इंतजार
अंकल... अंकल... अंकल रूको ना... एक छह साल की छोटी सी शुभिता पैरों में बिना चप्पल के सड़क पर दौड़ती जा रही थी। उसके घर के सामने से आज बहुत दिन बाद एक पोस्टमैन गुजरा था। उसे देखते ही वो दौड़कर अपने कमरे में गई थी और अपना स्कूल बैग उठाकर उसमें से एक कागल निकालकर फिर दौड़ते हुए बाहर आई थी। उसने इधर-उधर देखा तो पोस्टमैन कहीं नजर नहीं आया था। वह कुछ दूर घर से बाहर निकल आई थी। तभी उसे वह साइकिल नजर आई, जिसके साथ वह पोस्टमैन जा रहा था। उसने फिर से उस ओर दौड़ लगा दी थी। वह पोस्टमैन तक पहुंचती उसके पहले ही वह पोस्टमैन फिर अपनी साइकिल लेकर आगे बढ़ गया था। तेज धूप में शुभिता नंगे पैर ही पोस्टमैन के पीछे दौड़ते हुए उसे आवाज लगाकर रोकने का असफल सा प्रयास कर रही थी। वह अब अपने घर से ओर भी ज्यादा दूर आ गई थी। एक बार उसे पीछे की ओर देखा तो उसे अपना घर नजर नहीं आ रहा था। उसने फिर उस ओर देखा जिस ओर वह पोस्टमैन अंकल गए थे। उसकी आंखों में एक बार फिर से चमक आ गई थी। उसे एक बार फिर से पोस्टमैन अंकल की साइकिल नजर आई थी। इस बार वह पूरी ताकत से दौड़ते हुए साइकिल तक पहुंच गई थी। वह साइकिल के पास खड़ी होकर हाफ रही थी। तभी पोस्टमैन भी वहां आ पहुंचा। वह शुभिता को पहचानता था तो उसे देखते ही उसने कहा कि अरे... शुभिता बिटिया तुम यहां? यहां क्या कर रही हो वो भी इतनी धूप में। फिर उसकी नजर उसके पैरों की ओर गई तो शुभिता नंगे पैर ही थी। उसे इस हाल में देखकर पोस्टमैन को एक दम उस पर लाड़ आया और उसने अपना बैग साइकिल पर टांगा और उसे गोद में उठा लिया। उसे दुलार करते हुए पूछा अरे शुभिता बिटिया, तुम यहां क्या कर रही हो?
मैं आपके पास ही आई हूं अंकल। अचरज के साथ पोस्टमैन ने सवाल किया मेरे पास? हमारी बिटिया को आज हमसे क्या काम आ पड़ा? दादी कह रही थी आप सभी लोगों को खत पहुंचाते हो? बहुत ही मासूमियत से शुभिता ने पोस्टमैन से सवाल किया था। हां, बेटा, यही तो हमारा काम है। पर हमारी बिटिया रानी किसको खत पहुंचाना चाहती है। एक दम से उदास होते हुए शुभिता ने एक बार फिर उसी मासूमियत से जवाब दिया मम्मी को। इतना कहने के साथ ही उसके हाथ में जो कागज था वह उसने पोस्टमैन की ओर बढ़ा दिया। फिर कहा प्लीज अंकल मेरा ये खत मेरी मम्मी को दे दो। उनसे कहना कि अब शुभिता अच्छी बेटी बन गई है, इसलिए वो भी वापस आ जाए। दादी ने कहा था कि मैं अगर अच्छी बेटी बन जाउंगी तो मेरी मम्मी वापस आ जाएगी। पोस्टमैन शुभिता को चेहरा देख रहा था और उसकी मासूमियत भरी बातों का कोई जवाब नहीं दे पा रहा था। आज से करीब एक साल पहले शुभिता की मम्मी पल्लवी की मौत हो गई थी। शुभिता अब अपने दादा-दादी और पापा के साथ रहती है। वह अपनी मम्मी को हमेशा याद करती है। उसकी मां की जब मौत हुई तब वह पांच साल की थी और पिछले एक साल से वह अपनी मम्मी का रोज इंतजार कर रही है। पोस्टमैन उससे वो लेटर ले लेता है और उसे अपनी जेब में रख लेता है। उसे फिर साइकिल पर बैठता है और फिर उसे घर छोड़ने के लिए चल देता है। उसके घर के बाहर उसकी दादी खड़ी थी, उनके चेहरे पर चिंता साफ देखी जा सकती थी। उन्होंने जैसे ही शुभिता को पोस्टमैन के साथ देखा तो वह दौड़कर आई और शुभिता को गोद में उठाकर दुलार करने लगी। फिर कहने लगी ऐसे कहां चली गई थी रे बिटिया। पोस्टमैन ने कहा माजी यह हमारे पास ही आई थी। आप चिंता ना करे, बिटिया बिल्कुल ठीक है। दादी भी पोस्टमैन का शुक्रिया अदा कर शुभिता को अंदर लेकर चली जाती है। पोस्टमैन भी अपनी साइकिल उठाकर फिर से अपने काम के लिए निकल जाता है।
