सौदा
Final Part
अगले दिन तय समय पर कार्तिक उस जगह पहुंच जाता है, जहां इंस्पेक्टर अजय ने उसे बुलाया था। पूरा दिन वह अजय के साथ ही रहता है और ऋषभ की हत्या के संबंध में उसकी जांच में उसकी मदद करता है। शाम को अजय और कार्तिक एक बार फिर विराज से मिलने के लिए पहुंचते हैं। जब वे उसके घर पहुंचते हैं तो उन्हें पता चलता है कि विराज फिलहाल डॉक पर है, अगर वे चाहे तो वहां मिल सकते हैं। दोनों डॉक के लिए रवाना हो जाते हैं। वहां पहुंचते हैं तो विराज वहां अपने कुछ खास लोगों के साथ बात कर रहा था। उन्हें देखकर विराज उनकी ओर आता है।
विराज- तो इंस्पेक्टर अब क्या बात करने आए हो?
अजय- बस वहीं क्या तुम कुछ पता लगा पाए हो?
विराज- नहीं, मैं कुछ नहीं पता लगा सका फिलहाल। पर जल्द ही लगा लूंगा।
अजय- शायद अब उसकी जरूरत नहीं पड़े। क्योंकि मैंने कुछ पता लगाया है।
विराज- अच्छा, क्या पता लगाया है तुमने?
अजय- वो बताने से पहले मैं तुमसे एक सवाल करना चाहता हूं?
विराज- कैसा सवाल?
अजय- बस यही कि जहां ऋषभ की हत्या हुई थी वहां तुम क्या कर रहे थे? और तुम्हारा ऋषभ से क्या लेना-देना था?
विराज- अच्छा तो तुम्हें पता चल गया है। चलो कोई बात नहीं। वैसे भी तुम मेरा कुछ नहीं कर सकते।
अजय- वो सब बाद में देखेंगे, मैंने जो पूछा है उसका जवाब दो।
विराज- वैसे तो तुम मुझसे जबरदस्ती नहीं कर सकते, पर फिर भी मैं तुम्हें बता देता हूं। मैं वहां गया था किसी और काम से था, पर ऋषभ ने मुझे वहां एक कत्ल करते हुए देख लिया था। वह भागा भी पर मुझसे भाग नहीं सकता था। मेरे आदमियों ने उसे पकड़ लिया।
अजय- तो यह बात तुम हमें पहले भी बता सकते थे?
विराज- बता तो सकता था, पर मैंने सोचा कि जब तक तुम्हें पता न चले तब तक मैं भी न कुछ कहूं तो ही अच्छा है।
अजय- अब तो हमें पता भी चल गया है और तुमने अपना जुर्म कबूल भी कर लिया है।
विराज- वैसे एक बात और जैसा कि तुमने कहा था कि मेरी किस्मत किससे बदली गई है उसके बारे में भी मैंने पता लगाने की कोशिश की थी।
अजय- किससे बदली है तुम्हारी किस्मत?
विराज- यह तो उस साये ने मुझे नहीं बताया, पर उसने कहा था कि तुम लोग आओंगे तो वह भी आ जाएगा और कुछ सौदा पूरा करने की बात भी कर रहा था।
कार्तिक- हां, कल वो मुझे मिला भी था और कह रहा था कि अगली मुलाकात में उसे सौदा पूरा करना है।
कार्तिक- हां, मैं बुलाता हूं। (कार्तिक साये के बारे में सोचता है और साया वहां आ जाता है।)
साया- ओह, तो सभी लोग यहां है। बहुत अच्छा है सभी से यहीं एक साथ बात हो जाएगी।
कार्तिक- हां, सभी लोग यहां है। अब ये बताओ िक इस किसमत बदलने के सौदे से हमें मुक्ति कैसे मिलेगी?
