एक ही सुराग
पार्ट 2
एक ही सुराग का पहला पार्ट यहां पढ़े
इसके बाद केबिन में कुछ देर के लिए खामोशी छा जाती है। इस खामोशी के बीच भौमिक सोचता है कि क्या आगामी कुछ दिनों में शहर में ऐसा कुछ होने वाला है, जिससे वहां कोई गड़बड़ की जाए तो शहर में अशांति का माहौल बन सकता है। हालांकि उसे इस समय ऐसा कुछ याद नहीं आता है। वह एक बार फिर परमार की ओर रूख करता है।
इसके बाद केबिन में कुछ देर के लिए खामोशी छा जाती है। इस खामोशी के बीच भौमिक सोचता है कि क्या आगामी कुछ दिनों में शहर में ऐसा कुछ होने वाला है, जिससे वहां कोई गड़बड़ की जाए तो शहर में अशांति का माहौल बन सकता है। हालांकि उसे इस समय ऐसा कुछ याद नहीं आता है। वह एक बार फिर परमार की ओर रूख करता है।
भौमिक- परमार, वह जब भी हमें कोई सुराग देगा तब देगा, परंतु हम अब इसे हल्के में नहीं ले सकते हैं।
परमार- जी, सर।
भौमिक- तो परमार एक काम करो सबसे पहले ये पता करो कि क्या शहर में कुछ बड़ा होने वाला है। कोई पार्टी, किसी बड़े व्यक्ति का आना, या कोई राजनीतिक सभा या कुछ भी।
परमार- जी, सर मैं पता लगाता हूं।
इतना कहने के बाद परमार वहां से चला जाता है। भौमिक एक बार फिर से वह खत उठाता है और गौर से उसे पढ़ने लगता है। खत को पढ़ते हुए वह यह भी सोच रहा था कि यह खत लिखने वाला कौन हो सकता है। वह यह भी सोचता है कि यह जो भी है वह उसके हर काम पर नजर रखता है, तभी उसने हवेली वाले डॉक्टर के परिवार की हत्या का जिक्र किया है और उसे इसके लिए सम्मान भी मिला है यह भी उसे पता है। यह व्यक्ति जो कोई भी भौमिक के बारे में हर जानकारी रखता है। भौमिक ने म नही मन तय कर लिया था कि अब वह उसे पकड़कर ही दम लेगा। इसके लिए उसे कुछ भी करना पड़े वह करेगा। अब भौमिक इंतजार में था कि परमार क्या खबर लाता है और यह व्यक्ति जो खुद को अब चैलेंजर कह रहा है वह खुद कोई सुराग दे, जैसा कि उसने कहा है। इसके बाद भौमिक भी लंच के लिए निकल जाता है। शाम को एक बार फिर वह ऑफिस आता है और कुछ जरूरी काम निपटाकर फिर से चला जाता है। लगभग तीन दिन बीत गए थे और चैलेंजर की ओर से अब तक सुराग के लिए कोई खत नहीं मिला था। हमेशा की तरह भौमिक और परमार उसके केबिन में बैठकर काम कर रहे थे। तभी एक सिपाही आता है, उसके हाथ में एक लिफाफा था। भौमिक उसे देखता है और उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। सिपाही टेबल के पास आता है और भौमिक की ओर लिफाफा बढ़ाते हुए कहता है कि सर यह लिफाफा पहले की ही तरह एक पत्थर से दबा हुआ था। परमार यह सुनकर तुरंत बाहर की ओर जाता है, पर भौमिक उसे रोक देता है और कहता है कि परमार कोई फायदा नहीं है बाहर जाने का। वहां कोई नहीं होगा और न ही तुम्हें वहां कोई सुराग मिलेगा। परमार भौमिक की बात सुनकर फिर से कुर्सी पर बैठ जाता है। भौमिक वह लिफाफा लेता है और सिपाही बाहर चला जाता है।
भौमिक- लो परमार इस बार पहले तुम पढ़ो। देखे क्या कहना चाहता है चैलेंजर।
परमार- जी, सर। परमार वो लिफाफा खोलता है और लेट निकालकर पढ़ता है।
डियर एसीपी,
