लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 4

लापता- आखिर किसकी तलाश है... पहला पार्ट यहां पढ़े

जंबो काका- सच कहूं तो मुझे अब तक यही लगता है कि उस धमाके में कोई तो बचा था। पर कौन बचा, कैसे बचा, कहां गया कुछ पता ही नहीं चला। 

मिहिर- काका उस धमाके के समय ऐसा कुछ था जो आम तौर पर नहीं होता। 

जंबो काका- ऐसा तो कुछ नहीं था, पर हां उस समय यहां पास में ही एक बंजारों का डेरा हुआ करता था। धमाके के कुछ दिन वह भी रातों रात गायब हो गया। एक ही रात में बंजारे कहा चले गए कुछ पता ही नहीं चला। 

मिहिर- धमाके से कितने दिन बाद वो बंजारे यहां से चले गए थे काका? 

जंबो काका- ठीक से तो कुछ याद नहीं पर शायद 20 या 25 दिन रहे होंगे। 

मिहिर- और कुछ काका ?

जंबो काका- नहीं ऐसा तो कुछ नहीं। हां, याद आया। धमाका होने के कुछ ही देर बाद वहां एक काले रंग की बडत्री सी कार आई थी और फिर तुरंत ही चली गई। 

मिहिर- उस कार के बारे में कुछ याद है काका ?

जंबो काका- नहीं अब तो यह 15 बरस पुरानी बात है। इतना कहां याद रहता है। पर हां एक बात है कि उस कार पर पीछे शीशे पर बहुत सारे गोले बने हुए थे। 

मिहिर- गोले ? 

जंबो काका- हां गोले, मुझे तो कुछ समझ नहीं आया। 

मिहिर- अच्छा काका वो बंजारों का जो डेरा था उसके बारे में कुछ पता है क्या आपको ?

जंबो काका- बहुत तो नहीं पता पर इतना पता है कि उन बंजारों का जो सरदार था उसका नाम हीरा था। उसके डेरे में करीब 200 लोग थे। कभी यहां तो कभी कहां। ऐसे ही घूमते रहते थे। वो कहता था कि उसने अपने डेरे के साथ पूरा भारत घूम लिया है। 

मिहिर- ठीक है काका। आपने मेरी बहुत मदद की है, आपको धन्यवाद। 

जंबो काका से जानकारी हासिल कर मिहिर वहां से निकल जाता है। वहां से वह अपना अगला सफर शुरू करता है। अब वह बंजारों के सरदार हीरा के बारे में पता लगाना चाहता है। इस कारण वह अब उस हादसे वाले स्थान के आसपास के गांवों में हीरा के बारे में जानकारी जुटाता है। हालांकि उसे आसपास के गांव में कोई जानकारी नहीं मिलती है। हीरा की तलाश में वह कई गांवों में पहुंच जाता है। आखिरकार एक गांव में उसे हीरा के बारे में जानकारी मिलती है। गांव से उसे पता चलता है कि प्रदेश की बॉर्डर पर फिलहाल उनका डेरा जमा है। बारिश होने वाली है, इस कारण पूरी बारिश में वे लोग घूमते नहीं है इस कारण वे लोग कम से कम तीन महीने वहीं रहेंगे। वहां हीरा मिल सकता है। मिहिर अब प्रदेश की बॉर्डर का सफर तय करता है। दो दिन के बाद वह उस जगह पहुंच जाता है, जहां बंजारों का डेरा लगा था। मिहिर बंजारों के डेरे में पहुंचकर उनके सरदार हीरा से मिलने की इच्छा जाहिर करता है। कुछ ही देर में वो हीरा के सामने था। हालांकि हीरा उसे रात को आराम करने का कहता है और वो जिस भी काम से वहां आया है, उसके बारे में सुबह बात करने की कह देता है। इसके बाद मिहिर आराम करने के लिए चला जाता है। लंबा सफर तय करने के कारण वो यूं भी थक चुका था। अगले दिन मिहिर एक बार फिर हीरा के सामने होता है। 


लापता- आखिर किसकी तलाश है... दूसरा पार्ट यहां पढ़े 

हीरा - अब बताओ बाबू क्या मदद चाहिए हीरा की ?

मिहिर- बात कुछ पुरानी है इसलिए आपको शायद थोड़ा दिमाग पर जोर देना पड़े। 

हीरा- कोई बात नहीं। बात बताओ। 

मिहिर- आज से 15 साल पहले काशीपुर गांव के पास सड़क पर एक बस में हादसा में हुआ था। मुझे उसके बारे में ही कुछ जानना है। 

हीरा- हां, याद है बाबू। उस हादसे को कैसे भूल सकते हैं। इतना तेज धमाका मैंने आज तक नहीं सुना है। 

मिहिर- मैं वहीं जानना चाहता हूं कि आखिर उस दिन हुआ क्या था ? 