साया- मेरा सौदा पूरा कर दो मैं तुम्हें तुम्हारी किस्मत वापस कर दूंगा।
अजय- बताओ क्या करना है तुम्हारा सौदा पूरा करने के लिए। तुम्हारे इस सौदे के कारण हमारी जिंदगी मुश्किल में पड़ चुकी है। मैं एक इंस्पेक्टर होकर विराज जैसे अपराधी से मदद मांग रहा हूं।
कार्तिक- और मैं, मैं तो हत्यारा बन गया हूं।
कार्तिक- जल्दी बताओ क्या करना है?
विराज- एक मिनट पहले मुझे बताओ कि तुमने मेरी किस्मत किससे बदली थी।
साया- ये जो कुछ हो रहा है तुम्हारे कारण ही हो रहा है।
विराज- मेरे कारण? और क्या हो रहा है।
साया- किस्मत बदलने के सौदे में सब कुछ अच्छा चल रहा था। कार्तिक प्रमोशन पाकर बहुत खुश भी था। ऋषभ को भी दूसरी किस्मत मिल गई थी। इंस्पेक्टर अजय भी तुम्हारी किस्मत लेकर आगे बढ़ने ही वाला था।
विराज- तो इसमें मैंने क्या किया है?
सौदा पार्ट 5 यहां पढ़े
साया- इसका सिर्फ एक ही तरीका है और समझ लो कि वहीं मेरा तुम तीनों से सौदा पूरा करने की शर्त भी है।
कार्तिक- क्या है शर्त? क्या करना होगा हमें इस सब को रोकने के लिए। मुझे बस इन सब से छुटकारा चाहिए।
साया- तो फिर सुनो। या तो तुम और अजय मिलकर विराज को खत्म कर दो या विराज तुम दोनों को खत्म कर दे।
विराज- उससे क्या फायदा होगा?
विराज अपनी पिस्टल निकालता है और सबसे पहले अजय की ओर तान देता है। जैसे ही वह गोली चलाता है अजय कार्तिक को धक्का देते हुए एक साइड कूद जाता है। क्योंकि अजय यह जानता था कि यदि वह बच गया तो विराज अगला वार कार्तिक पर ही करेगा और शायद कार्तिक उससे बच न पाए। इसलिए वह कार्तिक को भी बचाने का प्रयास करता है। यह सब साया वहां खड़ा होकर देख रहा था। इसके बाद विराज उन दोनों के पीछे भागता है और कई बार फायर भी करता है, पर हर बार अजय बच जाता है। विराज की गोलियां खत्म हो जाती है और वह पिस्टल की मैगजीन चेंज करता है, इसी बीच कार्तिक उस पर लोहे की रोड से हमला कर देता है। इतनी ही देर में अजय भी वहां आ जाता है और लगातार दो गोलियां विराज के सीने में उतार देता है। साया यह देखकर मुस्कुरा देता है। इधर अजय और कार्तिक भी एक लंबी सांस लेकर साये की ओर आ जाते हैं।
अजय- हमने सौदा पूरा कर दिया है।
अजय- नहीं कार्तिक- बस थोड़ी सी कानूनी कार्रवाई रहेगी उसके बाद तुम आजाद हो।
साया- अच्छा तो अब मैं चलता हूं। देखता हूं कोई और मेरे साथ सौदा करके अपनी किस्मत बदलना चाहता है क्या?
कार्तिक- पर हमारा वो कॉन्ट््रेक्ट लेटर?
