एक ही सुराग
पार्ट 3
ऐसे ही केस को लेकर बात करते हुए दोनों कुछ ही देर में उस जगह पर पहुंच जाते हैं। वहां उन्हें एक पुराना पोस्टऑफिस भी नजर आता है, जिससे भौमिक यह समझ जाता है कि उसने पहेली का सही हल निकाला था। अब उसके अनुसार उस चैलेंजर का दूसरा सुराग उसे यही मिलने की पूरी उम्मीद थी। ऐसा ही सोचकर भौमिक और परमार दोनों पोस्टऑफिस के अंदर चले जाते हैं। वहां थोड़ी बहुत पूछताछ करते हैं, पर वहां उन्हें सुराग के रूप में कुछ नहीं मिलता है। हालांकि इसके बाद भी दोनों पोस्टऑफिस और उसके आसपास देखते हैं कि शायद हमेशा की तरह किसी पत्थर से दबा कोई खत रखा हो, परंतु उन्हें वहां ऐसा कुछ नहीं मिलता है। दोनों फिर से अपनी कार में आ जाते हैं। कार में भौमिक की सीट पर ही एक पत्थर से दबा एक खत रखा था। वह उसे उठाता है और खोलता है।
डियर एसीपी,
जैसा कि मैंने सोचा था कि आप मेरी पहली पहेली को हल कर लेंगे और यहां तक आ ही जाएंगे। पर एक बात जो मैंने नहीं सोची थी वह यह कि आपने कैसे सोच लिया कि मैं ये खत पोस्टऑफिस में रखूंगा, वहां जाकर आपको पूछताछ करने की जरूरत नहीं थी। फिर भी आपने की चलिए कोई बात नहीं। ये आपका काम भी है। अब हम आगे की बात करते हैं। वैसे आपको एक बात बता दूं कि आपको यहां बुलाया है तो आप इस जगह को अच्छी तरह से देख लें कि क्योंकि यहां से मैं अपना कुछ काम करते हुए जा रहा हूं। और अब रही बात दूसरे सुराग कि तो वो आपके ऑफिस पहुंच गया हैं। वहां जाकर आप अपने दूसरे सुराग को देख सकते हैं और फिर एक नाकाम कोशिश कर सकते हैं मुझे पकड़ने की।
अ...ह....ह...ह... इतना गुस्सा अच्छा नहीं होता एसीपी साहब। खत को फाड़ने से कुछ नहीं होगा। इसलिए अपने गुस्से पर थोड़ा काबू रखिए और जल्दी से ऑफिस जाइए, क्योंकि वहां आपका दूसरा सुराग है।
अच्छा अब चलता हूं फिर मिलूंगा ऐसे ही किसी खत में।
चैलेंजर
भौमिक उस खत को पढ़कर डेश बोर्ड पर पटक देता है और फिर परमार उस खत को पढ़ता है। खत पढ़ने के बाद वह कार सीधे ऑफिस के लिए मोड़ लेता है। ऑफिस पहुंचने के बाद जैसे ही वे केबिन में जाते हैं टेबल पर ही उन्हें एक खत मिलता है। इस बार भी भौमिक उस खत को उठाता है। इस बार उसे उस खत में सिर्फ एक पहेली लिखी मिलती है।
ये उड़ने की राह है, यहां वक्त कभी थमता नहीं
मैं भी एक ऐसा गुलाब हूं, जो खुश्बू कभी रखता नहीं।
परमार- अब ये क्या पहेली है सर?
भौमिक- पहेली है तो इसका हल तो निकालना ही होगा। तभी तो हम उस तक पहुंच सकते हैं।
परमार- पर सर ऐसे कब तक हम पहेलियों के सहारे बैठे रहेंगे? हम उसे कैसे पकड़ सकते हैं?
भौमिक- फिलहाल तो हमारे पास इन पहेलियों के सिवाय कुछ नहीं है परमार। इन पहेलियों से ही हमें उसका कोई सुराग मिल सकता है।
परमार- तो अब इस पहेली क्या हल है सर?
भौमिक- वही तो सोच रहा हूं परमार। आखिर अब क्या कहना चाह रहा है यह?
