एक ही सुराग
Final part
इस तरह बात करते हुए दोनों एक बार फिर से ऑफिस के बाहर निकल जाते हैं और भौमिक के परमार अलग-अलग स्थानों पर जाकर कुछ पड़ताल करने लग जाते हैं। ऐसे ही वक्त बीतता है और 15 अगस्त का दिन भी आ जाता है। जैसे कि पहले ही भौमिक ने चैलेंजर की पहेली का हल खेज लिया था उसके अनुसार प्रफुल्ल जो कि राजनीति में उतरने की तैयारी कर रहा था आज एक सभा को संबोधित करने के लिए शहर के शहीद स्थल पर आया था। यहां काफी लोगों की भीड़ जमा थी। चूंकि शहर में प्रफुल्ल का काफी नाम था, इस कारण वहां कई लोग उसे सुनने के लिए भी आए थे। आज यह भी पता चलने वाला था कि प्रफुल्ल किसी पार्टी में शामिल होगा। पिछले कुछ दिनों से शहर में प्रफुल्ल के किस पार्टी में शामिल होने को लेकर खासी चर्चा भी थी। सभा स्थल पर प्रफुल्ल आने ही वाला था और लोग उसका इंतजार कर रहे थे। कुछ ही देर में प्रफुल्ल वहां पहुंच जाता है और वहां बने बड़े से मंच पर पहुंचकर सभी का अभिवादन करता है। इतनी भीड़ होने के कारण वहां पुलिस का भी इंतजाम किया गया था। भौमिक और परमार भी वहां मौजूद थे। इतनी भीड़ के बाद भी भौमिक की नजर सिर्फ प्रफुल्ल पर ही थी। प्रफुल्ल भी मंच से भौमिक को देखता है और एक मुस्कान अपने चेहरे पर लेकर आता है। भौमिक की आंखे अचानक ही चमक जाती है, वह भी एक बार मुस्कुराता है और फिर उसका चेहरा सख्त हो जाता है। सभा शुरू होती है और फिर कुछ ही देर बाद प्रफुल्ल माइक की ओर आगे आता है। तभी मंच से कुछ दूर एक जोरदार धमाका होता है और वहां अफरा-तफरी मच जाती हैं। लोग इधर-उधर भागना शुरू कर देते हैं। मंच पर भी अफरा-तफरी होती है। पुलिस भीड़ को कंट््रोल करने में लग जाती है और भौमिक और परमार उस ओर दौड़ लगा देते हैं, जिस ओर धमाका हुआ था। करीब आधे घंटे में ही मैदान पूरी तरह से खाली हो जाता है। वहां की सारी व्यवस्था करने के बाद भौमिक और परमार वहां से अपने ऑफिस के लिए निकलते हैं। दोनों जैसे ही कार के पास पहुंचते हैं, कार में जिस सीट पर भौमिक बैठता है उस सीट पर एक लेटर उसे मिलता है। वह उसे जेब में रखता है और फिर सीधे ऑफिस पहुंच जाता है। शहर में एक सभा के दौरान अचानक हुए धमाके के कारण वह काफी गुस्से भी नजर आ रहा था। वह अब जेब से लेटर निकालकर पढ़ता है।
मुझे अफसोस है कि तुम्हारा एक महीने का समय पूरा हो गया और तुम मेरे बारे में कोई जानकारी नहीं जुटा सके और न ही मुझे पकड़ सके हो। वैसे मुझे यकीन है कि तुम जब ये लेटर पढ़ रहे हो तो शायद तुम्हें पता भी नहीं है कि शहीद स्थल पर हुआ क्या है? तुम्हें शायद अब तक यह लग रहा है कि वहां उस सभा को फेल करने के लिए एक धमाका किया गया है। पूरी मीडिया भी अब तक यही कहानी कह रही है, पर कुछ ही देर में न्यूज बदलने वाली है। और वो न्यूज क्या होना चाहिए कुछ अंदाजा लगा सकते हो। वैसे तो तुम पहले ही अंदाजा लगा चुके थे। हां, बिल्कुल सही सोचा तुमने एसीपी। प्रफुल्ल सहाय गायब है। मैंने अपना काम कर दिया ह ैअब तुम्हारी बारी है। वैसे मुझे उसकी बहुत ज्यादा जरूरत तो नहीं है, पर फिर भी तुम्हारे लिए मैं उसे दो दिन तक जिंदा रख सकता हूं। तुम चाहो तो उसे मुझसे बचा लो। ये मेरा आखिरी खत है, अब तुम मुझ तक कैसे पहुंचोगे यह अब तुम ही सोचना। मेरा काम हो गया है और अब मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा सिर्फ दो दिन के लिए। अगर आ गए तो प्रफुल्ल तुम्हें जिंदा मिल जाएगा, नही तो.......