वादे के मुताबिक मैं आपको अपना सुराग दे रहा हूं। यह खत एक बार फिर आपके पास पहुंचा रहा हूं। वैसे आपको एक बात को जानकर खुशी होगी कि मैंने जो एक महीने का समय मुझे पकड़ने या पता लगाने के लिए आपको दिया था, उसकी टाइमिंग आज से शुरू हो रही है। इस खत को पढ़ने के साथ ही आपका टाइम शुरू हो जाएगा। तो देखते है कि मैं अपना काम पहले खत्म करता हूं या आप पहले मुझ तक पहुंच पाते हैं। वैसे खेल को थोड़ा रोचक बनाने के लिए मैंने कुछ सोचा है। मैं आपको सुराग तो दूंगा, पर.....। ना घबराईए मत कोई शर्त नहीं रख रहा हूं बस ये कहना चाह रहा हूं कि मेरा हर सुराग एक पहेली के रूप में होगा। अगर आपने पहले हल कर ली तो आप मुझ तक पहुंच पाएंगे और अगर पहेली हल नहीं कर पाए तो मैं तो आपना काम कर ही लूंगा। तो अब ज्यादा बात न करते हुए आपको सुराग देता हूं। नीचे एक पहेली है उसका हल निकालिए और मुझसे मिलने या मुझे पकड़ने का पहला प्रयास करें।
चैलेंजर
पहचान पुरानी ही सही पर औकात अपनी अब भी रखता हूं,
भूला दिया कई लोगों ने मुझे, पर पहचान अब भी रखता हूं।
कागज की बनावट से कभी मिल जाती थी यादें और रिश्तें,
अब भी दफन है मुझ में कई बातें और कई रिश्तों के किस्से।
मेरी तारिफ कहीं तुम्हारी यादों में ही गुम है, उन्हें समेट लो,
दिन तो पांचवां है तुम भी आकर मुझसे यही मिल पर मिल लो।
ऐसी ही एक पहेली के साथ वह खत समाप्त हो जाता है और परमार खत पढ़ने के बाद भौमिक को देखता है।
परमार- अब ये क्या है सर? ये पहेली और ये आकर मिलना, पकड़ना। मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है। और वो किस काम की बात कर रहा है? कौन सा काम करना चाह रहा है ये?
भौमिक- मुझे कुछ कुछ समझ आ रहा है परमार। ये शायद हमारे साथ खेलना चाहता है। और रही बात इसके काम की तो यह अभी कुछ नहीं करने वाला। ये अभी अपने उस काम की तैयारी कर रहा है। जिसके लिए इसे कम से कम एक महीना लग रहा है। इसलिए ही इसने हमें भी एक महीने का समय दिया है।
परमार- पर सर हम इसे पकड़ेंगे कैसे? और ये पहेली का क्या फंडा है?
भौमिक- कहा ना परमार, ये हमसे खेल रहा है। ये खुद को बहुत चालाक समझ रहा है। इसलिए ही इसने हमें पहेली के रूप में अपना सुराग भेजा है। पहेली है तो कुछ अजीब सी और साफ तौर पर कुछ नहीं लिखा है इसने। इसलिए इस पहेली का हल निकालने के लिए हमें अपना दिमाग लगाना होगा, तभी यह पहेली हल हो पाएगी।
भौमिक- अरे, तुम परेशान क्यों हो रहे हो परमार। आराम से। एक काम करो पहले कॉफी मंगाओं फिर देखते है इस पहेली को भी।
परमार कॉफी मंगा लेता है और दोनों कॉफी पीने लगते हैं। कॉफी पीते हुए भौमिक उस पहेली के बारे में ही सोच रहा था। वह बार-बार खत को देख रहा था और सोचता था। परमार बड़े गौर से भौमिक को देख रहा था। भौमिक कई बार बहुत गहरी सोच में होता तो कभी अचानक मुस्कुरा देता था। ऐसा उसने कई बार किया और परमार उसे देखकर और परेशान हो रहा था। इधर परमार सोच रहा था कि आखिर सर को क्या हो गया है कभी मुस्कुरा रहे है और कभी एकदम से गंभीर हो जाते हैं। आखिर माजरा क्या है। परमार भी उस पहेली को देखता पर उसे उसका कोई हल समझ नहीं आ रहा था। तभी भौमिक कॉफी का कप टेबल पर रखता है और खड़ा हो जाता है।
भौमिक- परमार एक काम करो जल्दी से गाड़ी निकालो।
परमार- सर अचानक कहां जा रहे हैं? और ये पहेली का क्या?
