बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार पार्ट 3  Immense hate and true love part 3

बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार  

पार्ट 3



बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 1 यहां पढ़े 

सुहानी अब भी उसे देख रही थी। तभी विवान की नजर सुहानी पर पड़ती है और वह सुहानी की ओर आता है। सुहानी हालांकि कुछ सकुचाती है, पर फिर नॉमर्ल हो जाती है। 
विवान- आप यहां क्या कर रही है? 
सुहानी- आपसे बात करने के लिए ही आई थी। 
विवान- पर मैं आपसे कोई बात नहीं करना चाहता हूं। 
सुहानी- हां, जानती हूं, आप लड़कियों से कम ही बात करते हैं। 
विवान- जब पता है तो आप यहां क्यों आईं हैं? 
सुहानी- क्योंकि मुझे आपसे बात करना है। 
विवान- क्या बात करना है? 
सुहानी- आप ऐसे क्यों हैं? मैंने तो सुना है आप पहले बहुत अच्छे थे। सभी से आपकी दोस्ती थी। 
विवान- वो बहुत पुरानी बात है। अब मैं वैसा नहीं हूं। और कुछ ?
सुहानी- देखिए अगर एक व्यक्ति आपके साथ गलत करता है तो इसका मतलब यह तो नहीं कि सभी आपके साथ गलत करेंगे। 
विवान- देखिए आप अपनी समझ अपने पास रखिए और मुझे मेरे हाल पर छोड़ दीजिए। 
सुहानी- देखिए आप किसी और की गलती की सजा किसी को दे रहे हैं, जो सही नहीं है। 
विवान- क्या सही है और क्या गलत ये मुझे तय करना है।
सुहानी- पर आपके इस व्यवहार से कोई हर्ट हो सकता है। 
विवान- होता है तो होता रहे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। 
सुहानी- पर आपको फर्क पड़ना चाहिए। क्योंकि आपको किसी ने हर्ट किया है तो आप कितने दुखी रहते हैं, अपने में ही खोए रहते हैं। जो आपको बुरा लगा है, वहीं आप दूसरों को दे रहे हैं। 
विवान- देखिए मैं आपसे कह चुका हूं कि आप अपनी समझ अपने पास रखिए मुझे क्या करना है वो मुझे अच्छे पता है। 
सुहानी- नहीं पता है, इसलिए तो बताने आई हूं। 
विवान- मैंने आपसे कोई मदद नहीं मांगी है, इसलिए मेहरबानी करके आप यहां से जा सकती हैं। 
सुहानी- मैं अपनी बात पूरी करके ही जाउंगी। 
विवान- तो आप अपनी बात पूरी करें, मैं यहां से चला जाता हूं। 
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 2 यहां पढ़े 

इतना कहकर विवान वहां से चला जाता है। सुहानी उसे एकटक देखती रहती है और उसके बारे में ही सोचती रहती है। वह मन ही मन तय करती है कि वह विवान को बदलकर रहेगी। इसके बाद सुहानी भी कॉलेज आ जाती है। यहां आकर वह कुछ और लोगों से भी विवान के बारे में बात करती है। उसे पता चलता है कि एक समय विवान कॉलेज का हीरो था। वह सबकी हर संभव मदद करता था। वह कॉलेज का चुनाव भी लड़ा था। पर अचानक पता नहीं क्या हुआ कि वह इतना बदल गया है। एक समय तक तो उसके दोस्तों में लड़के और लड़कियां दोनों होते थे। पर उसका व्यवहार लड़कियों के लिए बिल्कुल ही बदल गया है। सुहानी सभी की बातों को सुनती है और फिर शाम होने पर अपने घर के लिए निकल जाती है। वह घर पर भी विवान के बारे में ही सोच रही थी। अगले दिन वह फिॅर कॉलेज जाती है और इस बार सीधे वह तालाब पर पहुंच जाती है, जहां विवान पहले से अकेला बैठा हुआ था। इस बार सुहानी सीधे उसके पास पहुंच जाती है। विवान उसे देखता है और उठकर जाने लगता है। 
सुहानी- रूकिए, मुझे आपसे कुछ बातें करना है। 
विवान- पर मुझे आपसे कोई बात नहीं करना है। मैंने आपसे कल भी कहा था कि आप अपनी समझ अपने पास रखिए, मुझे क्या करना है वह मुझे पता है। 
सुहानी- देखिए स्वाती तो अब आपकी जिंदगी में आ नहीं सकती तो आप क्यों अपने आप में घुट रहे हैं?
स्वाती का नाम सुनकर विवान अचानक से चौंक जाता है। उसकी आंखों के सामने एक फिल्म की तरह उसकी पिछली जिंदगी उसकी आंखों के सामने घूम जाती है। 
विवान- आप स्वाती को कैसे जानती हैं? 
सुहानी- जानती नहीं हूं, बस कॉलेज में जब आपके बारे में पता किया तो उसका नाम भी सामने आया। 
विवान- ओह तो अब आप मेरी जासूसी कर रही है? 
सुहानी- जासूसी नहीं। बस आपके बारे में पता किया। 
विवान- जान सकता हूं क्यों? 

सुहानी- क्योंकि प्रतियोगिता में जिस तरह से आप प्यार के खिलाफ बोल रहे थे, उससे लगा कि आपको प्यार से बहुत नफरत है, मैं उस नफरत को शायद मिटा तो नहीं सकती पर कुछ कम जरूर कर सकती हूं। 
विवान- मुझे कोई जरूरत नहीं है। 
सुहानी- जरूरत है, ताकि आपके व्यवहार में कुछ परिवर्तन आए। आप जैसे पहले थे वैसे ही रहे। 
विवान- नहीं। 
सुहानी- स्वाती का जाने का मतलब यह नहीं है कि आप दुनियां के लिए बुरे हो जाए। 
विवान- देखिए आप मेरे बारे में बहुत कम जानती है। इसलिए आप मुझे मेरे हाल पर ही छोड़ दीजिए। 
सुहानी- नहीं मैंने तय किया है कि मैं आपको बदलकर रहूंगी। 
सुहानी की इस बात को सुनकर विवान अचानक से गुस्से में तेज चिल्लाता है। 
विवान- क्या बदलोगी, और क्यों बदलोगी। तुम भी तो एक लड़की ही हो ना। तुम कुछ नहीं बदल सकती। इसलिए जाओ यहां। 
विवान के इस व्यवहार को देखकर सुहानी कुछ देर के लिए डर जाती है और फिर से खुद को संभालती है। 
सुहानी- अगर आप मेरी बात सुनेंगे तो जरूर बदल सकती हूं। 
विवान- क्या बदलना चाहती हो आप? 
सुहानी- बस इतना ही कि आप जैसे पहले थे, वैसे ही हो जाए। आपके दिल में प्यार के लिए जो नफरत है वो खत्म हो जाए। 
विवान- वो कभी नहीं होगी। 
सुहानी- होगी, जरूर होगी, आप कोशिश तो कीजिए। 
विवान- कोशिश, कोशिश करूं..... चलिए मैं कोशिश करता हूं। एक कोशिश आप करेगी मेरे लिए। 
सुहानी- अगर मैं आपकी किसी भी तरह से मदद कर पाउं तो मुझे खुशी होगी। 
विवान- आपका कहना है कि आप मुझे बदलना चाहती है। मैं जैसा पहले था, आप चाहती है कि मैं पहले जैसा ही हो जाउं। अब आप मेरी बात बहुत ध्यान से सुनिए। 
सुहानी- आप बोलते रहिए मैं सुन रही हूं। 

