बेताल The Silent Killer अंतिम भाग 



भौमिक को जब होश आता है तो वह खुद को एक कमरे में कुर्सी पर बंधा हुआ पाता है। होश में आने के बाद वह कमरे को गौर से देखता है पर यह उसके लिए एक अंजान जगह थी। ठीक उसकी कुर्सी सामने एक और कुर्सी रखी हुई थी, जिस पर एक लड़की को बांधा गया था, वह अब भी बेहोश थी। भौमिक को अब यह समझने में देर नहीं लगी थी कि बेहोश करने के बाद कोई व्यक्ति उसे उठाकर यहां लेकर आ गया है और उसे बांध दिया गया है। वह खुद को छुड़ाने की कोशिश करता है पर नाकाम होता है, क्योंकि उसे काफी मजबूत तरीके से बांधा गया था। तभी उसे किसी के चलने की आवाज आती है और वह फिर से बेहोश होने का नाटक करता है। आंखे बंद होने के बाद भी भौमिक कमरे में होने वाली हरकत को महसूस कर रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि कोई शख्स कमरे में आ चुका है। वह शख्स उसकी ओर बढ़ता है उसके बाल पकड़ता है और जोर से उसका सिर हिलाता है। 
शख्स : ओह, अब तक बेहोश है? एक लड़की मरने वाली है और एसीपी अब तक सोया हुआ है। वैसे भी अब तक 10 मर चुकी है तो इसने अब तक क्या कर लिया है, जो अब कुछ कर पाएगा? 
भौमिक- भौमिक उसकी आंखों में देखते हुए उन्हें तो नहीं बचा सका पर इसे मरने नहीं दूंगा। 
शख्स- ओह तो तुम होश हो एसीपी? मतलब नाटक कर रहे थे बेहोश होने। 
भौमिक- होश तो अब तेरे खोने वाले है, क्योंकि अब मैं होश में आ चुका हूं। पीछे से वार कर बेहोश तो कर दिया, पर अब तू वार नहीं कर पाएगा। 
शख्स- एसीपी मैं तुम्हें इज्जत दे रहा हूं और तुम मुझे तू-तू करके बात कर रहे हो। यह बात मुझे पसंद नहीं आई। 
भौमिक- तूने ऐसा कौन सा काम किया है, जिससे तुझे इज्जत मिले। 
शख्स - एसीपी साहब एक काम करो ये तू-तू करना बंद करो, मेरा नाम कुशाग्र है। मुझे मेरे नाम से ही बुला लो। 
भौमिक- पहले ये बताओ, तुम ये सब क्या कर रहे हो और क्यों कर रहे हो? 
कुशाग्र- अरे एसीपी तुम अब तक नहीं समझे? मुझे तो लगा था कि तुम्हें छोटा सा कोई सुराग मिलता है तो तुम पूरा केस सॉल्व कर देते हो। जबकि उस बाबा ने तो तुम्हें पूरी कहानी बता दी थी। 
भौमिक- मतलब वो तंत्र-मंत्र तुम कर रहे हो? इस जमाने में भी तुम तंत्र-मंत्र का मान रहे हो? 
कुशाग्र- तुम नहीं मानते एसीपी तो क्या हुआ, पर मैं तो मानता हूं। और भी कई लोग मानते हैं। उस बाबा को ही देख लो वह कैसे बंद घर में अंदर आ गया और बिना दरवाजा खोले बाहर चला गया। 
भौमिक- देखो तुम जो भी कर रहे हो वह गलत है। इसकी तुम्हें बहुत कड़ी सजा मिलेगी। 
कुशाग्र- सजा तो तब मिलेगी ना एसीपी, जब तुम मुझे पकड़ पाओगे। आज इस लड़की के खात्मे के साथ ही मेरी सिद्धी पूरी हो जाएगी और फिर मैं जो चाहू वो कर सकूंगा। इसलिए तुम ये ख्वाब देखना छोड़ दो एसीपी की तुम मुझे छू भी सकोगे। 
भौमिक- वो तो वक्त ही बताएगा कुशाग्र।