अब क्या करोगे एसीपी? कैसे पहुंचोगे प्रफुल्ल तक। ऑफिस में बैठकर काम नहीं चलेगा, बाहर निकलो और अपने काम में तेजी लाओ। सिर्फ दो दिन।
चैलेंजर
लेटर पढ़ने के बाद भौमिक टेबल पर जोर से मुक्का मारता है। इसे देखकर परमार उसे रोकने की कोशिश करता है।
परमार- अरे सर ये क्या कर रहे हैं आप?
भौमिक- परमार हम सही थे। प्रफुल्ल सहाय का अपहरण हो गया है।
परमार- क्या? ये क्या कह रहे है सर आप?
भौमिक- हां परमार यही सच है। इतना कहने के साथ ही भौमिक वह लेटर परमार की ओर बढ़ा देता है। परमार वह लेटर पढ़ने लगता है।
परमार- ओह सर। अब क्या करें?
भौमिक- करना क्या है परमार, अब हमें अपना काम ही करना है। प्रफुल्ल को सही सलामत लेकर आना है।
परमार- हां, सर पर कैसे?
भौमिक- अगर मैं सही हूं परमार तो हमें ज्यादा मुश्किल नहीं आने वाली है। अब चलो यहां से। अब चैलेंजर का चैलेंज खत्म कर ही देते हैं।
इतना कहने के बाद भौमिक और परमार वहां से निकल जाते हैं। वे सीधे प्रफुल्ल के घर पहुंच जाते हैं। यहां कुछ पूछताछ करने के बाद वे दोनों उसके घर के आसपास तलाशी लेते हैं। इसके बाद भौमिक एक बार फिर शहीद स्थल पर पहुंच जाता है। यहां वह हर चीज को बड़े गौर से देखता है और फिर कुछ सोचकर हल्के से मुस्कुराता है। यहां से वह सामने की ओर बनी एक दुकान की ओर जाता है, जहां पर सीसीटीवी लगा था। वहां की फुटेज वह देखने लगता है। फुटैज देखते हुए वह एक बार फिर से मुस्कुराता है और फिर वहां से चला जाता है। इसके बाद वह परमार को कुछ काम बताकर उसे रवाना करता है और खुद गाड़ी लेकर दूसरे रास्ते पर निकल जाता है। भौमिक शहर के कुछ स्थानों पर जाता है और वहां कुछ लोगों से मुलाकात करता है। फिर वह एक फोन लगाता है और उस फोन पर ही कुछ देर तक बात करता रहता है और फिर अपनी गाड़ी में बैठकर रवाना हो जाता है। शहर से दूर हाइवे के रास्ते में उसकी गाड़ी दौड़ने लगती है। कच्चे और टेड़े मेड़े रास्ते से होते हुए उसकी गाड़ी एक जगह पर जाकर रूक जाती है। वह थोड़ी देर कार में ही बैठा रहता है औ फिर कार से उतरकर पैदल ही कच्चे रास्ते पर बढ़ने लगता है। कुछ दूर पैदल चलने के बाद वहां एक खंडहर दिखाई पड़ता है और वह उसकी ओर लगातार आगे बढ़ता जाता है। खंडहर में पहुंचने के साथ ही वह अपने हाथ में अपनी पिस्टल ले लेता है। और चारों ओर देखते हुए आगे बढ़ता जाता है। खंडहर के बीच में एक बड़ा सा हॉलनुमा बना हुआ था, वह वहां पहुंचकर अपनी पिस्टल को फिर से रख लेता है और वहां से आवाज लगाता है।
भौमिक के इतना कहने के बाद कुछ देर के लिए वहां सन्नाटा रहता है और फिर खंडहर के उस हॉल के एक ओर से ताली की आवाज के साथ एक साया नजर आता है, जो धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और फिर वह साया पूरी तरह से सामने आता है और वह कोई और नहीं प्रफुल्ल ही था।
प्रफुल्ल- मुझे ये तो पता था एसीपी कि एक ना एक दिन तुम मुझ तक जरूर पहुंचोगे, पर इतनी जल्दी पहुंच जाओगे यह नहीं सोचा था। वैसे तुम्हें कैसे पता चला कि इन सबके पीछे मैं ही हूं?
