बेताल The Silent Killer पांचवा भाग



कुछ देर तक सोचने के बाद भौमिक घर के बाहर निकल जाता है और बाबा को देखने लगता है। इस बार बाबा उसे नजर नहीं आता है। भौमिक सोचता है कि शायद बाबा उस पर नजर रख रहा था अब चला गया। जब उसे बाबा नजर नहीं आता है तो वह वापस अपने घर आ जाता है। भौमिक जैसे ही अपने रूम में आता है वह यह देखकर चौंक जाता है कि बाबा उसके रूम में बैठा हुआ था। 

भौमिक- तुम, तुम यहां कैसे आ गए? 

बाबा- मैं कहीं भी आ-जा सकता हूं भौमिक। 

भौमिक- तुम मेरा पीछा कर रहे हो? 

बाबा- नहीं मैं तुम्हें कुछ बताने की कोशिश कर रहा हूं। जो मैं बताना चाह रहा हूं, उसे तुम मानना नहीं चाहते हो। 

भौमिक- होता होगा तंत्र-मंत्र। पर मैं नहीं मानता। 

बाबा- तुम नहीं मानते पर होता है। होता है इसलिए वो भी मानता है और वो ऐसा कर रहा है। 

भौमिक- कौन? 

बाबा- तुम्हारा गुनाहगार। वो कातिल। 

भौमिक- उन कत्लों का तंत्र-मंत्र से कोई लेना देना नहीं है। यही मैंने तुम्हें ऑफिस में भी कहा था। 

बाबा- ठीक है तुम्हें उन कत्लों की जांच जैसे करना है वैसे करो। पर एक बार जो मैंने कहा है उस पर भी ध्यान देना। क्योंकि यदि उसे शक्ति मिल गई तो बहुत बुरा होगा। इन कत्लों के सिलसिले को रोकना चाहते हो तो इस पते पर एक बार जरूर जाना। बाबा एक पर्ची टेबल पर रख देता है 


इसके बाद बाबा वहां से चला जाता है। भौमिक उस पर्ची को कुछ देर देखता है और फिर घड़ी में टाइम देखकर उस पर्ची पर लिखे पते को बिना पढ़े ही सो जाता है। अगले दिन सुबह वह फिर उठता है और तैयार होकर ऑफिस पहुंच जाता है। पूरा दिन ऑफिस में रहने के बाद भी वह केस के संबंध में कोई सुराग नहीं जुटा पाया था। उसे कातिल के संबंध में कोई सुराग हाथ नहीं लग रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर करें तो क्या करें। कातिल को रोकना बहुत जरूरी था। इसी बीच एक और कत्ल की होने की खबर उसके पास आ जाती है। यह लगातार 7वां कत्ल था। पहले हुए कत्ल की तरह ही यह कत्ल हुआ था जिसका मतलब साफ था कि यहां भी कातिल वहीं है। आखिरकार रात को भौमिक फिर से अपने घर पहुंच जाता है। जब वह अपने रूम में पहुंचता है तो उसकी नजर टेबल पर रखी उस पर्ची पर पड़ती है, वह उस पर्ची को उठाता है, उस पर शहर से दूर एक वारान जगह का पता लिखा होता है। भौमिक कुछ देर सोचता है और फिर वह उस जगह पर जाने का फैसला करता है। 

