लोग क्या कहेंगे ? 


जीवन को जीते हुए हमारे आसपास कई सवाल आ खड़े होते हैं। इनमें से कुछ सवालों के जवाब हमें अपने धर्म-शास्त्रों से मिल जाते हैं और कुछ सवालों के जवाब हमें विज्ञान से मिल जाते हैं। इंसान के रूप में हमने सूर्य और पृथ्वी की दूरी का भी पता लगा लिया है। समुद्र की गहराई को नाप लिया है। पर फिर भी कुछ सवाल ऐसे हैं, जिनके जवाब हमें अब तक नहीं मिल पाए हैं और शायद निकट भविष्य में मिल भी ना पाए। यू ंतो मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज के कई दायरों में बंधा होता है। सामाजिक प्राणी होते हुए हमें एक सवाल का जवाब आज तक नहीं मिला है और सवाल है लोग क्या कहेंगे? यह एक ऐसी बात है कि इसके कुछ अपवाद भी समाज में हैं, परंतु वे लोग भी इस बात के विपरीत की धारणा को समाज में प्रतिपादित नहीं कर पाए हैं। मानसी भी ऐसी ही एक सामाजिक प्राणी है। घर-परिवार के साथ ही नौकरी भी करती है और घर, समाज और ऑफिस तीनों ही स्थानों पर सामंजस्य बनाकर चलती है। पढ़ी लिखी होने के साथ ही मानसी संस्कारी और अच्छी सुशील लड़की की छवि भी रखती है। अब उसके घर में उसकी शादी की बात प्रारंभ हो गई थी। जल्द ही माता-पिता ने अच्छा परिवार देखकर उसके हाथ पीले कर दिए और उसे उसके ससुराल रवाना कर दिया। शुरूआत में उसके ससुराल में सब कुछ सामान्य था। शादी के कुछ माह बाद तक उसने अपनी नौकरी भी जारी रखी, पर फिर उसके घर के लोगों की रजामंदी नहीं होने के कारण उसे अपनी जॉब छोड़नी पड़ी। जॉब छोड़ने के बाद मानसी अब सारा समय घर में ही बीतता है। घर में रहते हुए उसने नोटिस किया कि अब उसके घर वालों के व्यवहार उसके प्रति बदल रहा है। सास के तानों के साथ ही उसका पति सुहास भी अब उससे ठीक से बात नहीं करता है। कुछ ही दिन और बीते थे कि अब सुहास मानसी के साथ मारपीट भी करने लगा था। छोटी-छोटी बातों पर अब सुहास मानसी के साथ मारपीट करने लगा। अब वो रोज रात को शराब पीकर आता और मानसी के साथ झगड़ा करता और यदि मानसी कुछ बोलती तो उसे पीटने लगता था। तनाव और पीड़ा से दुखी होकर वह अपने माता-पिता से मिलने के लिए गई। वहां उसने उसके साथ हो रहे व्यवहार की पूरी बात अपने माता-पिता को बताई और सुहास को छोड़ने की बात कही। हालांकि यह उसके जीवन का बहुत बड़ा फैसला था, इसलिए उसने अपने माता-पिता की भी राय ली। माता-पिता ने उसकी परेशानी को तो समझा पर उसे सुहास को ना छोड़ने की भी सलाह दे डाली। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बेठी तू सुहास को छोड़ तो देगी, यहां आकर रह भी लेगी। फिर से जॉब भी शुरू कर देगी, पर पति से अलग रहेगी तो लोग क्या कहेंगे। किस किस को जवाब देते रहेंगे। इससे अच्छा है कि सुहास को बदलने का प्रयास करो, उसकी कोई परेशानी है तो उसे दूर करो। मानसी अपने माता-पिता की बात को मानकर बुझे मन से फिर से अपने ससुराल चली जाती है। उसके कई प्रयास किए कि उसके सुहास और उसके माता-पिता के व्यवहार में परिवर्तन आए पर वह असफल रही। वक्त के साथ उसके घर वालों के ताने और मारपीट का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा था। अब उसे किसी से बात करने की भी इजाजत नहीं थी। उसके हमेशा एक कमरे में बंद रखा जाता। घर में एक नौकरानी की तरह हमेशा उसे काम कराया जाता और काम में जरा भी देरी होने या गड़बड़ होने पर उसके साथ जानवरों से जैसा सलूक किया जाता था। इन सबसे मानसी अब हार चुकी थी। एक बार घर में जब कोई नहीं था, तब उसने फिर अपनी मां को फोन कर अपनी बात बताई और सुहास को छोड़ने के लिए कहा कि परंतु इस बार फिर मां ने लोग क्या कहेंगे बेटी कहकर उसे वही रहने का मजबूर कर दिया। 


मानसी ने यह पूरी बात अपनी एक सहेली को बताई। उसकी सहेली शिखा का कहना था कि वह चाहे तो पुलिस की मदद ले सकती है। पुलिस न सिर्फ सुहास को बल्कि सास और ससुर को भी सबक सिखा देगी। शिखा की बात सुनने के बाद मानसी ने हिम्मत तो की थी, परंतु फिर उसे उसकी मां की बात याद आ गई कि लोग क्या कहेंगे। क्योंकि यह तो तय था कि यदि वह पुलिस में शिकायत करेगी तो वह उस घर में नहीं रह पाएगी। काफी सोच विचार कर एक बार उसने खुद से समझौता कर लिया। दिन ऐसे ही गुजरते रहे। एक दिन मानसी के सब्र का बांध टूट गया था। उसने एक दिन अपने घर में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस के साथ ही मानसी के माता-पिता को भी इसकी जानकारी मिल गई थी। पुलिस जहां अपनी कार्रवाई कर रही थी, वहीं उसके माता-पिता अपनी बेटी की हत्या का दोष उसके ससुराल वालों पर लगा रहे थे। पुलिस ने भी एक्शन लिया और उसके ससुरालजनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। पुलिस को एक लेटर भी मिला था, जो कि उसने अपनी मांके नाम लिखा था। 