शाम को पोस्टमैन अपना सारा काम खत्म कर अपने घर पहुंचता है। अपनी पत्नी से पानी पिलाने के लिए कहता है और फिर पानी पीकर हाथ-पैर धोने के लिए चला जाता है। इस बीच उसकी पत्नी उसके लिए चाय भी बना देती है। चाय का कप उसके हाथ में पकड़ा कर वह कहती है बाजार से सामान खरीदने के लिए जा रही है। इतना कहकर वह घर के बाहर चली जाती है। फिर पोस्टमैन उठता है और शुभिता का वह लेटर निकालकर फिर से कुर्सी पर बैठ जाता है। वह उस लेटर को पढ़ना शुरू करता है।
मेरी प्यारी मम्मी,
आप कहां हो, मुझे आपकी बहुत याद आती है। आप अब जल्दी से घर आ जाओ ना। दादी कहती है कि आप भगवान के पास गई हो। अब तो बहुत दिन हो गए हैं, इसलिए अब आप भगवान से कहो कि आपको शुभिता के पास जाना है और जल्दी से घर आ जाओ। मम्मी मुझे आपके हाथ से खाना खाना है। दादी कहती है कि आप तब तक नहीं आओगी जब तक मैं खुद अपने हाथ से खाना नहीं खाउंगी। आजकल मैं अपने हाथ से खाना खाती हूं। इसलिए अब आप आ जाओ। मम्मी अब मैं अपना होमवर्क भी कर लेती हूं। अब मैं आपको होमवर्क के लिए भी परेशान नहीं करूंगी। अब तो आप आ जाओगी ना मम्मी?
दादी कह रही थी कि भगवान बच्चों की बात जरूर सुनते हैं आप मेरी तरफ से भगवान से कहो ना कि मैं आपको बहुत याद करती हूं, फिर वो आपको मेरे पास आने देंगे। मम्मी मेरे स्कूल में मेरी एक फ्रेंड है उसकी मम्मी भी भगवान के पास ही है। उनसे कहना कि मेरी फ्रेंड की मम्मी को भी भेज दे। मुझे पता है कि वो भी अपनी मम्मी को बहुत मिस करती है, जैसे मैं करती हूं। मम्मी पापा भी आपको याद करते हैं। पूरा दिन पापा ऑफिस में रहते है और रात को देर से आते हैं। आप थे तो पापा शाम को जल्दी आ जाते थे, और फिर हम लोग घूमने के लिए जाते थे। अब तो पापा मुझे कहीं घूमाने भी नहीं ले जाते हैं। मैं दादी से कहती हूं तो वह कहती है कि वह मुझे गोद में उठाकर नहीं चल सकती है क्योंकि उनके घुटने में दर्द होता है। मम्मी मैं बहुत दिन से कहीं घूमने भी नहीं गई हूं, आप आ जाओ तो हम घूमने चलेंगे। मैं प्रॉमिस करती हूं कि जब हम घूमने जाएंगे तो मैं आइसक्रिम भी नहीं मांगूंगी। पर आप आ जाओ ना मम्मी। पता है मम्मी अब मुझे स्कूल बस तक लेने के लिए भी कोई नहीं आता है, पहले तो आप मुझे हमेशा लेने आती थी। अब मैं अपनी गली से घर तक अकेली ही आती हूं। दादी मेरे टिफिन में रोज एक जैसा ही ब्रेकफास्ट रख देती है, आप तो रोज अलग-अलग ब्रेकफास्ट रखते थे। मैं दादी से कहती हूं तो वह कहती है कि उन्हें अलग-अलग नाश्ता बनाना नहीं आता है। रात को सोते समय मुझे अब डर भी नहीं लगता है मम्मी। क्योंकि दादी मेरे पास नहीं सोती है और पापा तो बहुत देर से आते हैं तो मुझे तो पता ही नहीं होता है। दादी आपकी तरह मुझे कहानी भी नहीं सुनाती है। मम्मी मैं अब अच्छी बेटी बन गई हूं इसलिए अब आप जल्दी से आ जाओ मैं आपको अब कभी परेशान करूंगी। मैंने दादी से आपका पता भी पूछा था, पर दादी ने नहीं बताया। इसलिए मैं यह लेटर पोस्टमैन अंकल को दे दूंगी। दादी बता रही थी कि वो सभी का पता जानते हैं। इसलिए वो मेरा ये लेटर मैं उनको दे दूंगी। और वो मेरा ये लेटर आपको भी पहुंचा देंगे। मम्मी लेटर पढ़कर जल्दी से आ जाना, मैं आपका इंतजार करूंगी।