करीब दो घंटे तक कार चलाने के बाद भौमिक उस जगह पहुंच जाता है। वह काफी सुनसान जगह थी और रात होने के कारण वहां कुछ नजर भी नहीं आ रहा था। जंगल का रास्ता होने के कारण वह कुछ सर्तक होकर भी चल रहा था। वह जंगल की ओर बढ़ता जाता है। कुछ दूर उसे एक टूटा-फूटा सा घर नजर आता है। वह उसकी ओर बढ़ने लगता है। इस बार उसने अपने हाथ में अपनी पिस्टल भी निकाल ली थी। वह धीरे-धीरे घर की ओर बढ़ता है। पहले वह घर के आसपास नजर दौड़ाता है, वहां उसे कोई नजर नहीं आता है। फिर वह एक टूटू शीशे से घर के अंदर झांकने की कोशिश करता है। वहां भी उसे कोई नजर नहीं आता है। तभी उसे घर के साइड के हिस्से मेंए क कुआं नजर आता है। वह कुएं की ओर बढ़ता है। जैसे ही वह कुएं की ओर बढ़ता है कुछ बदबू उसे परेशान करने लगती है। रात होने के कारण उसे कुएं में कुछ दिखाई नहीं देता है। तभी उसे घर से कुछ आवाज सुनाई देती है। वह फिर से उस घर की ओर बढ़ जाता है। धीरे-धीरे वह घर में दाखिल भी हो जाता है, परंतु उसे वहां कोई नजर नहीं आता है। इसके बाद वह काफी देर तक घर में और घर के आसपास तलाशी लेता है। इस बार भी उसे वहां कुछ नहीं मिलता है तो वह अपनी कार में आकर बैठ जाता है और फिर थकान के कारण उसकी नींद लग जाती है। सुबह जब उसकी नींद खुलती है तो वह एकदम से चौक जाता है, क्योंकि उसकी कार के शीशे पर किसी ने उल्टा स्वास्तिक बनाया हुआ था। वह कार से बाहर निकलकर इधर-उधर देखता है तो सामने एक पेड़ पर उसे एक पुतला उल्टा लटका नजर आता है। वह समझ जाता है कि यहां कुछ गड़बड़ है और वह तुरंत ही परमार को कुछ लोगों के साथ आने के लिए फोन कर देता है। कुछ ही देर में परमार भी वहां कुछ सिपाहियों के साथ आ जाता है। फिर वे सभी उस पुतले की ओर जाते हैं। वहां जाकर देखते हैं तो वहां तंत्र-मंत्र का पूरा सामान बिखरा पड़ा था। पुतले पर खून, बाल और कुछ कपड़ों के टूकड़ों को लगाया गया था। इसके बाद वे सभी वहां से सारे चीजे उठा लेते हैं। कुछ ही देर में फॉरेंसिक टीम भी वहां आ जाती है और अपने काम पर लग जाती है। भौमिक और परमार वहां से निकल जाते हैं। भौमिक पहले अपने घर जाता है और वहां से तैयार होकर फिर से ऑफिस आता है। इस दौरान परमार उन चीजों की जांच करता है। ऑफिस पहुंचते ही भौमिक परमार से उन चीजों के बारे में पूछता है। 



भौमिक- परमार क्या पता चला इन चीजों से। 

परमार- सर अब तक तो यही कि ये सभी चीजे किसी ने तंत्र-मंत्र के लिए ही उपयोग की है। ये जो भी चीजें है वो प्रयोग भी इसी विद्या में होती है। 

भौमिक- ओके और? 

परमार- सबसे खास बात यह है सर कि उस पुतले पर जो बाल लगे हुए थे, वो सभी उन्हीं लड़कियों है जिनका कत्ल हुआ था। 

भौमिक- और उन कपड़ों का क्या राज है परमार? 

परमार- सर अभी कुछ कनफर्म तो नहीं कहा जा सकता, पर अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये कपड़े भी उन्हीं लड़कियों से जुड़े हो सकते हैं। 

भौमिक- परमार तो क्या वो बाबा सच कह रहा था? 

परमार- सर अगर इन सभी सबूतों को ध्यान में रखे तो उस बाबा की बातों में कुछ सच्चाई तो है। पर सर एक बात समझ नहीं आई कि आप उस जगह पर कैसे पहुंच गए? 

भौमिक- मुझे उस जगह के बारे में उस बाबा ने ही बताया था। 

परमार- बाबा ने? पर कब सर? उसने यहां तो कुछ भी नहीं बताया था, तब तो मैं भी यहीं था। 

भौमिक- यहां नहीं परमार, मेरे घर पर। 

परमार- आपके घर? 


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इसके बाद भौमिक परमार को उस दिन से लेकर आज सुबह तक की सारी बात बताता है। अब भौमिक इस बात को मानने लगा था कि शहर में हो रहे कत्ल का इस तंत्र-मंत्र से कोई संबंध में जरूर है। इसके साथ उसे यह भी समझ आ गया था कि रात को उस घर से जो आवाज आई थी, तब वहां कोई था जरूर, पर उसे नजर नहीं आया था। उसकी नींद लगने के बाद उस शख्स ने ही उसकी कार के शीशे पर उल्टा स्वास्तिक बनाया होगा। इसके साथ ही भौमिक यह भी सोच रहा था कि वो जो कोई भी था उसने वहां से ये सारे सबूत क्यों नहीं हटाए। तभी उसे उस कुएं के बारे में याद आता है और वह परमार को लेकर फिर से उसी जगह पहुंच जाता है। उस कुएं में भौमिक को कुछ बच्चों के नरकंकाल मिलते हैं। अब वह उन नरकंकाल के बारे में पता लगाना चाहता है। हालांकि भौमिक को यह समझ नहीं आ रहा था कि एक ओर तो लड़कियों के कत्ल हो रहे हैं और एक ओर बच्चों के नरकंकाल मिले हैं, इनका आपस में क्या संबंध हो सकता है। उसे एक बार फिर उस बाबा की याद आती है, जो उसे इस बारे में कुछ बता सके। उसे अब इस बात का भी अफसोस हो रहा था कि उसने बाबा से उसका नाम, पता क्यों नहीं पूछा? अगर उसके पास उस बाबा को नाम, पता होता तो वह उससे दोबारा संपर्क कर सकता था। 


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