साया- सौदा पूरा हो चुका है तो उस लेटर का भी कोई मतलब नहीं है। इतना कहकर साया वो लेटर फाड़ देता है।
कार्तिक- किस्मत बदलने के इस खेल ने पहले से भी ज्यादा परेशान कर दिया था।
साया- वैसे तुम दोनों को एक बात बता देना चाहता हूं। हालांकि ये मेरा काम ही है कि मैं लोगों से सौदा करूं और उनकी किस्मत बदल दूं। पर फिर भी एक बात हमेशा याद रखना। इंसान अपनी किस्मत अपनी मेहतन और अपने कर्म से बनाता है। किसी भी किस्मत से कोई अपने लिए कुछ नहीं कर सकता है। अगर तुम्हें भी कुछ करना है तो आगे बढ़ो, मेहनत करो और अपने कर्म से ही अपनी किस्मत को बदल डालो। अगर ऐसे किसी सौदे में रहोगे तो हो सकता है कि तुम्हारा हाल भी ऋषभ और विराज जैसा ही हो।
सौदा पार्ट 8 यहां पढ़े
इसके बाद साया वहां से अचानक गायब हो जाता है। कार्तिक और अजय भी वहां से चले जाते हैं। अगले दिन कार्तिक अपने ऑफिस पहुंचता है और फिर से अपने केबिन में बैठकर आराम से काम करने लगता है। अब उसके परिवार में कोई परेशानी भी नहीं थी। इन बातों को सोचते हुए कार्तिक मन ही मन कहता है कि वह ऐसे ही अपनी किस्मत को दोष दे रहा था। साया का कहना सही है कि इंसान अपनी मेहनत और कर्म से अपनी बना सकता है और बदल सकता है। दूसरी ओर अजय को भी प्रमोशन मिल जाता है और उसे दूसरे शहर जाना पड़ता है। बिना किस्मत बदले ही दोनों अब अपनी जिंदगी में काफी खुश थे।
विराज- तो इंस्पेक्टर अब क्या बात करने आए हो?
अजय- बस वहीं क्या तुम कुछ पता लगा पाए हो?
विराज- नहीं, मैं कुछ नहीं पता लगा सका फिलहाल। पर जल्द ही लगा लूंगा।
अजय- शायद अब उसकी जरूरत नहीं पड़े। क्योंकि मैंने कुछ पता लगाया है।
विराज- अच्छा, क्या पता लगाया है तुमने?
अजय- वो बताने से पहले मैं तुमसे एक सवाल करना चाहता हूं?
विराज- कैसा सवाल?
अजय- बस यही कि जहां ऋषभ की हत्या हुई थी वहां तुम क्या कर रहे थे? और तुम्हारा ऋषभ से क्या लेना-देना था?
विराज- अच्छा तो तुम्हें पता चल गया है। चलो कोई बात नहीं। वैसे भी तुम मेरा कुछ नहीं कर सकते।
अजय- वो सब बाद में देखेंगे, मैंने जो पूछा है उसका जवाब दो।
विराज- वैसे तो तुम मुझसे जबरदस्ती नहीं कर सकते, पर फिर भी मैं तुम्हें बता देता हूं। मैं वहां गया था किसी और काम से था, पर ऋषभ ने मुझे वहां एक कत्ल करते हुए देख लिया था। वह भागा भी पर मुझसे भाग नहीं सकता था। मेरे आदमियों ने उसे पकड़ लिया।
कार्तिक- तो क्या तुमने ऋषभ की हत्या की है?
विराज- हां, मुझे उसे मजबूरी में मारना पड़ा। उसने मुझे किसी का कत्ल करते देख लिया था। और मैं अपने किसी भी अपराध का कोई सबूत नहीं छोड़ता हूं। अजय- तो यह बात तुम हमें पहले भी बता सकते थे?
विराज- बता तो सकता था, पर मैंने सोचा कि जब तक तुम्हें पता न चले तब तक मैं भी न कुछ कहूं तो ही अच्छा है।
अजय- अब तो हमें पता भी चल गया है और तुमने अपना जुर्म कबूल भी कर लिया है।
विराज- वैसे एक बात और जैसा कि तुमने कहा था कि मेरी किस्मत किससे बदली गई है उसके बारे में भी मैंने पता लगाने की कोशिश की थी।
अजय- किससे बदली है तुम्हारी किस्मत?