भौमिक हाथ में खत लेकर काफी देर तक सोचता रहता है। पर उसे पहेली का कोई हल नहीं मिलता है। वह कुछ देर बाहर टहलने के लिए चला जाता है और फिर थोड़ी देर बाद ऑफिस आकर बैठ जाता है। पहेली के हल के साथ भौमिक यह भी सोच रहा था कि आखिर यह शख्स ऐसा क्या करना चाह रहा है। और उसने उसे एक महीने का समय क्यों दिया है। क्या एक महीने में ऐसा कुछ होने वाला है जिसका वो फायदा उठा सके। परमार भी लगातार से देखे जा रहा था। आखिरकार जब कोई हल नहीं निकलता है तो दोनों अपने अपने घर के लिए रवाना हो जाते हैं। रास्तें में गाड़ी चलाते हुए भी भौमिक के दिमाग में वहीं पहेली चल रही थी। तभी उसकी नजर एक बोर्ड पर पड़ती है और वह मुस्कुरा देता है।
परमार- सर लगता है कि आपने पहेली का हल निकाल लिया है।
भौमिक- हां, परमार लगता तो ऐसा ही है। अब यह तो सुबह जाकर पता चलेगा कि मैं कितना सही हूं।
परमार- तो सुबह कहां जाना है सर?
भौमिक- परमार सुबह क्यों अभी चलते हैं।
परमार- सर इस समय। अब तो काफी देर हो चुकी हैं।
भौमिक- परमार थोड़ी देर और सही परमार। तुम एक काम करो गुलाबगंज के टॉवर तक चलो।
परमार- गुलाबगंज के टॉवर पर?
भौमिक- हां, परमार। देखो ये उड़ने की राह मतलब एयरपोर्ट रोड। मैं भी एक ऐसा गुलाब हूं, जो खुश्बू नहीं रखता मतलब गुलाब गंज और यहां वक्त कभी थमता नहीं। मतलब टॉवर जहां की घड़ी कभी बंद नहीं होती और गुलाबगंज का बाजार भी कभी बंद नहीं होता है।
परमार- वाह सर मान गए। आपने तो पहेली का हल निकाल ही लिया।
भौमिक- तुम बस जल्दी से वहां चलो। मुझे लग रहा है कि वहां हमारा एक और खत इंतजार कर रहा है।
कुछ ही देर में दोनों गुलाबगंज पहुंच जाते हैं और वहां टॉवर के आसपास खत को तलाशना शुरू कर देते हैं। वहां उन्हें कुछ नजर नहीं आता है, पर भौमिक सोचता है कि उसके अनुसार तो अगला खत यही होना चाहिए। क्या चैलेंजर ने अब तक खत यहां रखा नहीं है? क्या उसे ऐसा लग रहा था कि मैं उसकी पहेली का जल्दी हल नहीं निकला पाउंगा, इस कारण उसने अब तक यहां कोई खत नहीं छोड़ा है? दूसरी ओर परमार भी वहां खत को खोज रहा था। तभी वहां एक रेहड़ी वाला आता है।
रेहड़ी वाला- साहब शायद जो खोज रहे हैं, वह मेरे पास है।
भौमिक- तुम्हारे पास?
रेहड़ी वाला- हां, शायद आप यह खत खोज रहे हैं ना?
