बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार
पार्ट 3
सुहानी अब भी उसे देख रही थी। तभी विवान की नजर सुहानी पर पड़ती है और वह सुहानी की ओर आता है। सुहानी हालांकि कुछ सकुचाती है, पर फिर नॉमर्ल हो जाती है।
विवान- आप यहां क्या कर रही है?
सुहानी- आपसे बात करने के लिए ही आई थी।
विवान- पर मैं आपसे कोई बात नहीं करना चाहता हूं।
सुहानी- हां, जानती हूं, आप लड़कियों से कम ही बात करते हैं।
विवान- जब पता है तो आप यहां क्यों आईं हैं?
सुहानी- क्योंकि मुझे आपसे बात करना है।
विवान- क्या बात करना है?
सुहानी- आप ऐसे क्यों हैं? मैंने तो सुना है आप पहले बहुत अच्छे थे। सभी से आपकी दोस्ती थी।
विवान- वो बहुत पुरानी बात है। अब मैं वैसा नहीं हूं। और कुछ ?
सुहानी- देखिए अगर एक व्यक्ति आपके साथ गलत करता है तो इसका मतलब यह तो नहीं कि सभी आपके साथ गलत करेंगे।
विवान- देखिए आप अपनी समझ अपने पास रखिए और मुझे मेरे हाल पर छोड़ दीजिए।
सुहानी- देखिए आप किसी और की गलती की सजा किसी को दे रहे हैं, जो सही नहीं है।
विवान- क्या सही है और क्या गलत ये मुझे तय करना है।
सुहानी- पर आपके इस व्यवहार से कोई हर्ट हो सकता है।
विवान- होता है तो होता रहे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।
सुहानी- पर आपको फर्क पड़ना चाहिए। क्योंकि आपको किसी ने हर्ट किया है तो आप कितने दुखी रहते हैं, अपने में ही खोए रहते हैं। जो आपको बुरा लगा है, वहीं आप दूसरों को दे रहे हैं।
विवान- देखिए मैं आपसे कह चुका हूं कि आप अपनी समझ अपने पास रखिए मुझे क्या करना है वो मुझे अच्छे पता है।
सुहानी- नहीं पता है, इसलिए तो बताने आई हूं।
विवान- मैंने आपसे कोई मदद नहीं मांगी है, इसलिए मेहरबानी करके आप यहां से जा सकती हैं।
सुहानी- मैं अपनी बात पूरी करके ही जाउंगी।
विवान- तो आप अपनी बात पूरी करें, मैं यहां से चला जाता हूं।
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 2 यहां पढ़े
इतना कहकर विवान वहां से चला जाता है। सुहानी उसे एकटक देखती रहती है और उसके बारे में ही सोचती रहती है। वह मन ही मन तय करती है कि वह विवान को बदलकर रहेगी। इसके बाद सुहानी भी कॉलेज आ जाती है। यहां आकर वह कुछ और लोगों से भी विवान के बारे में बात करती है। उसे पता चलता है कि एक समय विवान कॉलेज का हीरो था। वह सबकी हर संभव मदद करता था। वह कॉलेज का चुनाव भी लड़ा था। पर अचानक पता नहीं क्या हुआ कि वह इतना बदल गया है। एक समय तक तो उसके दोस्तों में लड़के और लड़कियां दोनों होते थे। पर उसका व्यवहार लड़कियों के लिए बिल्कुल ही बदल गया है। सुहानी सभी की बातों को सुनती है और फिर शाम होने पर अपने घर के लिए निकल जाती है। वह घर पर भी विवान के बारे में ही सोच रही थी। अगले दिन वह फिॅर कॉलेज जाती है और इस बार सीधे वह तालाब पर पहुंच जाती है, जहां विवान पहले से अकेला बैठा हुआ था। इस बार सुहानी सीधे उसके पास पहुंच जाती है। विवान उसे देखता है और उठकर जाने लगता है।
सुहानी- रूकिए, मुझे आपसे कुछ बातें करना है।
विवान- पर मुझे आपसे कोई बात नहीं करना है। मैंने आपसे कल भी कहा था कि आप अपनी समझ अपने पास रखिए, मुझे क्या करना है वह मुझे पता है।
सुहानी- देखिए स्वाती तो अब आपकी जिंदगी में आ नहीं सकती तो आप क्यों अपने आप में घुट रहे हैं?
स्वाती का नाम सुनकर विवान अचानक से चौंक जाता है। उसकी आंखों के सामने एक फिल्म की तरह उसकी पिछली जिंदगी उसकी आंखों के सामने घूम जाती है।
विवान- आप स्वाती को कैसे जानती हैं?