मां, आपके दिए संस्कारों के बल पर मैंने यहां मिलने वाले हर दुख और तकलीफ को सहने की रह संभव कोशिश की है। पर आखिर मैं भी इंसान हूं। दर्द मुझे भी होता है। इसलिए अब सहन नहीं कर पा रही हूं। इसलिए हमेशा के लिए इस दर्द से छुटकारा पा रही हूं। दर्द है तो सिर्फ इस बात का कि मैं अब भी जीना चाहती हूं, मैं फिर से पैरों पर खड़े होना चहाती हूं। अपनी जिंदगी को फिर से बनाना चाहती हूं। पर लोग क्या कहेंगे वाली आपकी बात मुझे ये सब नहीं करने दे रही है। अब मैं जा रही हूं अब लोग क्या कहेंगे यह तुम देख लेना मां। क्योंकि मैं तो रहूंगी नहीं यह सुनने के लिए कि लोग क्या कह रहे हैं। लोग क्या कहेंगे कि एक बात को लेकर आपने मुझे मेरी जिंदगी जीने से रोक दिया मां। गलती आपकी भी नहीं है मां, क्योंकि आप, मैं या हम जैसे कई लोग समाज की इस परिपाटी को कभी तोड़ ही नहीं पाए हैं। लोग क्या कहेंगे ये सोचकर ही हम कभी स्वच्छंद होकर अपने फैसले नहीं ले पाए हैं। लोग क्या कहेंगे क्यों क्योंकि लड़की शादी के बाद घर आ गई है, लोग क्या कहेंगे इसलिए सब कुछ होना के बाद भी हम लड़कियों की खुशियों की बली चढ़ा देते हैं। लोग क्या कहेंगे इसलिए कई बार प्रेम सफल नहीं हो पाता है। लोग आखिर ये लोग कौन है मां। वैसे आप अपनी जगह सही भी हो मां। क्योंकि जब भगवान श्रीराम को लोकलाज के कारण माता सीता का त्याग करना पड़ गया था तो मैं तो एक मामूली इंसान हूं। जब वो भगवान होकर भी इस लोग क्या कहेंगे कि बात का विरोध नहीं कर सके तो मैं या आप कैंसे कर सकते हैं। वैसे मां हो सकता है कि लोग अब भी कुछ कहेंगे। कुछ क्या बहुत कुछ कहेंगे, पर मां मेरी आपसे विनती है कि अब आप लोगों की इन बातों को अनसुना कर देना क्योकि लोग क्या कहेंगे के डर से आप अपनी बेटी को तो खो चुके हो, अब इस बात के डर से कुछ और न खो देना। मां, आज जब मैंने खुद को खत्म करने का तय कर लिया है तो मेरे मन से लोग क्या कहेंगे का डर भी जा चुका है। क्योंकि ये जो लोग हैं ना ये हर हाल में कुछ न कुछ कहेंगे ही। इनके डर से मैंने जीना तो छोड़ दिया पर अब इन लोगों के डर से मैं मरना नहीं छोड़ सकती। क्योंकि जिंदा रहूंगी तब भी ये लोग कुछ ना कुछ बोलेंगे ही और ना रहूंगी तब भी ये कुछ ना कुछ बोलेंगे ही। इसलिए फैसला मुझे करना है इसलिए मैंने फैसला कर लिया है। 


मानसी का ये, खत न सिर्फ उसकी मां ने पढ़ा बल्कि उसके पिता और उसकी दोस्त शिखा ने भी पढ़ा था। शिखा अब मानसी की मां से सवाल कर रही थी कि आंटी कहां है वो लोग जो कुछ कहते हैं। आज यहां इस समय कुछ बोलने के लिए नहीं आएंगे। बोलेंगे पर यहां नहीं, तब बोलेंगे जब आप सुन न पाओ। लोग क्या कहेंगे के डर ने आपने अपनी बेटी को खो दिया। आंटी अब समय बदल रहा है, आप अपने आप को भी बदलो। काश आपने मानसी का साथ देकर इन लोगों को जवाब देने का फैसला किया होता तो आज मानसी हमारे साथ होती। लोग.... लोग तो अब भी कहेंगे आंटी, लोग तो अब भी कहेंगे.....। ये सवाल बिल्कुल ऐसा ही एक फंदा है आंटी जैसा फंदा मानसी ने अपने गले में डाला था। जानते हैं क्यों? क्योंकि वो लोग क्या कहेंगे के फंदे से आजाद नहीं हो सकी। वो आजाद होना चाहती थी, पर उसे आजाद नहीं होने दिया गया। वो लोगों के फंदे को नहीं निकाल सकी, इसलिए उसने एक ओर फंदा अपने गले में लगा लिया। आंटी लोग अब भी कहेंगे.... लोग अब भी कहेंगे....। 

 

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