ये भी तो तेरी एक ख्वाहिश है
ये भी तो तेरी एक ख्वाहिश है

मेरी हसरतों का क्या, जैसे कोई शबनम है,
आज कुछ ज्यादा है, तो कल कुछ कम है।
रात के साये में पली, सुबह खत्म हो जाती है, 
मेरी ख्वाहिश भी तेरी ख्वाहिश से दब जाती है।।

मैंने तो चाहा है हर पल साथ तेरा हो, 
पर तुझे मंजूर नहीं मेरा सपना पूरा हो।
बिखर जाने दे एक सपना ही तो टूटेगा, 
क्या होगा गर एक और अपना छुटेगा।।

हमने बनाई, बसाई थी एक छोटी दुनियां, 
जिसमें हम दोनों के बीच न थी कोई दुरियां।
तो क्या जो तुने तोड़ दी कसमें मिटा दी हे यादें
तो क्या जो तू भूल गई, प्यार भरे कुछ वादें।।

मैंने समझा था मैं और तुम अब हम है, 
तुमने ही कहा हम नहीं मैं और तुम है।
अब जब भी आती है याद तेरी आंखें नम है,
मन कुछ भारी और दिल में तेरा ही गम है।।

गर तुम्हें लगे मैं भूल गया बस आवाज लगाना, 
तुम्हें जो आए याद तो फिर वापस चली आना।
मंजिल हो तुम मेरी, फिर भी राह भटका रहे हो, 
छोड़ रहे हो तुम, इल्जाम मुझ पर लगा रहे हो।।

अच्छा क्या करोगे तुम जब मेरी याद सताएंगी,
चिखोगी, चिल्लाओगी या कुछ अश्क बहाओगी।
मैं तो चला भी जाउंगा दूर, तुमसे बहुत ही दूर, 
क्या एक बार भी सोचोगी तुम, क्या था मेरा कसूर।।

अब और अपनी शख्सियत को नीलाम नहीं कर सकता, 
बहुत कहे शब्द अब उन्हें बेजान नहीं कर सकता।
गर होता तुम्हें कुछ लिहाज तो यूं रूसवा नहीं करते, 
गर होता तुम्हें भी कुछ प्यार तो यूं इंतजार नहीं करते।।

तुम तो कह चुके हो, मैं भी अलविदा करता हूं,
अब ना रोकना ना टोकना, मैं तुमसे दूर चलता हूं।
मैं चला जाउं तुझसे दूर, ये तेरी एक गुजारिश है, 
मैं रहूं तन्हां, ये भी तो तेरी एक ख्वाहिश है।।

पहली मुलाकात का वो रूमानी सा पल
पहली मुलाकात का वो रूमानी सा पल


पहली मुलाकात का वो रूमानी सा पल, 
बरसों बाद भी लगता है ना बीता हो कल।
वो ठंडी बयार, फिर वो मौसम की फुहार, 
फिर लगता था जैसे मुझे हो रहा है प्यार।।

बस एक शिकायत हो रही थी दिल से, 
थम क्यों नहीं जाता ये वक्त धीरे से।
बस जीना चाहता उस वक्त को हर पल में, 
एक सुनहरा लम्हा है वो मेरे बीते कल में।।

कुछ डरी, कुछ सहमी खड़ी भीग रही थी वो, 
आज शायद मेरा ही इंतजार कर रही थी वो।
भीगते बालों से लगातार वो गिरते छोटे से मोती, 
काश कि समेट लेता गर उसकी इजाजत होती।।

दिल से तो जानती थी, पर थी कुछ अंजान सी, 
आंखों में हया और दिल की गली सुनसान थी।
वो चुप, मैं भी खामोश, फिर भी कितना शोर था, 
उस पर से मौसम भी कितना बेईमान और था।।

हाय रे मेरी मजबूरी भी मुझ पर क्या सितम ढाती है, 
शब्द भी लिखता हूं तो आंखों में तस्वीर रह जाती है।
उस पल को फिर जीने को मरना मुझे गवारा है,
कोई नहीं छिनेगा हमसे, वो पल बस हमारा है।।

उस लम्हें को कैद कर एक तस्वीर बनाना चाहता हूं,
गर जीना है मुझको, उस पल में ही जीना चाहता हूं।
उस खामोशी की बातों को फिर से सुनना चाहता हूं, 
फिर बरसे ये मौसम, मैं फिर से भीगना चाहता हूं।।

फिर तेरा हाथ पकड़ कर राहों में चलना चाहता हूं, 
तेरे लिए बस तेरे लिए रातों को जीना चाहता हूं।
तेरे बातों में जिक्र हो जिसका वो रिश्ता बनना चाहता हूं, 
उसे लम्हें के हर लम्हें का, मैं वो लम्हा बनना चाहता हूं।।

