाँ बैठा था, वो बस वहीं बैठा रहा। कोई भी किसी प्रकार की कोई हरकत नहीं कर रहा था। सभी चेहरों पर पसीना साफ दिख रहा था। सेल में एक दम खामोशी थी। इधर भौमिक ये सोच रहा था कि क्या सच में इन 8 लोगों में से किसी ने उन चारों की हत्या की है? अगर है तो कोई भी इस नजर क्यों नहीं आ रहा है ? सभी बहुत ज्यादा डरे हुए लग रहे हैं, जैसे कि ये हत्या उनके लिए किसी सदमे से कम ना हो।
ऐसे ही सोचते हुए भौमिक अपने केबिन में चला जाता है और सिपाही से कहता है कि सुमित को यहाँ लेकर आओ, अब उससे बात करके देखते हैं कि उसका क्या कहना इन हत्याओं के बारे में। सिपाही भौमिक को यस सर कहते हुए वहां से चला जाता है। कुछ देर बाद वह सुमित को लेकर उस केबिन में आता है और सुमित को छोड़कर वापस चला जाता है।
भौमिक- तो सुमित कैसे हो तुम?
सुमित भौमिक के सवाल का कोई जवाब नहीं देता है। भौमिक फिर भी उससे बात करने का प्रयास करता है।
भौमिक- सुमित मुझे लग रहा है तुम काफी डरे हुए हो? क्या कुछ कहना चाहते हो तुम?
सुमित इस बार ना में अपना सिर हिला देता है।
भौमिक- सुमित तुम्हें क्या लगता है कि क्या विशाल ने ही वो चारों कत्ल किए है?
सुमित जैसे ही भौमिक की बात सुनता है वह भी एकदम से गुस्से में आ जाता है। उसके चेहरे पर कुछ देर पहले जो डर था वह गायब हो जाता है। विशाल की तरह ही उसका चेहरा भी एकदम से सख्त हो जाता है और वह चिल्लाने लगता है।
सुमित- वो झूठ बोल रहा है। मुझे बचाने के लिए कत्ल का इल्जाम वो अपने सिर ले रहा है। जबकि सच तो ये है कि उन चारों लोगों की हत्या मैने की है। बाकि कोई् भी इस अपराध में शामिल नहीं था।
भौमिक- सुमित तो क्या तुम मुझे बताओगे कि तुमने उन चारों लोगों की हत्या क्यों और कैसे की है?
सुमित- वो डॉक्टर अच्छा आदमी नहीं था। उसने मुझे गुस्सा दिलाया था। इसलिए मैने उसकी हत्या कर दी।
भौमिक- सुमित पर तुमने हत्या तो डॉक्टर की थी, तो उसकी पत्नी और उसके बच्चों को किसने मारा?
सुमित इस सवाल के जवाब में कुछ नहीं बोलता है और चुप रह जाता है।
भौमिक- अच्छा सुमित ये बताओं तुमने अगर हत्या की है तो चाकू पर कोई निशान नहीं है। मेरे कहना का मतलब यह है कि चाकू पर तुम्हारे अंगुलियों के कोई निशान क्यों नहीं है?
सुमित- वो मुझे नहीं पता। मुझे बस इतना पता है कि मैंने ही उन चारों लोगों को मारा है।
इतना कहते हुए सुमित भी जोर-जोर से चिल्लाने लगता है और वह भी विशाल की तरह बेहोश हो जाता है। भौमिक इस बार भी अचरज में पड़ जाता है और सिपाही को बुलाकर सुमित को अस्पताल के लिए रवाना कर देता है। वह हवेली में जाने का तय करता है और परमार को कॉल करता है। कुछ ही देर में परमार भी उसके ऑफिस आ जाता है और दोनों हवेली के लिए निकल जाते हैं।
हवेली पहुंचकर भौमिक पूरी हवेली को गौर से देखने लगता है।
भौमिक- परमार, आखिर ऐसा क्या रहस्य छुपा है इस हवेली में की चार-चार कत्ल होने के बाद भी दो बार पूरी तरह से सुराग ढूढ़ने के बाद भी यहां कुछ नहीं मिल रहा है?
परमार- जी सर, मैं भी यहीं सोच रहा था।
भौमिक- परमार कातिल ने क्या एक परफेक्ट क्राइम को अंजाम दिया है या हमसे कुछ मिस हो रहा है?
परमार- सर परफेक्ट क्राइम के बारे में आप कह रहे है? आप तो हमेशा कहते आए हैं कि कातिल कितना ही चालाक क्यों न हो कोई न कोई सुराग छोड़कर ही जाता है।
भौमिक- हां परमार, पर इस बार मुझे अब तक कोई सुराग नजर नहीं आया है। इस बार शायद किसी चालाक कातिल से ही पाला पड़ा है।
परमार- शायद सर। पर मुझे लगता है कि आप इस केस को भी क्रेक कर ही देंगे। थोड़ा वक्त लग सकता है, पर यह केस आप ही सॉल्व करेंगे।
भौमिक- आई होप सो परमार।




