बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार
Final पार्ट
अगले ही दिन सुहानी नागपुर पहुंच जाती है। काफी मुश्किल से वह स्वाती का पता लगाती है और उसके घर पहुंच जाती है। स्वाती आज भी घर पर अकेली ही थी। स्वाती हालांकि सुहानी को पहचानती नहीं है, इसलिए स्वाती उसे अपना परिचय देती है। हालांकि उसने अब तक स्वाती को यह नहीं बताया है कि वह विवान को जानती है और उसके कारण ही यहां तक आई है। स्वाती उसे घर में बुलाती है और फिर दोनों बात करने लगते हैं।
स्वाती- वैसे मैंने आपको पहचाना नहीं। क्या हम पहले कहीं मिले हैं?
सुहानी- नहीं, हम पहले कभी नहीं मिले। आप मुझे नहीं जानती, पर मैं आपको बहुत अच्छे से जानती हूं।
स्वाती- ओह... बताए यहां कैसे आना हुआ?
सुहानी- मैं सिर्फ एक सवाल का जवाब लेने के लिए आई हूं।
स्वाती- कौन सा सवाल?
सुहानी- आपने विवान के साथ ऐसा क्यों किया?
स्वाती- ओह तो तुमको विवान ने यहां भेजा है।
सुहानी- जी, नहीं उन्होंने यहां नहीं भेजा। मैं यहां खुद अपनी मर्जी से आई हूं। और मुझे मेरे सवाल का जवाब चाहिए।
स्वाती- तो सुनो जवाब। मैं किसी अपाहिज की बीवी बनकर पूरी जिंदगी उसकी गुलामी नहीं कर सकती थी। मेरे भी कुछ सपने थे, मेरी भी जिंदगी है। हां, एक समय उसका भविष्य अच्छा था, पर एक्सीडेंट के बाद लगभग सब खत्म हो गया था। इस कारण मुझे अपना फैसला बदलना पड़ा।
सुहानी- पर बाद में तो तुम्हें पता चल गया था कि वह एक्सीडेंट के बाद पूरी तरह से ठीक है। जब वो तुमसे मिलने के लिए आया था, तब तो तुम उसे सॉरी कह सकती थी। पर तुमने तो ऐसा कुछ नहीं किया, बल्कि उसे और चोट पहुंचा दी।
स्वाती- मुझे जो ठीक लगा वो मैंने किया।
सुहानी- तुमने जो विवान के साथ किया वहीं अगर तुम्हारे साथ होता तो? तुम्हारे अपाहिज होने की झूठी खबर सुनने के बाद वो भी किसी ओर से शादी कर लेता तो कया तब भी तुम यही कहती कि उसने जो किया वो अच्छा किया।
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 2 यहां पढ़े
इतना कहने के बाद सुहानी वहां से चली जाती है। सुहानी के जाने के बाद स्वाती सुहानी की बातों को सोचती है और फिर विवान को फोन लगाती है। फोन पर वह विवान को अपने किए केलिए सॉरी बोलती है और उससे कहती भी है कि वो अपनी जिंदगी फिर से शुरू करें। आज उसे बुरा लग रहा है कि वह उसके साथ नहीं है।
अगले दिन सुहानी फिर उसी जगह पहुंच जाती है, जहां विवान अक्सर होता है। आज भी विवान वहां अकेला घूम रहा था और सुहानी उसे देख रही थी। फिर सुहानी विवान की ओर जाती है। दोनों एक दूसरे को देखते हैं।
विवान- आप फिर आ गई?
सुहानी- जी, हां।
विवान- मैंने कहा कि आप मुझे मेरे हाल पर छोड़ दें। मुझे आपसे कोई बात नहीं करना है।
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 3 यहां पढ़े
सुहानी- हां, गई थी। क्योंकि मुझसे आपकी यह हालत नहीं देखी जा रही थी। सोचा शायद उसके कहने से आप मान जाए। क्योंकि प्यार तो आपने भी किया था उससे।
विवान- हां, किया था, पर वो तो निभा नहीं सकी। बस यही कह भी रही थी। अब सलाह दे रही है कि मैं अपनी जिंदगी फिर से शुरू करूं।
सुहानी- जी, मैं भी आपसे यही कहना चाहती हूं, जो हुआ अब उससे आगे निकलिए। जो होना था वो हो गया।
विवान- जी, नहीं आप सभी के लिए यह सब कहना बहुत आसान है। जब आप मेरी स्थिति से गुजरेगी तब कहूंगा मैं ये बात। दर्द का अहसास उसे ही होता है, जिसे चोट लगी हो। वरना दर्द को दूर करने की सलाह देने के लिए तो हजारों लोग आ जाते हैं। कभी उस दर्द को महसूस करके देखा, तब पता चलेगा।
सुहानी- पर....