फिर मन करता है ले जाउं तुम्हें एक नई दुनिया में, 
चलो हम खो जाए फिर से एक प्यार की दुनिया में।
ना कोई गम ना कोई लम्हा ना कोई तुम्हें परेशान करें, 
आओ खो जाए हम, फिर बस एक दूजे को प्यार करें।।

चलो, आज हम कुछ याद करते हैं
चलो, आज हम कुछ याद करते हैं 



कहते हैं यादें अक्सर मन को भिगो कर जाती हैं, 
ना वक्त ना जज्बात देखती है बस चली आती हैं।
यादों से ही तो दिल खुश और होंठ मुस्कुराते हैं, 
चलो आज हम फिर खोकर कुछ याद करते हैं।। 

कैसा वो एक अजनबी सा अहसास हुआ करता था, 
जब अचानक हाथ से हाथ स्पर्श हुआ करता था।
वक्त का पहिया भी कैसे थम जाया करता था, 
जब मैं तेरी आंखों में एक टक देखा करता था।।

फिर तेरा एक सवाल और मेरा एक जबाव होता था, 
आंखों में हजारों बातें और बस दिल खामोश होता था।
जब लगाता था तुम्हें गले वो भी क्या सुकुन होता था, 
अचानक तन्हाई में दोनों के दिलों का शोर होता था।।

इजहारे ए इश्क में तब चंद अल्फाज ही काफी होते थे, 
जब तुम, मैं और हमारे दिल एक दूजे के पास होते थे।
ठिठुरती ठंड में, ख्यालों में तेरा मुझमें सिमट जाना, 
इत्तेफाक ही है कि ये सब बस ख्याल ही होते थे।।

कितने ही सपने आंखों में सजने लग जाते थे, 
जाने कितने ही दिन सिर्फ बातों में कट जाते थे।
रात होती तो मैं अक्सर तेरे लिए गुनगुनाता था, 
मेरे गीत भी जाने कैसे मेरे जज्बात बन जाते थे।।

कभी तेरा यूं ही रूठ जाना और मनाना याद है
बीता है कुछ वक़्त, मुझे अब भी तेरी हर बात याद है।
मेरे साथ की बात से ही तो तुम चहक उठती थी, 
कहती थी हम मिले हैं, जरूर कुछ तो कोई बात है।।

तेरे लिए जीना मेरी जिंदगी का एक बहाना था, 
तेरी खुशी के लिए मेरा रोना मुझे गवारा था।
तुम भी तो अक्सर मुझे गले से लगा लेती थी, 
कभी एक-दूजे का होना ही तो प्यार हमारा था।।

दिन हो या रात हो, हम तेरा इंतजार करते हैं, 
हम तो अब भी सिर्फ और सिर्फ तुमसे प्यार है।
ये कोई ख्याल नहीं, हम फिर से इजहार करते हैं, 
चलो आज हम फिर खोकर कुछ याद करते हैं।। 

सौदा  पार्ट 6

सौदा 

पार्ट 6


कार्तिक के ऑफिस में पहुंचते ही वह उसे शक के आधार पर हिरासत में ले लेता है। कार्तिक को समझ नहीं आता है कि वह ऐसा क्यों कर रहा है? जबकि वह बार-बार कह रहा है कि उसने ऋषभ की हत्या नहीं की है। अजय कार्तिक को अपने साथ ले जाता है और फिर अपने ऑफिस में आकर उससे पूछताछ शुरू करता है। 
अजय- तो तुम्हारा कहना है कि तुमने ऋषभ की हत्या नहीं की है।
कार्तिक- एक बार नहीं 1000 बार भी यही कहूंगा। 
अजय- तुमने बताया था कि उस दिन तुम ऑफिस से बाहर गए थे तो ऑफिस के ही एक क्लाइंट से मिले थे? जिसका नाम पता भी तुमने मुझे दिया था। 
कार्तिक- हां, मिला था। तभी तो नाम पता दिया था। 
अजय- तो मिस्टर कार्तिक आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि उस व्यक्ति से हमने बात की है और उसका कहना है कि कम से कम एक महीने से आपकी और उसकी कोई मुलाकात नहीं हुई है।