सुहानी- जानती नहीं हूं, बस कॉलेज में जब आपके बारे में पता किया तो उसका नाम भी सामने आया।
विवान- ओह तो अब आप मेरी जासूसी कर रही है?
सुहानी- जासूसी नहीं। बस आपके बारे में पता किया।
विवान- जान सकता हूं क्यों?
सुहानी- क्योंकि प्रतियोगिता में जिस तरह से आप प्यार के खिलाफ बोल रहे थे, उससे लगा कि आपको प्यार से बहुत नफरत है, मैं उस नफरत को शायद मिटा तो नहीं सकती पर कुछ कम जरूर कर सकती हूं।
विवान- मुझे कोई जरूरत नहीं है।
सुहानी- जरूरत है, ताकि आपके व्यवहार में कुछ परिवर्तन आए। आप जैसे पहले थे वैसे ही रहे।
विवान- नहीं।
सुहानी- स्वाती का जाने का मतलब यह नहीं है कि आप दुनियां के लिए बुरे हो जाए।
विवान- देखिए आप मेरे बारे में बहुत कम जानती है। इसलिए आप मुझे मेरे हाल पर ही छोड़ दीजिए।
सुहानी- नहीं मैंने तय किया है कि मैं आपको बदलकर रहूंगी।
सुहानी की इस बात को सुनकर विवान अचानक से गुस्से में तेज चिल्लाता है।
विवान- क्या बदलोगी, और क्यों बदलोगी। तुम भी तो एक लड़की ही हो ना। तुम कुछ नहीं बदल सकती। इसलिए जाओ यहां।
विवान के इस व्यवहार को देखकर सुहानी कुछ देर के लिए डर जाती है और फिर से खुद को संभालती है।
सुहानी- अगर आप मेरी बात सुनेंगे तो जरूर बदल सकती हूं।
विवान- क्या बदलना चाहती हो आप?
सुहानी- बस इतना ही कि आप जैसे पहले थे, वैसे ही हो जाए। आपके दिल में प्यार के लिए जो नफरत है वो खत्म हो जाए।
विवान- वो कभी नहीं होगी।
सुहानी- होगी, जरूर होगी, आप कोशिश तो कीजिए।
विवान- कोशिश, कोशिश करूं..... चलिए मैं कोशिश करता हूं। एक कोशिश आप करेगी मेरे लिए।
सुहानी- अगर मैं आपकी किसी भी तरह से मदद कर पाउं तो मुझे खुशी होगी।
विवान- आपका कहना है कि आप मुझे बदलना चाहती है। मैं जैसा पहले था, आप चाहती है कि मैं पहले जैसा ही हो जाउं। अब आप मेरी बात बहुत ध्यान से सुनिए।
सुहानी- आप बोलते रहिए मैं सुन रही हूं।
विवान- प्यार एक ऐसा अहसास और एक ऐसा रिश्ता है, जो दो अंजान लोगों को एक कर देता है। पैदा होने वाला बच्चा अपने पूरे परिवार से अंजान होता है, परंतु जब उसे उन्हीं लोगों से प्यार मिलता है तो उका एक रिश्ता मजबूत होता चला जाता है। प्यार के कई रूप है, उनमें से एक रूप में प्रेमी-प्रेमिका भी है। आज रिश्ते के प्रेम में एक अनदेखी सी शर्त लागू होने लगी है। कि ऐसा होगा तो हमाररा प्यार बना रहेगा, वैसा होगा तो हम साथ रह सकेंगे। जबकि प्यार और उसका अहसास किसी भी शर्त को नहीं मानता। पर इंसान उस अहसास के बीच में ऐसी शर्तों को लाकर न सिर्फ उस अहसास को कुचल देता है, बल्कि प्यार और उस रिश्ते का भी खून कर देता है।
ऐसे बोलते हुए विवान कुछ देर के लिए चुप हो जाता है। सुहानी अब भी लगातार उसकी ओर देख रही थी। वह एक बार पलटता है और सुहानी को देखता है और फिर से बोलना शुरू करता है।
विवान- मेरे घर के लोग, मेरे दोस्त सभी समझते हैं कि उस एक्सीडेंट में स्वाती की मौत हो गई थी, ऐसी खबर उन्होंने मुझे दी थी और मैंने उनकी बात को मान लिया था। पर यह सही नहीं हैं। एक समय तक मैं इसे सच मानकर कुछ समय के लिए उदास हो गया था। फि र मैंने सोचा जो होना था हो गया, इसलिए अब फिर से मुण्े अपनी जिंदगी शुरूआत करना है। इसके लिए मैं कुछ दिनों के घूमने के लिए बाहर चला गया था। कई जगहों पर अकेले ही घूमता हरां घूमते हुए एक दिन नागपुर पहुंच गया। वहां एक शाम को मार्केट में घूम रहा था, तभी मेरी नजर स्वाती पर गई। मैंने सोचा स्वाती कैसे हो सकती है, उसकी तो मौत हो चुकी है। पर जब मैंने कुछ देर तक उसे फॉलो किया तो पता चला कि स्वाती मरी नहीं थी, वह मेरी स्वाती ही थी। कुछ देर के लिए मेरा दिमाग सुन्न हो गया था। मैं कुछ सोच ही नहीं पा रहा था। मैंने उसका पीछा किया और उसके घर का पता लगाया। फिर जब दिन के समय उसके घर पर कोई नहीं था, तो मैं उससे मिलने के लिए उसके घर पहुंच गया।
सुहानी- फिर उसने क्या बोला?