विवान- प्यार एक ऐसा अहसास और एक ऐसा रिश्ता है, जो दो अंजान लोगों को एक कर देता है। पैदा होने वाला बच्चा अपने पूरे परिवार से अंजान होता है, परंतु जब उसे उन्हीं लोगों से प्यार मिलता है तो उका एक रिश्ता मजबूत होता चला जाता है। प्यार के कई रूप है, उनमें से एक रूप में प्रेमी-प्रेमिका भी है। आज रिश्ते के प्रेम में एक अनदेखी सी शर्त लागू होने लगी है। कि ऐसा होगा तो हमाररा प्यार बना रहेगा, वैसा होगा तो हम साथ रह सकेंगे। जबकि प्यार और उसका अहसास किसी भी शर्त को नहीं मानता। पर इंसान उस अहसास के बीच में ऐसी शर्तों को लाकर न सिर्फ उस अहसास को कुचल देता है, बल्कि प्यार और उस रिश्ते का भी खून कर देता है। 
ऐसे बोलते हुए विवान कुछ देर के लिए चुप हो जाता है। सुहानी अब भी लगातार उसकी ओर देख रही थी। वह एक बार पलटता है और सुहानी को देखता है और फिर से बोलना शुरू करता है। 
विवान- मेरे घर के लोग, मेरे दोस्त सभी समझते हैं कि उस एक्सीडेंट में स्वाती की मौत हो गई थी, ऐसी खबर उन्होंने मुझे दी थी और मैंने उनकी बात को मान लिया था। पर यह सही नहीं हैं। एक समय तक मैं इसे सच मानकर कुछ समय के लिए उदास हो गया था। फि र मैंने सोचा जो होना था हो गया, इसलिए अब फिर से मुण्े अपनी जिंदगी शुरूआत करना है। इसके लिए मैं कुछ दिनों के घूमने के लिए बाहर चला गया था। कई जगहों पर अकेले ही घूमता हरां घूमते हुए एक दिन नागपुर पहुंच गया। वहां एक शाम को मार्केट में घूम रहा था, तभी मेरी नजर स्वाती पर गई। मैंने सोचा स्वाती कैसे हो सकती है, उसकी तो मौत हो चुकी है। पर जब मैंने कुछ देर तक उसे फॉलो किया तो पता चला कि स्वाती मरी नहीं थी, वह मेरी स्वाती ही थी। कुछ देर के लिए मेरा दिमाग सुन्न हो गया था। मैं कुछ सोच ही नहीं पा रहा था। मैंने उसका पीछा किया और उसके घर का पता लगाया। फिर जब दिन के समय उसके घर पर कोई नहीं था, तो मैं उससे मिलने के लिए उसके घर पहुंच गया। 
सुहानी- फिर उसने क्या बोला? 
विवान- उसने मुझे देखा तो वो बहुत ही सामान्य थी। मैंने उससे मुझे छोड़ने कारण पूछा तो उसका कहना था कि एक्सीडेंट के बाद उसे बताया गया था कि मेरे पैर बेकार हो गए हैं, और अब मैं कभी नहीं चल पाउंगा। इस कारण वो एक अपाहिज के साथ अपनी जिंदगी नहीं बीता सकती थी। इसलिए उसने मुझे और मेरे शहर को हमेशा के लिए छोड़ दिया और अविनाश से शादी कर ली और अब वह बहुत खुश भी है। मैंने उससे कहा कि कम से कम एक बार वो मुझसे मिलती तो मैं सब ठीक कर देता। तो उसने कहा कि एक अपाहिज जो खुद अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता वो जिंदगी और उसकी परेशानियों उसकी समस्याओं को कैसे ठीक करेगा। और वैसे भी तुम्हारे ना पैसा है, ना अच्छी नौकरी, तुम मुझे दे भी क्या सकते थे? 
इतना कहते हुए विवान की आंखों में आंसू आ जाते हैं और वह वहीं बैठ जाता है। विवान की आंखों में आंसू देखकर सुहानी उसे सांत्वना देने के लिए उसके कंधे पर हाथ रखती है। विवान उसे देखता है और फिर से बोलना शुरू करता है। 


 बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार   पार्ट 2  Immense hate and true love part 2

बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार  

पार्ट 2


प्रोग्राम खत्म होने के बाद विवान जहां अपने दोस्तों के साथ घर जाने के लिए तैयारी कर रहा था, वहीं सुहानी भी अपनी कुछ सहेलियों के साथ कॉलेज कैंपस से बाहर आती है। उसकी नजर विवान पर पड़ती है और वह विवान से बात करने के लिए उसकी ओर चल पड़ती है। वह विवान के पास पहुंचकर उसे हैलो कहती है। विवान सिर्फ हां में सिर हिला देता है। इसके बाद उसके दोस्त वहां से चले जाते हैं। विवान भी उनके पीछे जाने लगता है तो सुहानी हाथ बढ़ाकर उसे जीत की बधाई देती है।
सुहानी- आपको जीत के लिए बधाई। आपने बहुत अच्छा बोला। 
विवान- थैक्स पर मैं इसे अपनी जीत नहीं कहूंगा। आप भी जीते है। या यूं कहूं कि प्रतियोगिता को बीच में ही छोड़ दिया गया। मेरे लिए ऐसी जीत कोई मायने नहीं रखती। 
सुहानी- हां एक तरह से आप सही है, पर सब्जेक्ट ऐसा था कि जिस पर ज्यादा बहस की भी नहीं जा सकती थी। 
विवान- ऐसा आपका मानना है, मेरा नहीं। यदि प्रतियोगिता पूरी होती तो आपको हार मिलती और मुझे जीत। 
सुहानी- आप अब भी गुस्से में लग रहे हैं? 
विवान- जी, नहीं मैं ऐसा ही हूं। 
सुहानी- जी, नहीं, मैंने देखा आप अपने दोस्तों के साथ इस तरह से बात नहीं करते हैं, उनसे तो बहुत अच्छे से पेश आते हैं। 
विवान- आपको जो समझना है समझिए। मुझे देर हो रही है, मैं चलता हूं। 
सुहानी- ओके, अगर देर हो रही है तो मैं आपको नहीं रोकूंगी, पर हम क्या दोबारा मिल सकते हैं?
विवान- जी, नहीं। मुझे आपसे बात करने में कोई रूचि नहीं है।
सुहानी- ओह, आप किसी से खफा है, और शायद उसका गुस्सा मुझ पर उतार रहे है? 
विवान- आपको जो भी समझना है समझिए मैं जा रहा हूं। 
इतना कहने के बाद विवान वहां से चला जाता है औ सुहानी वहीं खड़े होकर उसे देखती रहती है। तभी उसकी सहेलियां भी पीछे से उसके पास आ जाती है। 
नंदिनी- अरे तू उस खडूस के साथ क्या बात कर रही थी?
स्नेहा- उससे तो बात करना ही बेकार है। हमेशा मुंह चढ़ाकर घूमता रहता है। 
सुहानी- ऐसा नहीं है। जरूर कोई बात है, जिससे कारण वह ऐसा रहता है। 
नंदिनी- हां, पर उसे उसके हाल पर रहने दे। तू ज्यादा उससे बात मत कर। सुहानी- अच्छा ठीक है। चल अब घर चलते हैं। 

इसके बाद सभी अपने-अपने घर के लिए चली जाती है। घर पहुंचने के बाद भी सुहानी विवान के बारे में ही सोच रही थी। वह सोच रही थी कि उसका व्यवहार लड़कियों के साथ अलग और अपने दोस्तों के साथ अलग रहता है। वह हमेशा उस तरह से नहीं रहता है, जिस तरह से वह उससे बात कर रहा था। प्रतियोगिता में जीतने के बाद वह अपने दोस्तों के साथ काफी खुश लग रहा था। पर जब उसने बात की तो वह कुछ उखड़ गया था। अब सुहानी विवान की पिछली जिंदगी के बारे में जानने के लिए उत्सुक थी। अगले दिन वह फिर कॉलेज पहुंचती है और उसकी आंखे विवान को ही खोज रही थी। वह विवान से बात करना चाह रही थी। तभी उसे विवान का सबसे अच्छा दोस्त अनुराग नजर आता है और वह अनुराग के पास जाती है। 
सुहानी- हैलो अनुराग। 
अनुराग- ओ, सुहानी हैलो। कैसी हो? कल की जीत के लिए बधाई। 
सुहानी- थैंक्स अनुराग। 
अनुराग- बताओ कुछ काम था क्या? 
सुहानी- हां, काम तो था। 
अनुराग- तो बोलो। 
सुहानी- तुम्हारा दोस्त विवान नजर नहीं आ रहा? वो कहां है आज? 
अनुराग- और कहां होगा, वहीं बैठा होगा तालाब के किनारे। 
सुहानी- तालाब के किनारे? 
अनुराग- हां, जो अपने कॉलेज के पीछे हैं। आजकल वो कॉलेज में कम और तालाब के किनारे वक्त ज्यादा बिताता है। 
सुहानी- ऐसा क्यों? 
अनुराग- अरे अब क्या बताउं सुहानी। बस उसके साथ कुछ भी ठीक नहीं हुआ है। 
सुहानी- मतलब? 
अनुराग- सुहानी तुम अच्छी लड़की हो, इसलिए तुम्हें एक राय देना चाहता हूं। तुम विवान से जितना हो सके उतना ही दूर रहो। क्योंकि वो बहुत रूड है और तुम्हें कभी भी कुछ भी कह सकता है, जो शायद तुम्हें अच्छा ना लगे। 

