सौदा
पार्ट 4
कार्तिक जैसे ही ऑफिस पहुंचता है उसकी मुलाकात ऋषभ से होती है। ऋषभ उसे प्रमोशन के लिए बधाई देता है। कार्तिक भी मुस्कुराकर उसका स्वागत करता है। कार्तिक भी ऋषभ को प्रमोशन न मिलने को लेकर उसे सॉरी कहता है। हालांकि ऋषभ इस बात पर कोई रिएक्ट नहीं करता है और कार्तिक से बिना हाथ मिलाए ही वहां से चला जाता है। कार्तिक कुछ देर खड़े रहकर उसे देखता है और फिर अपने केबिन में आ जाता है। केबिन में आकर कार्तिक सोचने लगता है कि ऋषभ उसे गलत समझ रहा है, उसे लग रहा है कि मैंने उसका प्रमोशन छीन लिया है, जबकि सच तो यह है कि मैंने उसकी किस्मत ही छीन ली है। पर मैंने तो एक सौदा किया है, इसमें गलत क्या है। फिर वह सोचता है कि ऋषभ को किसी भी तरह से समझाना होगा। इसके बाद ऋषभ अपने काम में लग जाता है। हालांकि काम के सिलसिले में उसे ऑफिस से बाहर भी जाना पड़ता है, परंतु वह सभी काम निपटाकर फिर से ऑफिस भी आ जाता है। शाम को वह ऑफिस का सारा काम निपटाकर अपने घर के लिए निकल पड़ता है। कार्तिक अभी घर के बाहर ही पहुंचा था कि उसका मोबाइल बज उठता है। वह देखता है तो पता चलता है कि यह कॉल ऑफिस से आ रहा है।
कार्तिक- हेलो।
मदन- साहब मैं मदन बोल रहा हूं अपने ऑफिस से।
कार्तिक- हां मदन बोलो क्या हुआ?
मदन- साहब आप जल्दी से ऑफिस आ जाओ।
कार्तिक- क्यों, क्या हुआ?
मदन- साहब आप बस ऑफिस आ जाओ, फोन पर ज्यादा नहीं बता सकता। जितनी जल्दी हो सके आप ऑफिस आ जाओ।
कार्तिक- ठीक है, आ रहा हूं।
फोन कट कर कार्तिक अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ता है। जैसे ही वह ऑफिस पहुंचता है तो देखता है कि ऑफिस के सभी लोग वहां मौजूद है और सिर्फ उसे ही देखे जा रहा है। कार्तिक को कुछ समझ नहीं आता है। वह आगे बढ़ता जाता है और अपने केबिन में जा ही रहा होता है कि उसे एक आवाज रोक देती है। वह पलटकर देखता है तो वह आवाज इंस्पेक्टर अजय की थी।
अजय- रूक जाइए मिस्टर कार्तिक। अभी केबिन में जाने की जरूरत नहीं है। आपको ऑफिस के किसी काम से यहां नहीं बुलाया गया है।
कार्तिक- ठीक है, नहीं जा रहा केबिन में। पर कोई मुझे बताएगा कि मुझे अचानक यहां क्यों बुलाया गया है?
अजय- बिल्कुल बताएंगे कार्तिक जी। अब सिर्फ आप ही तो बचे है, जिसे बहुत कुछ बताना है।
कार्तिक- मतलब? क्या बताना है?
अजय- मेरे कुछ सवाल है कार्तिक जी, मुझे उनके सीधे और सच्चे जवाब चाहिए।
कार्तिक- कैसे सवाल। मैंने ऐसा क्या किया है कि पुलिस मुझसे सवाल करेगी?
अजय- किया है या नहीं किया है यह तो उन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल आप मेरे कुछ सवालों का जवाब तो दें।
कार्तिक- जी पूछिए क्या पूछना चाहते हैं आप?
अजय- आप ऋषभ को जानते है?
कार्तिक- जी, हां जानता हूं, मेरे ही ऑफिस में काम करता है। आज सुबह ही मेरी और उसकी मुलाकात हुई थी, यहीं इसी गेट पर खड़े होकर ही हम बात कर रहे थे।
अजय- करता है नहीं कार्तिक जी, करता था।
कार्तिक- करता था ? इसका क्या मतलब है? मैंने कहा ना कि आज ही तो मेरी मुलाकात हुई है।
अजय- जी बिल्कुल हुई होगी। पर वो शायद आपकी आखिरी मुलाकात थी, या उसके बाद भी आप उससे मिले थे?