इसके बाद भौमिक और परमार फिर से हवेली का मुआयना करने के लिए निकल पड़ते हैं। हवेली के हर कोने पर दोनों बारिकी से नजर रखते हुए कोई सुराग की तलाश करते हैं। काफी देर तक दोंनो हवेली में ही रहते परंतु निराश होकर लौटने के सिवाय उनके पास कोई चारा नहीं होता है और दोनों फिर से भौमिक के ऑफिस के लिए रवाना हो जाते हैं।
भौमिक- परमार वो पोस्टमार्टम रिपोर्ट का क्या हुआ?
परमार- अगले सात दिनों में रिपोर्ट आपकी टेबल पर होगी। चार लोगों का मामला है इस कारण थोड़ा टाइम लग रहा है।
भौमिक- ओके परमार। अच्छा अब एक काम और करों डॉक्टर और उसकी फैमिली के साथ इन आठों लोगों की मोबाइल डीटेल भी निकालों। साथ ही इनकी लोकेशन भी। यह भी पता करों की इन आठों लोगों का डॉक्टर से कभी भी कोई संपर्क हुआ था क्या?
परमार - सर मैने मोबाइल कंपनी को पहले ही बोल दिया हे और अगले दो दिनों में सभी डिटेल मिल जाएगी।
भौमिक- गुड परमार। अच्छा वो सुदीप शाह के बारे में क्या पता चला है? उससे कोई संपर्क हो सका है?
परमार- जी सर, मेरी उससे बात हुई है। मैंने उसे जल्द से जल्द यहां आने के लिए बोल दिया है। उसका कहना है कि उसे यहां पहुंचने में करीब एक सप्ताह का समय लग जाएगा। लंदन में उसकी कोई जरूरी मीटिंग है उसके बिजनेस को लेकर उन्हें निपटाकर वो जल्द ही यहां आ जाएगा।
भौमिक- ओके परमार। ये बताओं कि हवेली में कोई गार्ड नहीं रहता है क्या?

प्रमार- नहीं सर। जब तक काम शुरू नहीं हुआ था, उसके पहले तक था। काम बंद होने के बाद से कोई गार्ड नहीं है। शाह से मैंने पूछा तो उसका कहना था कि काम अचानक बंद होने और उसके लंदन आ जाने के कारण गार्ड से दोबारा बात नहीं पाई थी? इस कारण अभी वहां कोई गार्ड नहीं है।