सौदा पार्ट 1 यहां पढ़े  

कार्तिक- ऐसा कैसे हो सकता है? मैं मिला था उससे वह झूठ बोल रहा है। 
अजय- वो मुझे नहीं पता पर उसने हमें जो बयान दिया है उसके आधार पर झूठ आप बोल रहे हैं। 
कार्तिक- इंस्पेक्टर मैं फिर कहूंगा मैंने ऋषभ की हत्या नहीं की है। 
अजय- अभी तो सारे सबूत आपके खिलाफ है। इस कारण मैं आपकी कोई मदद नहीं कर सकता। आप कोई अच्छा वकील कर लीजिए, जो शायद आपको कोर्ट में बचा सके। 
करीब दो दिनों तक कार्तिक को हिरासत में रखा जाता है और कई बार उससे पूछताछ भी होती है। हर बार वह ऋषभ की हत्या से मना करता है परंतु इंस्पेक्टर अजय इस बात को मानता ही नहीं है। अब कार्तिक सोचता है कि शायद अजय को पूरा सच बता देना चाहिए। उस साये ने भी कहा था कि अगर मेरी कोई मदद कर सकता है तो इंस्पेक्टर अजय ही है। कार्तिक मन ही मन तय कर लेता है कि अब जब भी अजय आएगा तो वह उसे पूरा सच बता देगा। 
कार्तिक- इंस्पेक्टर मैं आपको कुछ बताना चाहता हूं। अगर आप मेरी बातों पर यकीन करें तो? 

सौदा पार्ट 2 यहां पढ़े 

अजय- मिस्टर कार्तिक अगर आप कहेंगे कि कत्ल आपने ही किया है तो मैं आपकी बात पर यकीन कर लूंगा। इसके अलावा आप क्या बताना चाहते है? 
कार्तिक- ये जो कुछ भी हो रहा है उसके कारण हो रहा है। 
अजय- मतलब इस कत्ल में आपके साथ कोई और भी है? 
कार्तिक- इंस्पेक्टर कत्ल तो मैंने नहीं किया है, पर मुझ पर जो इल्जाम आया है उसमें कोई और भी है मेरे साथ। 
सौदा पार्ट 3 यहां पढ़े 

अजय- कौन है वो। और इल्जाम नहीं कत्ल आपने ही किया है। 
कार्तिक- आप किस्मत को मानते हैं इंस्पेक्टर? 
अजय- कभी-कभी मानता हूं, पर अपनी मेहनत पर अधिक यकीन करता हूं। पर ये क्या सवाल है? 
कार्तिक- इंस्पेक्टर क्या आपको पिछले कुछ दिनों में ऐसा कोई मिला था, जिसने आपको किस्मत बदलने का ऑफर दिया हो? 
अजय- कुछ चौंकते हुए ये तुम्हें कैसे पता चला कार्तिक? 
कार्तिक- सब बताउंगा आपको, पर पहले आप मेरे सवाल का जवाब दीजिए। 
अजय- हां मिला था। रात को एक साया सा। उसने मुझसे बात भी की। पर जब मैं खोजने निकला तो वहां कोई नहीं था। 
कार्तिक- बिल्कुल ऐसा मेरे साथ भी हुआ है। मुझे भी एक साये ने मेरी किस्मत बदलने का ऑफर दिया था। मैंने उसे मान भी लिया था। 
अजय- हां, मैंने भी मान लिया था। पर तुम्हारे इस कत्ल का इन सब बातों से क्या लेना-देना। 
कार्तिक- इंस्पेक्टर तीन दिन पहले वह साया मुझे फिर मिला था। उसने मुझे बताया कि यह सब किस्मत बदलने के कारण ही हुआ है। 
अजय- मैं नहीं मानता इन बातों को। मैंने तो बस उस साये को चेक करने के लिए ऐसा किया था।

सौदा पार्ट 4 यहां पढ़े  

कार्तिक- मैंने भी। पर मुझे नहीं पता कि वह सच में मेरी किस्मत को बदल देगा। वैंसे आपने अपनी किसमत किससे बदली है? 
अजय- कुछ झेपते हुए मैंने किसी से अपनी किस्मत नहीं बदली है। मुझे तो बस तुम्हें कातिल साबित करना है। और वो मैं करके रहूंगा। 
कार्तिक- पर क्या आपको पता है कि अगर मैंने अपनी किस्मत नहीं बदली होती तो आज ऋषभ की जगह किसका कत्ल होता? 
अजय- एक बार फिर से चौंकते हुए किसका कत्ल होता। और क्या कहना चाह रहे हो तुम? 
कार्तिक- आपका कत्ल होता। अगर मैं अपनी किस्मत नहीं बदलता तो आपका कत्ल होता इंस्पेक्टर। 
अजय- क्या मजाक है ये? तुम्हें लगता है कि तुम कुछ भी बोलोगे और मैं मान लूंगा। नहीं ऐसा नहीं होगा।
कार्तिक- मैं जानता था आप मेरी बात पर यकीन नहीं करेंगे। मैं आपको अब पूरी बात विस्तार से बताता हूं। 