विराज- यह तो उस साये ने मुझे नहीं बताया, पर उसने कहा था कि तुम लोग आओंगे तो वह भी आ जाएगा और कुछ सौदा पूरा करने की बात भी कर रहा था।
कार्तिक- हां, कल वो मुझे मिला भी था और कह रहा था कि अगली मुलाकात में उसे सौदा पूरा करना है।
अजय- हां, मेरे पास भी आया था और यही कह रहा था।
विराज- तो फिर देर किस बात की बुला लो उसे। कार्तिक- हां, मैं बुलाता हूं। (कार्तिक साये के बारे में सोचता है और साया वहां आ जाता है।)
साया- ओह, तो सभी लोग यहां है। बहुत अच्छा है सभी से यहीं एक साथ बात हो जाएगी।
कार्तिक- हां, सभी लोग यहां है। अब ये बताओ िक इस किसमत बदलने के सौदे से हमें मुक्ति कैसे मिलेगी?
साया- मेरा सौदा पूरा कर दो मैं तुम्हें तुम्हारी किस्मत वापस कर दूंगा।
अजय- बताओ क्या करना है तुम्हारा सौदा पूरा करने के लिए। तुम्हारे इस सौदे के कारण हमारी जिंदगी मुश्किल में पड़ चुकी है। मैं एक इंस्पेक्टर होकर विराज जैसे अपराधी से मदद मांग रहा हूं।
कार्तिक- और मैं, मैं तो हत्यारा बन गया हूं।
साया- किस्मत तो तुम ही लोग बदलना चाह रहे थे, मैंने तो बस तुम्हारी मदद की है।कार्तिक- अरे, नहीं चाहिए मुझे ऐसी किस्मत। मेरी किस्मत में कुछ परेशानियां ही थी ना? घर के छोटे झगड़े, पर किसी की हत्या का दोष तो नहीं था।
साया- ठीक है तुम मेरा सौदा पूरा करों मैं तुम्हें तुम्हारी किस्मत वापस कर देता हूं। कार्तिक- जल्दी बताओ क्या करना है?
विराज- एक मिनट पहले मुझे बताओ कि तुमने मेरी किस्मत किससे बदली थी।
साया- ये जो कुछ हो रहा है तुम्हारे कारण ही हो रहा है।
विराज- मेरे कारण? और क्या हो रहा है।
साया- किस्मत बदलने के सौदे में सब कुछ अच्छा चल रहा था। कार्तिक प्रमोशन पाकर बहुत खुश भी था। ऋषभ को भी दूसरी किस्मत मिल गई थी। इंस्पेक्टर अजय भी तुम्हारी किस्मत लेकर आगे बढ़ने ही वाला था।
विराज- तो इसमें मैंने क्या किया है?
सौदा पार्ट 5 यहां पढ़े
साया- तुम्हें ऋषभ को मारना नहीं चाहिए था। तुमने उसे मारा, फिर कार्तिक परेशानी में आया। कार्तिक से अजय मिला। अजय और कार्तिक तुमसे मिले। तुम्हें अपना जुर्म कबूल करना पड़ा। ये सब तुमने ही तो किया है।
विराज- तो अब इसका अंत कैसे होगा? साया- इसका सिर्फ एक ही तरीका है और समझ लो कि वहीं मेरा तुम तीनों से सौदा पूरा करने की शर्त भी है।
कार्तिक- क्या है शर्त? क्या करना होगा हमें इस सब को रोकने के लिए। मुझे बस इन सब से छुटकारा चाहिए।
साया- तो फिर सुनो। या तो तुम और अजय मिलकर विराज को खत्म कर दो या विराज तुम दोनों को खत्म कर दे।
विराज- उससे क्या फायदा होगा?