कार्तिक- जी, नहीं उसके बाद तो वह मुझे नजर भी नहीं आया है।
अजय- मिस्टर कार्तिक क्या आप मुझे बता सकते हैं कि इस समय ऋषभ कहां होगा?
कार्तिक- ऑफिस का टाइम हो चुका है, ऑफिस के बाद कौन क्या करता है मुझे कैसे पता होगा?
अजय- हां, ये बात भी ठीक है। वैसे आप कहां थे? ये तो पता ही होगा आपको?
कार्तिक- मैं भी अपना काम खत्म कर बस घर पहुंचा ही था कि मदन का कॉल आ गया कि आप ऑफिस आ जाइए तो तुरंत ऑफिस आ गया।
अजय- ओह, तो अभी आप घर पहुंचे भी नहीं थे?
कार्तिक- जी, हां बस घर के बाहर ही पहुंचा था। वैसे आप बताएंगे मुझे यहां क्यों बुलाया गया है और किस कारण से मुझसे ऐसे सवाल किए जा रहे हैं?
अजय- हां, हां बिल्कुल बताएंगे। आपके साथी ऋषभ का कत्ल हो चुका है। इस कारण यह पूरी पूछताछ की जा रही है। पूरे स्टाफ से बात की जा रही है और स्टाफ में आप भी शामिल है।
कार्तिक इंस्पेक्टर की यह बात सुनकर एक दम से सुन्न सा रह जाता है कि ऋषभ की हत्या हो चुकी है। उसे याद आता है कि सुबह ही तो वह ऋषभ से मिला था। ऐसा कैसे हो सकता है। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह क्या और कैसे हो गया?
अजय- क्या हुआ कार्तिक जी। आप तो एकदम से खामोश हो गए?
कार्तिक- (संभलते हुए) यह कैसे हो सकता है? सुबह ही तो ऋषभ मुझसे मिला था। यही खड़े होकर तो हम बात कर रहे थे। मुझे प्रमोशन मिलने पर उसने बधाई भी दी थी और उसका प्रमोशन मुझे मिला था तो मैंने उससे माफी भी मांगी थी।
अजय- चलिए कोई बात नहीं। अब तो उसका कत्ल हो गया है तो यह सवाल-जवाब तो चलते ही रहेंगे। वैसे आपको एक बात बता देना चाहता हूं कि ऋषभ के कत्ल का सबसे ज्यादा शक मुझे आप पर ही है तो आप यहां से भागने की कोशिश भी मत करना। जब भी मुझे आपकी जरूरत होगी आपको आना होगा।
कार्तिक- अरे, मैं क्यों मारूंगा ऋषभ को?
अजय- वो हम पता कर लेंगे। बस आपसे जो कहा गया है उसे याद रखिएगा। मैं कल फिर आउंगा। ?
इतना कहकर अजय वहां से चला जाता है। एक बार फिर ऑफिस के सभी सदस्य कार्तिक को देखने लगते हैं। कार्तिक सभी से पूछता है कि क्या आपको भी लगता है कि मैंने ही ऋषभ को मारा है? पर कोई जवाब नहीं देता। कार्तिक अपने केबिन में चला जाता है और बैठ जाता है। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि यह सब क्या हो रहा है। प्रमोशन मिला था तो वह कितना खुश था अचानक यह क्या हो गया। वह काफी परेशान हो जाता है और फिर कुछ देर बाद केबिन से बाहर आता है तो देखता है कि ऑफिस पूरा खाली है और वह अकेला ही वहां खड़ा था। फिर वह भी अपने घर के लिए निकल जाता है। घर पहुंचने के बाद भी उसके दिमाग में ऋषभ का कत्ल होने की बात ही चल रही थी। साक्षी ने कार्तिक को परेशान देखा तो उससे बात की।
साक्षी- क्या हुआ कार्तिक, बहुत परेशान नजर आ रहे हो?
कार्तिक- (चौंकते हुए) नहीं, नहीं तो ऐसी कोई बात नहीं है।
साक्षी- तुम ठीक से झूठ नहीं बोल पाते हो। तुम्हारे चेहरे पर परेशानी साफ नजर आ रही है। बताओ क्या बात है, क्यों परेशान हो?
