सौदा 

पार्ट 7


सौदा पार्ट 1 यहां पढ़े  

विराज चौहान एक ऐसा इंसान था, जिस पर हाथ तो क्या उठाने से पहले बड़े से बड़ा आदमी भी 10 बार सोचता था। हैवानियत के मामले में उसका कोई सानी नहीं था। वह खुद को जिंदा शैतान कहलवाना पसंद करता था। दुनिया का ऐसा कोई बुरा काम नहीं था, जिसे वह नहीं करता था। अपराध के मामले में उससे बड़ा कोई नहीं था। अपनी पहुंच, रौब, ताकत और रूपए के बल पर वह कुछ भी करता था और कोई उसे रोकने वाला नहीं था। शायद इसी कारण अजय ने भी अपनी किस्मत को उससे बदल लिया था। पर कहते हैं कि अगर आपके पास ताकत, पैसा, रौब सब हो तो फिर किस्मत काम नहीं करती, यही सब चीजें काम करती है। ऐसा ही कुछ विराज के साथ था। उसकी किस्मत हालांकि अजय ने ले ली थी, पर उसे अब तक कोई फर्क नहीं पड़ा था। इधर अजय और कार्तिक अब इस सोच में थे कि आखिर ऐसा कौन हो सकता था जो अजय की हत्या करता और वह कौन है जो अजय और ऋषभ दोनों को जानता था? ये पता लगाने का जिम्मा अजय ने ले लिया था। वहीं अब कार्तिक की भी जमानत हो गई थी और उसे हिदायत थी कि वह शहर छोड़कर नहीं जाएगा। एक ओर जहां अजय पड़ताल में लगा था, वहीं कार्तिक भी जमानत मिलने के बाद अपनी ओर से पूरी बात पता लागने की कोशिश कर रहा था। वह ऋषभ के संबंध में जानकारी जुटा रहा था कि वह कब, कहां किससे मिलता था? ऑफिस से उसे ऋषभ के संबंध में कुछ जानकारी मिल गई थी, जिसके आधार पर उसने अपनी पड़ताल शुरू कर दी थी। हालांकि इस पूरी पड़ताल में अजय उसका साथ दे रहा था और वह उसे जैसा बताता था, वैसा ही कार्तिक करता था। इसी पड़ताल के दौरान कार्तिका को ऋषभ के बारे मेंकुछ जानकारी मिलती है और वह यह बताने के लिए अजय को फोन करता है। कुछ देर बाद दोनों एक होटल में मिलने का तय करते हैं।

सौदा पार्ट 2 यहां पढ़े 


अजय- हां, कार्तिक क्या बात है? इतनी अचानक क्यों बुलाया? 
कार्तिक- आप बैठिए सर। सब बताता हूं। आपके कहे अनुसार मैं ऋषभ के दोस्तों के बारे में जानकारी हासिल कर रहा था। इस दौरान ही मुझे पता चला कि ऋषभ का एक दोस्त है विक्रम। उसके चाचा मनमोहन उर्फ सिक्का विराज के साथ काम करते हैं। एक बार आपने ही उसे किसी केस में अंदर भी किया था। 
अजय- तो क्या सिक्का मेरी हत्या करना चाह रहा है? 
कार्तिक- ये तो मैं नहीं बता सकता, पर मुझे जो जानकारी मिली वह आपको बता रहा हूं। सिक्का आपकी हत्या करना चाह रहा है या नहीं ये आप पता लगा लो। 
अजय- हां, वो मैं पता कर लूंगा। वैसे ऋषभ का ये दोस्त विक्रम करता क्या है?
कार्तिक- पिछले पांच दिन से देख रहा हूं सर ऐसा कुछ नहीं करता कि कमाई हो। शायद अपने चाचा के पैसों पर ऐश कर रहा है। रोज रात को एक बार में जरूर जाता है अपने कुछ दोस्तों के साथ और पूरी तरह से नशे में होकर ही बाहर आता है। करीब 3 घंटे तक वहां रहता है। 