विवान- मैं आपसे आखिरी बार कह रहा हूं मुझे मेरे हाल पर छोड़ दीजिए। वैसे भी आपका और मेरा कोई रिश्ता भी नहीं है।
सुहानी- मैं आपसे प्यार करती हूं।
विवान- प्लीज, मुझे इस शब्द से नफरत है। इसलिए ये बात अब कभी भी मेरे सामने मत कहना। और बात क्या कहना, आप भी मेरे सामने कभी मत आना।
सुहानी- आप मेरा यकीन कीजिए मैं आपसे सच में प्यार करती हूं। और हमेशा आपके साथ ही रहना चाहती हूं।
विवान- मुझे किसी के साथ नहीं रहना है। आप यहां से जा सकती है।
सुहानी- तो फिर ठीक है, मैं देखूंगी कि कब तक आपकी नफरत खत्म नहीं होती है। मैं अपने प्यार से आपको बदलकर रहूंगी।
विवान- ठीक है आप मुझे प्यार करते रहिए और मैं अपनी नफरत के साथ खुश हूं। देखते है कि आपका प्यार मुझे बदल पाता है, या मेरी नफरत हमेशा कायम रहती है।
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 4 यहां पढ़े
स्वाती- वैसे मैंने आपको पहचाना नहीं। क्या हम पहले कहीं मिले हैं?
सुहानी- नहीं, हम पहले कभी नहीं मिले। आप मुझे नहीं जानती, पर मैं आपको बहुत अच्छे से जानती हूं।
स्वाती- ओह... बताए यहां कैसे आना हुआ?
सुहानी- मैं सिर्फ एक सवाल का जवाब लेने के लिए आई हूं।
स्वाती- कौन सा सवाल?
सुहानी- आपने विवान के साथ ऐसा क्यों किया?
स्वाती- ओह तो तुमको विवान ने यहां भेजा है।
सुहानी- जी, नहीं उन्होंने यहां नहीं भेजा। मैं यहां खुद अपनी मर्जी से आई हूं। और मुझे मेरे सवाल का जवाब चाहिए।
स्वाती- तो सुनो जवाब। मैं किसी अपाहिज की बीवी बनकर पूरी जिंदगी उसकी गुलामी नहीं कर सकती थी। मेरे भी कुछ सपने थे, मेरी भी जिंदगी है। हां, एक समय उसका भविष्य अच्छा था, पर एक्सीडेंट के बाद लगभग सब खत्म हो गया था। इस कारण मुझे अपना फैसला बदलना पड़ा।
सुहानी- पर बाद में तो तुम्हें पता चल गया था कि वह एक्सीडेंट के बाद पूरी तरह से ठीक है। जब वो तुमसे मिलने के लिए आया था, तब तो तुम उसे सॉरी कह सकती थी। पर तुमने तो ऐसा कुछ नहीं किया, बल्कि उसे और चोट पहुंचा दी।
स्वाती- मुझे जो ठीक लगा वो मैंने किया।
सुहानी- तुमने जो विवान के साथ किया वहीं अगर तुम्हारे साथ होता तो? तुम्हारे अपाहिज होने की झूठी खबर सुनने के बाद वो भी किसी ओर से शादी कर लेता तो कया तब भी तुम यही कहती कि उसने जो किया वो अच्छा किया।
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 2 यहां पढ़े
स्वाती- वो सब मुझे नहीं पता। और जो हुआ नहीं उसके बारे में मैं नहीं सोचती।
सुहानी- यही तो स्वाती कि जो हुआ नहीं उसका हमें अहसास नहीं होता। पर सिर्फ एक बार सोचकर देखों कि तुम विवान से प्यार करती रहती और वह तुम्हें नजर अंदाज करता रहता। तब तुम्हारे दिल पर क्या गुजरती। और जब तुम मिले थे तब क्या तुमने ऐसी कोई शर्त रखी थी कि अच्छे वक्त में ही हम साथ होंगे। प्यार और दोस्ती बुरे वक्त में ही सबसे अधिक काम आते हैं स्वाती। प्यार का विश्वास ही किसी भी इंसान को लड़ने की शक्ति देता है। पर तुमने विवान का साथ छोड़ा और आज वह किस हाल में है, वह तुम सोच भी नहीं सकती। विवान की खुशी, उसके चेहरे पर रहने वाली मुस्कान, उसका विश्वास तुमने सब कुछ छीन लिया है। पता है वह रेज एक तालाब के पास बैठा रहता है और अपने बीते दिनों को और तुम्हारे किए को याद कर रोता रहता है। तुम उसे एक अच्छी जिंदगी तो नहीं दे सकी, उसका साथ नहीं दे सकी, पर तुमने उसे तोड़कर रख दिया है। आज उसे प्यार के नाम से नफरत है। उसके दोस्त नहीं है। वह एक दम तन्हा हो गया है। हो सके तो अपने किए को एक बार सोचना और हो सके तो उससे बात कर सॉरी कर देना। इतना कहने के बाद सुहानी वहां से चली जाती है। सुहानी के जाने के बाद स्वाती सुहानी की बातों को सोचती है और फिर विवान को फोन लगाती है। फोन पर वह विवान को अपने किए केलिए सॉरी बोलती है और उससे कहती भी है कि वो अपनी जिंदगी फिर से शुरू करें। आज उसे बुरा लग रहा है कि वह उसके साथ नहीं है।
अगले दिन सुहानी फिर उसी जगह पहुंच जाती है, जहां विवान अक्सर होता है। आज भी विवान वहां अकेला घूम रहा था और सुहानी उसे देख रही थी। फिर सुहानी विवान की ओर जाती है। दोनों एक दूसरे को देखते हैं।
विवान- आप फिर आ गई?