क्रमशः 

गलती - द मिस्टेक - पार्ट 2

गलती - द मिस्टेक

पार्ट 2

हवेली से भौमिक सीधे अपने ऑफिस पहुंच जाता है। कुछ देर बाद ही परमार भी उसके ऑफिस आ जाता है। 4 लोगों की हत्या और उसमें कई बड़े लोगों के बच्चों के नाम होने के कारण कमिश्नर ने इस केस को जल्द खत्म करने की जिम्मेदारी भौमिक को ही सौंप दी थी। ऐसे में भौमिक अब सिर्फ केस को सुलझाने पर ही अपना ध्यान केंद्रित कर रहा था। उसके दिमाग में अब भी यही चल रहा था कि क्यों 8 लोग कत्ल का इल्जाम खुद पर ले रहे हैं और बाकि 7 को बेगुनाह बता रहे हैं। साथ ही डॉ. और उसका परिवार वहाँ क्या कर रहा था, और ये आठों लोग भी उस हवेली में क्या करने के लिए गए थे? वह यह भी सोच रहा था कि मान भी किया जाए कि इन 8 में से ही किसी एक ने कत्ल किया है, तो भी हवेली में ऐसा क्या हुआ जो एक ही व्यक्ति ने 4 लोगों की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी? भौमिक यही सब सोच रहा था तभी परमार भी वहाँ पहुंच गया।

परमार- सर सभी बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, रिपोर्ट आने में 7 दिन लग सकते हैं।
भौमिक- ओके। परमार वहाँ से कोई फिंगरप्रिंट मिले हैं क्या?
परमार- सर फोरेंसिक टीम पहुंच तो गई है, पर कुछ देर पहले बात हुई तो उनका कहना है कि वहाँ कोई फिंगरप्रिंट मौजूद ही नहीं है। और सबसे बड़ी बात तो ये है सर की चाकू पर भी कोई निशान नहीं मिले है।
भौमिक- क्या चाकू पर भी कोई निशान नहीं मिले? परमार ये कैसा कातिल है, जिसने कोई सुराग ही नहीं छोड़ा है ?
परमार- सर मैं भी यही सोच रहा हूं कि ऐसा कैसे संभव है कि एक कमरे में 4 लोगों की हत्या हो और कोई निशान या सुराग या फिंगरप्रिंट ही ना मिले?
भौमिक- वही तो परमार कातिल कोई ना कोई सुराग जरूर छोड़ कर जाता है, पर इस केस में इस अब तक कुछ भी नजर नहीं आ रहा है।
परमार- जी सर। कोई तो सुराग मिलना ही चाहिए। वैसे मैंने फोरेंसिक टीम को फिर से जांच करने के लिए बोल दिया है।
भौमिक- गुड जॉब परमार। वैसे वो हवेली है किसकी परमार?
परमार- सर मैंने पता किया है, कोई सुदीप शाह है। आजकल लंदन में रहते है। 15 दिन पहले यहीं थे। पुश्तेनी हवेली है, काफी समय से यहाँ कोई नहीं रहता है। शाह परिवार पिछले 15 साल से लंदन में ही है।
भौमिक- तो 15 साल बाद उन्हें उनकी इस हवेली की याद क्यों आई थी परमार?
परमार- सर सुना है कि वो यहाँ एक रिसोर्ट बनाना चाह रहे थे। साथ में बार भी ओपन करना चाह रहे थे। इसके लिए कुछ महीने तक हवेली में काम भी कराया गया था। 15 दिन पहले अचानक ही शाह के जाने से काम बंद हो गया।
भौमिक- ओके परमार तो ये पता करो कि मिस्टर शाह को लंदन में अचानक क्या काम आ गया था। साथ ही ये भी पता करो कि डॉक्टर और उसकी पूरी फैमिली उस रात वहाँ क्या करने गई थी और ये आठों लोग वहां कैसे और क्यों पहुंचे थे ?
परमार- जी सर, मैं पता करता हूं।
भौमिक- परमार अभी वो आठों लोग कहाँ है?
परमार- हमारी स्पेशल सेल में है सर।
भौमिक- तुम वो पता करो जो मैंने तुमसे कहा है, तब तक मैं इन लोगों से बात करता हूं। देखे तो सही आखिर पूरा मामला है क्या?
परमार- जी सर।