कुशाग्र - वक्त ? पर तुम्हारे पास वक्त कहां है एसीपी? वक्त तो अब मेरा है। बस थोड़ी सी देर और फिर......। 
इतना कहने के बाद कुशाग्र उस लड़की की ओर बढ़ने लगता है। हालांकि भौमिक उसे कई बार रोकने की कोशिश करता है पर बंधा होने के कारण वह कुछ कर नहीं पाता है। कुशाग्र उस लड़की को होश में लेकर आता है। लड़की होश में आते ही चीखने लगती है। इसके बाद कुशाग्र वहां से चला जाता है। इधर उस लड़की की नजर भौमिक पर पड़ती है, जो अब भी खुद को उस बंधन से आजाद करने की कोशिश करने में लगा था। लड़की भौमिक को अजीब नजरों से देखती है।
भौमिक- डरो मत, मेरा नाम भौमिक है और मैं एसीपी हूं। क्या तुम निकिता हो? 
निकिता- हां, पर आप यहां इस हाल में कैसे सर? 
भौमिक- वो सब बाद में। पहले ये बताओ, ये तुम्हारा घर है? 
निकिता- हां, सर। 
भौमिक- तो ये यहां क्या कर रहा है और यह अंदर कैसे आया? 
निकिता- पता नहीं सर। मैं तो जब रात को सो रही थी। तब मुझे मेरे बेड पर कुछ हलचल महसूस हुई। मेरी नींद खुली तो मेरी नजर इस पर गई। मैं कुछ कर पाती उसके पहले तो इसने मुझे कोई चीज सुंघाकर बेहोश कर दिया। 
भौमिक- पर ये अंदर आया कैसे? मेरे आदमी पूरे समय इस घर पर नजर रखे हुए थे। इस दौरान तो तुम गई और ऑफिस से वापस आई हो। इस समय में तुम्हारे घर पर कोई नहीं आया था। 
निकिता- मेरे घर पर आपके आदमी की नजर? मतलब आपको पता था कि मेरे साथ कुछ होने वाला है? आपके लोग मेरे घर पर नजर रखे हुए थे? 
भौमिक- ये सब मैं तुम्हें बाद में बताउंगा। पहले ये बताओ कि हम यहां से कैसे छूट सकते है? 
निकिता- मैं क्या बताउं सर मैं खुद भी तो यहां आपके सामने ही बंधी हुई हूं। 
तभी कुशाग्र फिर से उस कमरे में आता है। 
कुशाग्र - निकिता, अब तुम मेरी एक बात मानोगी। अब मैं जैसा कहूंगा, वैसा ही तुम्हें करना होगा। और एसीपी तुम तो जानते ही हो कि अगर इसने मेरा कहा नहीं माना तो इसके साथ क्या हो सकता है, इसलिए तुम ही इसे कह दो कि मैं जो कह रहा हूं वो ये करें। 
बेताल The Silent Killer चौथा भाग यहां पढ़े

