सौदा
पार्ट 5
अब तक आपने पढ़ा....
कार्तिक एक मध्यमवर्गीय परिवार से जुड़ा है। उसकी जिंदगी में कई परेशानियां है और वह उन परेशानियों से छुटकारा पाना चाहता है। उसके ऑफिस में ऋषभ काम करता है वह उसकी किस्मत को बहुत अच्छा मानता है। वह चाहता भी है कि उसकी किस्मत भी ऋषभ की जैसी होती तो उसके जीवन में कोई परेशानी नहीं होती। ऐसा ही कुछ सोचते हुए वह एक रात सो रहा था, तभी उसे अहसास होता है कि कोई उसके पास है। वहां एक साया था। यह साया उससे किस्मत का सौदा करता है। अगले दिन कार्तिक को प्रमोशन मिल जाता है, जो कि ऋषभ को मिलने वाला था। कार्तिक को लगने लगता है कि उसकी किस्मत ऋषभ से बदल चुकी है। कार्तिक अपने प्रमोशन के साथ काम कर ही रहा होता है कि उसे पता चलता है कि ऋषभ की हत्या हो चुकी है। मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर अजय को उस पर ही शक है। ऑफिस के लोग भी उस पर शक कर रहे हैं। कार्तिक परेशान है कि उसने हत्या नहीं की है फिर भी सभी लोग उस पर ही शक क्यों कर रहे हैं।
अब आगे...
शाम को खाना खाने के बाद भी कार्तिक के दिमाग में इंस्पेक्टर अजय की ही बात घूम रही थी। वह सोच नहीं पा रहा था कि ऐसा कैसे हो गया? सुबह ही तो वह ऋषभ से मिला था। उसके बाद तो उसने उसे देखा भी नहीं, फिर वह कैसे ऋषभ का कत्ल कर सकता है। ऐसे ही सोचते हुए कार्तिक सो जाता। अगले दिन फिर वह उठकर अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ता हैं। ऑफिस पहुंचते ही उसका सामना एक बार फिर से इंस्पेक्टर अजय से होता है। अजय भी उसे एक बार देखता है उसके बाद कार्तिक अपने केबिन में चला जाता है। अजय भी उसके पीछे कार्तिक के केबिन में पहुंच जाता है।
कार्तिक- आप यहां?
अजय- कत्ल की छानबीन के लिए मैं कहीं भी पहुंच सकता हूं।
कार्तिक- मेरा मतलब है कि आप मेरे केबिन में क्या कर रहे है?
अजय- अभी तो बताया कि कत्ल की छानबीन।
कार्तिक- मेरे केबिन में क्या मिलेगा आपको?
अजय- शायद कातिल!
कार्तिक- क्या बकवास है ये? आपको लगता है कि मैंने ऋषभ को मारा है? और भला मैं क्यों मारूंगा उसे?
अजय- यही तो पता करना है कि अगर आपको ऋषभ को मारना होता तो आप किस वजह से उसे मारते?
कार्तिक- मैं उसे मारता ही नहीं और न ही मैंने उसे मारा है।
अजय- अच्छा तो आप कहे और मैं मान लूं?
कार्तिक- आपको मानना होगा क्योंकि मैंने कोई कत्ल नहीं किया है।
अजय- अच्छा तो फिर ये बताइए कि ये प्रमोशन आपको कैसे मिल गया? यह प्रमोशन तो ऋषभ को मिलने वाला था?
कार्तिक- इस सवाल का जवाब मेरे बॉस ज्यादा बेहतर तरीके से दे पाएंगे।
अजय- उनसे भी पूछ लूंगा। आप भी बता देते तो अच्छा होता।
कार्तिक- मुझे नहीं पता। मुझे भी यही पता था कि यह प्रमोशन ऋषभ को मिलने वाला है। पह एक दिन जब मैं ऑफिस पहुंचा तो बॉस ने मेरे हाथ में यह प्रमोशन लेटर दे दिया। उन्होंने क्या सोचा और प्रमोशन मुझे क्यों दिया मैं नहीं जानता।
अजय- ठीक है मिस्टर कार्तिक। पर मेरा एक सवाल और है।
कार्तिक- क्या?
अजय- कल दोपहर आप ऑफिस से बाहर गए थे। क्या मैं जान सकता हूं कि कहां गए थे और किससे मिले थे?
