तो हर कहानी पूरी हो जाएगी
बहुत सुन चुका हूं दो दिलों के अधुरी कहानी,
कभी इसकी जुबानी तो कभी उसकी जुबानी।
सुना ये भी है इस जहान में दिल मिले ना मिले,
हर दिल में यहां किसी की याद हमेशा रहती है।।
सोचता हूं इस अधुरेपन की वजह क्या है,
मिलते हैं दो दिल जहां, वो जगह क्या है।
इश्क है अधुरा, प्रेम में भी आखर है ढाई,
देखा जो गौर से तो मोहब्बत भी अधुरी पाई।।
कहीं शब्द अधुरे, तो कहीं जज्बात अधुरे हैं,
कभी रातें है तन्हा, तो कभी दिन अधुरे हैं।
ये खालीपन अक्सर चुभता सा क्यों है,
लगता है फूलों के बिना गुलशन अधुरे हैं।।
कहीं मिलती नहीं मंजिल, तो कहीं रास्ते अधुरे हैं,
टूटे हुए दिलों के यहां हुए मशहूर कई किस्से हैं।
दिल में अरमान है बहुत और मन में कई उमंग हैं,
कलम तो लिख रही है, पर अब भी कई खत अधुरे हैं।।
क्यों बनते-बनते मिट जाती है एक सपनों की दुनियां,
इंसानों की बस्ती बहुत है, फिर भी यहां शहर अधुरे हैं,
टूटे है कई साथ यहां, कई हाथ भी यहां छुटे हैं,
जन्मों की कहानी है, फिर भी यहां कई रिश्ते अधुरे हैं।।
कभी आंखों की आंखों से बातें, कभी खत्म न होती रातें,
कभी महफिल दिल में, तो कभी यहां जश्न अधुरे हैं।
कभी पतझड़ तो कभी बहार, कभी नैंनों से बरसातें हैं,
गिरती भी है बूंदों की लड़ियां, फिर भी मौसम अधुरे हैं।।
ये खालीपन, ये सुनापन, कहीं अल्फाजों की बोली है,
कहीं श्मसान का सन्नाटा, कहीं उल्लासों की होली है।
कहीं सिमटती है दूरियां, कहीं पहलू की गहराई है,
कहीं बाहों की तड़प है, कहीं सीने के अरमान अधुरे हैं।।
प्यार तो पूरा न हुआ, पर दो दिल तो पूरे हैं,
कहानी सच्ची पर शायद शब्द ही अधुरे हैं।
है कोई कहानी, जिससे इनकी कमी पूरी हो जाएगी,
गर पूरे हुए ये शब्द, तो हर कहानी पूरी हो जाएगी।।
बहुत सुन चुका हूं दो दिलों के अधुरी कहानी,
कभी इसकी जुबानी तो कभी उसकी जुबानी।
सुना ये भी है इस जहान में दिल मिले ना मिले,
हर दिल में यहां किसी की याद हमेशा रहती है।।
सोचता हूं इस अधुरेपन की वजह क्या है,
मिलते हैं दो दिल जहां, वो जगह क्या है।
इश्क है अधुरा, प्रेम में भी आखर है ढाई,
देखा जो गौर से तो मोहब्बत भी अधुरी पाई।।
कहीं शब्द अधुरे, तो कहीं जज्बात अधुरे हैं,
कभी रातें है तन्हा, तो कभी दिन अधुरे हैं।
ये खालीपन अक्सर चुभता सा क्यों है,
लगता है फूलों के बिना गुलशन अधुरे हैं।।
कहीं मिलती नहीं मंजिल, तो कहीं रास्ते अधुरे हैं,
टूटे हुए दिलों के यहां हुए मशहूर कई किस्से हैं।
दिल में अरमान है बहुत और मन में कई उमंग हैं,
कलम तो लिख रही है, पर अब भी कई खत अधुरे हैं।।
क्यों बनते-बनते मिट जाती है एक सपनों की दुनियां,
इंसानों की बस्ती बहुत है, फिर भी यहां शहर अधुरे हैं,
टूटे है कई साथ यहां, कई हाथ भी यहां छुटे हैं,
जन्मों की कहानी है, फिर भी यहां कई रिश्ते अधुरे हैं।।
कभी आंखों की आंखों से बातें, कभी खत्म न होती रातें,
कभी महफिल दिल में, तो कभी यहां जश्न अधुरे हैं।
कभी पतझड़ तो कभी बहार, कभी नैंनों से बरसातें हैं,
गिरती भी है बूंदों की लड़ियां, फिर भी मौसम अधुरे हैं।।
ये खालीपन, ये सुनापन, कहीं अल्फाजों की बोली है,
कहीं श्मसान का सन्नाटा, कहीं उल्लासों की होली है।
कहीं सिमटती है दूरियां, कहीं पहलू की गहराई है,
कहीं बाहों की तड़प है, कहीं सीने के अरमान अधुरे हैं।।
प्यार तो पूरा न हुआ, पर दो दिल तो पूरे हैं,
कहानी सच्ची पर शायद शब्द ही अधुरे हैं।
है कोई कहानी, जिससे इनकी कमी पूरी हो जाएगी,
गर पूरे हुए ये शब्द, तो हर कहानी पूरी हो जाएगी।।









Bahut khub
ReplyDeleteबेहतरीन 👌🏻👍🏻
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