ये नादांनियां, ये गुस्ताखियां 

शायद हमसे ही सीखे थे इश्क ए जहान की ये नादांनियां, 
पर हमने तो नहीं सिखाई थी मोहब्बत में ये गुस्ताखियां।
क्यों दो दिलों में बन गई है बेवजह की गलतफहमियां, 
जो पास थे, क्यों बन गई है दूरियां आज उनके दरमियां।।

हमने सिखाया निभाया जाता मोहब्बत को मोहब्बत से, 
हमने बताया मोहब्बत मिलती है मोहब्बत को मोहब्बत से।
गर निभाओगे तो निभ भी जाएगी मोहब्बत मोहब्बत से, 
हम साथ हुए तो कट जाएगी जिंदगी भी मोहब्बत से ।।

तुम, मैं, दिल, प्यार कहने को तो बस ये अल्फाज हैं, 
इन सबसे बने हम, यहीं एक तो मोहब्बत की पहचान है।
हमने तो सिखाया था दिल के लिए तु ही एक जहान है, 
तेरी खामोशियों अब भी उठता दिल में कोई तूफान है।।

मोहब्बत के जहान में हमने तुम्हें मोहब्बत ही सिखाई थी, 
बदल दस्तुर जहां का इसमें तिजारत कहां ले आई थी।
मोहब्बत की दुनियां साथ हमने मोहब्बत से ही बनाई थी, 
रोशन जहान ए इश्क पर कैसी ये फरेब की परछाई थी।।


मैंने तो नहीं सिखाई थी कभी मोहब्बत निभाने शर्तों की बातें, 
मैंने तो नहीं सिखाया था किसी का दिल तोड़कर यूं ही चले जाना।
न ही मैंने सिखाया था कभी तुम्हें अपने को पल में पराया बनाना,
दिल तोड़ना, झूठ बोलना, बेरूखी दिखाना और कोई बहाना बनाना।।

दिलों से खेलने का हुनर तो मुझे आज भी नहीं आता है, 
आंखों में अश्क लेकर मुस्कुराना भी नहीं आता है।
मोहब्बत में हर प्रेमी, हर दिल मासूम ही नजर आता है, 
पता नहीं कौन तुम्हें मोहब्बत में शातिर बना जाता है।।

बेमतलब की मोहब्बत में तुम कहां से मतलब ले आए हो, 
धड़कते दिल को कैसे तुम पत्थर में तब्दील कर आए हो।
हमसे दूर रहकर जी लोगे कैसे आंखों में ख्वाब लाए हो, 
मोहब्बत में बेवफाई की अदा कहां से सीखकर आए हो।।

कुछ हमसे सीखे हो, अब कुछ तुम खुद ही सीख चुके हो,
साथ हमारे अब तो तर्जुबा-ए-मोहब्बत तुम कर चुके हो।
जो हमसे सीखे हो कभी उसकी भी आजमाइश कर लेना,
गर फिर हो तुम्हें मोहब्बत तो किसी शर्त पर मत करना।।

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