कार्तिक- ऑफिस के काम से गया और ऑफिस के एक क्लाइंट से ही मिलने गया था।
अजय- क्या मैं उस क्लाइंट का नाम और पता जान सकता हूं?
कार्तिक- आप अब भी मुझ पर शक कर रहे हैं?
अजय-जब तक कातिल पकड़ा नहीं जाता मैं सभी पर शक करूंगा। आप मुझे नाम और पता दीजिए।
कार्तिक अजय को उस क्लाइंट का नाम और पता दे देता है और अजय एक मुस्कान के साथ कार्तिक को देखकर उसके केबिन से चला जाता है। उसके बाद वह ऑफिस के कुछ लोगों से बात करता है। कार्तिक के केबिन के सामने से निकलते हुए वह एक बार फिर कार्तिक को देखता है और मुस्कुराते हुए ऑफिस से बाहर चला जाता है। कार्तिक फिर सोच में पड़ जाता है कि आखिर उस पर शक क्यों किया जा रहा है। तब वह ऑफिस में ही काम करने वाले अपने दोस्त विनय को बुलाता है।
कार्तिक- विनय ये इंस्पेक्टर तुम लोगों से क्या बात कर रहा था?
विनय- वो तुम्हारे और ऋषभ के बारे में ही पूछ रहा था।
कार्तिक- क्या पूछ रहा था?
विनय- यही कि तुम्हारे और उसके बीच संबंध कैसे थे? उसे मिलने वाला प्रमोशन आखिर तुम्हें कैसे मिल गया? क्या तुम दोनों के बीच कभी कोई झगड़ा हुआ है?
कार्तिक- विनय मैंने ऋषभ का कत्ल नहीं किया है।
विनय- मैं जानता हूं दोस्त। तुम किसी का भी कत्ल नहीं कर सकते। पर उस इंस्पेक्टर को कैसे यकीन दिलाए कि तुमने कुछ नहीं किया। उसका तो यहां तक कहना है कि तुम ही वो आखिरी इंसान हो जिसने ऋषभ को आखिरी बार जिंदा देखा था और उससे बात की थी।
कार्तिक- तो इसका मतलब ये हुआ कि मैंने उसकी हत्या कर दी?
विनय- ये मैं नहीं वो इंस्पेक्टर कह रहा है। उसका कहना है कि तुम्हारी और ऋषभ की ऑफिस में बात होने के बाद ऋषभ ऑफिस से बाहर गया और उसका मोबाइल यहीं बंद हो गया था। उसके बाद उसने ना किसी को कॉल किया है और न ही उसे किसी का कॉल आया है।
कार्तिक- अरे तो उसमें मैं क्या करूं, यदि उसने अपना मोबाइल बंद कर दिया था?
विनय- वो सब मुझे नहीं पता कार्तिक। पर इतना पता है कि वो इंस्पेक्टर अब तुम्हारे पीछे पड़ गया है। अब उसे जब तक असली कातिल नहीं मिल जाता, वह तुम पर ही शक करेगा।
इतना करने के बाद विनय कार्तिक के केबिन से चला जाता है। दिनभर कार्तिक ऑफिस का काम खत्म कर शाम को घर पहुंचता है। वह एक बार फिर साक्षी से कत्ल के बारे में बात करता है। साक्षी उसे हिम्मत देने की कोशिश करती है। रात को कार्तिक जब सोने के लिए जाता है, तब भी उसका दिमाग उन्हीं बातों को सोचता है। तभी उसे याद आता है कि उस साये ने उसे कहा था कि जब कभी उसे उसकी मदद की जरूरत हो वह उसे याद कर ले वह आ जाएगा। वह साये को याद करता है और कुछ ही देर में साया उसके सामने खड़ा होता है।
कार्तिक- अरे, ये क्या तुमने?
साया- मैंने क्या किया?
कार्तिक- तुमने तो मुझे कत्ल के इल्जाम में फंसा दिया। अब मुझे बताओ मैं इससे बाहर कैसे आउंगा?