आपकी शुभिता
लेटर पढ़ते हुए पोस्टमैन की आंखों में आंसू आ गए थे। वह सोच नहीं पा रहा था कि वह इस लेटर का क्या करें। लेटर में शुभिता के लिखे हर शब्द को उसके कोमल मन की भावना को वह इस समय महसूस कर पा रहा था। कैसे एक छोटी सी बच्ची अपनी मां का इंतजार कर रही है। बड़े उसे जो भी कह रहे हैं, वह कर रही है, सिर्फ यह सोचकर कि एक दिन उसकी मम्मी आ जाएगी।
दूसरी ओर शाम के गहरा जाने के बाद आसमान में तारे नजर आने लगे थे। शुभिता अपने घर की खिड़की में बैठकर आसमान की ओर ही देख रही थी और मन ही मन कह रही थी मम्मी आ जाओ ना, मुझे आपकी बहुत याद आती है। उसकी आंखों में कहीं आंसूओ की एक झलक थी, वहीं उसकी निगाहे कभी आसमान पर तो कभी घर के दरवाजे की ओर जा रही थी, इस इंतजार में उसकी मम्मी आसमान से नीचे आएगी और फिर घर का दरवाजा खोलकर उसके पास आ जाएगी। पोस्टमैन हाथ में लेटर लिए उस लेटर के जवाब का इंतजार कर रहा था। वह सोच रहा था कि इसका क्या और कैसे जवाब दे। एक छोटी सी बेटी की अपनी मां से मिलने की आस और उसके इंतजार का क्या जवाब हो सकता है। जबकि वह जानता है कि शुभिता की मां अब कभी नहीं आएगी, पर शायद ये उस लेटर का ही असर था कि वह खुद भी एक छह साल की शुभिता बन गया था और मन ही मन दुआ कर रहा था कि काश इस लेटर का हर शब्द असर कर जाए और शुभिता की मां लौट आए। पर क्या शुभिता का ये इंतजार कभी खत्म होगा। क्योंकि शुभिता की निगाहें अब भी आसमान की ओर थी और होंठों पर शब्द थे कि मम्मी तुम जल्दी से आ जाओ, मुझे आपकी बहुत याद आती है।
शाम को पोस्टमैन अपना सारा काम खत्म कर अपने घर पहुंचता है। अपनी पत्नी से पानी पिलाने के लिए कहता है और फिर पानी पीकर हाथ-पैर धोने के लिए चला जाता है। इस बीच उसकी पत्नी उसके लिए चाय भी बना देती है। चाय का कप उसके हाथ में पकड़ा कर वह कहती है बाजार से सामान खरीदने के लिए जा रही है। इतना कहकर वह घर के बाहर चली जाती है। फिर पोस्टमैन उठता है और शुभिता का वह लेटर निकालकर फिर से कुर्सी पर बैठ जाता है। वह उस लेटर को पढ़ना शुरू करता है।
मेरी प्यारी मम्मी,
आप कहां हो, मुझे आपकी बहुत याद आती है। आप अब जल्दी से घर आ जाओ ना। दादी कहती है कि आप भगवान के पास गई हो। अब तो बहुत दिन हो गए हैं, इसलिए अब आप भगवान से कहो कि आपको शुभिता के पास जाना है और जल्दी से घर आ जाओ। मम्मी मुझे आपके हाथ से खाना खाना है। दादी कहती है कि आप तब तक नहीं आओगी जब तक मैं खुद अपने हाथ से खाना नहीं खाउंगी। आजकल मैं अपने हाथ से खाना खाती हूं। इसलिए अब आप आ जाओ। मम्मी अब मैं अपना होमवर्क भी कर लेती हूं। अब मैं आपको होमवर्क के लिए भी परेशान नहीं करूंगी। अब तो आप आ जाओगी ना मम्मी?
