एक ही सुराग 

पार्ट 1


मुंबई-गोवा हाइवे पर एक हवेली में एक डॉक्टर और उसके परिवार की हत्या के मामले को भौमिक ने सुलझा लिया था। बहुत जल्द ही उसे केस का खुलाना करने के कारण उसे पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका था। उसका केस सॉल्व करने का रिकॉर्ड अब भी बरकरार था। उस केस से आगे बढ़ते हुए भौमिक अपने ऑफिस में बैठा कुछ फाइल देख रहा था और परमार भी उसके साथ उसके केबिन में ही था। दोनों कुछ पुराने अनसुलझे केस को लेकर बात कर रहे थे। भौमिक केस को लेकर परमार से जानकारी भी ले रहा था और परमार उसे केस की डिटेल के साथ ही केस में हुई अब तक की जांच के बारे में बताता जा रहा था। इसके साथ ही किसी केस में किसी अपराधी की डिटेल भी भौमिक परमार से ले रहा था। परमार काफी पुराना व्यक्ति था इस कारण उसे अधिकतर केस और उनकी जांच के बारे में जानकारी थी। मुंबई में ही रहते हुए वह काफी अपराधियों और उनके केस और उनके बारे में भी खासी जानकारी रखता था। अगर कहा जाए कि परमार का नेटवर्क काफी मजबूत था और वह कई ऐसी जानकारी अपने भरोसेमंद लोगों से प्राप्त कर लिया करता था, जो कि किसी भी केस के लिए जरूरी होती थी। इनमें कई बार वह अपराधियों के छिपने के साथ से लेकर अपराध में उपयोग में लाए गए हथियार और सुपारी कीलिंग जैसे अपराधों की जानकारी भी निकाल लिया करता था। भौमिक और परमार को उस केबिन में करीब 2 घंटे से ज्यादा का समय हो चुका था। तभी भौमिक ने परमार को कॉफी के लिए कहा। पहले वे दोनों बाहर जाकर कॉफी पीने का मन बना रहे थे, परंतु भौमिक ने बाद में परमार से कहा कि यहीं काफी बुलवा लेते है परमार इस पर परमार भी यस सर कहकर केबिन के बाहर जाता है और बाहर खड़े एक सिपाही को कॉफी लाने का कहकर फिर से केबिन में आ जाता है। कुछ ही देर में एक सिपाही दोनों के लिए कॉफी लेकर केबिन में आता है और कॉफी टेबल पर रखकर चले जाता है। दोनों अपनी कॉफी पी ही रहे होते हैं कि फिर से वहीं सिपाही भौमिक से अंदर आने की इजाजत मांगता है, भौमिक उसे अंदर आने को कहता है। सिपाही के हाथ में एक लिफाफा था, जो वह भौमिक को देते हुए कहता है कि सर यह लिफाफा बाहर पड़ा था और इस पर आपका नाम लिखा था। भौमिक उससे वो लिफाफा लेता है और कहता है कि यह कौन सा तरीका है लिफाफा पहुंचाने का कि बाहर फेंककर चला गया। सिपाही कहता है यह तो पता नहीं सर, अभी जब बाहर गया आपको कॉफी देकर तो इस पर नजर पड़ी। यह एक पत्थर से दबा हुआ रखा था। पता नहीं कब से रखा हुआ है? भौमिक हां में सिर हिलाता है और वह सिपाही फिर से केबिन के बाहर चले जाता है। भौमिक वह लिफाफा टेबल पर रखता है और कहता है कि पहले कॉफी खत्म की जाए उसके बाद इस लिफाफे को खोलेंगे, पता नहीं क्या हो इसमें? और हम अपनी कॉफी भी ठीक से नहीं पी सके। और फिर परमार और भौमिक दोनों हंस पड़ते हैं। कॉफी पीने के बाद भौमिक वह लिफाफा खोलता है तो उसमें उसे एक खत मिलता है। खत पढ़ते हुए भौमिक का चेहरा गंभीर हो जाता है। परमार उसकी ओर देखकर भांप जाता है कि कुछ गड़बड़ है और खत में तभी सर अचानक इतने गंभीर हो गए हैं। भौमिक वो खत पढ़कर टेबल पर रख देता है तभी परमार उससे पूछता है कि सर क्या हुआ? ऐसा क्या लिखा है खत में कि आप इतने गंभीर हो गए। भौमिक परमार से कहता है कि तुम खुद ही पढ़ लो परमार। परमार वो खत उठाता है और पढ़ना शुरू करता है।

