सौदा
पार्ट 3
अब तक आपने पढ़ा....
कार्तिक एक मध्यमवर्गीय परिवार से जुड़ा है। उसकी जिंदगी में कई परेशानियां है और वह उन परेशानियों से छुटकारा पाना चाहता है। उसके ऑफिस में ऋषभ काम करता है वह उसकी किस्मत को बहुत अच्छा मानता है। वह चाहता भी है कि उसकी किस्मत भी ऋषभ की जैसी होती तो उसके जीवन में कोई परेशानी नहीं होती। ऐसा ही कुछ सोचते हुए वह एक रात सो रहा था, तभी उसे अहसास होता है कि कोई उसके पास है। वहां एक साया था। यह साया उससे किस्मत का सौदा करता है। अगले दिन कार्तिक को प्रमोशन मिल जाता है, जो कि ऋषभ को मिलने वाला था। कार्तिक को लगने लगता है कि उसकी किस्मत ऋषभ से बदल चुकी है।
अब आगे...
इसके बाद कार्तिक का बॉस वहां से चला जाता है और कार्तिक के ऑफिस के सभी लोग एक एककर उसे बधाई देते हैं। कार्तिक वह लेटर लेकर अपने केबिन में चला जाता है, जो उसे प्रमोशन के बाद मिला है। बधाई देने वालों में ऋषभ भी था। उससे मिलते समय कार्तिक काफी खुश नजर आ रहा था। अब वह अपने केबिन में बैठकर अपने आप में ही मुस्कुरा रहा था। तभी उसे याद आता है कि दो दिन पहले ही ऑफिस में यह प्रमोशन ऋषभ को मिलने की बात चल रही थी। फिर अचानक उसे ये प्रमोशन कैसे मिल गया? वह सोच ही रहा था तभी उसे रात के सपने की बात याद आ गई और उसने उस साये के कहने पर ऋषभ से ही अपनी किस्मत बदलने के बारे में सोचा था। कार्तिक अब सोचने लगता है कि क्या सच में उसकी किस्मत बदल गई है? क्या ऋषभ की किस्मत अब उसकी हो गई है, क्योंकि यह प्रमोशन हर हाल में ऋषभ को ही मिलना था पर अचानक ही उसे मिल गया। वह यह सोच ही रहा था और उसने तय किया कि इस बारे में एक बार अपने बॉस से बात करना चाहिए। यह सोचते हुए वह अपने बॉस के केबिन में पहुंच जाता है।
कार्तिक- बॉस, क्या मैं अंदर आ सकता हूं?
बॉस- अरे हां कार्तिक। बताओ कैसे आना हुआ? आज तो तुम्हें भी केबिन मिल गया है। कोई खास बात है क्या?
कार्तिक- जी, खास ही मान लीजिए बॉस।
बॉस- अच्छा बोलो क्या खास बात है?
कार्तिक- बॉस मेरे मन में एक प्रश्न है और मैं चाहता हूं कि आप उसका एक दम सही जवाब दे।
बॉस- हां, हां कार्तिक। बताओ क्या प्रश्न है?
कार्तिक- बॉस दो दिन पहले तक मुझे जो प्रमोशन मिला है वह ऋषभ को मिलने वाला था, फिर अचानक उसका नाम हटाकर मेरा नाम कैसे आ गया?
बॉस- ये तो मुझे भी नहीं पता कार्तिक। पर कल रात को मैं प्रमोशन के बारे में सोच रहा था, तभी मुझे तुम्हारा ख्याल आया। जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि तुमसे कई गलतियां हुई है, पर तुम्हें प्रमोशन तो मिलना ही चाहिए था। बस फिर क्या रात को ही मैंने तय कर लिया था। और आज सुबह जब ऑफिस आया तो ऋषभ के नाम जगह तुम्हारा नाम लिख दिया।
बॉस की बात सुनकर कार्तिक फिर से अपने केबिन में चला जाता है। उसके दिमाग में अब भी यही प्रश्न चल रहा था कि रात को जो हुआ वह सपना था या सच है? क्या सच में उसकी किस्मत ऋषभ से बदल गई है? क्योंकि उसे जो प्रमोशन मिला है उसमें उसका नाम कभी भी नहीं था, परंतु अचानक ही उसे प्रमोशन मिल गया। जबकि ऑफिस के हिसाब से भी यह प्रमोशन सिर्फ ऋषभ को ही मिलना था, जो अब उसे मिल चुका है। तो क्या सच में अब ऋषभ की किस्मत उसकी किस्मत हो चुकी है? ऑफिस टाइम खत्म होने तक कार्तिक यही सोच रहा था। उसके बाद वह अपने घर की ओर चल देता है। घर पहुंचने के बाद आज उसे घर का माहौल भी बदला हुआ नजर आता है। उसकी पत्नी भी उससे बड़े प्यार से बात कर रही है। उसका बेटा भी काफी शांत नजर आ रहा था। आज उसे घर में किसी प्रकार के झगड़े या कलह के बारे में भी कोई बात सुनने को नहीं मिली थी। उसने साक्षी को अपने प्रमोशन की बात बताई तो वो भी काफी खुश नजर आ रही थी। अब उसे यकीन होने लगा था कि रात को जो हुआ वह सपना नहीं था, बल्कि सच था। उसकी किस्मत सच में ऋषभ से बदल गई है। अब वह भी काफी खुश हो रहा था। पूरा परिवार खाना खाने के बाद सैर करने के लिए गया और फिर देर से लौटकर आए और उसके बाद सभी सोने की तैयारी करने लग गए। रात को एक बार फिर कार्तिक अचानक उठकर बैठ जाता है। उसे लगता है कि उसका नाम पुकार रहा है, वह आसपास देखता है तो उसे कोई नजर नहीं आता है। कुछ ही देर में उसके कमरे में धुंध छा जाती है और उस धुंध से फिर से वहीं साया उसके पास आ जाता है। कार्तिक इस बार सामान्य ही रहता है।
साया- तो कार्तिक अब तो यकीन हो गया ना मेरी बात का कि मैं तुम्हारी किस्मत बदल सकता हूं?