विवान- उसने मुझे देखा तो वो बहुत ही सामान्य थी। मैंने उससे मुझे छोड़ने कारण पूछा तो उसका कहना था कि एक्सीडेंट के बाद उसे बताया गया था कि मेरे पैर बेकार हो गए हैं, और अब मैं कभी नहीं चल पाउंगा। इस कारण वो एक अपाहिज के साथ अपनी जिंदगी नहीं बीता सकती थी। इसलिए उसने मुझे और मेरे शहर को हमेशा के लिए छोड़ दिया और अविनाश से शादी कर ली और अब वह बहुत खुश भी है। मैंने उससे कहा कि कम से कम एक बार वो मुझसे मिलती तो मैं सब ठीक कर देता। तो उसने कहा कि एक अपाहिज जो खुद अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता वो जिंदगी और उसकी परेशानियों उसकी समस्याओं को कैसे ठीक करेगा। और वैसे भी तुम्हारे ना पैसा है, ना अच्छी नौकरी, तुम मुझे दे भी क्या सकते थे?
इतना कहते हुए विवान की आंखों में आंसू आ जाते हैं और वह वहीं बैठ जाता है। विवान की आंखों में आंसू देखकर सुहानी उसे सांत्वना देने के लिए उसके कंधे पर हाथ रखती है। विवान उसे देखता है और फिर से बोलना शुरू करता है।
विवान- आप यहां क्या कर रही है?
सुहानी- आपसे बात करने के लिए ही आई थी।
विवान- पर मैं आपसे कोई बात नहीं करना चाहता हूं।
सुहानी- हां, जानती हूं, आप लड़कियों से कम ही बात करते हैं।
विवान- जब पता है तो आप यहां क्यों आईं हैं?
सुहानी- क्योंकि मुझे आपसे बात करना है।
विवान- क्या बात करना है?
सुहानी- आप ऐसे क्यों हैं? मैंने तो सुना है आप पहले बहुत अच्छे थे। सभी से आपकी दोस्ती थी।
विवान- वो बहुत पुरानी बात है। अब मैं वैसा नहीं हूं। और कुछ ?
सुहानी- देखिए अगर एक व्यक्ति आपके साथ गलत करता है तो इसका मतलब यह तो नहीं कि सभी आपके साथ गलत करेंगे।
विवान- देखिए आप अपनी समझ अपने पास रखिए और मुझे मेरे हाल पर छोड़ दीजिए।
सुहानी- देखिए आप किसी और की गलती की सजा किसी को दे रहे हैं, जो सही नहीं है।
विवान- क्या सही है और क्या गलत ये मुझे तय करना है।
सुहानी- पर आपके इस व्यवहार से कोई हर्ट हो सकता है।
विवान- होता है तो होता रहे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।
सुहानी- पर आपको फर्क पड़ना चाहिए। क्योंकि आपको किसी ने हर्ट किया है तो आप कितने दुखी रहते हैं, अपने में ही खोए रहते हैं। जो आपको बुरा लगा है, वहीं आप दूसरों को दे रहे हैं।
विवान- देखिए मैं आपसे कह चुका हूं कि आप अपनी समझ अपने पास रखिए मुझे क्या करना है वो मुझे अच्छे पता है।
सुहानी- नहीं पता है, इसलिए तो बताने आई हूं।
विवान- मैंने आपसे कोई मदद नहीं मांगी है, इसलिए मेहरबानी करके आप यहां से जा सकती हैं।
सुहानी- मैं अपनी बात पूरी करके ही जाउंगी।
विवान- तो आप अपनी बात पूरी करें, मैं यहां से चला जाता हूं।
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 2 यहां पढ़े