कार्तिक साक्षी के इस सवाल पर सोचने लगता है कि क्या वह साक्षी को सारी बात बता दे। पहले वह सोचता है कि नहीं वरना वह भी परेशान हो जाएगी। तभी साक्षी उसे टोकती है।
साक्षी- बोलो ना क्या बात है? बात बताने के लिए भी तुम्हें सोचना पड़ रहा है मतलब कुछ बहुत बड़ी बात है।
कार्तिक- साक्षी मेरे ऑफिस में ऋषभ है ना? उसका... उसका...
साक्षी- क्या उसका... उसका... कर रहे हो? साफ बोलो ना क्या हुआ है?
कार्तिक- उसका कत्ल हो गया है और पुलिस को शक है कि मैंने उसकी हत्या की है।
साक्षी- (चौंकते हुए) क्या? ऋषभ का कत्ल हो गया और उसका कत्ल तुमने किया है? ऐसा कैसे हो सकता है?
कार्तिक- मुझे खुद कुछ समझ नहीं आ रहा है साक्षी। मैं भला क्यों ऋषभ की हत्या करूंगा?
साक्षी- पर ये सब हुआ कैसे? मुझे पूरी बात बताओ।
कार्तिक साक्षी को ऑफिस पहुंचने से लेकर दोबारा ऑफिस पहुंचने तक पूरी बात विस्तार से बता देता है।
साक्षी- तो इस बात से कहां से लगता है कि तुमने ऋषभ की हत्या की है?
कार्तिक- पुलिस को अभी शक है। उनका कहना है कि उनकी इजाजत के बिना मैं शहर से बाहर नहीं जा सकता।
साक्षी- जब तुमने कुछ किया ही नहीं है तो तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है। पुलिस का शक दूर हो जाएगा।
कार्तिक- हां साक्षी।
कार्तिक अब सोचता है कि क्या साक्षी को वो सपने वाली और किस्मत के सौदे वाली बात भी बता देना चाहिए? वह यह सोचकर चुप रह जाता है कि साक्षी उसकी बात पर भरोसा नहीं करेगी। इस कारण वह उसे कुछ नहीं बताता।
साक्षी- कार्तिक अब एक काम करो फिलहाल तुम मुंह हाथ धो लो, मैं तुम्हारे लिए चाय बनाकर लाती हूं। अब इस बारे में ज्यादा मत सोचो। जितना ज्यादा सोचोंगे उतना ही तुम्हें टेंशन होगा। पुलिस कुछ सवाल भी करती है तो सब कुछ साफ-साफ बता देना।
कार्तिक- हां साक्षी, तुम ठीक कह रही हो। वैसे भी मेरे सोचने या परेशान होने से ऋषभ का असली कातिल तो मिल नहीं जाएगा? इसलिए मैं अब ज्यादा नहीं सोचूंगा। जो होगा देखा जाएगा।
इतना कहकर कार्तिक बाथरूम में चला जाता है और साक्षी उसके लिए चाय बनाने के लिए किचिन में चली जाती है।
कार्तिक- हेलो।
मदन- साहब मैं मदन बोल रहा हूं अपने ऑफिस से।
कार्तिक- हां मदन बोलो क्या हुआ?
मदन- साहब आप जल्दी से ऑफिस आ जाओ।
कार्तिक- क्यों, क्या हुआ?
मदन- साहब आप बस ऑफिस आ जाओ, फोन पर ज्यादा नहीं बता सकता। जितनी जल्दी हो सके आप ऑफिस आ जाओ।
कार्तिक- ठीक है, आ रहा हूं।
फोन कट कर कार्तिक अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ता है। जैसे ही वह ऑफिस पहुंचता है तो देखता है कि ऑफिस के सभी लोग वहां मौजूद है और सिर्फ उसे ही देखे जा रहा है। कार्तिक को कुछ समझ नहीं आता है। वह आगे बढ़ता जाता है और अपने केबिन में जा ही रहा होता है कि उसे एक आवाज रोक देती है। वह पलटकर देखता है तो वह आवाज इंस्पेक्टर अजय की थी।
अजय- रूक जाइए मिस्टर कार्तिक। अभी केबिन में जाने की जरूरत नहीं है। आपको ऑफिस के किसी काम से यहां नहीं बुलाया गया है।
कार्तिक- ठीक है, नहीं जा रहा केबिन में। पर कोई मुझे बताएगा कि मुझे अचानक यहां क्यों बुलाया गया है?