सुहानी- पर अनुराग.... मैं तो....
अनुराग- सुहानी मेरी बात मान लो, मैं तुम्हारे भले के लिए कह रहा हूं। 
सुहानी- ठीक है अनुराग। वैसे भी मेरी क्लास का समय हो रहा है, इसलिए अब मैं चलती हूं। 
इसके बाद सुहानी अपनी क्लास में चली जाती है। क्लास अटेंड करने के बाद वह फिर से फ्री होती है तो वह कॉलेज के पीछे की ओर बने तालाब की ओर चल पड़ती है। अनुराग के कहे अनुसार जहां विवान अक्सर होता है। सुहानी जब वहां पहुंचती है तो देखती है कि विवान वहां तालाब के किनारे बैठा है। वह कभी तालाब में पत्थर फेंक रहा था, तो कभी आसामान की ओर। कभी एकदम से शांत बैठ जाता था। तो कभी उठकर इधर-उधर चहल कदमी करने लग जाता था। उसे देखने पर ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बहुत बेचैन है और अपने आप ही कुछ सह रहा है। 
सुहानी उसके पास जाने का सोचती है पर उसे अनुराग की बात याद आ जाती है तो वह वापस कॉलेज लौट जाती है। कॉलेज में वह अपनी एक ओर सहेली से बात करने लगती है। 
सुहानी- हैलो विशाखा।
विशाखा- हैलो सुहानी। 
सुहानी- विशाखा मुझे तुमसे कुछ बात करना है। 
विशाखा- हां, बोलो क्या बात है सुहानी। 
सुहानी- तुम इस कॉलेज में बहुत समय से हो। मुझे तो अभी एक साल ही हुआ है। तो मुझे किसी के बारे में कुछ जानना था। 
विशाखा- किस के बारे सुहानी? 
सुहानी- विवान। 
विशाखा- अरे वो पागल, उसके बारे में क्या जानना है सुहानी। वो तो पूरा पागल है। 
सुहानी- फिर भी जो तुम्हें पता हो प्लीज मुझे बताओ। 
विशाखा- ठीक है सुहानी। वैसे मुझे बहुत ज्यादा तो नहीं पता है पर जितना पता है उतना तुम्हें बता देती हूं। और एक बात और मैंने जितना सुना है बस मैं उतना ही जानती हूं। 
सुहानी- ओके विशाखा। जितना तुम्हें पता है उतना ही बता दो। 

विशाखा सुहानी को बताती है कि विवान एक मीडिल क्लास फैमिली से बिलॉंग करता है। उसके पापा का एक छोटा बिजनेस है और मां घर पर ही रहती है। उसकी एक बड़ी बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है। उसकी और उसके पापा की कभी नहीं बनी है। पर वो अपनी मां लाड़ला है। सुना है उसे किसी लड़की से प्यार हो गया था। वह उससे शादी करना चाहता था पर उसके पापा ने मना कर दिया। एक दिन वो लड़की और विवान कहीं घूमने के लिए गए थे, तभी एक एक्सीडेंट हो गया और उसमें उस लड़की की मौत हो गई। विवान भी उस एक्सीडेट के बाद करीब 2 साल तक कॉलेज नहीं आया। इसी साल उसने फिर से कॉलेज ज्वॉइन किया है। घर से और अपनी लव लाइफ से वह हमेशा ही दुखी रहा है। सुना है कि उसकी बहन भी अब उससे बात नहीं करती है और वह अपनी मां के सामने हमेशा खुश रहता है ताकि उसकी मां उसे देखकर दुखी न हो। एक्सीडेंट के पहले तो वह सभी से बहुत अच्छे से बात करता था, पर एक्सीडेंट के बाद पता नहीं क्या हुआ कि लड़कियों से तो खासकर वह बात ही नहीं करता और यदि कोई लड़की उससे बात भी करें तो बहुत ही रूड होकर बात करता है। इतना कहने के बाद विशाख भी वहां से चली जाती है। विशाख की बात सुनकर सुहानी एक बार फिर उसी तालाब के पास पहुंच जाती है। वह दूर खड़े होकर विवान को देखती रहती है। विवान पहले की तरह घूम रहा था। 

 बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार   पार्ट 1 Immense hate and true love part 1

         बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार  

पार्ट 1


विवान के लिए तो आज का दिन भी हमेशा की तरह से सामान्य दिन ही था, पर उसके कॉलेज में आज एक अलग ही माहौल था। कॉलेज में फेरयरवेल पार्टी के साथ कुछ रोचक प्रतियोगिताएं भी होने वाली थी। विवान के दोस्त चाहते थे कि वह भी किसी प्रतियोगिता में भाग ले और उस प्रतियोगिता का विजेता बनकर ही लौटे। दोस्तों के कहने पर वह प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए तैयार हो जाता है। कॉलेज में बड़े से मंच पर कार्यक्रम की शुरूआत होती है और धीरे-धीरे कार्यक्रम आगे बढ़ता जाता है। विवान के दोस्तों को अब इंतजार था वाद-विवाद प्रतियोगिता का, जिसमें विवान भाग ले रहा था। विवान एक तरह से कॉलेज का हीरो था। पढ़ाई से लेकर स्पोर्टस, कल्चरल एक्टिविटी या कॉलेज कैंपस में होने वाली किसी भी गतिविधि में वो हमेशा एक्टिव रहता था। इस कारण ही सभी दोस्तों को उम्मीद थी कि विवान ही जीतेगा। फिर वो वक्त आ गया जब वाद-विवाद प्रतियोगिता के विवान का नाम पुकारा गया। विवान मंच पर पहुंच जाता है। तभी एक ओर नाम पुकारा जाता है सुहानी। मंच पर खड़े प्रोफेसर बताते हैं कि संयोग से इस प्रतियोगिता में केवल दो ही नाम सामने आए हैं। एक विवान और दुसरा नाम सुहानी का है। प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार यहां कुछ पर्ची है, जिन पर वाद-विवाद के विषय लिखे हुए हैं, कोई पर्ची निकाली जाएगी और उस पर ही इन दोनों को वाद-विवाद करना हैं। कॉलेज की प्रिसिंपल पर्ची निकालती हैं और सब्जेक्ट बताई है प्यार यानि कि लव। 

विवान और सुहानी दोनों एक-दूसरे को देखते है और फिर अपनी जगह पर जाकर खड़े हो जाते हैं। सुहानी कहती है कि वह प्यार के पक्ष में बोलेगी और विवान प्यार के विपक्ष में बोलने के लिए तैयार हो जाता है। 
सुहानी- प्यार पर बोलने के लिए इतना कुछ है कि शायद अल्फाज भी कम पड़ जाए। कहते भी है कि प्यार को कभी शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। ये एक ऐसी अनुभूति है जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। प्यार से दुनियां खूबसूरत सी लगने लगती है, दिल गुनगुनाने लगता है और दुनियां के सभी रंग और भी खिलकर हमारी आंखों को सुकुन देते हैं। प्यार में इतनी ताकत होती है कि वह किसी भी इंसान को बदल दे। किसी भी इंसान के जीवन में जब प्यार आ जाता है तो वह न सिर्फ केयरिंग हो जाता है, बल्कि उसके अंदर एक जिम्मेदारी भी आ जाती है। वह दूसरों की इच्छाओं का सम्मान करने लग जाता है। वह दूसरों के लिए जीना सीख जाता है। वह खुद के साथ ही हर उस व्यक्ति की परवाह करने लग जाता है, जिससे वह प्यार करता है। 
विवान- मेरा मानना है कि प्यार जैसा कुछ इस दुनियां में होता ही नहीं। प्यार जैसा एक शब्द बनाकर दो मीठे शब्द बोलकर अपना मतलब निकालना ही प्यार है। सुहानी जी कि एक बात से इत्तेफाक रखता हूं कि प्यार किसी भी इंसान को बदल सकता है। पर जैसा सुहानी जी ने कहा उस तरह से नहीं। प्यार जो कि मेरी नजर में कोई अस्तित्व ही नहीं रखता है, उसके नाम पर किसी भी इंसान को खत्म किया जा सकता है। उसकी जिंदगी की खुशियां उससे छीनी जा सकती है। उसकी हंसी उससे छिनी जा सकती है। उससे उसकी भावनाओं से इस शब्द के नाम खिलवाड़ किया जा सकता है। और सबसे बड़ी बात यह कि इस शब्द दिखावा मात्र करके उसका फायदा उठाया जा सकता है। 


सुहानी- जो प्यार को एक बाद महसूस कर लेते हैं, वे उसे कभी दिखावे का नाम नहीं देते। प्यार के मायने रिश्तों के अनुसार बदलते जाते हैं। रिश्ता कोई भी प्यार हमेशा जिंदगी अहमियत रखता है। दोस्तों में भी प्यार होता है। एक प्रेमी अपनी प्रेमिका से और एक प्रेमिका अपने प्रेमी से प्यार करती है। माता-पिता अपने बच्चों से और बच्चे अपने माता-पिता से प्यार करते हैं। हर रिश्ता कहीं न कहीं प्यार के धागे से बंधा होता है। 
विवान- प्यार हो तो उसे महसूस किया जाए। अगर प्यार से हर रिश्ता बंधा होता है तो क्या सुहानी जी मुझे ये बताएगी कि क्यों बुजुर्ग माता-पिता वृद्धाश्रम में छोड़ दिए जाते है? क्यों कई बच्चे पैदा होते ही अनाथालय पहुंचा दिए जाते है? क्यों रक्षाबंधन के दिन किसी भाई की कलाई सुनी रह जाती है, क्यों कोई बहन अपने भाई की राह तकती रह जाती है। क्यों कोई लड़की अपने प्रेमी को छोड़कर किसी ओर से शादी करने के लिए चली जाती है और क्यों कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका को छोड़कर अपना प्यार किसी ओर में तलाश करने लग जाता है। 
सुहानी- यह सब होता है पर हर किसी के साथ नहीं होता है। अगर ऐसा होता तो आज घर कम और अनाथालय और वृद्धाश्रम ज्यादा होते। लव मैरिज जैसा कोई शब्द आज प्रचलित नहीं होता।
विवान- अगर लव मैरिज जैसा शब्द भी प्रचलित है तो क्यों वहीं लव मैरिज तलाक के रूप में बदल जाती है। शादी के बाद उनका प्यार अचानक कहां गायब हो जाता है, जो कि शादी के पहले तक एक-दूसरे के बिना मर जाने की बात किया करते थे? 
इस बीच एक बार फिर कॉलेज की प्रिंसिपल खड़ी होती है और वह प्रतियोगिता में सुहानी और विवान दोनों को ही विजेता घोषित करते हुए प्रतियोगिता समाप्त करती है। प्रिंसिपल यानि कि मेडम रिचा कहती है कि प्यार एक ऐसा शब्द है, जिस पर हर इंसान अपनी एक सोच और एक मानसिकता रखता है। इस कारण इस विषय पर ज्यादा बहस नहीं होना चाहिए, इस कारण मैं विवान और सुहानी दोनों को संयुक्त रूप से इस प्रतियोगिता का विजेता घोषित करती हूं। 