भौमिक अपने ऑफिस से निकलकर स्पेशल सेल की ओर जाता है। यहां आठों लोग डरे सहमे बैठे हैं। भौमिक उन्हें देखकर सोचता है कि परमार तो कह रहा था कि ये सभी अपना जुर्म कबूल कर रहे हैं, पर ये सभी तो काफी डरे हुए लग रहे है। कत्ल करने के बाद अगर इन्होंने अपना जुर्म कबूल किया था तो अब ये डर क्यों रहे हैं। भौमिक समझ नहीं पा रहा था कि आखिर मामला है क्या? यही सोचकर उसने उन सभी से एक-एक कर बात करने का निर्णय लिया। इससे पहले उसने वहां रखी एक फ़ाइल उठाई और उसे देखने लगा। फ़ाइल में सभी के नाम, पते, मोबाइल नंबर, उनकी उम्र और अन्य जानकारी थी। सेल के पास एक खाली रूम में भौमिक वह फाइल लेकर चला गया और वहीं खड़े एक सिपाही से कहा कि विशाल चौहान को यहाँ लेकर आओ। भौमिक ने सिपाही से एक बार फिर कहा कि सिर्फ विशाल को। सिपाही जी सर कहता हुआ विशाल को लेने के लिए चला गया। कुछ ही देर में सिपाही विशाल को लेकर उस रूम में आ गया जहाँ भौमिक बैठा था। भौमिक ने सिपाही को वहाँ से जाने के लिए कहा और सिपाही भी उसे सेल्यूट देकर दरवाजा बंद कर वहाँ से चला गया। भौमिक ने विशाल को सामने रखी एक कुर्सी पर बैठने का इशारा किया और खुद एक बार फिर उस फ़ाइल को देखने लगा।
भौमिक- तो विशाल तुम्हारे पिता इस प्रांत के मंत्री है मिस्टर ए के चौहान ?
विशाल ने सिर्फ हां में अपना सर हिला दिया। भौमिक ने गौर किया कि वह अब भी काफी डरा हुआ था और कुछ बोल भी नहीं पा रहा था।
भौमिक- और तुम एम के कॉलेज से फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहे हो?
इस बार भी विशाल ने सिर्फ हां में सर हिला दिया।
भौमिक- और तुम्हारे सभी साथी भी तुम्हारे साथ उसी कॉलेज में और तुम्हारी ही क्लास में है?
पिछली बार की तरह विशाल ने बिना कुछ कहे सिर्फ हां में गर्दन हिला दी। विशाल के चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा था। उसके होंठ सूख रहे थे और उसके माथे पर पसीने की बूंदे चमक रही थी। विशाल भौमिक की ओर देख भी नहीं रहा था। वो सामने रखी टेबल की ओर देख रहा था। रह-रह कर वो अपने माथे से पसीने को साफ करने की कोशिश कर रहा था, परन्तु शायद डर के कारण उसे बार बार पसीना आ रहा था। उसे देखकर लग रहा था कि वो कुछ बोल नहीं पाएगा।
भौमिक- विशाल तो क्या तुम बताओगे कि उस रात हुआ क्या था?
(विशाल अब कुछ नहीं बोला। भौमिक ने अपना सवाल फिर दोहराया पर इस बार भी विशाल ने कोई जवाब नहीं दिया और टेबल की ओर एक टक देखता रहा। इस बार भौमिक ने अपना प्रश्न कुछ बदला।)
भौमिक- विशाल ये बताओ कि तुमने उन चारों लोगों की हत्या कैसे की?
(ये प्रश्न सुनते ही विशाल को जैसे कोई करंट लग गया हो कुछ ऐसा झटका लगा। विशाल का चेहरा अचानक ही सख्त हो गया। उसके चेहरे से डर एक दम से गायब हो गया था और उसके चेहरे पर गुस्सा नजर आने लगा। विशाल में आए इस अचानक बदलाव ने भौमिक को भी अचरज में डाल दिया कि कुछ पल पहले विशाल जो इतना डरा हुआ था अचानक गुस्से में क्यों आ गया? भौमिक कुछ समझ नहीं पा रहा था कि तभी विशाल जोर से चीखा।)
विशाल- हां, हां मैंने ही मारा है उन चारों को। उन्हें तब तक चाकू मारे जब तक कि वो चारों मर नहीं गए। मैंने मारा है उन्हें मेरे दोस्तों का इससे कोई लेना देना नहीं है। मुझे सज़ा दो जो भी सजा देना है। 
(ऐसे ही चिल्लाते हुए विशाल बेहोश हो गया) 

