बेइंतहा नफरत और सच्चा प्यार
पार्ट 1
विवान के लिए तो आज का दिन भी हमेशा की तरह से सामान्य दिन ही था, पर उसके कॉलेज में आज एक अलग ही माहौल था। कॉलेज में फेरयरवेल पार्टी के साथ कुछ रोचक प्रतियोगिताएं भी होने वाली थी। विवान के दोस्त चाहते थे कि वह भी किसी प्रतियोगिता में भाग ले और उस प्रतियोगिता का विजेता बनकर ही लौटे। दोस्तों के कहने पर वह प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए तैयार हो जाता है। कॉलेज में बड़े से मंच पर कार्यक्रम की शुरूआत होती है और धीरे-धीरे कार्यक्रम आगे बढ़ता जाता है। विवान के दोस्तों को अब इंतजार था वाद-विवाद प्रतियोगिता का, जिसमें विवान भाग ले रहा था। विवान एक तरह से कॉलेज का हीरो था। पढ़ाई से लेकर स्पोर्टस, कल्चरल एक्टिविटी या कॉलेज कैंपस में होने वाली किसी भी गतिविधि में वो हमेशा एक्टिव रहता था। इस कारण ही सभी दोस्तों को उम्मीद थी कि विवान ही जीतेगा। फिर वो वक्त आ गया जब वाद-विवाद प्रतियोगिता के विवान का नाम पुकारा गया। विवान मंच पर पहुंच जाता है। तभी एक ओर नाम पुकारा जाता है सुहानी। मंच पर खड़े प्रोफेसर बताते हैं कि संयोग से इस प्रतियोगिता में केवल दो ही नाम सामने आए हैं। एक विवान और दुसरा नाम सुहानी का है। प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार यहां कुछ पर्ची है, जिन पर वाद-विवाद के विषय लिखे हुए हैं, कोई पर्ची निकाली जाएगी और उस पर ही इन दोनों को वाद-विवाद करना हैं। कॉलेज की प्रिसिंपल पर्ची निकालती हैं और सब्जेक्ट बताई है प्यार यानि कि लव।
विवान और सुहानी दोनों एक-दूसरे को देखते है और फिर अपनी जगह पर जाकर खड़े हो जाते हैं। सुहानी कहती है कि वह प्यार के पक्ष में बोलेगी और विवान प्यार के विपक्ष में बोलने के लिए तैयार हो जाता है।
सुहानी- प्यार पर बोलने के लिए इतना कुछ है कि शायद अल्फाज भी कम पड़ जाए। कहते भी है कि प्यार को कभी शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। ये एक ऐसी अनुभूति है जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। प्यार से दुनियां खूबसूरत सी लगने लगती है, दिल गुनगुनाने लगता है और दुनियां के सभी रंग और भी खिलकर हमारी आंखों को सुकुन देते हैं। प्यार में इतनी ताकत होती है कि वह किसी भी इंसान को बदल दे। किसी भी इंसान के जीवन में जब प्यार आ जाता है तो वह न सिर्फ केयरिंग हो जाता है, बल्कि उसके अंदर एक जिम्मेदारी भी आ जाती है। वह दूसरों की इच्छाओं का सम्मान करने लग जाता है। वह दूसरों के लिए जीना सीख जाता है। वह खुद के साथ ही हर उस व्यक्ति की परवाह करने लग जाता है, जिससे वह प्यार करता है।
विवान- मेरा मानना है कि प्यार जैसा कुछ इस दुनियां में होता ही नहीं। प्यार जैसा एक शब्द बनाकर दो मीठे शब्द बोलकर अपना मतलब निकालना ही प्यार है। सुहानी जी कि एक बात से इत्तेफाक रखता हूं कि प्यार किसी भी इंसान को बदल सकता है। पर जैसा सुहानी जी ने कहा उस तरह से नहीं। प्यार जो कि मेरी नजर में कोई अस्तित्व ही नहीं रखता है, उसके नाम पर किसी भी इंसान को खत्म किया जा सकता है। उसकी जिंदगी की खुशियां उससे छीनी जा सकती है। उसकी हंसी उससे छिनी जा सकती है। उससे उसकी भावनाओं से इस शब्द के नाम खिलवाड़ किया जा सकता है। और सबसे बड़ी बात यह कि इस शब्द दिखावा मात्र करके उसका फायदा उठाया जा सकता है।