एक ओर जहां विवान के दोस्त विवान की जीत का जश्न मना रहे है, वहीं दूसरी ओर सुहानी की सहेलियां भी उसे जीत की बधाई दे रही है। सुहानी की नजरें विवान पर ही टिकी है, वहीं विवान ने एक बार भी पलटकर सुहानी को नहीं देखा था। हालांकि दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं और फिर भी यह उन दोनों की पहली मुलाकात ही थी। जैसे विवान अपने कॉलेज में एक्टिव है, उसी तरह से सुहानी भी एक्टिव है। बस आज तक दोनों कभी आमने-सामने नहीं आ पाए थे। आज एक प्रतियोगिता के कारण दोनों का आमना-सामना हुआ है। विवाद की पढ़ाई में ब्रेक भी लग गया था, उसके बाद उसने दोबार से अपनी पढ़ाई शुरू की है। एक ओर जहां विवाद अब गंभीर व्यक्तित्व रखता है, वहीं सुहानी कुछ चंचल है और हमेशा खुश रहने वाली लड़की है। ऐसा कह सकते हैं कि विवान और सुहानी फिलहाल तो एक-दूसरे के विपरीत व्यक्तित्व वाले लोग है।  
एक ही सुराग  Final part

एक ही सुराग 

Final part




इस तरह बात करते हुए दोनों एक बार फिर से ऑफिस के बाहर निकल जाते हैं और भौमिक के परमार अलग-अलग स्थानों पर जाकर कुछ पड़ताल करने लग जाते हैं। ऐसे ही वक्त बीतता है और 15 अगस्त का दिन भी आ जाता है। जैसे कि पहले ही भौमिक ने चैलेंजर की पहेली का हल खेज लिया था उसके अनुसार प्रफुल्ल जो कि राजनीति में उतरने की तैयारी कर रहा था आज एक सभा को संबोधित करने के लिए शहर के शहीद स्थल पर आया था। यहां काफी लोगों की भीड़ जमा थी। चूंकि शहर में प्रफुल्ल का काफी नाम था, इस कारण वहां कई लोग उसे सुनने के लिए भी आए थे। आज यह भी पता चलने वाला था कि प्रफुल्ल किसी पार्टी में शामिल होगा। पिछले कुछ दिनों से शहर में प्रफुल्ल के किस पार्टी में शामिल होने को लेकर खासी चर्चा भी थी। सभा स्थल पर प्रफुल्ल आने ही वाला था और लोग उसका इंतजार कर रहे थे। कुछ ही देर में प्रफुल्ल वहां पहुंच जाता है और वहां बने बड़े से मंच पर पहुंचकर सभी का अभिवादन करता है। इतनी भीड़ होने के कारण वहां पुलिस का भी इंतजाम किया गया था। भौमिक और परमार भी वहां मौजूद थे। इतनी भीड़ के बाद भी भौमिक की नजर सिर्फ प्रफुल्ल पर ही थी। प्रफुल्ल भी मंच से भौमिक को देखता है और एक मुस्कान अपने चेहरे पर लेकर आता है। भौमिक की आंखे अचानक ही चमक जाती है, वह भी एक बार मुस्कुराता है और फिर उसका चेहरा सख्त हो जाता है। सभा शुरू होती है और फिर कुछ ही देर बाद प्रफुल्ल माइक की ओर आगे आता है। तभी मंच से कुछ दूर एक जोरदार धमाका होता है और वहां अफरा-तफरी मच जाती हैं। लोग इधर-उधर भागना शुरू कर देते हैं। मंच पर भी अफरा-तफरी होती है। पुलिस भीड़ को कंट््रोल करने में लग जाती है और भौमिक और परमार उस ओर दौड़ लगा देते हैं, जिस ओर धमाका हुआ था। करीब आधे घंटे में ही मैदान पूरी तरह से खाली हो जाता है। वहां की सारी व्यवस्था करने के बाद भौमिक और परमार वहां से अपने ऑफिस के लिए निकलते हैं। दोनों जैसे ही कार के पास पहुंचते हैं, कार में जिस सीट पर भौमिक बैठता है उस सीट पर एक लेटर उसे मिलता है। वह उसे जेब में रखता है और फिर सीधे ऑफिस पहुंच जाता है। शहर में एक सभा के दौरान अचानक हुए धमाके के कारण वह काफी गुस्से भी नजर आ रहा था। वह अब जेब से लेटर निकालकर पढ़ता है।

डियर एसीपी,
मुझे अफसोस है कि तुम्हारा एक महीने का समय पूरा हो गया और तुम मेरे बारे में कोई जानकारी नहीं जुटा सके और न ही मुझे पकड़ सके हो। वैसे मुझे यकीन है कि तुम जब ये लेटर पढ़ रहे हो तो शायद तुम्हें पता भी नहीं है कि शहीद स्थल पर हुआ क्या है? तुम्हें शायद अब तक यह लग रहा है कि वहां उस सभा को फेल करने के लिए एक धमाका किया गया है। पूरी मीडिया भी अब तक यही कहानी कह रही है, पर कुछ ही देर में न्यूज बदलने वाली है। और वो न्यूज क्या होना चाहिए कुछ अंदाजा लगा सकते हो। वैसे तो तुम पहले ही अंदाजा लगा चुके थे। हां, बिल्कुल सही सोचा तुमने एसीपी। प्रफुल्ल सहाय गायब है। मैंने अपना काम कर दिया ह ैअब तुम्हारी बारी है। वैसे मुझे उसकी बहुत ज्यादा जरूरत तो नहीं है, पर फिर भी तुम्हारे लिए मैं उसे दो दिन तक जिंदा रख सकता हूं। तुम चाहो तो उसे मुझसे बचा लो। ये मेरा आखिरी खत है, अब तुम मुझ तक कैसे पहुंचोगे यह अब तुम ही सोचना। मेरा काम हो गया है और अब मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा सिर्फ दो दिन के लिए। अगर आ गए तो प्रफुल्ल तुम्हें जिंदा मिल जाएगा, नही तो.......
अब क्या करोगे एसीपी? कैसे पहुंचोगे प्रफुल्ल तक। ऑफिस में बैठकर काम नहीं चलेगा, बाहर निकलो और अपने काम में तेजी लाओ। सिर्फ दो दिन।
                                                                                                                 चैलेंजर

लेटर पढ़ने के बाद भौमिक टेबल पर जोर से मुक्का मारता है। इसे देखकर परमार उसे रोकने की कोशिश करता है।
परमार- अरे सर ये क्या कर रहे हैं आप?
भौमिक- परमार हम सही थे। प्रफुल्ल सहाय का अपहरण हो गया है।
परमार- क्या? ये क्या कह रहे है सर आप?
भौमिक- हां परमार यही सच है। इतना कहने के साथ ही भौमिक वह लेटर परमार की ओर बढ़ा देता है। परमार वह लेटर पढ़ने लगता है।
परमार- ओह सर। अब क्या करें?
भौमिक- करना क्या है परमार, अब हमें अपना काम ही करना है। प्रफुल्ल को सही सलामत लेकर आना है।
परमार- हां, सर पर कैसे?
भौमिक- अगर मैं सही हूं परमार तो हमें ज्यादा मुश्किल नहीं आने वाली है। अब चलो यहां से। अब चैलेंजर का चैलेंज खत्म कर ही देते हैं।
इतना कहने के बाद भौमिक और परमार वहां से निकल जाते हैं। वे सीधे प्रफुल्ल के घर पहुंच जाते हैं। यहां कुछ पूछताछ करने के बाद वे दोनों उसके घर के आसपास तलाशी लेते हैं। इसके बाद भौमिक एक बार फिर शहीद स्थल पर पहुंच जाता है। यहां वह हर चीज को बड़े गौर से देखता है और फिर कुछ सोचकर हल्के से मुस्कुराता है। यहां से वह सामने की ओर बनी एक दुकान की ओर जाता है, जहां पर सीसीटीवी लगा था। वहां की फुटेज वह देखने लगता है। फुटैज देखते हुए वह एक बार फिर से मुस्कुराता है और फिर वहां से चला जाता है। इसके बाद वह परमार को कुछ काम बताकर उसे रवाना करता है और खुद गाड़ी लेकर दूसरे रास्ते पर निकल जाता है। भौमिक शहर के कुछ स्थानों पर जाता है और वहां कुछ लोगों से मुलाकात करता है। फिर वह एक फोन लगाता है और उस फोन पर ही कुछ देर तक बात करता रहता है और फिर अपनी गाड़ी में बैठकर रवाना हो जाता है। शहर से दूर हाइवे के रास्ते में उसकी गाड़ी दौड़ने लगती है। कच्चे और टेड़े मेड़े रास्ते से होते हुए उसकी गाड़ी एक जगह पर जाकर रूक जाती है। वह थोड़ी देर कार में ही बैठा रहता है औ फिर कार से उतरकर पैदल ही कच्चे रास्ते पर बढ़ने लगता है। कुछ दूर पैदल चलने के बाद वहां एक खंडहर दिखाई पड़ता है और वह उसकी ओर लगातार आगे बढ़ता जाता है। खंडहर में पहुंचने के साथ ही वह अपने हाथ में अपनी पिस्टल ले लेता है। और चारों ओर देखते हुए आगे बढ़ता जाता है। खंडहर के बीच में एक बड़ा सा हॉलनुमा बना हुआ था, वह वहां पहुंचकर अपनी पिस्टल को फिर से रख लेता है और वहां से आवाज लगाता है।