कार्तिक फिर अपनी बात कहना शुरू करता है कि किस तरह वह अपनी परिस्थितियों से परेशान हो चुका था। वह हर हाल में अपनी सभी परेशानियों का हल चाह रहा था।  फिर उसने साक्षी से लड़कर बाजार जाने, बाजार में भूखे बच्चों के मिलने, उनके द्वारा किस्मत बदलने और फिर रात को उस साये के आने की बात बताई। साथ ही साये से सौदा करने के बारे में भी उसने अजय को पूरी बात बताई। फिर उसने यह भी बताया कि कैसे उसे अचानक प्रमोशन मिला और कैसे उसकी परेशानियां लगभग खत्म हो गई। फिर ऋषभ की हत्या होना और अजय का उस पर शक करना। इसके बाद साये का फिर आना और उसे बताना कि अजय ही उसकी इस परेशानी से निकलने में मदद कर सकता है। कार्तिक की पूरी बात सुनने के बाद अजय कुछ देर के लिए सोचने लगता है। 
अजय-मैं तुम्हारी इन बातों पर यकीन कर सकता हूं पर कोर्ट में इसे साबित नहीं किया जा सकता है। वैसे हां यह सच है कि मैंने भी उस साये से एक ऐसा ही सौदा किया हैं।
कार्तिक- तो फिर आप यह जानते होंगे कि आपकी किस्मत किससे बदली गई है? 
अजय- हां, जानता हूं। 
कार्तिक- जैंसे मेरी किस्मत ऋषभ से बदली है और ऋषभ की किसी ओर से। साये ने जैसा मुझे बताया था उसके अनुसार हत्या आपकी होना थी और इल्जाम ऋषभ पर आना था। अब हमें दो काम करना है सर कि आपकी किस्मत जिससे बदली गई है हमें उसके बारे में पता करना होगा और साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि ऋषभ की किस्मत आपसे बदली गई थी, तो आपका ऐसा कौन सा दुश्मन है जो ऋषभ को भी जानता है और आपकी हत्या कर ऋषभ को फंसा सकता था। 
अजय- हां, शायद तुम सच कर रहे हो। पर मेरे साथ एक प्रॉब्लम और है।

सौदा पार्ट 5 यहां पढ़े  

कार्तिक- वो क्या सर। 
अजय- यही कि मैंने जिससे अपनी किस्मत बदली है उसके बारे में कुछ भी पता करना मतलब अपने लिए परेशानियां खड़ी करना है। अगर उसे जरा भी पता चल गया तो शायद हम दोनों ही इस दुनियां में ना रहें। 
कार्तिक- ऐसा कौन है सर जो आपको भी मार सकता है। मेरा मतलब है कि पुलिस इंस्पेक्टर पर हमला कर सकता है?
अजय- विराज चौहान। 
कार्तिक भी यह नाम सुनकर चौंक जाता है। उसके बाद वह सोचने लगता है कि अब शायद उसका बच पाना मुश्किल ही है। इससे तो अच्छा है कि वह अपना जुर्म कबूल कर ले और जेल चला जाए। कम से कम वहां जिंदा तो रह सकता हूं। इंस्पेक्टर की मदद लेकर खुद को बेगुनाह साबित करना चाहा तो जान भी जा सकती है। 

एक सौदा करते हैं
एक सौदा करते हैं 

चलो, आज हम दोनों एक सौदा करते हैं, 
अब ना तुम करना कभी मुझे याद।
और ना ही मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा, 
चलो आज हम दोनों ये वादा करते हैं।।

अच्छा सुनो, ले जाओ अपनी सारी यादें, 
अपनी कुछ कसमें, अपने कुछ वादें।
बस दे दो मेरे वो पल, जो सोच में बीते है, 
मेरे वक्त से हम तेरी यादें बदल लेते हैं।।

ले जाओ अपने प्यार की वो सारी निशानियां, 
मिटा दो दिल से मेरे तुम्हारी सारी कहानियां।
तू खुश है तो हम तन्हाई का जहर भी पीते है, 
तुम कहना हमसे दूर रहकर खुशी से जीते हैं।।

बोलो मेरे अश्कों की कीमत भला क्या होगी, 
तेरी खुशी की कीमत बस मेरी खुशी ही होगी।
तुम रहना खुश, बहने दे गर अश्क मेरे बहते है,
तेरे लिए ये समझौता भी चल हम कर लेते हैं।।

अच्छा सुनो, कभी हमारा वो रूठना, वो मनाना, 
कभी लड़ना तो कभी झगड़ना भी अभी बाकि है। 
इनका हिसाब तुम बोलो हम कैसे करते हैं, 
मैं तो कहूंगा हम बस एक दूजे को बस माफ करते हैं।।