अजय- बिल्कुल बताएंगे कार्तिक जी। अब सिर्फ आप ही तो बचे है, जिसे बहुत कुछ बताना है।
कार्तिक- मतलब? क्या बताना है?
अजय- मेरे कुछ सवाल है कार्तिक जी, मुझे उनके सीधे और सच्चे जवाब चाहिए।
कार्तिक- कैसे सवाल। मैंने ऐसा क्या किया है कि पुलिस मुझसे सवाल करेगी?
अजय- किया है या नहीं किया है यह तो उन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल आप मेरे कुछ सवालों का जवाब तो दें।
कार्तिक- जी पूछिए क्या पूछना चाहते हैं आप?
अजय- आप ऋषभ को जानते है?
कार्तिक- जी, हां जानता हूं, मेरे ही ऑफिस में काम करता है। आज सुबह ही मेरी और उसकी मुलाकात हुई थी, यहीं इसी गेट पर खड़े होकर ही हम बात कर रहे थे।
अजय- करता है नहीं कार्तिक जी, करता था।
कार्तिक- करता था ? इसका क्या मतलब है? मैंने कहा ना कि आज ही तो मेरी मुलाकात हुई है।
अजय- जी बिल्कुल हुई होगी। पर वो शायद आपकी आखिरी मुलाकात थी, या उसके बाद भी आप उससे मिले थे?
कार्तिक- जी, नहीं उसके बाद तो वह मुझे नजर भी नहीं आया है।
अजय- मिस्टर कार्तिक क्या आप मुझे बता सकते हैं कि इस समय ऋषभ कहां होगा?
कार्तिक- ऑफिस का टाइम हो चुका है, ऑफिस के बाद कौन क्या करता है मुझे कैसे पता होगा?
अजय- हां, ये बात भी ठीक है। वैसे आप कहां थे? ये तो पता ही होगा आपको?
कार्तिक- मैं भी अपना काम खत्म कर बस घर पहुंचा ही था कि मदन का कॉल आ गया कि आप ऑफिस आ जाइए तो तुरंत ऑफिस आ गया।
अजय- ओह, तो अभी आप घर पहुंचे भी नहीं थे?
कार्तिक- जी, हां बस घर के बाहर ही पहुंचा था। वैसे आप बताएंगे मुझे यहां क्यों बुलाया गया है और किस कारण से मुझसे ऐसे सवाल किए जा रहे हैं?
अजय- हां, हां बिल्कुल बताएंगे। आपके साथी ऋषभ का कत्ल हो चुका है। इस कारण यह पूरी पूछताछ की जा रही है। पूरे स्टाफ से बात की जा रही है और स्टाफ में आप भी शामिल है।
कार्तिक इंस्पेक्टर की यह बात सुनकर एक दम से सुन्न सा रह जाता है कि ऋषभ की हत्या हो चुकी है। उसे याद आता है कि सुबह ही तो वह ऋषभ से मिला था। ऐसा कैसे हो सकता है। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह क्या और कैसे हो गया?
अजय- क्या हुआ कार्तिक जी। आप तो एकदम से खामोश हो गए?
कार्तिक- (संभलते हुए) यह कैसे हो सकता है? सुबह ही तो ऋषभ मुझसे मिला था। यही खड़े होकर तो हम बात कर रहे थे। मुझे प्रमोशन मिलने पर उसने बधाई भी दी थी और उसका प्रमोशन मुझे मिला था तो मैंने उससे माफी भी मांगी थी।
अजय- चलिए कोई बात नहीं। अब तो उसका कत्ल हो गया है तो यह सवाल-जवाब तो चलते ही रहेंगे। वैसे आपको एक बात बता देना चाहता हूं कि ऋषभ के कत्ल का सबसे ज्यादा शक मुझे आप पर ही है तो आप यहां से भागने की कोशिश भी मत करना। जब भी मुझे आपकी जरूरत होगी आपको आना होगा।
कार्तिक- अरे, मैं क्यों मारूंगा ऋषभ को?
अजय- वो हम पता कर लेंगे। बस आपसे जो कहा गया है उसे याद रखिएगा। मैं कल फिर आउंगा। ?