इतना कहकर विवान वहां से चला जाता है। सुहानी उसे एकटक देखती रहती है और उसके बारे में ही सोचती रहती है। वह मन ही मन तय करती है कि वह विवान को बदलकर रहेगी। इसके बाद सुहानी भी कॉलेज आ जाती है। यहां आकर वह कुछ और लोगों से भी विवान के बारे में बात करती है। उसे पता चलता है कि एक समय विवान कॉलेज का हीरो था। वह सबकी हर संभव मदद करता था। वह कॉलेज का चुनाव भी लड़ा था। पर अचानक पता नहीं क्या हुआ कि वह इतना बदल गया है। एक समय तक तो उसके दोस्तों में लड़के और लड़कियां दोनों होते थे। पर उसका व्यवहार लड़कियों के लिए बिल्कुल ही बदल गया है। सुहानी सभी की बातों को सुनती है और फिर शाम होने पर अपने घर के लिए निकल जाती है। वह घर पर भी विवान के बारे में ही सोच रही थी। अगले दिन वह फिॅर कॉलेज जाती है और इस बार सीधे वह तालाब पर पहुंच जाती है, जहां विवान पहले से अकेला बैठा हुआ था। इस बार सुहानी सीधे उसके पास पहुंच जाती है। विवान उसे देखता है और उठकर जाने लगता है।
सुहानी- रूकिए, मुझे आपसे कुछ बातें करना है।
विवान- पर मुझे आपसे कोई बात नहीं करना है। मैंने आपसे कल भी कहा था कि आप अपनी समझ अपने पास रखिए, मुझे क्या करना है वह मुझे पता है।
सुहानी- देखिए स्वाती तो अब आपकी जिंदगी में आ नहीं सकती तो आप क्यों अपने आप में घुट रहे हैं?
स्वाती का नाम सुनकर विवान अचानक से चौंक जाता है। उसकी आंखों के सामने एक फिल्म की तरह उसकी पिछली जिंदगी उसकी आंखों के सामने घूम जाती है।
विवान- आप स्वाती को कैसे जानती हैं?
सुहानी- जानती नहीं हूं, बस कॉलेज में जब आपके बारे में पता किया तो उसका नाम भी सामने आया।
विवान- ओह तो अब आप मेरी जासूसी कर रही है?
सुहानी- जासूसी नहीं। बस आपके बारे में पता किया।
विवान- जान सकता हूं क्यों?
सुहानी- क्योंकि प्रतियोगिता में जिस तरह से आप प्यार के खिलाफ बोल रहे थे, उससे लगा कि आपको प्यार से बहुत नफरत है, मैं उस नफरत को शायद मिटा तो नहीं सकती पर कुछ कम जरूर कर सकती हूं।
विवान- मुझे कोई जरूरत नहीं है।
सुहानी- जरूरत है, ताकि आपके व्यवहार में कुछ परिवर्तन आए। आप जैसे पहले थे वैसे ही रहे।
विवान- नहीं।
सुहानी- स्वाती का जाने का मतलब यह नहीं है कि आप दुनियां के लिए बुरे हो जाए।
विवान- देखिए आप मेरे बारे में बहुत कम जानती है। इसलिए आप मुझे मेरे हाल पर ही छोड़ दीजिए।
सुहानी- नहीं मैंने तय किया है कि मैं आपको बदलकर रहूंगी।
सुहानी की इस बात को सुनकर विवान अचानक से गुस्से में तेज चिल्लाता है।
विवान- क्या बदलोगी, और क्यों बदलोगी। तुम भी तो एक लड़की ही हो ना। तुम कुछ नहीं बदल सकती। इसलिए जाओ यहां।
विवान के इस व्यवहार को देखकर सुहानी कुछ देर के लिए डर जाती है और फिर से खुद को संभालती है।
सुहानी- अगर आप मेरी बात सुनेंगे तो जरूर बदल सकती हूं।
विवान- क्या बदलना चाहती हो आप?