डियर एसीपी साहब, 
सबसे पहले तो मैं आपको बधाई देना चाहता हूं कि आपने डॉक्टर और उसके परिवार की हत्या का केस बहुत जल्दी ही सॉल्व कर लिया। वाकई इतने उलझे हुए केस को इतनी जल्दी सिर्फ आप ही सॉल्व कर सकते थे। वैसे आपके हाथ में आए सभी केस आपने सॉल्व किए हैं, परंतु यह केस वाकई में बहुत अलग था और आपने अपनी समझबुझ से आखिरकार उसे सॉल्व कर ही दिया। वैसे खत पढ़ते हुए आपके मन में सवाल तो आ रहा होगा कि खत लिखने वाला मैं कौन हूं और यदि बधाई ही देना थी तो सामने आकर क्यों नहीं दी? मेरा नाम जानने के लिए आपने खत लिखने वाला का नाम भी देखा था, पर वहां तो लिखा ही नहीं है। वैसे मेरा नाम जानना जरूरी नहीं है, जरूरी यह है कि यह खत मैंने लिखा क्यों है? तो बिना देर किए मैं आपको बता देता हूं कि यह खत मैंने लिखा क्यों है? तो एसीपी साहब कुछ दिनों से आपका शहर बहुत शांत है जो मुझे अच्छा नहीं लग रहा है। अखबारों में भी कोई सुर्खियां नहीं आ रही है। इसलिए अब मैं आपके शहर को कुछ अशांत करने जा रहा हूं। अब आपके शहर में कुछ ऐसा होने वाला है, जिससे पूरा मुंबई हिल जाएगा। मैं इस शहर में कुछ ऐसा करूंगा कि आप भी मुझ तक पहुंच नहीं पाएंगे। आप इसे चुनौती के रूप में भी ले सकते हैं, वैसे लेना क्या मैं तो खुद आपको चैलेंज करता हूं अगर मुझे रोक सकते हो तो रोक लो। 
एक बात और आपको बता देना चाहता हूं, मैं जो करने वाला हूं उसके लिए मैं आपको एक महीने का समय देता हूं। इस एक महीने में अगर आप मेरी पहचान कर सको तो बहुत अच्छा होगा, क्योंकि यदि आप मुझ तक पहुंच गए तो फिर आपका शहर शांत ही रहने वाला है और अगर नहीं पहुंच पाए तो कुछ तो होगा ही। वैसे आपकी कुछ मुश्किल मैं आसान भी किए देता हूं। इस एक महीने के दौरान मैं अपने उस काम के सिलसिले में जहां भी जाउंगा उसकी खबर आप तक पहुंचा दूंगा, अगर आप मुझे पहचान सके और यह आपके लिए अच्छा होगा। एक महीने के बाद जो भी शहर में होगा उसकी भी जानकारी आपको देता रहूंगा ताकि आप मेरा चैलेंज पूरा कर सके। अब देखते है कि आप मुझ तक पहुंचते हैं या मैं अपने काम को अंजाम देकर निकल जाउंगा और आप मेरा कुछ नहीं कर पाएंगे। अब आप मुझे किस नाम से बुलाएंगे यह तो मैं नहीं जानता पर हां मैं खुद को एक नाम दे रहा हूं वो भी सिर्फ आपके लिए। 
आपका अपना चैलेंजर