सुहानी- जो प्यार को एक बाद महसूस कर लेते हैं, वे उसे कभी दिखावे का नाम नहीं देते। प्यार के मायने रिश्तों के अनुसार बदलते जाते हैं। रिश्ता कोई भी प्यार हमेशा जिंदगी अहमियत रखता है। दोस्तों में भी प्यार होता है। एक प्रेमी अपनी प्रेमिका से और एक प्रेमिका अपने प्रेमी से प्यार करती है। माता-पिता अपने बच्चों से और बच्चे अपने माता-पिता से प्यार करते हैं। हर रिश्ता कहीं न कहीं प्यार के धागे से बंधा होता है।
विवान- प्यार हो तो उसे महसूस किया जाए। अगर प्यार से हर रिश्ता बंधा होता है तो क्या सुहानी जी मुझे ये बताएगी कि क्यों बुजुर्ग माता-पिता वृद्धाश्रम में छोड़ दिए जाते है? क्यों कई बच्चे पैदा होते ही अनाथालय पहुंचा दिए जाते है? क्यों रक्षाबंधन के दिन किसी भाई की कलाई सुनी रह जाती है, क्यों कोई बहन अपने भाई की राह तकती रह जाती है। क्यों कोई लड़की अपने प्रेमी को छोड़कर किसी ओर से शादी करने के लिए चली जाती है और क्यों कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका को छोड़कर अपना प्यार किसी ओर में तलाश करने लग जाता है।
सुहानी- यह सब होता है पर हर किसी के साथ नहीं होता है। अगर ऐसा होता तो आज घर कम और अनाथालय और वृद्धाश्रम ज्यादा होते। लव मैरिज जैसा कोई शब्द आज प्रचलित नहीं होता।
विवान- अगर लव मैरिज जैसा शब्द भी प्रचलित है तो क्यों वहीं लव मैरिज तलाक के रूप में बदल जाती है। शादी के बाद उनका प्यार अचानक कहां गायब हो जाता है, जो कि शादी के पहले तक एक-दूसरे के बिना मर जाने की बात किया करते थे?
इस बीच एक बार फिर कॉलेज की प्रिंसिपल खड़ी होती है और वह प्रतियोगिता में सुहानी और विवान दोनों को ही विजेता घोषित करते हुए प्रतियोगिता समाप्त करती है। प्रिंसिपल यानि कि मेडम रिचा कहती है कि प्यार एक ऐसा शब्द है, जिस पर हर इंसान अपनी एक सोच और एक मानसिकता रखता है। इस कारण इस विषय पर ज्यादा बहस नहीं होना चाहिए, इस कारण मैं विवान और सुहानी दोनों को संयुक्त रूप से इस प्रतियोगिता का विजेता घोषित करती हूं।
एक ओर जहां विवान के दोस्त विवान की जीत का जश्न मना रहे है, वहीं दूसरी ओर सुहानी की सहेलियां भी उसे जीत की बधाई दे रही है। सुहानी की नजरें विवान पर ही टिकी है, वहीं विवान ने एक बार भी पलटकर सुहानी को नहीं देखा था। हालांकि दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं और फिर भी यह उन दोनों की पहली मुलाकात ही थी। जैसे विवान अपने कॉलेज में एक्टिव है, उसी तरह से सुहानी भी एक्टिव है। बस आज तक दोनों कभी आमने-सामने नहीं आ पाए थे। आज एक प्रतियोगिता के कारण दोनों का आमना-सामना हुआ है। विवाद की पढ़ाई में ब्रेक भी लग गया था, उसके बाद उसने दोबार से अपनी पढ़ाई शुरू की है। एक ओर जहां विवाद अब गंभीर व्यक्तित्व रखता है, वहीं सुहानी कुछ चंचल है और हमेशा खुश रहने वाली लड़की है। ऐसा कह सकते हैं कि विवान और सुहानी फिलहाल तो एक-दूसरे के विपरीत व्यक्तित्व वाले लोग है।









Great
ReplyDeleteNice story
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