साया- यदि तुम इन दोनों को मार दोगे तो इनकी किस्मत फिर से मेरे पास आ जाएगी और तुम्हारे जुर्म कबूलने का कोई गवाह नहीं होगा। और अगर ये दोनों तुम्हें मार देते हैं तो ऋषभ तो मर ही चुका है और तुम्हारे मर जाने से तुम्हारी किस्मत भी खत्म हो जाएगी और अजय और कार्तिक को उनकी किस्मत मिल जाएगी।
विराज- तो इसमें कौन से बड़ी बात है मैं अभी इन दोनों को मार देता हूं। विराज अपनी पिस्टल निकालता है और सबसे पहले अजय की ओर तान देता है। जैसे ही वह गोली चलाता है अजय कार्तिक को धक्का देते हुए एक साइड कूद जाता है। क्योंकि अजय यह जानता था कि यदि वह बच गया तो विराज अगला वार कार्तिक पर ही करेगा और शायद कार्तिक उससे बच न पाए। इसलिए वह कार्तिक को भी बचाने का प्रयास करता है। यह सब साया वहां खड़ा होकर देख रहा था। इसके बाद विराज उन दोनों के पीछे भागता है और कई बार फायर भी करता है, पर हर बार अजय बच जाता है। विराज की गोलियां खत्म हो जाती है और वह पिस्टल की मैगजीन चेंज करता है, इसी बीच कार्तिक उस पर लोहे की रोड से हमला कर देता है। इतनी ही देर में अजय भी वहां आ जाता है और लगातार दो गोलियां विराज के सीने में उतार देता है। साया यह देखकर मुस्कुरा देता है। इधर अजय और कार्तिक भी एक लंबी सांस लेकर साये की ओर आ जाते हैं।
अजय- हमने सौदा पूरा कर दिया है।
साया- हां, अब तुम्हारी किस्मत फिर से तुम्हारी हो गई है।
कार्तिक- इंस्पेक्टर अब तो मुझ पर कत्ल का कोई इल्जाम नहीं रहेगा ना? अजय- नहीं कार्तिक- बस थोड़ी सी कानूनी कार्रवाई रहेगी उसके बाद तुम आजाद हो।
साया- अच्छा तो अब मैं चलता हूं। देखता हूं कोई और मेरे साथ सौदा करके अपनी किस्मत बदलना चाहता है क्या?
कार्तिक- पर हमारा वो कॉन्ट््रेक्ट लेटर?
साया- सौदा पूरा हो चुका है तो उस लेटर का भी कोई मतलब नहीं है। इतना कहकर साया वो लेटर फाड़ देता है।
कार्तिक- किस्मत बदलने के इस खेल ने पहले से भी ज्यादा परेशान कर दिया था।
साया- वैसे तुम दोनों को एक बात बता देना चाहता हूं। हालांकि ये मेरा काम ही है कि मैं लोगों से सौदा करूं और उनकी किस्मत बदल दूं। पर फिर भी एक बात हमेशा याद रखना। इंसान अपनी किस्मत अपनी मेहतन और अपने कर्म से बनाता है। किसी भी किस्मत से कोई अपने लिए कुछ नहीं कर सकता है। अगर तुम्हें भी कुछ करना है तो आगे बढ़ो, मेहनत करो और अपने कर्म से ही अपनी किस्मत को बदल डालो। अगर ऐसे किसी सौदे में रहोगे तो हो सकता है कि तुम्हारा हाल भी ऋषभ और विराज जैसा ही हो।
सौदा पार्ट 8 यहां पढ़े
इसके बाद साया वहां से अचानक गायब हो जाता है। कार्तिक और अजय भी वहां से चले जाते हैं। अगले दिन कार्तिक अपने ऑफिस पहुंचता है और फिर से अपने केबिन में बैठकर आराम से काम करने लगता है। अब उसके परिवार में कोई परेशानी भी नहीं थी। इन बातों को सोचते हुए कार्तिक मन ही मन कहता है कि वह ऐसे ही अपनी किस्मत को दोष दे रहा था। साया का कहना सही है कि इंसान अपनी मेहनत और कर्म से अपनी बना सकता है और बदल सकता है। दूसरी ओर अजय को भी प्रमोशन मिल जाता है और उसे दूसरे शहर जाना पड़ता है। बिना किस्मत बदले ही दोनों अब अपनी जिंदगी में काफी खुश थे।









Awesome story
ReplyDeleteShandar
ReplyDeleteGood story
ReplyDeletegreat sir good storey
ReplyDeletevery nice, very interesting, and good story ....thanx for share
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