एक ही सुराग
पार्ट 5
सभी लोगों को काम समझाने के बाद भौमिक और उसकी पूरी टीम वहां से रवाना हो जाती है। टीम के लोग जहां 30 लोगों पर नजर रखने के लिए निकल जाते हैं, वहीं परमार और भौमिक एक बार फिर उन स्थानों पर पहुंचते हैं, जहां से उन्हें लेटर मिला था। हालांकि ऑफिस में उन्हें कोई सुराग नहीं मिलता है, परंतु वो रेहड़ी वाले से बात करने के लिए गुलाबगंज पहुंच जाते हैं। वे रेहड़ी वाले से पूछते हैं कि उसने जो लेटर भौमिक को दिया था वह वहां कौन लेकर आया था? क्या से कुछ भी याद है। रेहड़ी वाला उन्हें बताता है कि उसे ऐसा कुछ याद नहीं है। वह तो जब अपनी प्लेट उठाने के लिए गया था तो प्लेट के साथ ही यह लेटर मिला था। उस पर भौमिक का नाम लिखा था, इसलिए उसने संभालकर रख लिया था। उसने सोचा था कि ज बवह अपने घर जाएगा तब लेटर साथ ले जाएगा और सुबह आपके ऑफिस में आपको दे देगा। कई बार पूछने के बाद भी रेहड़ी वाला भौमिक को लेटर देने वाले के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे सका था। इसके बाद परमार और भौमिक एक बार फिर अपने ऑफिस आ जाते है। दोनों जैसे ही केबिन में पहुंचते हैं भौमिक की टेबल पर एक और लेटर रखा उन्हें मिलता है। वह सिपाही से पूछता है तो वह बताता है कि हमेशा की तरह पत्थर के नीचे दबा था, आप ऑफिस में नहीं थे, इस कारण टेबल पर ही रख दिया। इसके बाद सिपाही चला जाता है। भौमिक वह लेटर खोलता है।
डियर एसीपी,
मैंने जितना सोचा था आपसे अधिक समझदार और चालाक है। अब मुझे लग रहा है कि मैंने सही आदमी का चुनाव किया है चुनौती देने के लिए। कहते हैं ना दुश्मन ताकतवर हो तो जंग में उतना ही अधिक मजा आता है और जीतने का भी मजा बढ़ जाता है। मेरे लेटर के बाद आपने जिस तरह से काम किया है और 30 लोगों की लिस्ट तैयार कर ली है, उससे मैं काफी प्रभावित हुआ हूं। आप अच्छा काम कर रहे हैं। आपने उन 30 लोगों को सतर्क करने के बारे में भी सोच लिया है, ये भी बहुत अच्दा कदम है आपका। पर आप मुझसे जीत नहीं पाएंगे, क्योंकि मैं आपसे हमेशा दो कदम आगे ही रहने वाला हूं। वैसे मुझे पकड़ने के लिए जो आप इतने प्रयास कर रहे हैं वो काफी कम है। वैसे आपको एक बात बता देता हूं कि मैं बहुत जल्द आपके सामने आने वाला हूं। आप अगर मुझे पहचान सके तो पहचान लेना। अब ज्यादा बात नहीं करता हूं, बहुत काम है। अपने काम कोअंजाम देने के लिए कुछ तैयारियां भी करना है। आप भी अब ज्यादा बिजी हो जाएंगे। तीस लोगों से मिलना है आपको, फिर मेरे बारे में भी सुराग लगाना है। आपके पास भी तो बहुत काम है। चलिए मिलते हैं फिर एक और लेटर एक और पहेली के साथ।
ओह हां, एक बड़ा सुराग देता हूं आपको अपने काम के बारे में।
बुलबुल भी होगी, सैय्याद भी होगा,
बीता जो वक्त, फिर याद भी होगा।
शिकार पहुंच रहा है शिकारी के वास्ते,
आ रही है मंजिल कट रहे हैं रास्ते-रास्ते।।
कहने की जरूरत तो नहीं कि कौन
चैलेंजर
परमार- इस बार क्या लिखा है सर?
भौमिक- परमार, यह इंसान हमारे बारे में सब जानता है। इसे यह भी पता है कि मैंने कोई 30 लोगों की लिस्ट भी बनाई है।
परमार- यह सब इसे कैसे पता चला सर? यह बात तो अब तक हम दोनों और हमारी टीम के वो सात लोग ही जानते थे?
भौमिक- वो तो पता नहीं परमार। वो बहुत चालाक है और हम पर लगातार नजर रखे हुए हैं। ये बात मैं शुरू से कह रहा हूं।
परमार- जी सर। पर अब आगे क्या करना है और इस बाद खत में क्या लिखा है?
भौमिक- यही कि उसे हमारी हर गतिविधि की जानकारी है। इस बार भी एक पहेली दी है, परंतु इस बार कुछ साफ नहीं हो रहा है।
परमार- मतलब सर?
भौमिक- बुलबुल भी होगी, सैय्याद भी होगा,
बीता जो वक्त, फिर याद भी होगा।
शिकार पहुंच रहा है शिकारी के वास्ते,
आ रही है मंजिल कट रहे हैं रास्ते-रास्ते।।
अब इसका क्या मतलब निकालू परमार? उसे लगता है कि मैं बहुत चालाक हूं तो इस बार उसने पहेली कुछ उलझा दी है।
भौमिक- ये कुछ बड़ा करना चाह रहा है परमार। कुछ बहुत बड़ा।
तभी भौमिक के ऑफिस के फोन की घंटी बजती है और भौमिक फोन उठाता है। दूसरी ओर से मीडिया के किसी व्यक्ति का फोन था। भौमिक नो कमेंट कहते हुए झल्लाकर फोन रख देता है।
परमार- क्या हुआ सर?