इतना कहकर अजय वहां से चला जाता है। एक बार फिर ऑफिस के सभी सदस्य कार्तिक को देखने लगते हैं। कार्तिक सभी से पूछता है कि क्या आपको भी लगता है कि मैंने ही ऋषभ को मारा है? पर कोई जवाब नहीं देता। कार्तिक अपने केबिन में चला जाता है और बैठ जाता है। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि यह सब क्या हो रहा है। प्रमोशन मिला था तो वह कितना खुश था अचानक यह क्या हो गया। वह काफी परेशान हो जाता है और फिर कुछ देर बाद केबिन से बाहर आता है तो देखता है कि ऑफिस पूरा खाली है और वह अकेला ही वहां खड़ा था। फिर वह भी अपने घर के लिए निकल जाता है। घर पहुंचने के बाद भी उसके दिमाग में ऋषभ का कत्ल होने की बात ही चल रही थी। साक्षी ने कार्तिक को परेशान देखा तो उससे बात की।
साक्षी- क्या हुआ कार्तिक, बहुत परेशान नजर आ रहे हो?
कार्तिक- (चौंकते हुए) नहीं, नहीं तो ऐसी कोई बात नहीं है।
साक्षी- तुम ठीक से झूठ नहीं बोल पाते हो। तुम्हारे चेहरे पर परेशानी साफ नजर आ रही है। बताओ क्या बात है, क्यों परेशान हो?
कार्तिक साक्षी के इस सवाल पर सोचने लगता है कि क्या वह साक्षी को सारी बात बता दे। पहले वह सोचता है कि नहीं वरना वह भी परेशान हो जाएगी। तभी साक्षी उसे टोकती है।
साक्षी- बोलो ना क्या बात है? बात बताने के लिए भी तुम्हें सोचना पड़ रहा है मतलब कुछ बहुत बड़ी बात है।
कार्तिक- साक्षी मेरे ऑफिस में ऋषभ है ना? उसका... उसका...
साक्षी- क्या उसका... उसका... कर रहे हो? साफ बोलो ना क्या हुआ है?
कार्तिक- उसका कत्ल हो गया है और पुलिस को शक है कि मैंने उसकी हत्या की है।
साक्षी- (चौंकते हुए) क्या? ऋषभ का कत्ल हो गया और उसका कत्ल तुमने किया है? ऐसा कैसे हो सकता है?
कार्तिक- मुझे खुद कुछ समझ नहीं आ रहा है साक्षी। मैं भला क्यों ऋषभ की हत्या करूंगा?
साक्षी- पर ये सब हुआ कैसे? मुझे पूरी बात बताओ।
कार्तिक साक्षी को ऑफिस पहुंचने से लेकर दोबारा ऑफिस पहुंचने तक पूरी बात विस्तार से बता देता है।
साक्षी- तो इस बात से कहां से लगता है कि तुमने ऋषभ की हत्या की है?
कार्तिक- पुलिस को अभी शक है। उनका कहना है कि उनकी इजाजत के बिना मैं शहर से बाहर नहीं जा सकता।
साक्षी- जब तुमने कुछ किया ही नहीं है तो तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है। पुलिस का शक दूर हो जाएगा।
कार्तिक- हां साक्षी।
कार्तिक अब सोचता है कि क्या साक्षी को वो सपने वाली और किस्मत के सौदे वाली बात भी बता देना चाहिए? वह यह सोचकर चुप रह जाता है कि साक्षी उसकी बात पर भरोसा नहीं करेगी। इस कारण वह उसे कुछ नहीं बताता।
साक्षी- कार्तिक अब एक काम करो फिलहाल तुम मुंह हाथ धो लो, मैं तुम्हारे लिए चाय बनाकर लाती हूं। अब इस बारे में ज्यादा मत सोचो। जितना ज्यादा सोचोंगे उतना ही तुम्हें टेंशन होगा। पुलिस कुछ सवाल भी करती है तो सब कुछ साफ-साफ बता देना।
कार्तिक- हां साक्षी, तुम ठीक कह रही हो। वैसे भी मेरे सोचने या परेशान होने से ऋषभ का असली कातिल तो मिल नहीं जाएगा? इसलिए मैं अब ज्यादा नहीं सोचूंगा। जो होगा देखा जाएगा।
इतना कहकर कार्तिक बाथरूम में चला जाता है और साक्षी उसके लिए चाय बनाने के लिए किचिन में चली जाती है।








Good story going great
ReplyDeleteShandar bhai... good job
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