चलो, आज हम कुछ याद करते हैं
कहते हैं यादें अक्सर मन को भिगो कर जाती हैं,
ना वक्त ना जज्बात देखती है बस चली आती हैं।
यादों से ही तो दिल खुश और होंठ मुस्कुराते हैं,
चलो आज हम फिर खोकर कुछ याद करते हैं।।
कैसा वो एक अजनबी सा अहसास हुआ करता था,
जब अचानक हाथ से हाथ स्पर्श हुआ करता था।
वक्त का पहिया भी कैसे थम जाया करता था,
जब मैं तेरी आंखों में एक टक देखा करता था।।
फिर तेरा एक सवाल और मेरा एक जबाव होता था,
आंखों में हजारों बातें और बस दिल खामोश होता था।
जब लगाता था तुम्हें गले वो भी क्या सुकुन होता था,
अचानक तन्हाई में दोनों के दिलों का शोर होता था।।
इजहारे ए इश्क में तब चंद अल्फाज ही काफी होते थे,
जब तुम, मैं और हमारे दिल एक दूजे के पास होते थे।
ठिठुरती ठंड में, ख्यालों में तेरा मुझमें सिमट जाना,
इत्तेफाक ही है कि ये सब बस ख्याल ही होते थे।।
कितने ही सपने आंखों में सजने लग जाते थे,
जाने कितने ही दिन सिर्फ बातों में कट जाते थे।
रात होती तो मैं अक्सर तेरे लिए गुनगुनाता था,
मेरे गीत भी जाने कैसे मेरे जज्बात बन जाते थे।।
कभी तेरा यूं ही रूठ जाना और मनाना याद है
बीता है कुछ वक़्त, मुझे अब भी तेरी हर बात याद है।
मेरे साथ की बात से ही तो तुम चहक उठती थी,
कहती थी हम मिले हैं, जरूर कुछ तो कोई बात है।।
तेरे लिए जीना मेरी जिंदगी का एक बहाना था,
तेरी खुशी के लिए मेरा रोना मुझे गवारा था।
तुम भी तो अक्सर मुझे गले से लगा लेती थी,
कभी एक-दूजे का होना ही तो प्यार हमारा था।।
दिन हो या रात हो, हम तेरा इंतजार करते हैं,
हम तो अब भी सिर्फ और सिर्फ तुमसे प्यार है।
ये कोई ख्याल नहीं, हम फिर से इजहार करते हैं,
चलो आज हम फिर खोकर कुछ याद करते हैं।।
ना वक्त ना जज्बात देखती है बस चली आती हैं।
यादों से ही तो दिल खुश और होंठ मुस्कुराते हैं,
चलो आज हम फिर खोकर कुछ याद करते हैं।।
कैसा वो एक अजनबी सा अहसास हुआ करता था,
जब अचानक हाथ से हाथ स्पर्श हुआ करता था।
वक्त का पहिया भी कैसे थम जाया करता था,
जब मैं तेरी आंखों में एक टक देखा करता था।।
फिर तेरा एक सवाल और मेरा एक जबाव होता था,
आंखों में हजारों बातें और बस दिल खामोश होता था।
जब लगाता था तुम्हें गले वो भी क्या सुकुन होता था,
अचानक तन्हाई में दोनों के दिलों का शोर होता था।।
इजहारे ए इश्क में तब चंद अल्फाज ही काफी होते थे,
जब तुम, मैं और हमारे दिल एक दूजे के पास होते थे।
ठिठुरती ठंड में, ख्यालों में तेरा मुझमें सिमट जाना,
इत्तेफाक ही है कि ये सब बस ख्याल ही होते थे।।
कितने ही सपने आंखों में सजने लग जाते थे,
जाने कितने ही दिन सिर्फ बातों में कट जाते थे।
रात होती तो मैं अक्सर तेरे लिए गुनगुनाता था,
मेरे गीत भी जाने कैसे मेरे जज्बात बन जाते थे।।
कभी तेरा यूं ही रूठ जाना और मनाना याद है
बीता है कुछ वक़्त, मुझे अब भी तेरी हर बात याद है।
मेरे साथ की बात से ही तो तुम चहक उठती थी,
कहती थी हम मिले हैं, जरूर कुछ तो कोई बात है।।
तेरे लिए जीना मेरी जिंदगी का एक बहाना था,
तेरी खुशी के लिए मेरा रोना मुझे गवारा था।
तुम भी तो अक्सर मुझे गले से लगा लेती थी,
कभी एक-दूजे का होना ही तो प्यार हमारा था।।
दिन हो या रात हो, हम तेरा इंतजार करते हैं,
हम तो अब भी सिर्फ और सिर्फ तुमसे प्यार है।
ये कोई ख्याल नहीं, हम फिर से इजहार करते हैं,
चलो आज हम फिर खोकर कुछ याद करते हैं।।









Nice 👌👌👌😊
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteBhut khoob dada
ReplyDeleteAwesome dear
ReplyDeleteअद्भुत...������
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