क्रमशः 

गलती - द मिस्टेक - पार्ट 1

नमस्कार
जिंदगी कड़वी मीठी टाइटल से मैं अपनी जिंदगी के कुछ अनुभव कहानी, गीत, कविता और लेख के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूं। ब्लॉग पर पहली बार में अपने अनुभव से आपको रूबरू ना करते हुए एक कहानी कलमबद्ध कर रहा हूं। यह कहानी कई दिनों से मेरे जेहन में थी, जिसे आज लिख रहा हूं। कहानी बड़ी है इस कारण अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर प्रस्तुत करता रहूंगा।
इस प्रकार की कहानी लिखने का यह मेरा पहला प्रयास है। जिसमें कुछ थ्रिलर, सस्पेंस, कुछ इत्तेफाक और कुछ गलती है, जो कहानी को रोचक बनाती है। पहला प्रयास होने के कारण उम्मीद करता हूं कि कुछ गलती मुझसे लेखन में हुई हो तो आप उसे नजरअंदाज कर देंगे। तो चलिए शुरू करते है अपनी कहानी गलती द मिस्टेक।

गलती - द मिस्टेक
पार्ट 1 
शहर के बड़े होटल में एक पार्टी चल रही थी। पार्टी में शहर के कई बड़े लोग शामिल थे। जैसे कि अक्सर पार्टियों में होता है तो इस पार्टी में भी जाम छलक रहे थे। एक ओर संगीत भी चल रहा था तो दूसरी ओर पार्टी में शामिल लोग शहर के हालात से लेकर देश की राजनीति तक बातें करने में व्यस्त थे। पार्टी में एसीपी भौमिक शर्मा भी थे। वो भी कुछ लोगों के साथ बातों में मशगूल थे। तभी उनके मोबाइल पर एक कॉल आता है और वो काफी गंभीर हो जाते हैं। पार्टी से थोड़ा सा दूर जाकर वह अपने कमिश्नर को कॉल कर कुछ जानकारी देकर जी सर कहते हुए वहाँ से तत्काल रवाना हो जाते है। कुछ ही देर में वो शहर की सड़कों को छोड़कर गोआ हाइवे पर निकल पड़ते हैं। करीब आधे घंटे के बाद उनकी कार एक हवेलीनुमा पुरानी बिल्डिंग के पास जाकर रुकती है। यहाँ पहले से ही पुलिस पहुंच गई थी, जिसके कारण कुछ पुलिस कर्मी घटनास्थल पर अंदर बाहर हो रहे थे। हवेली के बाहर दो एम्बुलेंस भी थी। एसीपी को घटनास्थल पर आया देख एक पुलिस कर्मी उसके पास भागकर आता है और उसे सलाम करता है।
भौमिक- क्या हालत है परमार ?
परमार- सब कुछ कंट्रोल में है सर।
भौमिक- ओके, गुड़ क्या मामला है?
परमार- सर 4 लोगों की हत्या हुई है, देखने से लगता है कि चारों एक ही परिवार के है। मरने वालों में एक आदमी, एक औरत और दो बच्चे है सर।
भौमिक- कैसे हुई है हत्या कुछ पता चला?
परमार- जी सर, शरीर पर चाकू के वार साफ नजर आ रहे है। हर किसी की बॉडी पर 4 से 5 वार किए गए हैं।
भौमिक- कोई सुराग मिला परमार ?
परमार- सुराग तो मिल है सर, पर मुझे लगता है केस बहुत उलझाने वाला है।
भौमिक- मतलब?
परमार- सर एक चाकू मिला है जिस पर बहुत खून लगा है और....
भौमिक- और?
परमार- और 8 लोग है अंदर। जो कुछ बहुत अजीब ही बात कर रहे हैं 
भौमिक- परमार ये अजीब क्या बात कर रहे है ? अब ये मत कहना कि किसी भूत ने इन सबकी हत्या की है।
परमार- नहीं सर, ये नहीं कह रहा ना तो मैं और ना ही अंदर बैठे वो 8 लोग 
भौमिक- तो फिर क्या अजीब है ?
परमार- सर सभी 8 लोगों का कहना है कि हत्या उसने की है और बाकी 7 लोगों का इससे कोई लेना देना नहीं है।
भौमिक- क्या? ये 8 लोग है कौन ?
परमार- सर सभी कॉलेज स्टूडेंट्स है। और सबसे खास बात तो ये है सर कि सभी vip लोगों के बच्चे है। एक तो मंत्री जी का बेटा है, एक शहर के बड़े बिल्डर का और दो बड़े बिजनेस मैन के लड़के है।
भौमिक- और बाकि 4?
परमार- सर बाकि 4 लड़कियां है, जो इनकी पर्सनल दोस्त हैं।
भौमिक- यू मीन गर्लफ्रैंड ?
परमार- जी सर।
भौमिक- 4 लोगों की हत्या और 8 क़ातिल? और। उनमें भी 7 बेगुनाह। तुम सही कह रहे थे परमार केस काफी उलझा हुआ है।