भौमिक- मिस्टर प्रफुल्ल सहाय। आपके चैलेंज के अनुसार मैं आप तक पहुंच चुका हूं। आप चाहे तो अब बाहर आ सकते हैं, ताकि अब हम किसी खत से नहीं बल्कि आमने-सामने बात करें।
भौमिक के इतना कहने के बाद कुछ देर के लिए वहां सन्नाटा रहता है और फिर खंडहर के उस हॉल के एक ओर से ताली की आवाज के साथ एक साया नजर आता है, जो धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और फिर वह साया पूरी तरह से सामने आता है और वह कोई और नहीं प्रफुल्ल ही था।
प्रफुल्ल- मुझे ये तो पता था एसीपी कि एक ना एक दिन तुम मुझ तक जरूर पहुंचोगे, पर इतनी जल्दी पहुंच जाओगे यह नहीं सोचा था। वैसे तुम्हें कैसे पता चला कि इन सबके पीछे मैं ही हूं?
भौमिक- वो सब तो मैं तुम्हें बता ही दूंगा पर पहले तुम ये बताओ कि ये सब तुमने किया क्यों?
प्रफुल्ल- बहुत सीधी सी बात है एसीपी। आज मेरे पास सब कुछ है, पॉवर, पैसा, पोजिशन। मैं जो चाहे वह पैसे से पा सकता था पर मेरा सपना था कि मैं शहर में और खासकर राजनीति में वो मुकाम हासिल करूं जो आज तक कोई नहीं कर सका।
भौमिक- तो ऐसे खत लिखकर या मुझे चैलेंज करा तुम वो मुकाम हासिल कर लोगे?
प्रफुल्ल- नहीं मैंने ऐसा नहीं सोचा। मैं राजनीति की पारी की शुरूआत कर रहा था। मुझे जनता के हर व्यक्ति का सपोर्ट चाहिए था।
भौमिक- एक मिनट। बातें तो होती ही रहेगी। मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूं।
प्रफुल्ल- क्या लाए हो एसीपी?
इसके बाद भौमिक एक चेस बोर्ड निकालता है और उसे बिछा देता है। फिर दोनों ही चेस बोर्ड पर अपने मोहरे सेट करने लगते हैं और फिर दोनों के बीच गेम शुरू हो जाता है।
भौमिक- अब बताओ प्रफुल्ल ऐसा तुमने क्यों किया?
प्रफुल्ल- एक मोहरे को आगे बढ़ाते हुए। जैसा कि मैंने बताया कि मुझे आमजनता में हर व्यक्ति का सपोर्ट चाहिए था। मैं चाहता तो पैसे से वोट खरीद सकता था, पर मैंने ऐसा नहीं किया। इसलिए मुझे लोगों के सपोर्ट संवेदना की जरूरत थी। राजनीति में आने से पहले ही मुझ पर हमला होना और फिर मेरा अपहरण हो जाना ये मेरा प्लान था, ताकि जब मैं चुनाव लडूं तो जनता की संवेदना से मैं जीत जाउं।
भौमिक- पर ऐसा करके तुम क्या हासिल करना चाहते थे। इस बार भौमिक अपना एक मोहरा आगे बढ़ाता है?
प्रफुल्ल- कहा ना मैं ऐसे मुकाम पर पहुंचना चाहता हूं, जहां आज तक कोई नहीं पहुंच सका।
भौमिक- तुम दूसरे रास्ते से भी उस मुकाम तक पहुंच सकते थे। पर तुमने अपराध का सहारा लिया जो बिल्कुल भी सही नहीं है।

प्रफुल्ल- मुझे जो सही लगता है मैं वहीं करता हूं। आज तक अपने डिसीजन के कारण ही मैं यहां तक पहुंचा हूं।
भौमिक- तो अब देखो कि तुम्हारा डिसीजन तुम्हें कहां पहुंचाने वाला है।
प्रफुल्ल- वो तो बाद में देखेंगे पहले अपने राजा को संभालों एसीपी।
भौमिक- चेस बोर्ड को देखते हुए कुछ देर सोचता है फिर अपनी एक चाल चलता है। लो बचा लिया राजा।
प्रफुल्ल- तुम्हारे साथ खेलने में मजा आ रहा है एसीपी। सामने वाला खिलाड़ी अच्छा हो तो खेल का मजा बढ़ जाता है। वैसे तुम मुझ तक पहुंच कैसे गए एसीपी?
भौमिक- खेल में कभी-कभी एक छोटी सी गलती भी बहुत भारी पड़ जाती है एसीपी। अतिआत्मविष्वास किसी भी खिलाड़ी को हार की ओर ले जा सकता है और यही गलती तुमने भी की है। जैसे अभी इस गेम में कर गए हो। और ये गलती तुम्हारे वजीर को ले गई है।
प्रफुल्ल- वजीर को खो देने के बाद प्रफुल्ल एकदम चौंक जाता है और कहता है ये गलती मैंने कैसे कर दी?
भौमिक- कहा ना अतिआत्मविश्वास।
प्रफुल्ल- और तुम्हारे मुझ तक पहुंचने में कौन सी गलती रही एसीपी?
भौमिक- तुम्हें याद है प्रफुल्ल मैं 30 लोगों की लिस्ट तैयार करने के बाद तुमसे भी मिलने के लिए आया था। तब तुम्हें आगाह भी किया था। पर तुम्हारे अतिआत्मविश्वास ने ही मुझे तुम पर शक करने के लिए मजबूर किया। क्योंकि बाकि सब लोग इस बात से थोड़ा तो डरे थे, पर तुम नहीं डरे और कहा कि तुम इन सब से निपट लोगे। जबकि एक एसीपी रैंक कर व्यक्ति तुम्हें आगाह कर रहा था और तुम बिल्कुल नॉमर्ल थे। तभी मुझे शक हुआ था। और यही मेरा एकलौता सुराग भी था, जिससे मैं तुम तक पहुंच सकता था।


प्रफुल्ल- हां सही कहा था मैंने। और देखों मैं अपने प्लान में लगभग सफल ही हूं।
भौमिक- नहीं। क्योंकि अब मैं यहां आ गया हूं और तुम मेरे सामने हो तो अब तुम्हारा बच पाना मुश्किल है।
प्रफुल्ल- चलो माना कि उस गलती ने तुम्हें शक करने पर मजबूर किया, पर ये सब मेरा प्लान है यह तुम्हें कैसे पता चला?
भौमिक- एक छोटा मोहरा भी कभी-कभी राजा को मुश्किल में डाल सकता है। ऐसा ही कुछ तुम्हारे साथ हुआ। वो घोड़ा तो याद ही होगा तुम्हें, जो ढाई घर चलता है पर सामने वाले को चारों खाने चित कर देता है?
प्रफुल्ल- हां, याद है।
भौमिक- ऐसा ही लगड़ा घोड़ा मेरा तुम्हारे घर में सेंध लगा गया प्रफुल्ल। तुम पर शक होने के बाद मैंने अपने एक खास व्यक्ति को तुम पर नजर रखने के लिए छोड़ दिया और मैं भी तुम पर नजर रखे था। एक दिन किसी से बात करते हुए तुमने अपनी पूरी प्लानिंग बता ही दी थी। हालांकि उसे प्लानिंग में तुम कुछ कोड वर्ड में बात कर रहे थे, बाद में मैंने उन कोड वर्ड को तोड़ा तो मुझे पूरी कहानी समझ आ गई थी। मुझे इंतजार था तो बस 15 अगस्त का ताकि मैं तुम्हें रंगे हाथ पकड़ सकूं। हां, यहां तक पहुंचने के लिए मुझे कुछ मेहनत जरूर करना पड़ी और आखिरकार तुम मेरी पकड़ में आ ही गए और इसके साथ ही तुम्हारा गेम ओचर हो गया। चेक एंड मैट। यू लॉस्ट मि. प्रफुल्ल।