साया- पहली बात तो यह है कि मैंने तुम्हें कत्ल के इल्जाम में नहीं फंसाया है। फंसाया है तो तुम्हारी किस्मत ने। और दूसरी बात यह है कि मैं तुम्हें बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकता हूं। जो भी करना है तुम्हें करना है।
कार्तिक- अरे, मेरी किस्मत में अगर कत्ल का इल्जाम था तो बताना चाहिए थे ना?
साया- कार्तिक ये किस्मत तुम्हारी नहीं ऋषभ की है, उस पर कत्ल का इल्जाम लगने वाला था। इस कारण अब तुम पर लगा है। और तुमने ही ऋषभ से अपनी किस्मत बदली है मैंने तो बस कोई एक व्यक्ति चुनने को कहना था। तुमने ऋषभ को चुना और मैंने उससे तुम्हारी किस्मत बदल दी। अब उसकी किस्मत में क्या था और क्या होगा यह मुझे नहीं पता।
कार्तिक- ये तो पहले से भी बड़ी परेशानी हो गई है। कुछ तो बताओ मैं इससे बाहर कैसे आ सकता हूं।
साया- मुझे नहीं पता। हां ये बता सकता हूं कि ऋषभ पर कत्ल का इल्जाम लगने वाला था वह अब तुम पर लगा है, और एक बात और कि ऋषभ की किस्मत मैंने जिससे बदली थी उसकी हत्या होने वाली थी तो अब ऋषभ की हो गई।
कार्तिक- मैं तो किस्मत बदलने के चक्कर में और भी फंस गया हूं।
साया- तुम अच्छे इंसान हो। मैं तुम्हारी एक मदद कर सकता हूं।
कार्तिक- वो क्या?
साया- मैं तुम्हें उस इंसान का नाम बता सकता हूं जिससे मैंने ऋषभ की किस्मत बदली थी।
कार्तिक- उससे क्या होगा? क्या मुझ पर लगा कत्ल का इल्जाम हट जाएगा?
साया- हो सकता है कि वो इंसान तुम्हारी कुछ मदद कर सके?
कार्तिक- ठीक है बताओ कौन है वो इंसान?
साया- वो इंसान है इंस्पेक्टर अजय।
कार्तिक अजय का नाम सुनकर ही चौंक जाता है। जो इंस्पेक्टर ऋषभ के कत्ल के उसे जिम्मेदार मान रहा है वह उसकी मदद क्यों करेगा। और वह उसे क्या बताएगा कि उसने ऋषभ से अपनी किस्मत बदली थी और ऋषभ की किस्मत उससे बदल गई थी। कत्ल उसका होने वाला था और उसका इल्जाम ऋषभ पर लगने वाला था। इतनी बात वो क्यों सुनेगा और अगर सुनेगा तो क्या वो उसकी बात मानेगा।
साया- कार्तिक, कार्तिक। क्या हुआ क्या सोचने लगे।
कार्तिक- अरे वहीं इंस्पेक्टर तो मेरे पीछे पड़ा है। वह समझता है कि मैंने ही ऋषभ की हत्या की है।अच्छा तो अब ये भी बता दो कि तुमने इंस्पेक्टर की किस्मत किससे बदली है।
साया- नहीं मैं तुम्हें इतना नहीं बता सकता। इंस्पेक्टर का भी नाम मैंने तुम्हें इसलिए बताया है कि शायद तुम्हारी कोई मदद हो जाए। अब अगर वहीं इंस्पेक्टर तुम्हें हत्या का दोषी मानता है तो मैं कुछ नहीं कर सकता।
इतना कहने के बाद साया एक बार फिर गायब हो जाता है। साये के चले जाने के बाद कार्तिक फिर से सोच में पड़ जाता है। अब उसके दिमाग में एक ही बात चल रही है कि इंस्पेक्टर के दिमाग से यह बात कैंसे निकाली जाए कि उसने ऋषभ की हत्या नहीं की है। वह ऐसा सोचते हुए सो जाता है। अगले दिन तैयार होकर ऑफिस पहुंच जाता है। वह जैसे ही ऑफिस पहुंचता है वहां इंस्पेक्टर अजय पहले से मौजूद था।
कार्तिक एक मध्यमवर्गीय परिवार से जुड़ा है। उसकी जिंदगी में कई परेशानियां है और वह उन परेशानियों से छुटकारा पाना चाहता है। उसके ऑफिस में ऋषभ काम करता है वह उसकी किस्मत को बहुत अच्छा मानता है। वह चाहता भी है कि उसकी किस्मत भी ऋषभ की जैसी होती तो उसके जीवन में कोई परेशानी नहीं होती। ऐसा ही कुछ सोचते हुए वह एक रात सो रहा था, तभी उसे अहसास होता है कि कोई उसके पास है। वहां एक साया था। यह साया उससे किस्मत का सौदा करता है। अगले दिन कार्तिक को प्रमोशन मिल जाता है, जो कि ऋषभ को मिलने वाला था। कार्तिक को लगने लगता है कि उसकी किस्मत ऋषभ से बदल चुकी है। कार्तिक अपने प्रमोशन के साथ काम कर ही रहा होता है कि उसे पता चलता है कि ऋषभ की हत्या हो चुकी है। मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर अजय को उस पर ही शक है। ऑफिस के लोग भी उस पर शक कर रहे हैं। कार्तिक परेशान है कि उसने हत्या नहीं की है फिर भी सभी लोग उस पर ही शक क्यों कर रहे हैं।
अब आगे...