परमार- जी सर। 

इसके बार भौमिक और परमार अंदर जाते है। यहाँ चारों लड़के और लड़कियां एक सोफे पर बैठे हुए हैं। हवेली के एक कमरे में चार लाश पड़ी हुई है। चारों के पेट पर चाकू से कई वार किए गए है। चारों ओर खून ही खून पड़ा है। भौमिक के दिमाग मे अब एक बात खटक रही है कि कमरे में 4 खून हुए और चारों ने ही बचने का कोई प्रयास नहीं किया, क्योंकि कमरे में हर चीज सलीके से रखी हुई नजर आ रही हूं। भौमिक का मानना है कि यदि बचने का प्रयास किया होता तो कुछ चीजें तो टूटती या बिखरी होती, पर कमरे में ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा था। फिर भौमिक ने सोचा कि हो सकता है कि क़ातिल ने सोते हुए हमला किया हो? पर हमला एक पर होता तो बाकि लोग तो जाग जाते। या ये भी हो सकता है कि चारों को पहले बेहोश किया हो और फिर चाकू से वार किए गए हो। एक संभावना और थी कि चारों को खाने में कुछ दिया गया हो और बाद में चाकू से वार किए गए हो। अंत में भौमिक ने मन ही मन तय किया कि जो भी होगा वो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आ ही जाएगा। उसने परमार को सभी बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने के लिए कहा और खुद कमरे को गौर से देखने लगा। काफी देर तक रूम को देखने के बाद भी उसे ऐसा कुछ नहीं मिला, जिससे कि वो क़ातिल की कोई पहचान कर सके। उसके बाद वो उन 8 लोगों के पास पहुंच गया, जहां परमार पहले से ही सभी के नाम, पते और मोबाइल नंबर नोट कर रहा था। इसी बीच उन सभी के माता-पिता भी हवेली पर पहुंच गए थे। सभी उन्हें घर लेकर जाना चाह रहे थे, परन्तु भौमिक ने किसी को भी जाने नहीं दिया, क्योंकि सभी खुद को उन चारों का क़ातिल बता रहे थे। इसलिए सभी को हिरासत में ले लिया गया। शहर के कई बड़े लोगों के बच्चों के नाम केस से जुड़ जाने के कारण केस काफी गंभीर भी हो गया था। दूसरी और जिनकी हत्या हुई थी वो भी शहर के बहुत बड़े हार्ट सर्जन डॉ. अविनाश सक्सेना थे। उनके साथ उनकी पत्नी आरती, 12 साल का बेटा आरुष और 8 साल की बेटी भव्या थी। अब जो बात सामने आ रही थी वो यह थी कि शहर से 30 किलोमीटर दूर डॉ. अविनाश अपने परिवार के साथ क्या कर रहे थे और मंत्री जी, बिल्डर और दो बिजनेसमैन के बेटे अपनी गर्लफ्रैंड के साथ इस हवेली में क्या करने आए थे?
क्रमशः