भौमिक- तुम चलो तो सही परमार। रास्तें में बताता हूं तुम्हें।
(परमार गाड़ी बाहर निकालता है और भौमिक उसमें आकर बैठ जाता है।)
परमार- कहां जाना है सर?
भौमिक- अभी तो बस सीधे जाने दो बाकि आगे बताता हूं।
भौमिक- परमार आगे देखकर गाड़ी चलाओ। मैं जानता हूं तुम्हारे मन में कई प्रश्न उठ रहे हैं। चलो मैं उन सभी सवालों के जवाब देता हूं तुम्हें।
परमार- जी सर, जल्दी बताइए।
भौमिक- उसकी पहेली क्या है परमार।
पहचान पुरानी ही सही पर औकात अपनी अब भी रखता हूं,
भूला दिया कई लोगों ने मुझे, पर पहचान अब भी रखता हूं।
कागज की बनावट से कभी मिल जाती थी यादें और रिश्तें,
अब भी दफन है मुझ में कई बातें और कई रिश्तों के किस्से।
मेरी तारिफ कहीं तुम्हारी यादों में ही गुम है, उन्हें समेट लो,
दिन तो पांचवां है तुम भी आकर मुझसे यही मिल पर मिल लो।
भौमिक- यहा पहली लाइन का मतलब है कि कोई पुरानी बिल्डिंग पर उसे नाम से जाना जाता है। दूसरी लाइन का मतलब है कि वहां ऐसा कुछ था, जो शायद अब वहां नहीं है या फिर अब उसका उपयोग लोग करते नहीं है। कागज की बनावट से का मतलब हो सकता है खत, जिसमें लोग अपने लोगों को याद करते थे और रिश्तों से मिला करते थे। दफन है रिश्तों के किस्से मतलब कई खत आज भी उसके पास है मतलब कि पोस्टऑफिस हो सकता है, जहां लोगों के खत आया जाया करते थे और कई खत पता बदल जाने के बाद वहीं रह जाते थे। तारिफ का मतलब यही है कि हम पोस्टऑफिस को भूले नहीं है। और पांचवे दिन का मतलब है कि सप्ताह का पांचवा दिन यानि कि शुक्रवार जो आज है और आज चैलेंजर वहां अपने काम के सिलसिले में आने वाला है। यानि कि हमारे शहर के पुराने पोस्टऑफिस के आसपास या वहीं पर वो हमेंं मिलेगा।
परमार- अरे वाह सर क्या बात है। आपने तो बड़ी जल्दी ही पहेली का हल निकाल लिया। अब उसे पता चलेगा कि आप भी क्या चीज है।
भौमिक- नहीं परमार मुझे लगता है कि शायद वो जानता है कि मैं इस पहेली का हल निकाल लूंगा और शायद हमारा अगला सुराग हमें वहीं पोस्टऑफिस पर मिलने वाला है।
परमार- ये आपको कैसे पता सर?
भौमिक- पक्का तो नहीं कह सकता परमार। पर जिस तरह से यह हमसे खत के माध्यम से बात कर रहा है और पहेली के रूप में सुराग दे रहा है, उससे मुझे लगता है कि यह हमें बहुत अच्छे से जानता है और हमारे लिए हमारा अगला सुराग वहीं छोड़कर गया होगा।









Great dear
ReplyDeleteNice story
ReplyDeletevery nice .....weldone
ReplyDeleteWah sir chha gaye
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