सुहानी- जी, हां।
विवान- मैंने कहा कि आप मुझे मेरे हाल पर छोड़ दें। मुझे आपसे कोई बात नहीं करना है।
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 3 यहां पढ़े
सुहानी- मैं तो सिर्फ यह पूछने आई हूं कि स्वाती ने क्या कहा?
विवान- एकदम चौंकते हुए तो आप स्वाती के पास गई थी? सुहानी- हां, गई थी। क्योंकि मुझसे आपकी यह हालत नहीं देखी जा रही थी। सोचा शायद उसके कहने से आप मान जाए। क्योंकि प्यार तो आपने भी किया था उससे।
विवान- हां, किया था, पर वो तो निभा नहीं सकी। बस यही कह भी रही थी। अब सलाह दे रही है कि मैं अपनी जिंदगी फिर से शुरू करूं।
सुहानी- जी, मैं भी आपसे यही कहना चाहती हूं, जो हुआ अब उससे आगे निकलिए। जो होना था वो हो गया।
विवान- जी, नहीं आप सभी के लिए यह सब कहना बहुत आसान है। जब आप मेरी स्थिति से गुजरेगी तब कहूंगा मैं ये बात। दर्द का अहसास उसे ही होता है, जिसे चोट लगी हो। वरना दर्द को दूर करने की सलाह देने के लिए तो हजारों लोग आ जाते हैं। कभी उस दर्द को महसूस करके देखा, तब पता चलेगा।
सुहानी- पर....
विवान- मैं आपसे आखिरी बार कह रहा हूं मुझे मेरे हाल पर छोड़ दीजिए। वैसे भी आपका और मेरा कोई रिश्ता भी नहीं है।
सुहानी- मैं आपसे प्यार करती हूं।
विवान- प्लीज, मुझे इस शब्द से नफरत है। इसलिए ये बात अब कभी भी मेरे सामने मत कहना। और बात क्या कहना, आप भी मेरे सामने कभी मत आना।
सुहानी- आप मेरा यकीन कीजिए मैं आपसे सच में प्यार करती हूं। और हमेशा आपके साथ ही रहना चाहती हूं।
विवान- मुझे किसी के साथ नहीं रहना है। आप यहां से जा सकती है।
सुहानी- तो फिर ठीक है, मैं देखूंगी कि कब तक आपकी नफरत खत्म नहीं होती है। मैं अपने प्यार से आपको बदलकर रहूंगी।
विवान- ठीक है आप मुझे प्यार करते रहिए और मैं अपनी नफरत के साथ खुश हूं। देखते है कि आपका प्यार मुझे बदल पाता है, या मेरी नफरत हमेशा कायम रहती है।
बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार का पार्ट 4 यहां पढ़े
यह इन दोनों की आखिरी मुलाकात थी। हालांकि कॉलेज में हरते हुए दोनों कई बार एक-दूसरे के आमने-सामने आए थे, पर दोनों ने ही किसी से बात नहीं की थी। तालाब के पास की उनकी मुलाकात को आज तीन साल हो गए हैं। सुहानी अब भी विवान से प्यार करती है और वह विवान को बदलने के लिए उसे प्यार का अहसास कराना चाहती है। पिछले कुछ समय से वह रोज एक फूल विवान के घर के बाहर रखकर आती है। विवान भी उस फूल को देखता है और उसके पास से गुजर जाता है। वह यह भी जानता है कि यह फूल सुहानी ने ही रखा है, पर वह कभी उस फूल को उठाता नहीं है। सुहानी को इंतजार है कि विवान वह फूल उठाए और विवान सोचता है कि यह फूल आना बंद हो। विवान अब भी प्यार से उतनी ही नफरत करता है, जितनी कि तीन साल पहले करता था, वहीं सुहानी अब भी विवान से प्यार करती है और उसके आने का इंतजार कर रही है।








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