गले से लगाकर तुम्हें मैं हुआ हूं बहुत खुश, 
बोलो तुम उस खुशी को कैसे ले जाओगी।
उस पल का अहसास हम आज भी करते हैं, 
तुम दो इजाजत वो अहसास हम अपने पास ही रखते हैं।।

यूं तो अभी बदलने को बहुत कुछ बाकि है, 
तेरे लिए जो जागा उन रातों का हिसाब बाकि है।
पर छोड़ों आज हम एक और भूल करते हैं, 
गले लगाकर हम एक दूसरे को अलविदा करते हैं।।

ऐसा ही एक सौदा हमने पहले भी किया था,
जब कभी दिल के बदले हमने दिल दिया था।
तेरी खुशी को हम अपने आंसुओं से बदलते हैं, 
चलो, आज हम दोनों फिर एक सौदा करते हैं।।

उलझन

उलझन

जब भी बैठता हूं अकेला, हजारों शब्द अंर्तमन में उठते है, 
जुबां तक आते-आते अक्सर लफ्ज विद्रोह कर उठते हैं।
खामोश मन को चीर डालती है शब्दों की यह वेदना, 
एक गूंज से पहले ही शब्द खो देते हैं अपनी चेतना।।

कहूंगा तो बहुत शोर हो जाएगा बाहर और अंर्त में, 
ना कहूंगा तो गिर जाउंगा और भी अपने ही गर्त में।
तोड़ दूं खामोशी तो साथ टूटता एक वादा है, 
चुप रहूं कैसे इन शब्दों को बोझ कुछ ज्यादा है।। 

शायद अब भी उसे यकीं है मैं वादा निभाउंगा, 
जो कहा था कभी उससे, वो करके दिखाउंगा।
शायद इसलिए ही तो वो मुझसे बेखबर है, 
वे क्या जाने बेजां शब्दों का हुआ क्या असर है।।

चूभती खामोशी में यूं तो कोई कमी ना है, 
लफ्ज की हुंकार के साथ कैसे जीना है।
इक पल खामोशी, एक पल शोर होता है, 
कभी कभी मेरे अंदर कोई और होता है।। 

ये सुबह, दिन, शाम और ये रात होती है, 
वो सुबह, दिन, शाम वो रात कहां होती है। 
लगता है मर गए है शब्द अब दफनाना होगा, 
बीता वक्त अब इस उलझन को सुलझाना होगा।।

फिर उसका कोई ख्याल मुझे यूं ही बांध जाता है, 
एक सुनहरा ख्वाब मेरे पास यूं ही छोड़ जाता है। 
मार दिए शब्द, जा तुझे मैं माफ करता हूं, 
डरता नहीं हूं, बस तुझसे प्यार करता हूं।। 

कह दो तुम कि...

कह दो तुम कि...

अभी दूर हो तो मुंह फेरकर बैठे हो,
कभी तो समझोगे मेरे प्यार को।
जब समझ जाओगे इश्क मेरा, 
पास आने से खुद को रोक नहीं पाओगे।।

क्यों लगता है कि धूप में तुम जल जाओगे, 
सोचना कि हम अंधेरे में भी तेरा साया बन जाएंगे।
कभी मत सोचना कि तुम अकेले तन्हा हो, 
हम तन्हाई में भी तेरी बात बन जाएंगे।।

कभी लगा कि गम में बह रहे आंसू तेरे, 
हम फिर तेरे खुशी के अश्क बन जाएंगे।
कभी भटक गई कोई राह तुमसे तो क्या, 
तेरा हाथ पकड़कर फिर तुझे साथ ले आएंगे।।

कभी रूठ जाओ हमसे तो मत घबरा जाना,
चंद पलों में ही हम तेरी मुस्कान बन जाएंगे।
कभी महसूस करो कि कोई साथ अनोखा, 
हम तेरे सबसे अच्छे दोस्त बन जाएंगें।।

कभी मांगना हाथ उठाकर कोई दुआ खुद की, 
हर हसरत पर तेरी हम तेरी बंदगी बन जाएंगे।
जब लगे कि सूख रहा है जीवन तुम्हारा, 
हमसे कहना हम तेरी शबनम बन जाएंगे। 

चाहे आज दो या चाहो तो कल साथ देना, 
इतना भी ना रूठना कि हमको भूला देना।
कभी लगे कि आज खिलखिलाना है तुम्हें, 
हम तेरे सपनों की दुनियां भी बन जाएंगें।।

बस एक ख्वाहिश रखता हूं मैं भी दिल में,
कोई और नहीं बस तुम रहो मेरे दिल में।
बस एक बार कह दो मुझे कुछ सुनना है, 
कह दो तुम कि एक दिन हम बस तेरे बन जाएंगे।।
सौदा  पार्ट 5