सुहानी- बस इतना ही कि आप जैसे पहले थे, वैसे ही हो जाए। आपके दिल में प्यार के लिए जो नफरत है वो खत्म हो जाए।
विवान- वो कभी नहीं होगी।
सुहानी- होगी, जरूर होगी, आप कोशिश तो कीजिए।
विवान- कोशिश, कोशिश करूं..... चलिए मैं कोशिश करता हूं। एक कोशिश आप करेगी मेरे लिए।
सुहानी- अगर मैं आपकी किसी भी तरह से मदद कर पाउं तो मुझे खुशी होगी।
विवान- आपका कहना है कि आप मुझे बदलना चाहती है। मैं जैसा पहले था, आप चाहती है कि मैं पहले जैसा ही हो जाउं। अब आप मेरी बात बहुत ध्यान से सुनिए।
सुहानी- आप बोलते रहिए मैं सुन रही हूं।
विवान- प्यार एक ऐसा अहसास और एक ऐसा रिश्ता है, जो दो अंजान लोगों को एक कर देता है। पैदा होने वाला बच्चा अपने पूरे परिवार से अंजान होता है, परंतु जब उसे उन्हीं लोगों से प्यार मिलता है तो उका एक रिश्ता मजबूत होता चला जाता है। प्यार के कई रूप है, उनमें से एक रूप में प्रेमी-प्रेमिका भी है। आज रिश्ते के प्रेम में एक अनदेखी सी शर्त लागू होने लगी है। कि ऐसा होगा तो हमाररा प्यार बना रहेगा, वैसा होगा तो हम साथ रह सकेंगे। जबकि प्यार और उसका अहसास किसी भी शर्त को नहीं मानता। पर इंसान उस अहसास के बीच में ऐसी शर्तों को लाकर न सिर्फ उस अहसास को कुचल देता है, बल्कि प्यार और उस रिश्ते का भी खून कर देता है।
ऐसे बोलते हुए विवान कुछ देर के लिए चुप हो जाता है। सुहानी अब भी लगातार उसकी ओर देख रही थी। वह एक बार पलटता है और सुहानी को देखता है और फिर से बोलना शुरू करता है।
विवान- मेरे घर के लोग, मेरे दोस्त सभी समझते हैं कि उस एक्सीडेंट में स्वाती की मौत हो गई थी, ऐसी खबर उन्होंने मुझे दी थी और मैंने उनकी बात को मान लिया था। पर यह सही नहीं हैं। एक समय तक मैं इसे सच मानकर कुछ समय के लिए उदास हो गया था। फि र मैंने सोचा जो होना था हो गया, इसलिए अब फिर से मुण्े अपनी जिंदगी शुरूआत करना है। इसके लिए मैं कुछ दिनों के घूमने के लिए बाहर चला गया था। कई जगहों पर अकेले ही घूमता हरां घूमते हुए एक दिन नागपुर पहुंच गया। वहां एक शाम को मार्केट में घूम रहा था, तभी मेरी नजर स्वाती पर गई। मैंने सोचा स्वाती कैसे हो सकती है, उसकी तो मौत हो चुकी है। पर जब मैंने कुछ देर तक उसे फॉलो किया तो पता चला कि स्वाती मरी नहीं थी, वह मेरी स्वाती ही थी। कुछ देर के लिए मेरा दिमाग सुन्न हो गया था। मैं कुछ सोच ही नहीं पा रहा था। मैंने उसका पीछा किया और उसके घर का पता लगाया। फिर जब दिन के समय उसके घर पर कोई नहीं था, तो मैं उससे मिलने के लिए उसके घर पहुंच गया।
सुहानी- फिर उसने क्या बोला?
विवान- उसने मुझे देखा तो वो बहुत ही सामान्य थी। मैंने उससे मुझे छोड़ने कारण पूछा तो उसका कहना था कि एक्सीडेंट के बाद उसे बताया गया था कि मेरे पैर बेकार हो गए हैं, और अब मैं कभी नहीं चल पाउंगा। इस कारण वो एक अपाहिज के साथ अपनी जिंदगी नहीं बीता सकती थी। इसलिए उसने मुझे और मेरे शहर को हमेशा के लिए छोड़ दिया और अविनाश से शादी कर ली और अब वह बहुत खुश भी है। मैंने उससे कहा कि कम से कम एक बार वो मुझसे मिलती तो मैं सब ठीक कर देता। तो उसने कहा कि एक अपाहिज जो खुद अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता वो जिंदगी और उसकी परेशानियों उसकी समस्याओं को कैसे ठीक करेगा। और वैसे भी तुम्हारे ना पैसा है, ना अच्छी नौकरी, तुम मुझे दे भी क्या सकते थे?
इतना कहते हुए विवान की आंखों में आंसू आ जाते हैं और वह वहीं बैठ जाता है। विवान की आंखों में आंसू देखकर सुहानी उसे सांत्वना देने के लिए उसके कंधे पर हाथ रखती है। विवान उसे देखता है और फिर से बोलना शुरू करता है।








