अपनी हार से प्रफुल्ल एकदम से बौखला जाता है और वह भौमिक पर हमला कर देता है। दोनों के बीच जमकर हाथापाई होती है और इस हाथापाई में दोनों एक-दूसरे पर हथियार तान देते हैं। दोनों ही गोली चलाते हैं। प्रफुल्ल की गोली जहां भौमिक के पेट में लगती हे, वहीं भौमिक की गोली प्रफुल्ल के सीधे सीने में लगती है, जिससे वह गिर जाता है। इसके बाद भौमिक अपना फोन निकालता है और परमार वो वहां आने के लिए कहता है। कुछ ही देर में परमार टीम के साथ वहां पहुंच जाता है। दोनों को हॉस्पिटल पहुंचाया जाता है। भौमिक अब लगभग बेहोशी की हालत में था। एंबूलेंस में जाते समय उसके हाथ से चेस का घोड़ा गिरता है और वह पूरी तरह से बेहोश होने से पहले प्रफुल्ल को देखता है और मुस्कुराता है। कुछ ही दिन बाद बाद दोनों ठीक हो जाते हैं और प्रफुल्ल पर केस चलता है, जबकि हमेशा की तरह भौमिक एक बार फिर अपने ऑफिस में अपनी टेबल पर बैठकर पेपर वेट को घूमा रहा होता है। 

एक ही सुराग  पार्ट 5

एक ही सुराग 

पार्ट 5




सभी लोगों को काम समझाने के बाद भौमिक और उसकी पूरी टीम वहां से रवाना हो जाती है। टीम के लोग जहां 30 लोगों पर नजर रखने के लिए निकल जाते हैं, वहीं परमार और भौमिक एक बार फिर उन स्थानों पर पहुंचते हैं, जहां से उन्हें लेटर मिला था। हालांकि ऑफिस में उन्हें कोई सुराग नहीं मिलता है, परंतु वो रेहड़ी वाले से बात करने के लिए गुलाबगंज पहुंच जाते हैं। वे रेहड़ी वाले से पूछते हैं कि उसने जो लेटर भौमिक को दिया था वह वहां कौन लेकर आया था? क्या से कुछ भी याद है। रेहड़ी वाला उन्हें बताता है कि उसे ऐसा कुछ याद नहीं है। वह तो जब अपनी प्लेट उठाने के लिए गया था तो प्लेट के साथ ही यह लेटर मिला था। उस पर भौमिक का नाम लिखा था, इसलिए उसने संभालकर रख लिया था। उसने सोचा था कि ज बवह अपने घर जाएगा तब लेटर साथ ले जाएगा और सुबह आपके ऑफिस में आपको दे देगा। कई बार पूछने के बाद भी रेहड़ी वाला भौमिक को लेटर देने वाले के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे सका था। इसके बाद परमार और भौमिक एक बार फिर अपने ऑफिस आ जाते है। दोनों जैसे ही केबिन में पहुंचते हैं भौमिक की टेबल पर एक और लेटर रखा उन्हें मिलता है। वह सिपाही से पूछता है तो वह बताता है कि हमेशा की तरह पत्थर के नीचे दबा था, आप ऑफिस में नहीं थे, इस कारण टेबल पर ही रख दिया। इसके बाद सिपाही चला जाता है। भौमिक वह लेटर खोलता है।
डियर एसीपी,
मैंने जितना सोचा था आपसे अधिक समझदार और चालाक है। अब मुझे लग रहा है कि मैंने सही आदमी का चुनाव किया है चुनौती देने के लिए। कहते हैं ना दुश्मन ताकतवर हो तो जंग में उतना ही अधिक मजा आता है और जीतने का भी मजा बढ़ जाता है। मेरे लेटर के बाद आपने जिस तरह से काम किया है और 30 लोगों की लिस्ट तैयार कर ली है, उससे मैं काफी प्रभावित हुआ हूं। आप अच्छा काम कर रहे हैं। आपने उन 30 लोगों को सतर्क करने के बारे में भी सोच लिया है, ये भी बहुत अच्दा कदम है आपका। पर आप मुझसे जीत नहीं पाएंगे, क्योंकि मैं आपसे हमेशा दो कदम आगे ही रहने वाला हूं। वैसे मुझे पकड़ने के लिए जो आप इतने प्रयास कर रहे हैं वो काफी कम है। वैसे आपको एक बात बता देता हूं कि मैं बहुत जल्द आपके सामने आने वाला हूं। आप अगर मुझे पहचान सके तो पहचान लेना। अब ज्यादा बात नहीं करता हूं, बहुत काम है। अपने काम कोअंजाम देने के लिए कुछ तैयारियां भी करना है। आप भी अब ज्यादा बिजी हो जाएंगे। तीस लोगों से मिलना है आपको, फिर मेरे बारे में भी सुराग लगाना है। आपके पास भी तो बहुत काम है। चलिए मिलते हैं फिर एक और लेटर एक और पहेली के साथ।
ओह हां, एक बड़ा सुराग देता हूं आपको अपने काम के बारे में।

बुलबुल भी होगी, सैय्याद भी होगा,
बीता जो वक्त, फिर याद भी होगा।
शिकार पहुंच रहा है शिकारी के वास्ते, 
आ रही है मंजिल कट रहे हैं रास्ते-रास्ते।।
                                                                                        कहने की जरूरत तो नहीं कि कौन
                                                                                                            चैलेंजर

लेटर को पढ़ने के बाद भौमिक का मन करता है कि लेटर को फाड़कर फेंक दें, पर ये सब एक सुराग ही है उसके लिए। भौमिक चेहरे पर अब गुस्सा साफ नजर आ रहा था।
परमार- इस बार क्या लिखा है सर?
भौमिक- परमार, यह इंसान हमारे बारे में सब जानता है। इसे यह भी पता है कि मैंने कोई 30 लोगों की लिस्ट भी बनाई है।
परमार- यह सब इसे कैसे पता चला सर? यह बात तो अब तक हम दोनों और हमारी टीम के वो सात लोग ही जानते थे?
भौमिक- वो तो पता नहीं परमार। वो बहुत चालाक है और हम पर लगातार नजर रखे हुए हैं। ये बात मैं शुरू से कह रहा हूं।
परमार- जी सर। पर अब आगे क्या करना है और इस बाद खत में क्या लिखा है?
भौमिक- यही कि उसे हमारी हर गतिविधि की जानकारी है। इस बार भी एक पहेली दी है, परंतु इस बार कुछ साफ नहीं हो रहा है।
परमार- मतलब सर?
भौमिक- बुलबुल भी होगी, सैय्याद भी होगा,
बीता जो वक्त, फिर याद भी होगा।
शिकार पहुंच रहा है शिकारी के वास्ते,
आ रही है मंजिल कट रहे हैं रास्ते-रास्ते।।
अब इसका क्या मतलब निकालू परमार? उसे लगता है कि मैं बहुत चालाक हूं तो इस बार उसने पहेली कुछ उलझा दी है।


परमार- मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है सर। क्या चाहता है ये इंसान?
भौमिक- ये कुछ बड़ा करना चाह रहा है परमार। कुछ बहुत बड़ा।
तभी भौमिक के ऑफिस के फोन की घंटी बजती है और भौमिक फोन उठाता है। दूसरी ओर से मीडिया के किसी व्यक्ति का फोन था। भौमिक नो कमेंट कहते हुए झल्लाकर फोन रख देता है।
परमार- क्या हुआ सर?
भौमिक- हमें उलझाने के लिए उसने ऐसा ही एक लेटर मीडिया को भी पहुंचा दिया है। मीडिया हमसे सवाल करें और हम उसके पीछे न जाए और वह अपना काम आसानी से कर जाए।
परमार- सर अब क्या कर सकते है?
भौमिक- करेंगे परमार जरूर करेंगे। इसको तो मैं ही पकडूंगा। ये खुद को जितना चालाक समझता है इसकी सारी चालाकी निकाल दूंगा। बस एक बार इसके बारे में कोई भी एक सुराग हाथ लग जाए।
परमार- मुझे यकीन है सर। आप इसे जरूर पकड़ेंगे।
भौमिक- अब तुम एक काम करो परमार हमने जितने लोगों की लिस्ट बनाई थी और अपने लोगों को उनकी निगरानी के लिए भेजा था, उसका क्या फीडबैक है?
परमार- जी सर। ऐसा कहकर परमार वहां से चला जाता है।
इधर भौमिक फिर से पूरे केस के बारे में सोचने लगता है। इस दौरान उसके चेहरे के भाव कई बार बदलते हैं। वह हर तरह से सोचने की कोशिश करता है कि यह जो भी व्यक्ति है वह इतना सबकुछ उसके बारे में कैसे जानता है? ऐसे सोचते हुए वह एक बार फिर अपनी बनाई लिस्ट को देखने लगता है। लिस्ट देखते हुए वह कुछ तय करता है और फिर लैपटॉप पर कुछ सर्च करने लगता है। लैपटॉप पर काम करते हुए उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान भी आती है। शायद उसे चैलेंजर के बारे में कुछ जानकारी मिल गई है। कुछ देर बाद परमार फिर से ऑफिस आ जाता है।