सौदा 

पार्ट 5


अब तक आपने पढ़ा....
कार्तिक एक मध्यमवर्गीय परिवार से जुड़ा है। उसकी जिंदगी में कई परेशानियां है और वह उन परेशानियों से छुटकारा पाना चाहता है। उसके ऑफिस में ऋषभ काम करता है वह उसकी किस्मत को बहुत अच्छा मानता है। वह चाहता भी है कि उसकी किस्मत भी ऋषभ की जैसी होती तो उसके जीवन में कोई परेशानी नहीं होती। ऐसा ही कुछ सोचते हुए वह एक रात सो रहा था, तभी उसे अहसास होता है कि कोई उसके पास है। वहां एक साया था। यह साया उससे किस्मत का सौदा करता है। अगले दिन कार्तिक को प्रमोशन मिल जाता है, जो कि ऋषभ को मिलने वाला था। कार्तिक को लगने लगता है कि उसकी किस्मत ऋषभ से बदल चुकी है। कार्तिक अपने प्रमोशन के साथ काम कर ही रहा होता है कि उसे पता चलता है कि ऋषभ की हत्या हो चुकी है। मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर अजय को उस पर ही शक है। ऑफिस के लोग भी उस पर शक कर रहे हैं। कार्तिक परेशान है कि उसने हत्या नहीं की है फिर भी सभी लोग उस पर ही शक क्यों कर रहे हैं। 
अब आगे...
शाम को खाना खाने के बाद भी कार्तिक के दिमाग में इंस्पेक्टर अजय की ही बात घूम रही थी। वह सोच नहीं पा रहा था कि ऐसा कैसे हो गया? सुबह ही तो वह ऋषभ से मिला था। उसके बाद तो उसने उसे देखा भी नहीं, फिर वह कैसे ऋषभ का कत्ल कर सकता है। ऐसे ही सोचते हुए कार्तिक सो जाता। अगले दिन फिर वह उठकर अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ता हैं। ऑफिस पहुंचते ही उसका सामना एक बार फिर से इंस्पेक्टर अजय से होता है। अजय भी उसे एक बार देखता है उसके बाद कार्तिक अपने केबिन में चला जाता है। अजय भी उसके पीछे कार्तिक के केबिन में पहुंच जाता है। 
कार्तिक- आप यहां? 
अजय- कत्ल की छानबीन के लिए मैं कहीं भी पहुंच सकता हूं। 
कार्तिक- मेरा मतलब है कि आप मेरे केबिन में क्या कर रहे है?
अजय- अभी तो बताया कि कत्ल की छानबीन। 
कार्तिक- मेरे केबिन में क्या मिलेगा आपको? 
अजय- शायद कातिल!
कार्तिक- क्या बकवास है ये? आपको लगता है कि मैंने ऋषभ को मारा है? और भला मैं क्यों मारूंगा उसे? 
अजय- यही तो पता करना है कि अगर आपको ऋषभ को मारना होता तो आप किस वजह से उसे मारते? 
कार्तिक- मैं उसे मारता ही नहीं और न ही मैंने उसे मारा है। 
अजय- अच्छा तो आप कहे और मैं मान लूं? 
कार्तिक- आपको मानना होगा क्योंकि मैंने कोई कत्ल नहीं किया है। 
अजय- अच्छा तो फिर ये बताइए कि ये प्रमोशन आपको कैसे मिल गया? यह प्रमोशन तो ऋषभ को मिलने वाला था? 
कार्तिक- इस सवाल का जवाब मेरे बॉस ज्यादा बेहतर तरीके से दे पाएंगे।
अजय- उनसे भी पूछ लूंगा। आप भी बता देते तो अच्छा होता। 
कार्तिक- मुझे नहीं पता। मुझे भी यही पता था कि यह प्रमोशन ऋषभ को मिलने वाला है। पह एक दिन जब मैं ऑफिस पहुंचा तो बॉस ने मेरे हाथ में यह प्रमोशन लेटर दे दिया। उन्होंने क्या सोचा और प्रमोशन मुझे क्यों दिया मैं नहीं जानता। 
अजय- ठीक है मिस्टर कार्तिक। पर मेरा एक सवाल और है। 
कार्तिक- क्या? 
अजय- कल दोपहर आप ऑफिस से बाहर गए थे। क्या मैं जान सकता हूं कि कहां गए थे और किससे मिले थे? 
कार्तिक- ऑफिस के काम से गया और ऑफिस के एक क्लाइंट से ही मिलने गया था।