भौमिक- हां, पर ये तुम्हारे पास कैसे आया।
रेहड़ी वाला- पता नहीं साहब। मैं तो यहां चाट बनाता हूं। कई लोग आते हैं और प्लेट कहीं भी रखकर चले जाते हैं। अभी थोड़ी देर पहले यहां से सारी प्लेट उठा रहा था तो एक प्लेट पर यह खत चिपका हुआ था। इस पर एसपी लिखा हुआ था, तो मैंने रख लिया था। आपको देखा तो देने के लिए आ गया।
भौमिक- ओके कोई बात नहीं। (भौमिक उसे 500 रूपए देता है और फिर से अपनी कार में आ जाता है।)
भौमिक वो खत खोलता है और उसे पढ़ने लगता है।
डियर एसीपी,
जानकर अच्छा लगा कि तुम अपने दिमाग का बखूबी इस्तेमाल करते हो। पहले मुझे लगा था कि तुम शायद आज यहां नहीं पहुंच पाओगे, पर तुम पहुंच गए हो और यह खत भी पढ़ रहे हो। चलो खैर कोई बात नहीं। अच्छा हुआ कि तुम आ गए। वैसे अब तुम्हारे लिए एक काम और करने वाला हूं। जिससे तुम्हारी परेशानी कुछ कम हो जाएगी और तुम्हें मेरे पीछे आने में मजा भी आएगा। क्योंकि अब मैं तुम्हें वो बताने वाला हूं, जो मैं करने वाला हूं। अब तुम मुझे कैसे रोकोगे ये तुम सोच लेना।
मैं इस शहर से एक अपहरण करने वाला हूं। और अपहरण एक ऐसे इंसान का होगा जिससे पूरी मुंबई हिल जाएगी। उसके अपहरण से न सिर्फ तुम्हारी पुलिस फोर्स बल्कि राजनेता भी चिल्लाने लग जाएंगे। इसलिए अब अपना हर कदम थोड़ा सोचकर उठाना एसीपी। किसका अपहरण होगा ये पता लगाना तुम्हारा काम है, पर हां तुम्हारी मदद मैं ऐसे कर सकता हूं कि मैं तुम्हें उसके बारे में कुछ हिंट दे दूंगा। अब नाम जानने के लिए तुम्हें मेरे अगले खत का थोड़ा सा इंतजार करना होगा, क्योंकि अपने काम के लिए मैं कुछ दिन शहर से बाहर जा रहा हूं। जब आउंगा तो तुम्हें फिर से ऐसा ही एक खत तुम्हारे ऑफिस में पहुंचा दूंगा।
चैलेंजर
यहां से परमार भौमिक को उसके घर पर छोड़कर अपने घर के लिए निकल जाता है। इधर घर पहुंचने के बाद भी भौमिक के दिमाग में चैलेंजर के खत की बातें ही घूम रही थी। वह अब यह सोचने लगा था कि मुंबई शहर में आखिर ऐसा कौन है, जिसके अपहरण से न सिर्फ पुलिस विभाग बल्कि राजनीति से जुड़े लोग भी मैदान में उतर जाएंगे। अब वह मुंबई शहर के नामचीन लोगों की लिस्ट बनाने के लिए बैठ जाता है। उसने शहर के लगभग 100 से भी अधिक लोगों की लिस्ट तैयार कर ली थी, जो मुंबई में अपना एक रसूख रखते हैं। इनमें कुछ फिल्म से जुड़े लोग, राजनेता और बिजनेसमैन के नाम शामिल थे। लिस्ट तैयार करने के बाद अब वह यह भी सोच रहा था कि एक साथ इतने लोगों की गतिविधि पर नजर रखना संभव नहीं हैं। ऐसे में अब इस लिस्ट में उसे कुछ ऐसे नाम निकालने होंगे जो फिलहाल की स्थिति में सक्रिय हो या हो सकते हैं। ऐसा सोचने के बाद भी उसके पास करीब 30 लोगों के नाम थे। हालांकि अब भौमिक को सोचना था कि इन तीस लोगों से मुलाकात कर वह इन्हें आगाह कर सकता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षा भी दे सकता है। इसके साथ ही उसके दिमाग में यह भी चल रहा था कि चैलेंजर जिसका भी अपहरण करने वाला है, वह इन तीस लोगों में से ही कोई होना चाहिए। ऐसा सोचते हुए ही उसकी नींद लग जाती है। अगले दिन सुबह उठकर तैयार होकर भौमिक वह लिस्ट और चैलेंजर के तीनों खत लेकर अपने ऑफिस के लिए निकल जाता है। ऑफिस में वह अपने केबिन में बैठकर एक बार फिर से अपनी तैयार की हुई लिस्ट को देखने लगता है। कुछ ही देर में परमार भी वहां पहुंच जाता है और भौमिक के केबिन में आकर बैठ जाता है। भौमिक अब भी अपने काम में ही लगा था।









Superb
ReplyDeleteVery nice story
ReplyDeleteintersting....superbb
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