दादी कह रही थी कि भगवान बच्चों की बात जरूर सुनते हैं आप मेरी तरफ से भगवान से कहो ना कि मैं आपको बहुत याद करती हूं, फिर वो आपको मेरे पास आने देंगे। मम्मी मेरे स्कूल में मेरी एक फ्रेंड है उसकी मम्मी भी भगवान के पास ही है। उनसे कहना कि मेरी फ्रेंड की मम्मी को भी भेज दे। मुझे पता है कि वो भी अपनी मम्मी को बहुत मिस करती है, जैसे मैं करती हूं। मम्मी पापा भी आपको याद करते हैं। पूरा दिन पापा ऑफिस में रहते है और रात को देर से आते हैं। आप थे तो पापा शाम को जल्दी आ जाते थे, और फिर हम लोग घूमने के लिए जाते थे। अब तो पापा मुझे कहीं घूमाने भी नहीं ले जाते हैं। मैं दादी से कहती हूं तो वह कहती है कि वह मुझे गोद में उठाकर नहीं चल सकती है क्योंकि उनके घुटने में दर्द होता है। मम्मी मैं बहुत दिन से कहीं घूमने भी नहीं गई हूं, आप आ जाओ तो हम घूमने चलेंगे। मैं प्रॉमिस करती हूं कि जब हम घूमने जाएंगे तो मैं आइसक्रिम भी नहीं मांगूंगी। पर आप आ जाओ ना मम्मी। पता है मम्मी अब मुझे स्कूल बस तक लेने के लिए भी कोई नहीं आता है, पहले तो आप मुझे हमेशा लेने आती थी। अब मैं अपनी गली से घर तक अकेली ही आती हूं। दादी मेरे टिफिन में रोज एक जैसा ही ब्रेकफास्ट रख देती है, आप तो रोज अलग-अलग ब्रेकफास्ट रखते थे। मैं दादी से कहती हूं तो वह कहती है कि उन्हें अलग-अलग नाश्ता बनाना नहीं आता है। रात को सोते समय मुझे अब डर भी नहीं लगता है मम्मी। क्योंकि दादी मेरे पास नहीं सोती है और पापा तो बहुत देर से आते हैं तो मुझे तो पता ही नहीं होता है। दादी आपकी तरह मुझे कहानी भी नहीं सुनाती है। मम्मी मैं अब अच्छी बेटी बन गई हूं इसलिए अब आप जल्दी से आ जाओ मैं आपको अब कभी परेशान करूंगी। मैंने दादी से आपका पता भी पूछा था, पर दादी ने नहीं बताया। इसलिए मैं यह लेटर पोस्टमैन अंकल को दे दूंगी। दादी बता रही थी कि वो सभी का पता जानते हैं। इसलिए वो मेरा ये लेटर मैं उनको दे दूंगी। और वो मेरा ये लेटर आपको भी पहुंचा देंगे। मम्मी लेटर पढ़कर जल्दी से आ जाना, मैं आपका इंतजार करूंगी।
आपकी शुभिता
लेटर पढ़ते हुए पोस्टमैन की आंखों में आंसू आ गए थे। वह सोच नहीं पा रहा था कि वह इस लेटर का क्या करें। लेटर में शुभिता के लिखे हर शब्द को उसके कोमल मन की भावना को वह इस समय महसूस कर पा रहा था। कैसे एक छोटी सी बच्ची अपनी मां का इंतजार कर रही है। बड़े उसे जो भी कह रहे हैं, वह कर रही है, सिर्फ यह सोचकर कि एक दिन उसकी मम्मी आ जाएगी।
दूसरी ओर शाम के गहरा जाने के बाद आसमान में तारे नजर आने लगे थे। शुभिता अपने घर की खिड़की में बैठकर आसमान की ओर ही देख रही थी और मन ही मन कह रही थी मम्मी आ जाओ ना, मुझे आपकी बहुत याद आती है। उसकी आंखों में कहीं आंसूओ की एक झलक थी, वहीं उसकी निगाहे कभी आसमान पर तो कभी घर के दरवाजे की ओर जा रही थी, इस इंतजार में उसकी मम्मी आसमान से नीचे आएगी और फिर घर का दरवाजा खोलकर उसके पास आ जाएगी। पोस्टमैन हाथ में लेटर लिए उस लेटर के जवाब का इंतजार कर रहा था। वह सोच रहा था कि इसका क्या और कैसे जवाब दे। एक छोटी सी बेटी की अपनी मां से मिलने की आस और उसके इंतजार का क्या जवाब हो सकता है। जबकि वह जानता है कि शुभिता की मां अब कभी नहीं आएगी, पर शायद ये उस लेटर का ही असर था कि वह खुद भी एक छह साल की शुभिता बन गया था और मन ही मन दुआ कर रहा था कि काश इस लेटर का हर शब्द असर कर जाए और शुभिता की मां लौट आए। पर क्या शुभिता का ये इंतजार कभी खत्म होगा। क्योंकि शुभिता की निगाहें अब भी आसमान की ओर थी और होंठों पर शब्द थे कि मम्मी तुम जल्दी से आ जाओ, मुझे आपकी बहुत याद आती है।









Great Sir,
ReplyDeleteStory sach me bahut achi hai
Emotional story 👌🏻
ReplyDeleteGreat story bhai👌
ReplyDeleteSuperb
ReplyDeleteGood one
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