अजय- क्या मैं उस क्लाइंट का नाम और पता जान सकता हूं? 
कार्तिक- आप अब भी मुझ पर शक कर रहे हैं? 
अजय-जब तक कातिल पकड़ा नहीं जाता मैं सभी पर शक करूंगा। आप मुझे नाम और पता दीजिए। 
कार्तिक अजय को उस क्लाइंट का नाम और पता दे देता है और अजय एक मुस्कान के साथ कार्तिक को देखकर उसके केबिन से चला जाता है। उसके बाद वह ऑफिस के कुछ लोगों से बात करता है। कार्तिक के केबिन के सामने से निकलते हुए वह एक बार फिर कार्तिक को देखता है और मुस्कुराते हुए ऑफिस से बाहर चला जाता है। कार्तिक फिर सोच में पड़ जाता है कि आखिर उस पर शक क्यों किया जा रहा है। तब वह ऑफिस में ही काम करने वाले अपने दोस्त विनय को बुलाता है। 
कार्तिक- विनय ये इंस्पेक्टर तुम लोगों से क्या बात कर रहा था? 
विनय- वो तुम्हारे और ऋषभ के बारे में ही पूछ रहा था। 
कार्तिक- क्या पूछ रहा था? 
विनय- यही कि तुम्हारे और उसके बीच संबंध कैसे थे? उसे मिलने वाला प्रमोशन आखिर तुम्हें कैसे मिल गया? क्या तुम दोनों के बीच कभी कोई झगड़ा हुआ है? 
कार्तिक- विनय मैंने ऋषभ का कत्ल नहीं किया है। 
विनय- मैं जानता हूं दोस्त। तुम किसी का भी कत्ल नहीं कर सकते। पर उस इंस्पेक्टर को कैसे यकीन दिलाए कि तुमने कुछ नहीं किया। उसका तो यहां तक कहना है कि तुम ही वो आखिरी इंसान हो जिसने ऋषभ को आखिरी बार जिंदा देखा था और उससे बात की थी। 

कार्तिक- तो इसका मतलब ये हुआ कि मैंने उसकी हत्या कर दी? 
विनय- ये मैं नहीं वो इंस्पेक्टर कह रहा है। उसका कहना है कि तुम्हारी और ऋषभ की ऑफिस में बात होने के बाद ऋषभ ऑफिस से बाहर गया और उसका मोबाइल यहीं बंद हो गया था। उसके बाद उसने ना किसी को कॉल किया है और न ही उसे किसी का कॉल आया है। 
कार्तिक- अरे तो उसमें मैं क्या करूं, यदि उसने अपना मोबाइल बंद कर दिया था? 
विनय- वो सब मुझे नहीं पता कार्तिक। पर इतना पता है कि वो इंस्पेक्टर अब तुम्हारे पीछे पड़ गया है। अब उसे जब तक असली कातिल नहीं मिल जाता, वह तुम पर ही शक करेगा। 
इतना करने के बाद विनय कार्तिक के केबिन से चला जाता है। दिनभर कार्तिक ऑफिस का काम खत्म कर शाम को घर पहुंचता है। वह एक बार फिर साक्षी से कत्ल के बारे में बात करता है। साक्षी उसे हिम्मत देने की कोशिश करती है। रात को कार्तिक जब सोने के लिए जाता है, तब भी उसका दिमाग उन्हीं बातों को सोचता है। तभी उसे याद आता है कि उस साये ने उसे कहा था कि जब कभी उसे उसकी मदद की जरूरत हो वह उसे याद कर ले वह आ जाएगा। वह साये को याद करता है और कुछ ही देर में साया उसके सामने खड़ा होता है। 
कार्तिक- अरे, ये क्या तुमने? 
साया- मैंने क्या किया? 
कार्तिक- तुमने तो मुझे कत्ल के इल्जाम में फंसा दिया। अब मुझे बताओ मैं इससे बाहर कैसे आउंगा? 
साया- पहली बात तो यह है कि मैंने तुम्हें कत्ल के इल्जाम में नहीं फंसाया है। फंसाया है तो तुम्हारी किस्मत ने। और दूसरी बात यह है कि मैं तुम्हें बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकता हूं। जो भी करना है तुम्हें करना है।

