बेताल The Silent Killer छठा भाग
बाबा- हां, मैं जानता था कि तुम मुझसे फिर से मिलना चाहते हो। इसलिए ही यहां आ गया। वैसे तुमने उस पर्ची को पढ़कर अच्छा काम किया।
भौमिक- पर आपने वहां का पता लिखा तो क्या आपको पता था कि वहां ऐसा कुछ है?
बाबा- मुझे क्या पता है और क्या नहीं। यह तुम ना ही जानों तो अच्छा है। बस तुम्हारा काम हो गया ना?
भौमिक- नहीं अभी मेरा काम नहीं हुआ है, क्योंकि वह कातिल अब भी आजाद घूम रहा है और वह फिर से कोई कत्ल कर सकता है।
बाबा- करेगा, बिल्कुल करेगा। पर तुम चाहो तो उसे रोक सकते हो।
भौमिक- मैं उसे हर हाल में रोकना चाहता हूं बाबा। पर आपको मेरी मदद करना होगी।
बाबा- ठीक है तो समाज की भलाई के लिए मैं तुम्हारी मदद करूंगा। पर मेरी एक शर्त है।
भौमिक- वो क्या?
बाबा- मैं सिर्फ तुम्हें रास्ता बताउंगा, तुम्हें उस रास्ते पर चलना होगा। मैं तुम्हारे साथ नहीं आउंगा।
भौमिक- ठीक है बाबा। मैं उस कातिल को पकड़ना चाहता हूं बस। आप मुझे रास्ता बताइए।
बाबा- ठीक है। इसके लिए तुम्हें अब दो दिन का इंतजार और करना होगा।
भौमिक- पर बाबा ये इंतजार क्यों। अगर इन दो दिनों में फिर कोई कत्ल हुआ तो?
बाबा- नहीं होगा।
भौमिक- बाबा आप अंदर कैसे आ गए? मैं आपका इंतजार ही कर रहा था।
बाबा- मैंने तुम्हें पहले भी कहा था कि मैं कहीं भी आ-जा सकता हूं। और रही बात इंतजार की तो मैं यहां तुम्हारे लिए ही आया हूं।
बाबा भौमिक को गौर से देखता है और उसके चेहरे पर एक मुस्कान आती है। बाबा की मुस्कान को देखकर भौमिक को कुछ आश्चर्य होता है पर वह कुछ कहता नहीं है। इस बीच बाबा एक बार एक पर्ची कमरे में रखी एक टेबल पर रखता है और फिर वहां से चला जाता है। बाबा के जाते ही भौमिक उठता है और उस पर्ची को खोलकर पढ़ता है। पर्ची पढ़ते ही भौमिक तैयार होता है और परमार को फोन लगाकर तुरंत ऑफिस पहुंचने के लिए कहता है और खुद भी ऑफिस के लिए निकल जाता है। भौमिक ऑफिस पहुंचता है और उसके कुछ ही देर बाद परमार भी वहां आ जाता है। परमार को लेकर भौमिक एक बार फिर ऑफिस से निकल जाता है। शहर की कुछ गलियों से होते हुए एक कॉलोनी में एक घर के सामने वह अपनी गाड़ी रूकवा देता है।
भौमिक- समझ लो परमार कि हमें हमारा गुनाहगार यही मिलने वाला है।
परमार- मैं कुछ समझा नहीं सर?
भौमिक- अभी तुम सिर्फ इतना करो परमार कि इस घर पर 24 घंटे, हर मिनट दो आदमियों की निगाह होना चाहिए। इस घर की हर एक मिनट की जानकारी हमारे पास होना चाहिए।
परमार- ठीक है सर। पर ये घर है किसका।
भौमिक- यह तो जब तुम नजर रखोगे तो तुम्हें खुद पता चल जाएगा। पर ध्यान रहे कि इस घर से तुम्हारी नजर हटना नहीं चाहिए।
परमार- ओके सर।
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परमार को इतना कहने के बाद भौमिक वहां से गाड़ी लेकर चला जाता है और परमार वहां खड़े होकर उस घर पर नजर रखने लगता है। हालांकि अभी सुबह के करीब 6.30 बजे थे, इस कारण उस कॉलोनी में कोई ज्यादा हलचल नजर नहीं आ रही थी। करीब 8.30 बजे उसे घर से एक लड़की निकलती है, जो गेट को लॉक कर निकल जाती है। इस बीच में परमार ने कुछ सिपाहियों को वहां बुला लिया था, वह उन्हें उस घर पर नजर रखने का कहकर उस लड़की के पीछे चला जाता है। इस दौरान वह भौमिक को फोन पर बता देता है कि वह उस लड़की के पीछे जा रहा है। लड़की एक ऑफिस पहुंच जाती है और परमार वहां से उस लड़की के संबंध में सारी जानकारी जुटा लेता है। उस लड़की की जानकारी वह भौमिक को फोन पर बता देता है। रात करीब 8.30 बजे वह लडत्रकी एक बार फिर अपने घर के लिए रवाना होती है और फिर अपने घर पर पहुंच जाती है और भौमिक भी उसके पीछे-पीछे वहां पहुंच जाता है। वह सिपाहियों से दिन भर की गतिविधि के बारे में जानकारी लेता है और दोनों सिपाही बताते हैं कि घर पर दिनभर ताला ही रहा है और इस दौरान उसके घर पर कोई नहीं आया। कॉलोनी में भी उन्हें कोई संदिग्ध नजर नहीं आया। कुछ ही देर में भौमिक भी वहां आ जाता है।
भौमिक- परमार कुछ खास बात?
परमार- नहीं सर। बस अभी निकिता अपने घर पर गई है।
भौमिक- दिन भर में कुछ मिला?
परमार- नहीं सर दिन भर ये दोनों यही थे और इन्होंने भी ऐसा कुछ खास नहीं देखा।
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परमार की बात सुनने के बाद भौमिक सोच में पड़ जाता है कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आज पूरे में दिन में यहां कुछ भी नहीं हुआ। जबकि बाबा ने तो यही पता दिया था। पूरे दिन नजर रखने के बाद भी यहां कोई संदिग्ध नजर नहीं आया है और न ही यहां कोई हलचल हुई है। ये बात तो तय है कि लड़की अकेली रहती है। ऑफिस में काम करती है तो कातिल का अगला निशाना हो सकती है। एक तरह से वह सही जगह पर खड़ा है। शिकार यहां है तो शिकारी कहां गया? बाबा के हिसाब से कातिल को आसपास ही कहीं होना चाहिए था, पर वो आया क्यों नहीं? अब धीरे-धीरे रात भी बढ़ने लगी थी। भौमिक ने परमार और दोनों सिपाहियों को कुछ देर आराम करने के लिए भेज दिया और खुद वहीं खड़े होकर उस घर पर नजर रखने लगा। अब रात भरी काफी हो गई थी और एक रात पहले बाबा का इंतजार करने के कारण भौमिक सो नहीं पाया था, इस कारण उस पर भी थकान हावी होने लगी थी। अब वो उस घर के सामने से हटकर एक दीवार के पास जाकर खड़ा हो गया था, जिससे घर से दूर रहकर उस घर पर नजर रख सके। वह घर पर नजर रखे ही था कि तभी उसके सिर पर किसी भारी चीज से किसी ने वार किया और वो वही बेहोश हो गया।









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