कार्तिक- हां, लग तो रहा है कि किस्मत ने कुछ बदला है।
साया- अभी तो आगे देखो तुम्हें और भी बहुत कुछ मिलने वाला है।
कार्तिक- और क्या मिल सकता है?
साया- वैसे, तुमने एक काम बहुत समझदारी का किया है।
कार्तिक- कौन सा काम?
साया- यही कि तुमने अपनी किस्मत बदलने के लिए ऋषभ का चुना। उसकी किस्मत वाकई काफी अच्छी है। अब देखो तुमने कल सौदा किया और आज तुम्हारा प्रमोशन भी हो गया और सैलरी भी बढ़ गई।
कार्तिक- हां, ये बात तो सच है। पर, तुम ये सब बात कैसे जानते हो?
साया- कार्तिक बच्चों वाले सवाल क्यों कर रहे हो? जब मैं तुम्हारी किस्मत बदल सकता हूं, तो क्या मुझे ये पता नहीं होगा कि क्या हुआ है और क्या होगा?
कार्तिक- अब क्या होगा? मुझे कुछ बताओ। आगे मेरी किस्मत में और क्या-क्या है?
साया- हंसते हुए तुम्हारी किस्मत?
कार्तिक- ओह मेरा मतलब है कि ऋषभ की किस्मत। वैसे सौदा करने के बाद तो वह किस्मत मेरी ही है ना?
साया- हां ये बात भी है कि अब वो किस्मत तुम्हारी है।
कार्तिक- तो फिर बताओ आगे क्या होगा?
साया- नहीं, मैं नहीं बता सकता। क्योंकि मैं ऐसा नहीं कर सकता। मुझे ऐसा करने की इजाजत भी नहीं है। जो भी होगा वह सब तुम्हारे सामने आ ही जाएगा।
कार्तिक- ठीक है फिर। वैसे अब तुम यहां क्यों आए। सौदे के हिसाब से कुछ लेने आए हो क्या?
साया- नहीं लेने तो नहीं आया हूं, पर तुम्हें यही याद दिलाने आया था कि वक्त आने पर मैं तुमसे कुछ भी मांग सकता हूं और वह तुम्हें देना होगा। मैंने अपना वादा निभाया है अब तुम्हारी बारी होगी अपना वादा निभाने की। या यूं कहूं कि सौदा पूरा करने की।
कार्तिक- हां, मुझे याद है।
साया- ठीक है तो फिर मिलेंगे कार्तिक। वैसे एक बात और अगर तुम्हें कभी मेरी जरूरत हो तो मुझे याद कर लेना मैं तुम्हारे पास आ जाउंगा। हो सकता है भविष्य में तुम्हें मेरी जरूरत पड़ जाए।
कार्तिक- हां, बिल्कुल।
इसके बाद साया एक बार फिर गायब हो जाता है और कार्तिक अचानक बिस्तर से उठकर बैठ जाता है। उसे फिर से लगता है कि उसने एक बार फिर कोई सपना ही देखा है। क्योंकि इस बाद भी कमरे में न तो कोई निशान था और न ही कोई धुंध थी। हालांकि कार्तिक अपनी किस्मत को बदलकर काफी खुश भी था। वह एक बार फिर सो जाता है। सुबह उठकर फिर से वह अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ता है।
कार्तिक एक मध्यमवर्गीय परिवार से जुड़ा है। उसकी जिंदगी में कई परेशानियां है और वह उन परेशानियों से छुटकारा पाना चाहता है। उसके ऑफिस में ऋषभ काम करता है वह उसकी किस्मत को बहुत अच्छा मानता है। वह चाहता भी है कि उसकी किस्मत भी ऋषभ की जैसी होती तो उसके जीवन में कोई परेशानी नहीं होती। ऐसा ही कुछ सोचते हुए वह एक रात सो रहा था, तभी उसे अहसास होता है कि कोई उसके पास है। वहां एक साया था। यह साया उससे किस्मत का सौदा करता है। अगले दिन कार्तिक को प्रमोशन मिल जाता है, जो कि ऋषभ को मिलने वाला था। कार्तिक को लगने लगता है कि उसकी किस्मत ऋषभ से बदल चुकी है।
अब आगे...