कार्तिक- अरे, मेरी किस्मत में अगर कत्ल का इल्जाम था तो बताना चाहिए थे ना? 
साया- कार्तिक ये किस्मत तुम्हारी नहीं ऋषभ की है, उस पर कत्ल का इल्जाम लगने वाला था। इस कारण अब तुम पर लगा है। और तुमने ही ऋषभ से अपनी किस्मत बदली है मैंने तो बस कोई एक व्यक्ति चुनने को कहना था। तुमने ऋषभ को चुना और मैंने उससे तुम्हारी किस्मत बदल दी। अब उसकी किस्मत में क्या था और क्या होगा यह मुझे नहीं पता। 
कार्तिक- ये तो पहले से भी बड़ी परेशानी हो गई है। कुछ तो बताओ मैं इससे बाहर कैसे आ सकता हूं। 
साया- मुझे नहीं पता। हां ये बता सकता हूं कि ऋषभ पर कत्ल का इल्जाम लगने वाला था वह अब तुम पर लगा है, और एक बात और कि ऋषभ की किस्मत मैंने जिससे बदली थी उसकी हत्या होने वाली थी तो अब ऋषभ की हो गई। 
कार्तिक- मैं तो किस्मत बदलने के चक्कर में और भी फंस गया हूं। 
साया- तुम अच्छे इंसान हो। मैं तुम्हारी एक मदद कर सकता हूं। 
कार्तिक- वो क्या? 
साया- मैं तुम्हें उस इंसान का नाम बता सकता हूं जिससे मैंने ऋषभ की किस्मत बदली थी। 
कार्तिक- उससे क्या होगा? क्या मुझ पर लगा कत्ल का इल्जाम हट जाएगा? 
साया- हो सकता है कि वो इंसान तुम्हारी कुछ मदद कर सके? 
कार्तिक- ठीक है बताओ कौन है वो इंसान? 
साया- वो इंसान है इंस्पेक्टर अजय। 

कार्तिक अजय का नाम सुनकर ही चौंक जाता है। जो इंस्पेक्टर ऋषभ के कत्ल के उसे जिम्मेदार मान रहा है वह उसकी मदद क्यों करेगा। और वह उसे क्या बताएगा कि उसने ऋषभ से अपनी किस्मत बदली थी और ऋषभ की किस्मत उससे बदल गई थी। कत्ल उसका होने वाला था और उसका इल्जाम ऋषभ पर लगने वाला था। इतनी बात वो क्यों सुनेगा और अगर सुनेगा तो क्या वो उसकी बात मानेगा। 
साया- कार्तिक, कार्तिक। क्या हुआ क्या सोचने लगे। 
कार्तिक- अरे वहीं इंस्पेक्टर तो मेरे पीछे पड़ा है। वह समझता है कि मैंने ही ऋषभ की हत्या की है।अच्छा तो अब ये भी बता दो कि तुमने इंस्पेक्टर की किस्मत किससे बदली है। 
साया- नहीं मैं तुम्हें इतना नहीं बता सकता। इंस्पेक्टर का भी नाम मैंने तुम्हें इसलिए बताया है कि शायद तुम्हारी कोई मदद हो जाए। अब अगर वहीं इंस्पेक्टर तुम्हें हत्या का दोषी मानता है तो मैं कुछ नहीं कर सकता। 
इतना कहने के बाद साया एक बार फिर गायब हो जाता है। साये के चले जाने के बाद कार्तिक फिर से सोच में पड़ जाता है। अब उसके दिमाग में एक ही बात चल रही है कि इंस्पेक्टर के दिमाग से यह बात कैंसे निकाली जाए कि उसने ऋषभ की हत्या नहीं की है। वह ऐसा सोचते हुए सो जाता है। अगले दिन तैयार होकर ऑफिस पहुंच जाता है। वह जैसे ही ऑफिस पहुंचता है वहां इंस्पेक्टर अजय पहले से मौजूद था। 

या मैं जीना ही छोड़ दूं
या मैं जीना ही छोड़ दूं 

अब तो बता तेरा इरादा क्या है, 
मुझ तक पहुंचने का तेरा रास्ता क्या है, 

क्या अब भी कुछ बाकी है दिखाने को, 
अब कोई सबक नहीं बाकी सिखाने को, 

अपनों ने प्यार के नाम पर लूटा है मुझे,
मुस्कुराते हुए हर दिन तोड़ा है मुझे, 

ना यकीं है साथ, ना कोई अपना पास है, 
फिर जुड़ जाने की नहीं कोई आस है, 

जानता हूं तुझे भी जिंदगी से बेइंतहा मोहब्बत है, 
मौत और जिंदगी की एक दूजे से शोहरत है, 

मेरी जिंदगी भी तो तेरी आशिकी का हिस्सा होगी, 
ले ले एक और जिंदगी, ये तेरी मोहब्बत का किस्सा होगी,

तेरे प्यार को मैं बहुत अच्छे से जानता हूं, 
रोज फना होती है तेरे इश्क़ में कई जिंदगी ये मानता हूं, 

तेरी आस में एक और जिंदगी तड़प रही है,
जिस्म में अटकी जान कब से फड़क रही है,

ए मौत तेरे होने का क्या मैं भरम तोड़ दूँ, 
तू आती है या मैं खुद जीना छोड़ दूं।