मत कर जिक्र 

मत कर जिक्र ए जमाने वफाओं का, 
हमने बेवफाओं की बेवफाई से वफा देखी है।
चंद सिक्के क्या खनक उठे, 
हमने बदलते रिश्तों की सच्चाई देखी है।।

कैसे बदलता है वक्त धीरे-धीरे, 
ये अफसोस भी तुम ही कर लो साहेब। 
हमने तो एक पल में ही यहां पर, 
चेहरों से सैकड़ों नकाब उतरते देखे हैं।।
क्या सच, क्या शर्मिंदगी, क्या बेहयाई है, 
जिसकी जैसी सोच है, वैसी ही सीरत पाई है।
तुम ही तोल लो शब्दों को इमान के वजन से, 
हमने तो काला सच और सफेद झूठ भी देखे हैं।।

ना बात करो साथ की, ना करो विश्वास की, 
ना किस्सा हो दोस्ती का, ना किस्सा रिश्तों का।
तुम बना रखों इनमें वजूद अपना, 
हमने तो दोस्ती में भी किरदार बदलते देखे हैं।।
तुम कर लो एतबार किसी से प्यार कर, 
और बदल भी दो जहां, कुछ असर कर।
हम नहीं इश्क से खुद को बदलने वाले,
हमने भी देखे है मतलब से प्यार करने वाले।।

क्या रंग और क्या कायनात की बात हो, 
कौन अपना और किसका यहां साथ हो।
तुम महसूस कर लो हर मौसम का समां,
हमने तो बहारों में भी पत्ते गिरते देखे हैं।। 

चाहो तो मिटा लो हस्ती किसी के वास्ते, 
एक जिंदगी के लिए चाहे बना दो रास्ते।
जिक्र में बसा देना चाहे किसी के लिए फूलों के गुलिस्तां, 
हमने तो अपनों के हाथ में भी खंजर देखे हैं।।

अब समझ नहीं आता फर्क उजले और काले में, 
कत्ल भी हो जाते हैं अब दिन के उजाले में।
दिल के जज्बात और मुंह की जुबां अब तुम समझों, 
हमने तो उजले कपड़ों में भी मन के काले देखें हैं।।
जो चाहे लगा लो कीमत अपने किरदार की, 
चाहे आजमा लो हैसियत अपने ही खरीदार की।
गर कर सको करना अदा जरूरत इंसान की, 
वरना हमने जरूरत में बिकते कई जिस्म भी देखे हैं।।

दे सको तो देना खुशियां और मुस्कान किसी को, 
और देना वजह खिलखिलाने की किसी को।
कभी करना ख्याल किसी की एक मुस्कुराहट का,
वरना हमने एक हंसी के पीछे आंसूओं के सैलाब देखे हैं।। 

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