शाम को खाना खाने के बाद भी कार्तिक के दिमाग में इंस्पेक्टर अजय की ही बात घूम रही थी। वह सोच नहीं पा रहा था कि ऐसा कैसे हो गया? सुबह ही तो वह ऋषभ से मिला था। उसके बाद तो उसने उसे देखा भी नहीं, फिर वह कैसे ऋषभ का कत्ल कर सकता है। ऐसे ही सोचते हुए कार्तिक सो जाता। अगले दिन फिर वह उठकर अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ता हैं। ऑफिस पहुंचते ही उसका सामना एक बार फिर से इंस्पेक्टर अजय से होता है। अजय भी उसे एक बार देखता है उसके बाद कार्तिक अपने केबिन में चला जाता है। अजय भी उसके पीछे कार्तिक के केबिन में पहुंच जाता है।
कार्तिक- आप यहां?
अजय- कत्ल की छानबीन के लिए मैं कहीं भी पहुंच सकता हूं।
कार्तिक- मेरा मतलब है कि आप मेरे केबिन में क्या कर रहे है?
अजय- अभी तो बताया कि कत्ल की छानबीन।
कार्तिक- मेरे केबिन में क्या मिलेगा आपको?
अजय- शायद कातिल!
कार्तिक- क्या बकवास है ये? आपको लगता है कि मैंने ऋषभ को मारा है? और भला मैं क्यों मारूंगा उसे?
अजय- यही तो पता करना है कि अगर आपको ऋषभ को मारना होता तो आप किस वजह से उसे मारते?
कार्तिक- मैं उसे मारता ही नहीं और न ही मैंने उसे मारा है।
अजय- अच्छा तो आप कहे और मैं मान लूं?
कार्तिक- आपको मानना होगा क्योंकि मैंने कोई कत्ल नहीं किया है।
अजय- अच्छा तो फिर ये बताइए कि ये प्रमोशन आपको कैसे मिल गया? यह प्रमोशन तो ऋषभ को मिलने वाला था?
कार्तिक- इस सवाल का जवाब मेरे बॉस ज्यादा बेहतर तरीके से दे पाएंगे।
अजय- उनसे भी पूछ लूंगा। आप भी बता देते तो अच्छा होता।
कार्तिक- मुझे नहीं पता। मुझे भी यही पता था कि यह प्रमोशन ऋषभ को मिलने वाला है। पह एक दिन जब मैं ऑफिस पहुंचा तो बॉस ने मेरे हाथ में यह प्रमोशन लेटर दे दिया। उन्होंने क्या सोचा और प्रमोशन मुझे क्यों दिया मैं नहीं जानता।
अजय- ठीक है मिस्टर कार्तिक। पर मेरा एक सवाल और है।
कार्तिक- क्या?
अजय- कल दोपहर आप ऑफिस से बाहर गए थे। क्या मैं जान सकता हूं कि कहां गए थे और किससे मिले थे?
कार्तिक- ऑफिस के काम से गया और ऑफिस के एक क्लाइंट से ही मिलने गया था।
अजय- क्या मैं उस क्लाइंट का नाम और पता जान सकता हूं?
कार्तिक- आप अब भी मुझ पर शक कर रहे हैं?
