तुम भी तो महसूस करके देखो 

ये शायद उसकी बेरूखी का ही तो असर हो रहा है,
उसकी ही यादों से रोशन मेरा हर सवेरा हो रहा है।
कभी शाम होती है तो कभी रात भी घेरा जाती है,
मेरे चारों ओर यादों का घना कोहरा हो रहा है।।

जब कभी बैठता हूं तन्हा तो ये अक्सर मुझे घेर लेती है, 
लगता है ऐसे जैसे तेरी बाहें मुझे खुद में समेट रही है।
कभी तो गुनगुनी सी धूप, कभी मौसम सर्द हो रहा है,
तेरे ही प्यार का अब भी मुझ पर असर हो रहा है।।

जाने कितने ही रंगों की जुबानी, तेरी यादों की कहानी है, 
कभी तुफां, कभी सुकुन तो कभी तेरी मोहब्बत रूमानी है।
 मन करता है बन जाउं एक परिंदा और तुमसे मिल लूं, 
 तेरे दिल के पिंजरे में इसे हमेशा के लिए बंद कर लूं।।

 बन जाउं वो शाम जब तुम मेरे साथ हुआ करती थी, 
कभी बन जाउं वो रात, जब हमारी बातें हुआ करती थी।
अक्सर उस वक्त के थमने की मैं बस दुआ मांगता था, 
उस वक्त जब तेरी बाहों का मुझे सहारा मिला करता था।।

मैं बन जाउं फूल की डाली भी, जिसे देख तू ललचाती थी, 
तोड़ लाने का मुझे कहने के लिए जरा ना हिचकिचाती थी।
फिर चल दूं उस राह पर, जो मुझे तेरी ओर ले आती थी, 
तुम ही हो मेरी मंजिल, जो मुझे दूर से दिखला देती थी।।

तेरी ही यादों में मैं बस जाना और खो जाना चाहता हूं, 
कभी प्यार, कभी तकरार, कभी अश्क बन जाना चाहता हूं।
होगी कमियां मुझ में भी, पर भूल जा, ये इल्तजा है मेरी, 
फिर पकड़ ले हाथ मेरा, मैं तेरे साथ चलना चाहता हूं।।

बहुत खूब है यादें, तुम भी तो महसूस करके देखों, 
कभी जी कर देखों तो कभी यादों में खोकर देखों।
ये यादें ही तुम्हें भी बहुत कुछ याद दिला देगी, 
कुछ पल बैठों तन्हा और यादों को याद करके देखों।।

कैसे यादों के तुफां को तुमने अब तक रोका है, 
खुश हो तुम ये सोचना बस एक रंगीन धोखा है।
खो जाओं अपनी बातों में देखो कौन सा अक्स बनता है, 
फिर से बन जाओ मेरे अब भी तुमको किसने रोका है।।

तुम बन जाओ मेरी आवाज, मुझे फिर से गुनगुनाने दो,
सीने लगा लो मुझको, मुझको कुछ देर मुस्कुराने दो।
शब्दों की सहरी से फिर मुझको साज कोई बनाने दो, 
तुम बन जाओ गीत मेरे, कोई संगीत मुझे बनाने दो।।

या जी लो मेरी जिंदगी बस इतना ही काफी होगा,
जब मिलेगा ना सुकूं और दर्द भी नाकाफी होगा।
मैं तो जिंदा हूं यादों से, कैसे तुम इतना सोचोगी, 
बस हो जाओ थोड़ा तन्हा, तुम भी तेरी यादों में डूबोगी।।

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