परमार- सर, कौन है ये, जो आपको चैलेंज कर रहा है? 
भौमिक- अभी तो मुझे भी कुछ नहीं पता है परमार। पर शायद इसका पता जल्द ही लगाना होगा। 
परमार- पर कैसे सर? इसने तो ऐसा कोई पहचान भी नहीं बताई है। 
भौमिक- हां, पर बता देगा। 
परमार- कैसे सर? ये लेटर भी उसने कम्प्यूटर पर टाइप कर भेजा है। राइटिंग से भी इसकी पहचान नहीं हो सकती है। लिफाफे पर भी कुछ नहीं लिखा है, सिर्फ आपके नाम की चिट लगी है और कुछ भी नहीं है। 
भौमिक- परेशान क्यों हो रहे हो परमार? उसने हमें एक महीने का समय दिया है ना और ये भी कहा कि उसे पकड़ने के लिए वह खुद ही हमें सुराग देगा। जब सुराग देगा तब हम उसे दबोच लेंगे। 
परमार- पर सर क्या आपको लगता है कि ये लेटर सही है? मतलब क्या वाकई एक महीने में बाद शहर में कुछ होने वाला है? 
भौमिक- ये तो वक्त ही बताएगा परमार। पर एक बात जो मुझे लग रही है वह यह है कि जिस तरह से इसने लेटर लिखा है यह अपने आप को बहुत चालाक समझता है। यह शायद खुद को साबित करना चाहता है। इसलिए इसने हमें सुराग देने के साथ ही उसे पकड़ने का चैलेंज दिया है। 
परमार- शायद ये हो सकता है सर। 
भौमिक- ये भी हो सकता है परमार कि एक महीने बाद कुछ हो ही नही। ये बस हमें अपने पीछे घुमाना चाहता है। 

तभी भौमिक के ऑफिस के फोन की घंटी बजती है और भौमिक फोन उठाता है। दूसरी ओर से किसी अखबार से फोन था और वे लोग उसे चैलेंज के बारे में ही भौमिक से पूछ रहे थे। भौमिक जांच करने की बात कहकर फोन रख देता है। 
भौमिक- अब मुझे लग रहा है कि ये इंसान जो भी है ये कुछ करने वाला है। 
परमार- ऐसा क्यों लग रहा है सर आपको? 
भौमिक- तुमने देखा नहीं परमार। ऐसा ही लेटर उसने सारी मीडिया को भी पहुंचाया है। वो हमें सीधे चैलेंज कर रहा है। 
परमार- मैं समझा नहीं सर।
भौमिक- परमार अगर इसे कुछ नहीं करना होता तो यह लेटर सिर्फ हमारे पास आता ताकि हम परेशान हो। पर इसने ऐसा ही लेटर मीडिया को भी पहुंचाया है, इसका मतलब यह है कि यह खुद को साबित करने की कोशिश कर रहा है। मीडिया के सामने यह हीरो बनना चाहता है। 
परमार- फिर तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है सर। 
भौमिक- हां, परमार। इसलिए हमें इसे सीरियस लेना होगा। इसके साथ ही इसका दूसरा लेटर या जैसा इसने कहा कि सुराग देगा उस पर हमें तत्काल एक्शन भी लेना होगा। 
परमार- पर सर इसका इरादा क्या होगा? ये करना चाहता है? 
भौमिक- ये तो अभी कहना मुश्किल है परमार, पर लगता है जो कुछ भी होगा बड़ा होगा। या कुछ ऐसा होगा, जिससे शहर को प्रभावित किया जा सके। 

Comments/disqusion
6 comments

  1. हर स्टोरी में इस प्रकार उलझ जाता हूं कि जो अंत मैं सोचता हूं उसके वितरीत ही होता है। कहानी में अच्छी बात यही है कि राइटर आपको घुमा सके, यह राइटर का शानदार प्रयोग है और लेखनी पर बेहतर पकड़ है।

    ReplyDelete
  2. fir se naya secret nayi intersting kahani ek naye suspense ke sath..... welcome

    ReplyDelete