हीरा- बाबू धमाके से पहले क्या हुआ यह तो नहीं पता, पर जैसे ही धमाका हुआ मैं और मेरे डेरे के लोग जो उस सड़क से कुछ ही दूर पर थे, दौड़कर बस के पास पहुंचे। हम जब वहां पहुंचे तो बस पूरी तरह से जल गई थी। उस बस में जितने भी लोग सवार थे, सभी जिंदा जल गए थे। 

मिहिर- पर क्या आपने वहां कुछ अलग देखा था ?

हीरा- अलग था या नहीं यह मुझे नहीं पता पर जब हम लोग वहां पहुंचे थे, तो एक बड़ी सी गाड़ी वहां से जा रही थी। उसके शीशे पर कुछ गोले बने हुए थे। 

मिहिर- और कुछ ?

हीरा- और तो ऐसा कुछ खास नहीं था। 

मिहिर- उस धमाके के बाद कुछ हुआ हो? 

हीरा- धमाके के बाद तो ये समझ लो बहुत कुछ हुआ था। पता नहीं कौन-कौन से लोग आकर हमसे पूछताछ करते रहते थे। आखिर में हमको वो जगह ही छोड़ना पड़ी। अब देखों 15 साल बाद तुम आ गए पूछताछ करने के लिए। आखिर उस धमाके में ऐसा क्या हो गया था कि 15 साल बाद भी पूछताछ कर रहे हो। 

मिहिर- बहुत कुछ हो सकता है हीरा जी अगर उस धमाके का राज नहीं खुला तो। वैसे और कोई खास बात याद है आपको उस धमाके के बारे में या धमाके के बाद। 

हीरा- बात तो है, पर पता नहीं वो तुम्हारे काम की है या नहीं। 

मिहिर- कौन सी बात ?

हीरा- हमारे डेरे में एक वैध हुआ करते थे। हादसे के बाद वे काफी गुमसुम रहने लगे थे। कोई 15 दिन वो अचानक लापता हो गए। उसके बाद से उनकी कोई खबर नहीं है। 

मिहिर- लापता हो गए मतलब ?

हीरा- मतलब ये बाबू कि रात को वो मुझसे मिलकर गए थे। मेरी तबीयत उस दिन कुछ खराब थी तो मैंने दवा मंगाई थी। वो ही दवा देने आ गए थे। कुछ देर मेरे पास बैठे, मुझे दवा दी और फिर चले गए। सुबह मैंने फिर उनसे दवा मंगाई तो वो डेरे में नहीं थे। हमने आसपास काफी खोजा पर उनका कुछ पता नहीं चला। 


लापता- आखिर किसकी तलाश तीसरा पार्ट यहां पढ़े 

मिहिर- आप बता रहे थे कि वो कुछ गुमसुम रहते थे, उसका कुछ पता चला था आपको ?

हीरा- नहीं। वो ही अचानक लापता हो गए तो उनके गुमसुम रहने का कारण भी पता नहीं चल पाया। हां, पर एक बात है वो धमाके के बाद से पूरा दि नही डेरे से गायब रहते थे। कोई पूछता तो कह देते थे कि पास के जंगल में गया था बूटिया देखने। पर यहां से जंगल तो बहुत दूर है। 

मिहिर- मतलब आपको उनके बारे में कुछ नहीं पता ? 

हीरा- नहीं। 

मिहिर- उनका कोई फोटो है आपके पास ? 

हीरा- हां एक बार हम मेला गए थे तो बड़ी जिद करके उनका भी एक फोटो लिया था, वहीं है। पर वो तो बहुत पुराना है। 

मिहिर- कोई बात नहीं आप दिखा तो दीजिए। 


हीरा उस वैध का फोटो लाता है और मिहिर अपने मोबाइल में उसका एक फोटो खींच लेता है। उसके बाद वह हीरा से विदा लेकर वहां से चल देता है। डेरे से कुछ दूर जाकर कमिश्नर को फोन करता है और अभी तक की सारी जानकारी उसे देता है। फोन कट करने के बाद मिहिर सोचता है कि हो न हो उस वैध को उस धमाके के बारे में कुछ ऐसा पता था, जिसके कारण वह गुमसुम रहता था और सारा दिन डेरे से गायब रहता था। आखिर ऐसी कौन सी बात है, जो उन्हें डरा रही थी। फिर अचानक एक दिन लापता हो गए। कोई बात तो जरूर है। डेरे से ऐसे कोई व्यक्ति कैसे गायब हो सकता है ? मिहिर को अब अपने मिशन को आगे बढ़ाने के लिए उस वैध को तलाश करना जरूरी था। क्योंकि अब मिहिर के मिशन को आगे का रास्ता उस वैध से ही मिल सकता था। पर समस्या यह थी कि वैध को आखिर कहां और कैसे तलाश किया जाए, क्योंकि उस वैध गायब हुए भी 15 साल बीत चुके हैं। मिशन केतु मिहिर के लिए बहुत मुश्किल मिशन साबित होने वाला था। क्योंकि उन सब बातों का पता लगाना था जो 15 साल पहले हो चुकी है। ऐसे में उन बातों से जुड़ा कोई भी सुराग मिलना अब बहुत मुश्किल है। 


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