भौमिक- वो सब तो मैं तुम्हें बता ही दूंगा पर पहले तुम ये बताओ कि ये सब तुमने किया क्यों?
प्रफुल्ल- बहुत सीधी सी बात है एसीपी। आज मेरे पास सब कुछ है, पॉवर, पैसा, पोजिशन। मैं जो चाहे वह पैसे से पा सकता था पर मेरा सपना था कि मैं शहर में और खासकर राजनीति में वो मुकाम हासिल करूं जो आज तक कोई नहीं कर सका।
भौमिक- तो ऐसे खत लिखकर या मुझे चैलेंज करा तुम वो मुकाम हासिल कर लोगे?
प्रफुल्ल- नहीं मैंने ऐसा नहीं सोचा। मैं राजनीति की पारी की शुरूआत कर रहा था। मुझे जनता के हर व्यक्ति का सपोर्ट चाहिए था।
भौमिक- एक मिनट। बातें तो होती ही रहेगी। मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूं।
प्रफुल्ल- क्या लाए हो एसीपी?
इसके बाद भौमिक एक चेस बोर्ड निकालता है और उसे बिछा देता है। फिर दोनों ही चेस बोर्ड पर अपने मोहरे सेट करने लगते हैं और फिर दोनों के बीच गेम शुरू हो जाता है।
भौमिक- अब बताओ प्रफुल्ल ऐसा तुमने क्यों किया?
प्रफुल्ल- एक मोहरे को आगे बढ़ाते हुए। जैसा कि मैंने बताया कि मुझे आमजनता में हर व्यक्ति का सपोर्ट चाहिए था। मैं चाहता तो पैसे से वोट खरीद सकता था, पर मैंने ऐसा नहीं किया। इसलिए मुझे लोगों के सपोर्ट संवेदना की जरूरत थी। राजनीति में आने से पहले ही मुझ पर हमला होना और फिर मेरा अपहरण हो जाना ये मेरा प्लान था, ताकि जब मैं चुनाव लडूं तो जनता की संवेदना से मैं जीत जाउं।
भौमिक- पर ऐसा करके तुम क्या हासिल करना चाहते थे। इस बार भौमिक अपना एक मोहरा आगे बढ़ाता है?
प्रफुल्ल- कहा ना मैं ऐसे मुकाम पर पहुंचना चाहता हूं, जहां आज तक कोई नहीं पहुंच सका।
भौमिक- तुम दूसरे रास्ते से भी उस मुकाम तक पहुंच सकते थे। पर तुमने अपराध का सहारा लिया जो बिल्कुल भी सही नहीं है।
प्रफुल्ल- मुझे जो सही लगता है मैं वहीं करता हूं। आज तक अपने डिसीजन के कारण ही मैं यहां तक पहुंचा हूं।
भौमिक- तो अब देखो कि तुम्हारा डिसीजन तुम्हें कहां पहुंचाने वाला है।
प्रफुल्ल- वो तो बाद में देखेंगे पहले अपने राजा को संभालों एसीपी।
भौमिक- चेस बोर्ड को देखते हुए कुछ देर सोचता है फिर अपनी एक चाल चलता है। लो बचा लिया राजा।
प्रफुल्ल- तुम्हारे साथ खेलने में मजा आ रहा है एसीपी। सामने वाला खिलाड़ी अच्छा हो तो खेल का मजा बढ़ जाता है। वैसे तुम मुझ तक पहुंच कैसे गए एसीपी?
भौमिक- खेल में कभी-कभी एक छोटी सी गलती भी बहुत भारी पड़ जाती है एसीपी। अतिआत्मविष्वास किसी भी खिलाड़ी को हार की ओर ले जा सकता है और यही गलती तुमने भी की है। जैसे अभी इस गेम में कर गए हो। और ये गलती तुम्हारे वजीर को ले गई है।
प्रफुल्ल- वजीर को खो देने के बाद प्रफुल्ल एकदम चौंक जाता है और कहता है ये गलती मैंने कैसे कर दी?