परमार- सर हमारे सभी लोग अपने काम पर लग गए हैं और शाम तक आज की सारी डिटेल हमारे पास होगी।
भौमिक- ठीक है परमार। पर अब हमें एक काम करना है।
परमार- वो क्या सर?
भौमिक- पर इस काम की खबर किसी को नहीं लगना चाहिए। यह बात सिर्फ तुम्हारे और मेरे बीच ही रहना चाहिए।
परमार- बिल्कुल सर।
भौमिक परमार को कुछ बताता है और फिर दोनों ऑफिस से निकल जाते हैं। कुछ ही देर में वह शहर की सड़कों पर होते हैं और शहर के कुछ विशेष स्थानों पर जाते हैं और पड़ताल करते हैं।  तीन घंटे से भी अधिक समय तक दोनों शहर के करीब पांच स्थानों पर जाकर जांच करते हैं। हालांकि इस पूरी कार्रवाई के दौरान परमार पूरी बात नहीं समझ पा रहा था, परंतु जितना उसे भौमिक ने ऑफिस में बताया था, उस हिसाब से वह काम कर रहा था। रात होने के कारण परमार एक बार फिर भौमिक को उसके घर छोड़ देता है और फिर अपने घर निकल जाता है। परमार के जाने के बाद भौमिक एक बार फिर अपने घर से निकल जाता है और इस बाद वह सीधे प्रफुल्ल के घर के बाहर पहुंच जाता है। वह छिपकर उसके घर पर नजर रखता है और वहां हर आने-जाने वाले व्यक्ति को देखता है और वहां होने वाली हर गतिविधि को नोट भी करता है। प्रफुल्ल के घर पर नजर रखते हुए उसे पूरी रात वहीं हो जाती है और वह सुबह होने पर अपने घर की ओर चल देता है। घर पहुंचकर कुछ देर आराम करने के बाद वह तैयार होकर एक बार फिर अपने ऑफिस पहुंच जाता है और वह लेट उठाता है। वह पहेली को एक बार फिर पढ़ता है और इस बार शायद उसने पहेली का हल निकाल लिया था। कुछ ही देर में परमार भी ऑफिस आ जाता है।

परमार- अरे सर आप इतनी जल्दी ऑफिस में?
भौमिक- हां, परमार। कुछ काम था तो आ गया।
परमार- अब आगे क्या करना है सर?
भौमिक- 15 अगस्त का इंतजार करना है परमार।
परमार- मतलब सर?
भौमिक- 15 अगस्त आने दो फिर बताउंगा।
परमार- ओके सर। वैसे आप कुछ सोच रहे है सर?
भौमिक- हां, परमार। यदि मेरा अंदाजा सही है तो मैं चैलेंजर के असली टारगेट तक पहुंच गया हूं। और अगर दूसरे तरीके से बात करूं तो शायद मैंने चैलेंजर को पहचान लिया है।
परमार- क्या ? तो चलिए सर उसे पकड़ लेते हैं।
भौमिक- अभी नहीं परमार। अभी तो मुझे बस शक है। जब तक कोई पक्का सबूत हाथ न लगे हम कुछ नहीं कर सकते।
परमार- हां, ये बात तो है सर।
भौमिक- इसलिए अब हम 15 अगस्त का इंतजार करेंगें। मेरा अंदाजा है कि 15 अगस्त को ही होना है जो कुछ भी होना है।
परमार- पर सर अगर आपका अंदाजा गलत निकला तो?
भौमिक- फिलहाल तो मैं भी कुछ नहीं कह सकता परमार। अब एक चांस ले रहा हूं। अंधेरे में तीर चलाया है अगर निशाने पर लग गया तो समझो सब ठीक हो जाएगा।
परमार- उम्मीद करता हूं निशाने पर ही लगे तीर।


एक ही सुराग  पार्ट 4

एक ही सुराग 

पार्ट 4


परमार- सर, अब क्या करना है? 
भौमिक- ओह, परमार तुम आ गए। मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था।
परमार- बताए सर क्या करना है अब? 
भौमिक- रात को मैंने एक लिस्ट तैयार की है और अब इन सभी लोगों से हमें मिलना है। अब इस मामले में थोड़ी सी भी ढिलाई हमें भारी पड़ सकती है। 
परमार- जी सर। 
भौमिक- क्योंकि जिस तरह से चैलेंजर हमारी हर खबर रखे हुए हैं, उससे लगता है कि यह हम पर नजर भी रख रहा है। यह बहुत चालाक भी है। अपना कोई सुराग नहीं दे रहा है। हमारी गाड़ी में आकर वो लेटर रखकर चला गया और हमें पता भी नहीं चला। इससे साफ है कि वह हमारे हर मूवमेंट पर नजर रखे हुए हैं। 
परमार- मुझे भी ऐसा ही लग रहा है सर। 
भौमिक- हम गुलाबगंज अगले दिन जाने वाले थे, पर अचानक ही वहां पहुंच गए और वहां हमें एक रेहड़ी वाला लेटर देकर जाता है। उसे कैसे पता चला कि हम गुलाबगंज जा रहे हैं, जो वह वहां लेटर पहुंचाकर आ गया। और अगर हम वहां नहीं पहुंचते तो क्या वो लेटर उस रेहड़ी वाले के पास ही रहता? 
परमार- जी सर, ये तो कहना मुश्किल है। 
भौमिक- वही तो परमार। अब हम इसे हल्के में नहीं ले सकते। सबसे पहले हमें उस व्यक्ति का पता लगाना है, जो इस चैलेंजर के निशाने पर है। इसलिए ही मैंने शहर के कुछ लोगों की लिस्ट बनाई है, अब हमें इन सभी से मिलना है और आगे ये लोग क्या करने वाले हैं, या इनका क्या प्लान है हमें ये सब पता करना होगा। और सबसे बड़ी बात यह है कि इन सभी लोगों को सुरक्षा भी देना होगी या इन पर नजर रखना होगी। क्योंकि अगर मेरा अंदाजा सही है तो इनमें से ही कोई एक उसका निशाना है। 
इतना कहते हुए भौमिक वो लिस्ट भौमिक को भी दिखाता है। फिर दोनों तय करते हैं कि कैसे इन लोगों से मुलाकात करना है और अपनी बात उनके सामने रखना है। क्योंकि एक तो सभी लोग शहर में काफी रूतबा रखते हैं, और उनकी सुरक्षा का जिम्मा सरकार का ही है। ऐसे में अगर किसी को जरा सी भी भनक लग गई कि उन्हें किसी से खतरा है तो काफी हंगामा हो सकता है। मीडिया भी पुलिस के पीछे पड़ जाएगी और चैलेंजर भी सतर्क हो जाएगा। इस कारण जो भी करना है वो बहुत सावधानी से करना है। ऐसा तय कर दोनों लोगों से मिलने के लिए निकल जाते हैं।
एक ही सुराग का 2 पार्ट यहां पढ़े 
लिस्ट के अनुसार एक-एक कर वो दोनों लोगों से मिलना शुरू करते हैं। वहीं कुछ लोग उन्हें मिल नहीं पाते हैं, तो भौमिक और परमार दूसरे व्यक्ति से मिलने के लिए पहुंच जाते हैं। दोनों अब तक पांच लोगों से मिल चुके थे और उनकी गतिविधियों के संबंध में जानकारी ले चुके थे। अब वह जिस शख्स के पास जा रहे थे वह शहर का ऐसा शख्स है, जिसने बहुत कम उम्र में ही बहुत तरक्की हासिल कर ली थी। वो शख्स न सिर्फ बिजनेस में अच्छा नाम बना चुका था, बल्कि एक समाजसेवी के रूप में भी उसकी बहुत ख्याती थी। जल्द वह अपनी राजनैतिक पारी की भी शुरूआत करने वाला था। इस शख्स का नाम था प्रफुल्ल सहाय। मुंबई जैसे शहर में इसने बहुत ही जल्द अपना बहुत बड़ा नाम कर लिया था। भौमिक और परमार दोनों उसके बंगले पर उससे मिलने के लिए पहुंच जाते हैं। प्रफुल्ल का नौकर उन्हें बैठने का कहकर प्रफुल्ल को बुलाने के लिए चला जाता है। प्रफुल्ल अभी नौजवान ही था। उसके रहन-सहन से ही उसकी उपलब्धियों के बारे में कोई भी अंदाजा लगा सकता था। चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान रखने के साथ ही उसका चेहरा हमेशा चमकता रहता था। प्रफुल्ल हॉल में आता है और भौमिक से हाथ मिलाता है और फिर उसके सामने ही बैठ जाता है। 
प्रफुल्ल- जी, एसीपी साहब, बताए आज आपको हमारी याद कैसे आ गई? अगर कुछ काम था तो मुझे कॉल कर देते मैं खुद आपके ऑफिस आ जाता। 
भौमिक- जी, प्रफुल्ल जी ऐसा कुछ नहीं है। बस एक छोटी सी जानकारी चाहिए थी, इसलिए मैं खुद ही आ गया। 
प्रफुल्ल- जी बताए मैं कैसे और क्या आपकी मदद कर सकता हूं? 
भौमिक- कोई भी बात करने से पहले मैं आपको एक बात बता देना चाहता हूं कि हमारी जो भी बात होगी वो सिर्फ हमारे बीच ही रहेगी। आपके किसी खास व्यक्ति को भी इस बात का पता न चले। 
प्रफुल्ल- अब आप कह रहे हैं तो ऐसा ही होगा। पर बात क्या है? 
भौमिक विस्तार से प्रफुल्ल को पूरी बात बताता है और कहता है कि उसे शक है कि वह इंसान जो भी है उसका टारगेट प्रफुल्ल भी हो सकता है। भौमिक उसे बताता है कि पुलिस इसके लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश करेगी कि वो आप तक पहुंच ही न सके। भौमिक की लिस्ट के अनुसार कुछ और लोग भी है, इस कारण वह बस उन्हें सतर्क कर रहा है। हालांकि पुलिस उन सभी लोगों की पूरी सुरक्षा करेगी। भौमिक की बात सुनते हुए प्रफुल्ल वहां से उठता है और हॉल में ही रखी एक टेबल पर पहुंच जाता है, जहां चेस बोर्ड सजा हुआ था। वह चेस बोर्ड की ओर ध्यान से देखने लगता है। इस बीच भौमिक अपनी बात खत्म करता है।
एक ही सुराग का 3 पार्ट यहां पढ़े 
प्रफुल्ल- एसीपी साहब आप चेस खेलते हैं? 
भौमिक- जी कभी-कभी। क्योंकि नौकरी से कभी फुर्सत ही नहीं मिलती है। हम अपराधियों के पीछे ही भागते रह जाते हैं और चेस खेलने के लिए एक जगह बैठना पड़ता है। 
प्रफुल्ल- आपका सबसे पसंदीदा मोहरा कौन सा है चेस में? 
भौमिक- जी मैं तो सभी को पसंद करता हूं। क्योंकि मोहरा कोई भी हो, खेल जीतना जरूरी होता है और जो गेम जीता दे वहीं मोहरा सबसे अच्छा होता है। 
प्रफुल्ल- मुझे आपका जवाब पसंद आया है एसीपी साहब। पर आपको पता है मेरा पसंदीदा मोहरा घोड़ा है, चलता को ढाई चाल है पर दूसरे मोहरे को चारो खाने चित कर देता है। 

