ये भी तो तेरी एक ख्वाहिश है

मेरी हसरतों का क्या, जैसे कोई शबनम है,
आज कुछ ज्यादा है, तो कल कुछ कम है।
रात के साये में पली, सुबह खत्म हो जाती है, 
मेरी ख्वाहिश भी तेरी ख्वाहिश से दब जाती है।।

मैंने तो चाहा है हर पल साथ तेरा हो, 
पर तुझे मंजूर नहीं मेरा सपना पूरा हो।
बिखर जाने दे एक सपना ही तो टूटेगा, 
क्या होगा गर एक और अपना छुटेगा।।

हमने बनाई, बसाई थी एक छोटी दुनियां, 
जिसमें हम दोनों के बीच न थी कोई दुरियां।
तो क्या जो तुने तोड़ दी कसमें मिटा दी हे यादें
तो क्या जो तू भूल गई, प्यार भरे कुछ वादें।।

मैंने समझा था मैं और तुम अब हम है, 
तुमने ही कहा हम नहीं मैं और तुम है।
अब जब भी आती है याद तेरी आंखें नम है,
मन कुछ भारी और दिल में तेरा ही गम है।।

गर तुम्हें लगे मैं भूल गया बस आवाज लगाना, 
तुम्हें जो आए याद तो फिर वापस चली आना।
मंजिल हो तुम मेरी, फिर भी राह भटका रहे हो, 
छोड़ रहे हो तुम, इल्जाम मुझ पर लगा रहे हो।।

अच्छा क्या करोगे तुम जब मेरी याद सताएंगी,
चिखोगी, चिल्लाओगी या कुछ अश्क बहाओगी।
मैं तो चला भी जाउंगा दूर, तुमसे बहुत ही दूर, 
क्या एक बार भी सोचोगी तुम, क्या था मेरा कसूर।।

अब और अपनी शख्सियत को नीलाम नहीं कर सकता, 
बहुत कहे शब्द अब उन्हें बेजान नहीं कर सकता।
गर होता तुम्हें कुछ लिहाज तो यूं रूसवा नहीं करते, 
गर होता तुम्हें भी कुछ प्यार तो यूं इंतजार नहीं करते।।

तुम तो कह चुके हो, मैं भी अलविदा करता हूं,
अब ना रोकना ना टोकना, मैं तुमसे दूर चलता हूं।
मैं चला जाउं तुझसे दूर, ये तेरी एक गुजारिश है, 
मैं रहूं तन्हां, ये भी तो तेरी एक ख्वाहिश है।।

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