इसके बाद कार्तिक का बॉस वहां से चला जाता है और कार्तिक के ऑफिस के सभी लोग एक एककर उसे बधाई देते हैं। कार्तिक वह लेटर लेकर अपने केबिन में चला जाता है, जो उसे प्रमोशन के बाद मिला है। बधाई देने वालों में ऋषभ भी था। उससे मिलते समय कार्तिक काफी खुश नजर आ रहा था। अब वह अपने केबिन में बैठकर अपने आप में ही मुस्कुरा रहा था। तभी उसे याद आता है कि दो दिन पहले ही ऑफिस में यह प्रमोशन ऋषभ को मिलने की बात चल रही थी। फिर अचानक उसे ये प्रमोशन कैसे मिल गया? वह सोच ही रहा था तभी उसे रात के सपने की बात याद आ गई और उसने उस साये के कहने पर ऋषभ से ही अपनी किस्मत बदलने के बारे में सोचा था। कार्तिक अब सोचने लगता है कि क्या सच में उसकी किस्मत बदल गई है? क्या ऋषभ की किस्मत अब उसकी हो गई है, क्योंकि यह प्रमोशन हर हाल में ऋषभ को ही मिलना था पर अचानक ही उसे मिल गया। वह यह सोच ही रहा था और उसने तय किया कि इस बारे में एक बार अपने बॉस से बात करना चाहिए। यह सोचते हुए वह अपने बॉस के केबिन में पहुंच जाता है।
कार्तिक- बॉस, क्या मैं अंदर आ सकता हूं?
बॉस- अरे हां कार्तिक। बताओ कैसे आना हुआ? आज तो तुम्हें भी केबिन मिल गया है। कोई खास बात है क्या?
कार्तिक- जी, खास ही मान लीजिए बॉस।
बॉस- अच्छा बोलो क्या खास बात है?
कार्तिक- बॉस मेरे मन में एक प्रश्न है और मैं चाहता हूं कि आप उसका एक दम सही जवाब दे।
बॉस- हां, हां कार्तिक। बताओ क्या प्रश्न है?
कार्तिक- बॉस दो दिन पहले तक मुझे जो प्रमोशन मिला है वह ऋषभ को मिलने वाला था, फिर अचानक उसका नाम हटाकर मेरा नाम कैसे आ गया?
बॉस- ये तो मुझे भी नहीं पता कार्तिक। पर कल रात को मैं प्रमोशन के बारे में सोच रहा था, तभी मुझे तुम्हारा ख्याल आया। जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि तुमसे कई गलतियां हुई है, पर तुम्हें प्रमोशन तो मिलना ही चाहिए था। बस फिर क्या रात को ही मैंने तय कर लिया था। और आज सुबह जब ऑफिस आया तो ऋषभ के नाम जगह तुम्हारा नाम लिख दिया।
बॉस की बात सुनकर कार्तिक फिर से अपने केबिन में चला जाता है। उसके दिमाग में अब भी यही प्रश्न चल रहा था कि रात को जो हुआ वह सपना था या सच है? क्या सच में उसकी किस्मत ऋषभ से बदल गई है? क्योंकि उसे जो प्रमोशन मिला है उसमें उसका नाम कभी भी नहीं था, परंतु अचानक ही उसे प्रमोशन मिल गया। जबकि ऑफिस के हिसाब से भी यह प्रमोशन सिर्फ ऋषभ को ही मिलना था, जो अब उसे मिल चुका है। तो क्या सच में अब ऋषभ की किस्मत उसकी किस्मत हो चुकी है? ऑफिस टाइम खत्म होने तक कार्तिक यही सोच रहा था। उसके बाद वह अपने घर की ओर चल देता है। घर पहुंचने के बाद आज उसे घर का माहौल भी बदला हुआ नजर आता है। उसकी पत्नी भी उससे बड़े प्यार से बात कर रही है। उसका बेटा भी काफी शांत नजर आ रहा था। आज उसे घर में किसी प्रकार के झगड़े या कलह के बारे में भी कोई बात सुनने को नहीं मिली थी। उसने साक्षी को अपने प्रमोशन की बात बताई तो वो भी काफी खुश नजर आ रही थी। अब उसे यकीन होने लगा था कि रात को जो हुआ वह सपना नहीं था, बल्कि सच था। उसकी किस्मत सच में ऋषभ से बदल गई है। अब वह भी काफी खुश हो रहा था। पूरा परिवार खाना खाने के बाद सैर करने के लिए गया और फिर देर से लौटकर आए और उसके बाद सभी सोने की तैयारी करने लग गए। रात को एक बार फिर कार्तिक अचानक उठकर बैठ जाता है। उसे लगता है कि उसका नाम पुकार रहा है, वह आसपास देखता है तो उसे कोई नजर नहीं आता है। कुछ ही देर में उसके कमरे में धुंध छा जाती है और उस धुंध से फिर से वहीं साया उसके पास आ जाता है। कार्तिक इस बार सामान्य ही रहता है।
साया- तो कार्तिक अब तो यकीन हो गया ना मेरी बात का कि मैं तुम्हारी किस्मत बदल सकता हूं?