अजय-जब तक कातिल पकड़ा नहीं जाता मैं सभी पर शक करूंगा। आप मुझे नाम और पता दीजिए।
कार्तिक अजय को उस क्लाइंट का नाम और पता दे देता है और अजय एक मुस्कान के साथ कार्तिक को देखकर उसके केबिन से चला जाता है। उसके बाद वह ऑफिस के कुछ लोगों से बात करता है। कार्तिक के केबिन के सामने से निकलते हुए वह एक बार फिर कार्तिक को देखता है और मुस्कुराते हुए ऑफिस से बाहर चला जाता है। कार्तिक फिर सोच में पड़ जाता है कि आखिर उस पर शक क्यों किया जा रहा है। तब वह ऑफिस में ही काम करने वाले अपने दोस्त विनय को बुलाता है।
कार्तिक- विनय ये इंस्पेक्टर तुम लोगों से क्या बात कर रहा था?
विनय- वो तुम्हारे और ऋषभ के बारे में ही पूछ रहा था।
कार्तिक- क्या पूछ रहा था?
विनय- यही कि तुम्हारे और उसके बीच संबंध कैसे थे? उसे मिलने वाला प्रमोशन आखिर तुम्हें कैसे मिल गया? क्या तुम दोनों के बीच कभी कोई झगड़ा हुआ है?
कार्तिक- विनय मैंने ऋषभ का कत्ल नहीं किया है।
विनय- मैं जानता हूं दोस्त। तुम किसी का भी कत्ल नहीं कर सकते। पर उस इंस्पेक्टर को कैसे यकीन दिलाए कि तुमने कुछ नहीं किया। उसका तो यहां तक कहना है कि तुम ही वो आखिरी इंसान हो जिसने ऋषभ को आखिरी बार जिंदा देखा था और उससे बात की थी।
कार्तिक- तो इसका मतलब ये हुआ कि मैंने उसकी हत्या कर दी?
विनय- ये मैं नहीं वो इंस्पेक्टर कह रहा है। उसका कहना है कि तुम्हारी और ऋषभ की ऑफिस में बात होने के बाद ऋषभ ऑफिस से बाहर गया और उसका मोबाइल यहीं बंद हो गया था। उसके बाद उसने ना किसी को कॉल किया है और न ही उसे किसी का कॉल आया है।
कार्तिक- अरे तो उसमें मैं क्या करूं, यदि उसने अपना मोबाइल बंद कर दिया था?
विनय- वो सब मुझे नहीं पता कार्तिक। पर इतना पता है कि वो इंस्पेक्टर अब तुम्हारे पीछे पड़ गया है। अब उसे जब तक असली कातिल नहीं मिल जाता, वह तुम पर ही शक करेगा।
इतना करने के बाद विनय कार्तिक के केबिन से चला जाता है। दिनभर कार्तिक ऑफिस का काम खत्म कर शाम को घर पहुंचता है। वह एक बार फिर साक्षी से कत्ल के बारे में बात करता है। साक्षी उसे हिम्मत देने की कोशिश करती है। रात को कार्तिक जब सोने के लिए जाता है, तब भी उसका दिमाग उन्हीं बातों को सोचता है। तभी उसे याद आता है कि उस साये ने उसे कहा था कि जब कभी उसे उसकी मदद की जरूरत हो वह उसे याद कर ले वह आ जाएगा। वह साये को याद करता है और कुछ ही देर में साया उसके सामने खड़ा होता है।
कार्तिक- अरे, ये क्या तुमने?
साया- मैंने क्या किया?
कार्तिक- तुमने तो मुझे कत्ल के इल्जाम में फंसा दिया। अब मुझे बताओ मैं इससे बाहर कैसे आउंगा?
साया- पहली बात तो यह है कि मैंने तुम्हें कत्ल के इल्जाम में नहीं फंसाया है। फंसाया है तो तुम्हारी किस्मत ने। और दूसरी बात यह है कि मैं तुम्हें बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकता हूं। जो भी करना है तुम्हें करना है।
कार्तिक- अरे, मेरी किस्मत में अगर कत्ल का इल्जाम था तो बताना चाहिए थे ना?