सौदा पार्ट 3 यहां पढ़े 
अजय- ठीक है कार्तिक अब इसके आगे की जानकारी मैं निकाल लूंगा। वैसे एक बात का ध्यान रखना यह किसी को पता न चले कि हम दोनों मिलकर कुछ पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। 
कार्तिक- जी, बिल्कुल सर। 
इसके बाद दोनों वहां से चले जाते हैं। अजय वहां उस बार पहुंचता है, जहां विक्रम रोज अपने दोस्तों के साथ आता था। वहां अजय नशे की हालत में ही विक्रम को हिरासत में ले लेता है। यह खबर जब उसके चाचा मनमोहन उर्फ सिक्का मिलती है तो वह अजय को फोन कर विक्रम को छोड़ने के लिए कहता है। इस पर विजय उससे कहता है कि वह एक बार विराज से मिलना चाहता है। मनमोहन जैसे ही विराज और अजय की मुलाकात करा देगा वह विक्रम को छोड़ देगा। मनमोहन इस बात पर कहता है कि वह विराज से बात कर उसे बताएगा। कुछ ही देर में मनमोहन का अजय के पास फोन आता है और विराज उससे मिलने के लिए राजी भी हो जाता है। अजय कार्तिक को फोन करता है और बताता है कि वह विराज से मिलने के लिए जा रहा है और चाहे तो वह भी उसके साथ चले। कार्तिक भी इस बात पर राजी हो जाता है। अजय सोचने लगता है कि ये शायद विराज की किस्मत के कारण ही है कि जिससे मिलने के लिए बड़े से बड़े मंत्री महीनों इंतजार करते रहते हैं उसे चंद मिनट में ही मिलने का मौका मिल गया है। कुछ ही देर में कार्तिक भी अजय के पास आ जाता है और दोनों विराज से मिलने के लिए निकल पड़ते हैं। विराज के बंगले पर पहुंचने पर उनकी  तलाशी ली जाती है और फिर उसके बाद वे विराज के सामने होते हैं। अजय विराज को अपने सामने देखकर मन में कुछ डर जाता है पर फिर भी हिम्मत करते हुए उससे बात करना शुरू करता है। 
सौदा पार्ट 4 यहां पढ़े  
अजय- मैं इंस्पेक्टर अजय हूं और ये कार्तिक है।
विराज- जानता हूं। यहां आने का मकसद बोलो। क्यों मिलना चाह रहे थे?
अजय- जी अगर आप ठीक समझे तो क्या हम अकेले में कुछ बात कर सकते है? 
विराज कुछ देर तक अजय और कार्तिक को देखता है कि फिर अपने आसपास खड़े अपने कुछ खास लोगों को देखता है। अपने एक साथी से वह एक पिस्टल हाथ में ले लेता है और फिस एक इशारा करता है और फिर वहां से सभी चले जाते हैं। अब उस बड़े से हॉल में अजय, कार्तिक और विराज ही रह जाते हैं। 

अजय- क्या इस हॉल में कोई सीसीटीवी कैमरा, या कोई छिपा कैमरा है? 
विराज- क्यों मेरी हत्या करता चाहते हो ताकि कैमरे में नजर नहीं आए? 
अजयनहीं हम कुछ ऐसी बात करना चाहते हैं, जो शायद अब तक सिर्फ आप ही जानते हो। उस बात के बारे में शायद आपके अलावा और कोई नहीं जानता। और अगर हम गलत नहीं है तो वह बात हम जानते हैं। 
विराज इस बार दोनों को बड़े आश्चर्य से देखता है और फिर कुछ देर सोचने के बाद कैमरे बंद करने के लिए कह देता है। हालांकि इस दौरान वह पिस्टल अजय और कार्तिक की ओर ताने रखता है। 
सौदा पार्ट 5 यहां पढ़े  
विराज- अगर कोई भी होशियारी दिखाने की कोशिश करोगे इंस्पेक्टर तो मुझे गोली चलाने में कोई परेशानी नहीं होगी। कैमरे भी बंद है तो कोई सबूत भी नहीं होगा कि गोली मैंने मारी है। 
अजय- नहीं हम ऐसा कुछ नहीं करना चाहते है। हम सिर्फ आपसे बात करने के लिए हैं। 
कार्तिक- अभी तो हम खुद मुश्किल में हैं तो आपसे दुश्मनी मोल लेकर अपनी परेशानियों को और तो नहीं बढ़ा सकते हैं। 


सौदा पार्ट 6 यहां पढ़े  


इसके बाद अजय और कार्तिक मिलकर विराज को पूरी कहानी बताते हैं। खासकर कार्तिक उसे अपने परेशानी और फिर साये के आने और किस्मत बदलने के बारे में बताता है। वही उसे उस सौदे के बारे में भी बताता है कि जो कि उस साये ने उसके साथ किस्मत बदलने के लिए किया था। फिर अजय उसे बताता है कि कैसे वह एक हत्या के मामले को लेकर अजय मिला और फिर अजय से उसे पता चला कि उसकी हत्या होने वाली है। और फिर वह यह भी बताता है कि एक साये ने उसके साथ भी सौदा किया था और उसने अपनी किस्मत विराज से बदली है। अजय और कार्तिक की बात को विराज भी बड़े ही ध्यान से सुनता है। दोनों की बाता पूरी हो जाती है तो उसे हॉल में एकदम सन्नाटा पसर जाता है। फिर थोड़ी ही देर बाद विराज जोर से हंसता है। हंसते हुए वह अजय और कार्तिक को देखता रहता है। इधर अजय और कार्तिक समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर विराज हंस क्यों रहा है। क्या उसने उस साये से कोई सौदा नहीं किया। क्योंकि अजय के अनुसार विराज ने भी किसी की किस्मत ली होगी तभी तो उसकी किस्मत उसे मिली है और फिर यदि ऐसा है तो ऋषभ ने भी तो किसी की किस्मत ली होगी तभी तो कार्तिक को ऋषभ की किस्मत मिली होगी। वह यह सब सोच रही रहा होता है कि विराज जो अब तक हंस रहा था अब चुप हो गया था। 

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