भौमिक- देखो मैं तुम्हें फिर कह रहा हूं कि तुम यहां से बचकर नहीं जा सकते। इसलिए लड़की को छोड़ दो और खुद को मेरे हवाले कर दो। 
कुशाग्र- ओह एसीपी। मुझे तुम्हारे इस ज्ञान की जरूरत नहीं है। अभी तुम वो करो जो मैं तुम्हें करने के लिए कह रहा हूं। वरना तुम जानते हो कि मैं इस लड़की का क्या हाल करूंगा। 
भौमिक- नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा। 
कुशाग्र- ठीक है, तो मैं अपने तरीके से इस लड़की से करवा लूंगा। और मेरा तरीका तो तुम्हें पता ही एसीपी। 
निकिता- क्या मुझे कोई बताएगा कि यहां क्या हो रहा है? और यह कौन है? और क्या करवाना चाहता है मुझसे। 
भौमिक- निकिता तुम चुप रहो। ये जो कह रहा है वो बिल्कुल मत करना। मुझ पर भरोसा रखो, मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा। 
कुशाग्र- (हंसते हुए) ठीक है एसीपी तुम इस लड़की को बचाने की कोशिश करो और मैं.....
इतना कहने के बाद कुशाग्र निकिता के मुंह पर टैप लगा देता है, जिससे कि वह चिल्ला न सके। इसके बाद वह उसे कुर्सी से खोलता है और फिर उसे दूसरे कमरे में ले जाता है। हालांकि निकिता उससे छूटने का बहुत प्रयास करती है, पर उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी। कुछ ही देर में वहां एकदम खामोशी छा जाती है। इधर भौमिक किसी अनहोनी के बारे में सोच रहा था, तभी कुशाग्र फिर से बाहर आता है। इस बार वह भौमिक के मुंह पर टैप लगाकर और उसे और तेज बांध कर चला जाता है। कमरे में जाने के बाद निकिता के चीखने के आवाज आती है। भौमिक फिर से डर जाता है और इस बाद पूरी ताकत लगाकर वह खुद को छुड़ाने की कोशिश करता है। आखिरकार वह खुद को छुड़ाने में सफल हो जाता है। वह अपनी गन देखता है, पर उसे गन नहीं मिलती है। वह बिना गन के ही उस कमरे की ओर बढ़ जाता है। वह कमरा अब अंदर से बंद था। वह उसे खोलने की कोशिश करता है। जब कमरा नहीं खुलता है तो वह गेट को तोड़ने का फैसला करता है और दो या तीन धक्कों के बाद वह गेट टूट जाता है। वह अंदर देखता है तो कुशाग्र वहां घायल पड़ा हुआ था और निकिता के टेबल के पीछे छिपी हुई थी। वह कमरे में अंदर जाता है। उसे देखकर निकिता बाहर आ जाती है। भौमिक कुशाग्र को देखता है वह घायल था। फिर वो परमार को फोन करता है और फिर निकिता से बात करने के लिए उसके पास जाता है। तभी कुशाग्र उस पर हमला कर देता है। दोनों में काफी हाथापाई होती है, जिसमें कुशाग्र और भी ज्यादा घायल हो जाता है। 
भौमिक- डरो मत निकिता। तुमने जो भी किया अपनी सुरक्षा के लिए किया है। वैसे भी वो मरा नहीं है घायल है। 
निकिता-वो मेरे साथ........ इतना कहते हुए निकिता रोने लगी है। 
भौमिक- रो नहीं निकिता। मैं सब जानता हूं। 
निकिता- पर ये है कौन सर? और मुझे क्यों मारना चाहता है। 

भौमिक- तुमने अखबारों में एक सीरियल कीलर के बारे में पढ़ा होगा ना। ये वहीं है। हमें भी इसकी बहुत दिन से तलाश थी। हमें पता चला था कि तुम इसकी अगली शिकार हो, इस कारण हम तुम्हारे घर पर नजर रख रहे थे। रात को मैं खुद यहां था कि तभी किसी ने पीछे से मेरे सिर पर वार किया और मैं बेहोश हो गया। होश आया तो कुर्सी पर था। बाकि जो हुआ तुम्हारे सामने हुआ है। 
निकिता- जी, पर अब इसका क्या करना है। 
भौमिक- तुम उसकी चिंता छोड़ दो, मैंने फोन कर दिया है, मेरे लोग आते ही होंगे। 
कुछ ही देर में परमार वहां कुछ सिपाहियों के साथ आ जाता है। फिर वह कुशाग्र को लेकर हॉस्पिटल चले जाता है। फिर भौमिक भी अपने घर आ जाता है। तैयार होकर वह फिर से ऑफिस आ जाता है। घायल होने के बाद भी कुशाग्र पुलिस को बताता है कि बचपन से ही उसे हमेशा इग्नोर किया जाता था। इसलिए उसने मन में ठान लिया था ि कवह कुछ अलग करेगा। फिर बड़ा होने पर उसे एक तांत्रिक मिला, उसने उसे बेताल के बारे में बताया और बताया कि बेताल को सिद्ध करने से वो दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान बन सकता है। वो जो चाहे वह कर सकता है। उसने बेताल को सिद्ध करने की पूरी विधि भी बताई थी। उसी अनुसार वह बेताल को सिद्ध करने के लिए लड़कियों की बलि दे रहा था। उसने दो और लड़कियों की हत्या की बात कबूल की थी। उसका कहना था कि यदि वह निकिता की भी बलि चढ़ा देता तो उसकी सिद्धी पूरी हो जाती, पर भौमिक ने उसे रोक लिया। इधर भौमिक एक और केस को सॉल्व करने के बाद पेपरवेट को टेबल पर घुमा रहा था। 
 

Comments/disqusion
1 comment

  1. भौमिक का किरदार जबरदस्त हैं

    ReplyDelete