साया- कार्तिक ये किस्मत तुम्हारी नहीं ऋषभ की है, उस पर कत्ल का इल्जाम लगने वाला था। इस कारण अब तुम पर लगा है। और तुमने ही ऋषभ से अपनी किस्मत बदली है मैंने तो बस कोई एक व्यक्ति चुनने को कहना था। तुमने ऋषभ को चुना और मैंने उससे तुम्हारी किस्मत बदल दी। अब उसकी किस्मत में क्या था और क्या होगा यह मुझे नहीं पता।
कार्तिक- ये तो पहले से भी बड़ी परेशानी हो गई है। कुछ तो बताओ मैं इससे बाहर कैसे आ सकता हूं।
साया- मुझे नहीं पता। हां ये बता सकता हूं कि ऋषभ पर कत्ल का इल्जाम लगने वाला था वह अब तुम पर लगा है, और एक बात और कि ऋषभ की किस्मत मैंने जिससे बदली थी उसकी हत्या होने वाली थी तो अब ऋषभ की हो गई।
कार्तिक- मैं तो किस्मत बदलने के चक्कर में और भी फंस गया हूं।
साया- तुम अच्छे इंसान हो। मैं तुम्हारी एक मदद कर सकता हूं।
कार्तिक- वो क्या?
साया- मैं तुम्हें उस इंसान का नाम बता सकता हूं जिससे मैंने ऋषभ की किस्मत बदली थी।
कार्तिक- उससे क्या होगा? क्या मुझ पर लगा कत्ल का इल्जाम हट जाएगा?
साया- हो सकता है कि वो इंसान तुम्हारी कुछ मदद कर सके?
कार्तिक- ठीक है बताओ कौन है वो इंसान?
साया- वो इंसान है इंस्पेक्टर अजय।
कार्तिक अजय का नाम सुनकर ही चौंक जाता है। जो इंस्पेक्टर ऋषभ के कत्ल के उसे जिम्मेदार मान रहा है वह उसकी मदद क्यों करेगा। और वह उसे क्या बताएगा कि उसने ऋषभ से अपनी किस्मत बदली थी और ऋषभ की किस्मत उससे बदल गई थी। कत्ल उसका होने वाला था और उसका इल्जाम ऋषभ पर लगने वाला था। इतनी बात वो क्यों सुनेगा और अगर सुनेगा तो क्या वो उसकी बात मानेगा।
साया- कार्तिक, कार्तिक। क्या हुआ क्या सोचने लगे।
कार्तिक- अरे वहीं इंस्पेक्टर तो मेरे पीछे पड़ा है। वह समझता है कि मैंने ही ऋषभ की हत्या की है।अच्छा तो अब ये भी बता दो कि तुमने इंस्पेक्टर की किस्मत किससे बदली है।
साया- नहीं मैं तुम्हें इतना नहीं बता सकता। इंस्पेक्टर का भी नाम मैंने तुम्हें इसलिए बताया है कि शायद तुम्हारी कोई मदद हो जाए। अब अगर वहीं इंस्पेक्टर तुम्हें हत्या का दोषी मानता है तो मैं कुछ नहीं कर सकता।
इतना कहने के बाद साया एक बार फिर गायब हो जाता है। साये के चले जाने के बाद कार्तिक फिर से सोच में पड़ जाता है। अब उसके दिमाग में एक ही बात चल रही है कि इंस्पेक्टर के दिमाग से यह बात कैंसे निकाली जाए कि उसने ऋषभ की हत्या नहीं की है। वह ऐसा सोचते हुए सो जाता है। अगले दिन तैयार होकर ऑफिस पहुंच जाता है। वह जैसे ही ऑफिस पहुंचता है वहां इंस्पेक्टर अजय पहले से मौजूद था।









स्टोरी तो अच्छी हैं पर एक निवेदन हैं कि आप स्टोरी को बहुत भागो में न देकर शार्ट में लिखे ।
ReplyDeleteजब तक स्टोरी में सभी एंगल न हो पढ़ने में उतना मजा भी नहीं आता है। और यह कहानी कुछ अलग हटकर है, इस कारण इसके भाग भी ज्यादा ही होंगे। अंत में जब स्टेरी समाप्त होगी तब काफी अच्छा लगेगा आपको एक पाठक के रूप में ।
DeleteKeep up the same.
ReplyDeleteLong stories me detailing achi rehti he ....keep it up very nice
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