कार्तिक- हां, लग तो रहा है कि किस्मत ने कुछ बदला है।
साया- अभी तो आगे देखो तुम्हें और भी बहुत कुछ मिलने वाला है।
कार्तिक- और क्या मिल सकता है?
साया- वैसे, तुमने एक काम बहुत समझदारी का किया है।
कार्तिक- कौन सा काम?
साया- यही कि तुमने अपनी किस्मत बदलने के लिए ऋषभ का चुना। उसकी किस्मत वाकई काफी अच्छी है। अब देखो तुमने कल सौदा किया और आज तुम्हारा प्रमोशन भी हो गया और सैलरी भी बढ़ गई।
कार्तिक- हां, ये बात तो सच है। पर, तुम ये सब बात कैसे जानते हो?
साया- कार्तिक बच्चों वाले सवाल क्यों कर रहे हो? जब मैं तुम्हारी किस्मत बदल सकता हूं, तो क्या मुझे ये पता नहीं होगा कि क्या हुआ है और क्या होगा?
कार्तिक- अब क्या होगा? मुझे कुछ बताओ। आगे मेरी किस्मत में और क्या-क्या है?
साया- हंसते हुए तुम्हारी किस्मत?
कार्तिक- ओह मेरा मतलब है कि ऋषभ की किस्मत। वैसे सौदा करने के बाद तो वह किस्मत मेरी ही है ना?
साया- हां ये बात भी है कि अब वो किस्मत तुम्हारी है।
कार्तिक- तो फिर बताओ आगे क्या होगा?
साया- नहीं, मैं नहीं बता सकता। क्योंकि मैं ऐसा नहीं कर सकता। मुझे ऐसा करने की इजाजत भी नहीं है। जो भी होगा वह सब तुम्हारे सामने आ ही जाएगा।
कार्तिक- ठीक है फिर। वैसे अब तुम यहां क्यों आए। सौदे के हिसाब से कुछ लेने आए हो क्या?
साया- नहीं लेने तो नहीं आया हूं, पर तुम्हें यही याद दिलाने आया था कि वक्त आने पर मैं तुमसे कुछ भी मांग सकता हूं और वह तुम्हें देना होगा। मैंने अपना वादा निभाया है अब तुम्हारी बारी होगी अपना वादा निभाने की। या यूं कहूं कि सौदा पूरा करने की।
कार्तिक- हां, मुझे याद है।
साया- ठीक है तो फिर मिलेंगे कार्तिक। वैसे एक बात और अगर तुम्हें कभी मेरी जरूरत हो तो मुझे याद कर लेना मैं तुम्हारे पास आ जाउंगा। हो सकता है भविष्य में तुम्हें मेरी जरूरत पड़ जाए।
कार्तिक- हां, बिल्कुल।
इसके बाद साया एक बार फिर गायब हो जाता है और कार्तिक अचानक बिस्तर से उठकर बैठ जाता है। उसे फिर से लगता है कि उसने एक बार फिर कोई सपना ही देखा है। क्योंकि इस बाद भी कमरे में न तो कोई निशान था और न ही कोई धुंध थी। हालांकि कार्तिक अपनी किस्मत को बदलकर काफी खुश भी था। वह एक बार फिर सो जाता है। सुबह उठकर फिर से वह अपने ऑफिस के लिए निकल पड़ता है।








Behtrin
ReplyDeleteBehtrin
ReplyDeleteShandaar...keep it up
ReplyDelete