भौमिक- हमें उलझाने के लिए उसने ऐसा ही एक लेटर मीडिया को भी पहुंचा दिया है। मीडिया हमसे सवाल करें और हम उसके पीछे न जाए और वह अपना काम आसानी से कर जाए।
परमार- सर अब क्या कर सकते है?
भौमिक- करेंगे परमार जरूर करेंगे। इसको तो मैं ही पकडूंगा। ये खुद को जितना चालाक समझता है इसकी सारी चालाकी निकाल दूंगा। बस एक बार इसके बारे में कोई भी एक सुराग हाथ लग जाए।
परमार- मुझे यकीन है सर। आप इसे जरूर पकड़ेंगे।
भौमिक- अब तुम एक काम करो परमार हमने जितने लोगों की लिस्ट बनाई थी और अपने लोगों को उनकी निगरानी के लिए भेजा था, उसका क्या फीडबैक है?
परमार- जी सर। ऐसा कहकर परमार वहां से चला जाता है।
इधर भौमिक फिर से पूरे केस के बारे में सोचने लगता है। इस दौरान उसके चेहरे के भाव कई बार बदलते हैं। वह हर तरह से सोचने की कोशिश करता है कि यह जो भी व्यक्ति है वह इतना सबकुछ उसके बारे में कैसे जानता है? ऐसे सोचते हुए वह एक बार फिर अपनी बनाई लिस्ट को देखने लगता है। लिस्ट देखते हुए वह कुछ तय करता है और फिर लैपटॉप पर कुछ सर्च करने लगता है। लैपटॉप पर काम करते हुए उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान भी आती है। शायद उसे चैलेंजर के बारे में कुछ जानकारी मिल गई है। कुछ देर बाद परमार फिर से ऑफिस आ जाता है।
भौमिक- ठीक है परमार। पर अब हमें एक काम करना है।
परमार- वो क्या सर?
भौमिक- पर इस काम की खबर किसी को नहीं लगना चाहिए। यह बात सिर्फ तुम्हारे और मेरे बीच ही रहना चाहिए।
परमार- बिल्कुल सर।
भौमिक परमार को कुछ बताता है और फिर दोनों ऑफिस से निकल जाते हैं। कुछ ही देर में वह शहर की सड़कों पर होते हैं और शहर के कुछ विशेष स्थानों पर जाते हैं और पड़ताल करते हैं। तीन घंटे से भी अधिक समय तक दोनों शहर के करीब पांच स्थानों पर जाकर जांच करते हैं। हालांकि इस पूरी कार्रवाई के दौरान परमार पूरी बात नहीं समझ पा रहा था, परंतु जितना उसे भौमिक ने ऑफिस में बताया था, उस हिसाब से वह काम कर रहा था। रात होने के कारण परमार एक बार फिर भौमिक को उसके घर छोड़ देता है और फिर अपने घर निकल जाता है। परमार के जाने के बाद भौमिक एक बार फिर अपने घर से निकल जाता है और इस बाद वह सीधे प्रफुल्ल के घर के बाहर पहुंच जाता है। वह छिपकर उसके घर पर नजर रखता है और वहां हर आने-जाने वाले व्यक्ति को देखता है और वहां होने वाली हर गतिविधि को नोट भी करता है। प्रफुल्ल के घर पर नजर रखते हुए उसे पूरी रात वहीं हो जाती है और वह सुबह होने पर अपने घर की ओर चल देता है। घर पहुंचकर कुछ देर आराम करने के बाद वह तैयार होकर एक बार फिर अपने ऑफिस पहुंच जाता है और वह लेट उठाता है। वह पहेली को एक बार फिर पढ़ता है और इस बार शायद उसने पहेली का हल निकाल लिया था। कुछ ही देर में परमार भी ऑफिस आ जाता है।
परमार- अरे सर आप इतनी जल्दी ऑफिस में?
भौमिक- हां, परमार। कुछ काम था तो आ गया।
परमार- अब आगे क्या करना है सर?
भौमिक- 15 अगस्त का इंतजार करना है परमार।
परमार- मतलब सर?
भौमिक- 15 अगस्त आने दो फिर बताउंगा।
परमार- ओके सर। वैसे आप कुछ सोच रहे है सर?
भौमिक- हां, परमार। यदि मेरा अंदाजा सही है तो मैं चैलेंजर के असली टारगेट तक पहुंच गया हूं। और अगर दूसरे तरीके से बात करूं तो शायद मैंने चैलेंजर को पहचान लिया है।
परमार- क्या ? तो चलिए सर उसे पकड़ लेते हैं।
भौमिक- अभी नहीं परमार। अभी तो मुझे बस शक है। जब तक कोई पक्का सबूत हाथ न लगे हम कुछ नहीं कर सकते।
परमार- हां, ये बात तो है सर।
भौमिक- इसलिए अब हम 15 अगस्त का इंतजार करेंगें। मेरा अंदाजा है कि 15 अगस्त को ही होना है जो कुछ भी होना है।
परमार- पर सर अगर आपका अंदाजा गलत निकला तो?
भौमिक- फिलहाल तो मैं भी कुछ नहीं कह सकता परमार। अब एक चांस ले रहा हूं। अंधेरे में तीर चलाया है अगर निशाने पर लग गया तो समझो सब ठीक हो जाएगा।
परमार- उम्मीद करता हूं निशाने पर ही लगे तीर।









Bahut jordat
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