भौमिक- जी आपका कहना भी सही है। वैसे अब मैं आपसे इजाजत चाहूंगा और मेरी बात का विशेष ध्यान रखिएगा। हमारी बात सिर्फ हम तक ही रहे। वैसे पुलिस आपकी सुरक्षा में हमेशा रहेगी। 
प्रफुल्ल- आप चिंता मत कीजिए एसीपी साहब। मैं ऐसी कोरी धमकियों से डरने वालों में से नहीं हूं। मुझे अपनी सुरक्षा करना आता है और वो मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। फिर भी आपको जो करना है कीजिए मैं कोई रोक टोक नहीं करूंगा। और रही बात हमारे बीच रहने की तो यह बात आपके लिए बड़ी हो सकती है, मेरे लिए नहीं। 
भौमिक- जी पर फिर भी आप थोड़ा सतर्क ही रहिएगा और अगर आपको कुछ भी अजीब सा अपने आस-पास लगे तो मुझे तुरंत सूचना दीजिएगा। 
प्रफुल्ल- जी बिल्कुल। 
इतनी बात होने के बाद परमार और भौमिक वहां से निकलते हैं। गेट पर पहुंचने के बाद भौमिक एक बार पलटकर प्रफुल्ल को देखता है। प्रफुल्ल का ध्यान अब भी चेस बोर्ड पर ही था और वह चेस के घोड़े को उठाकर उसे देखता है और फिर मुस्कुराते हुए उसे फिर से चेस बोर्ड पर रखता है और मुस्कुराते हुए कहता है चेक। भौमिक इसके बाद अपनी कार में बैठ जाता है और फिर परमार और भौमिक प्रफुल्ल के घर से निकल जाते हैं। दोनों को घूमते हुए काफी देर हो गई थी इस कारण भौमिक परमार से गाड़ी को उसके ऑफिस की ओर ले जाने के लिए कहता है। कुछ ही देर में दोनों ऑफिस पहुंच जाते हैं। 
परमार- सर 30 लोगों में से आज सिर्फ 6 लोगों से ही मुलाकात हो पाई है। ऐसे तो हमें चार से पांच दिन लग जाएंगे सभी से बात करने में। 
भौमिक- हां, परमार पर अब कर भी क्या सकते है? 
परमार- सर अगर आप कहे तो मैं कुछ कहूं। 
भौमिक- हां, परमार कहो। 
परमार- मैं सोचता हूं सर कि आप सभी को एक बार अपने ऑफिस बुला लीजिए और सभी से एक बार में बात कर लीजिए। इससे हमारा समय भी बच जाएगा और हमारी सभी से बात भी हो जाएगी। 
भौमिक- तुम कह तो सही रहे हो परमार। पर अगर ये खबर कहीं मीडिया को पता चल गई तो हंगामा हो जाएगा। इसलिए हमें एक-एक से ही मिलना होगा। हां ये कर सकते हैं कि हम कल से थोड़ा जल्दी निकले और जल्द से जल्द सभी लोगों से मुलाकात कर लें। 

परमार- ठीक है सर। जैसा आप कहें। 
भौमिक- अब एक काम करो ऑफिस में जो अपने विश्वासपात्र है, उन सभी को बुलाओ। 
परमार- जी सर। 
कुछ ही देर में परमार कुछ लोगों को लेकर केबिन में आ जाता है। भौमिक उन सभी लोगों से कहता है कि हमें एक काम करना है, पर इस काम के बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं चलना चाहिए। वह सभी को लोगों को चैलेंजर, उसके खत और उसकी चुनौती के बारे में बताता है और यह भी बताता है कि उसे शहर के 30 लोगों पर नजर रखना है। ताकि उसे यह पता चल सके कि शहर के उन 30 लोगों में से कोई चैलेंजर का टारगेट तो नहीं है। वह अपने ऑफिस के लोगों से कहता है कि उन्हें शहर के उन 30 लोगों की हर गतिविधि पर नजर रखना है कि और यह भी पता करना है कि आगे उनकी क्या प्लानिंग है? हम उन पर नजर रखे हैं, या उनकी कोई जानकारी जुटा रहे हैं यह उन लोगों को भी पता नहीं चलना चाहिए। इसके बाद भौमिक कहता है कि हमें हर हाल में उस चैलेंजर की चुनौती को पूरा करना है और उसे ऐसा कुछ भी करने से रोकना है। 
उसे मुझसे भी...

उसे मुझसे भी...

एक उसकी मोहब्बत थी, एक मेरी मोहब्बत थी, 
मुझे थी उसकी आरजू और उसे मेरी जरूरत थी।
उसकी और मेरी मोहब्बत में इतना ही तो फर्क था,
मुझे सिर्फ उससे और उसे मुझसे भी मोहब्बत थी।।

मेरे लिए उसका नाम जैसे खुदा का नाम होता था, 
नाम मेरा उसके लिए तो जैसे एक इल्जाम होता था।
मेरे लिए मैं गुल और वो मेरी गुलिस्तां होती थी,
बस इतनी सी मेरे इश्क की हकीकत होती थी।।

मैं जागता तो रात भर था पर सिर्फ उसके ही लिए, 
वो भी जागती थी क्योंकि उसे नींद नहीं आती थी।
बस उसके ही ख्यालों से रातें सुबह बन जाती थी, 
बस इतनी सी मेरे इश्क की तबीयत होती थी।।

उसके रूठने से दिल मेरा अक्सर बैठ जाता था, 
मैं जो रूठा तो कहती थी मुझे मनाना नहीं आता।
ये अदा थी उसकी या यही उसकी सीरत थी, 
इस बात पर मोहब्बत मेरी अक्सर हंसती थी।।

उसकी शिकन से मैं अक्सर बैचेन हो उठता था, 
और मेरी बैचेनी भी उसे मजाक लगती थी।
कहती थी रोने नहीं देंगे और बहुत सताती थी, 
उसकी यही बात मेरी मोहब्बत को तड़पाती थी।।

उसकी आरजू, उसकी जूफ्तजू, सब उसकी जरूरत थी, 
वो ही मंजिल थी मेरी और मेरी राहें भी मुकर्रर थी।
जाने कब और कैसे उसने मेरी राहें ही बदल दी थी, 
फिर भी मेरी नजरें मंजिल को ही भटकती थी।।

मेरी कसमें, मेरे वादे बदस्तुर आज भी कायम है, 
उसकी कसमें उसके वादे क्या फरेब के कायल थे।
कसम को भी कसम की ही कसम थी शायद, 
इसलिए ही तो उसकी हर कसम टूटती रहती है।।

मुझे मोहब्बत में ऐसे ही नाकाम ना समझ लेना, 
गर रहना हो तन्हा तो तुम भी इश्क कर लेना।
मोहब्बत मेरी भी किसी मोहब्बत से कम नही थी,
क्या हुआ जो एक तरफा ही सही पर मोहब्बत तो थी।।