भौमिक- कहा ना अतिआत्मविश्वास।
प्रफुल्ल- और तुम्हारे मुझ तक पहुंचने में कौन सी गलती रही एसीपी?
भौमिक- तुम्हें याद है प्रफुल्ल मैं 30 लोगों की लिस्ट तैयार करने के बाद तुमसे भी मिलने के लिए आया था। तब तुम्हें आगाह भी किया था। पर तुम्हारे अतिआत्मविश्वास ने ही मुझे तुम पर शक करने के लिए मजबूर किया। क्योंकि बाकि सब लोग इस बात से थोड़ा तो डरे थे, पर तुम नहीं डरे और कहा कि तुम इन सब से निपट लोगे। जबकि एक एसीपी रैंक कर व्यक्ति तुम्हें आगाह कर रहा था और तुम बिल्कुल नॉमर्ल थे। तभी मुझे शक हुआ था। और यही मेरा एकलौता सुराग भी था, जिससे मैं तुम तक पहुंच सकता था।
भौमिक- नहीं। क्योंकि अब मैं यहां आ गया हूं और तुम मेरे सामने हो तो अब तुम्हारा बच पाना मुश्किल है।
प्रफुल्ल- चलो माना कि उस गलती ने तुम्हें शक करने पर मजबूर किया, पर ये सब मेरा प्लान है यह तुम्हें कैसे पता चला?
भौमिक- एक छोटा मोहरा भी कभी-कभी राजा को मुश्किल में डाल सकता है। ऐसा ही कुछ तुम्हारे साथ हुआ। वो घोड़ा तो याद ही होगा तुम्हें, जो ढाई घर चलता है पर सामने वाले को चारों खाने चित कर देता है?
प्रफुल्ल- हां, याद है।
भौमिक- ऐसा ही लगड़ा घोड़ा मेरा तुम्हारे घर में सेंध लगा गया प्रफुल्ल। तुम पर शक होने के बाद मैंने अपने एक खास व्यक्ति को तुम पर नजर रखने के लिए छोड़ दिया और मैं भी तुम पर नजर रखे था। एक दिन किसी से बात करते हुए तुमने अपनी पूरी प्लानिंग बता ही दी थी। हालांकि उसे प्लानिंग में तुम कुछ कोड वर्ड में बात कर रहे थे, बाद में मैंने उन कोड वर्ड को तोड़ा तो मुझे पूरी कहानी समझ आ गई थी। मुझे इंतजार था तो बस 15 अगस्त का ताकि मैं तुम्हें रंगे हाथ पकड़ सकूं। हां, यहां तक पहुंचने के लिए मुझे कुछ मेहनत जरूर करना पड़ी और आखिरकार तुम मेरी पकड़ में आ ही गए और इसके साथ ही तुम्हारा गेम ओचर हो गया। चेक एंड मैट। यू लॉस्ट मि. प्रफुल्ल।
अपनी हार से प्रफुल्ल एकदम से बौखला जाता है और वह भौमिक पर हमला कर देता है। दोनों के बीच जमकर हाथापाई होती है और इस हाथापाई में दोनों एक-दूसरे पर हथियार तान देते हैं। दोनों ही गोली चलाते हैं। प्रफुल्ल की गोली जहां भौमिक के पेट में लगती हे, वहीं भौमिक की गोली प्रफुल्ल के सीधे सीने में लगती है, जिससे वह गिर जाता है। इसके बाद भौमिक अपना फोन निकालता है और परमार वो वहां आने के लिए कहता है। कुछ ही देर में परमार टीम के साथ वहां पहुंच जाता है। दोनों को हॉस्पिटल पहुंचाया जाता है। भौमिक अब लगभग बेहोशी की हालत में था। एंबूलेंस में जाते समय उसके हाथ से चेस का घोड़ा गिरता है और वह पूरी तरह से बेहोश होने से पहले प्रफुल्ल को देखता है और मुस्कुराता है। कुछ ही दिन बाद बाद दोनों ठीक हो जाते हैं और प्रफुल्ल पर केस चलता है, जबकि हमेशा की तरह भौमिक एक बार फिर अपने ऑफिस में अपनी टेबल पर बैठकर पेपर वेट को घूमा रहा होता है।










👌👌👌👌👌
ReplyDeleteNice story
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