लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 1
पहाड़ी रास्तों से होते हुए एक बस तेज गति से चली जा रही थी। बस में करीब 15-20 लोग सवार है। पहाड़ी रास्तों और उसके मोड़ पर भी बस की गति कम नहीं हो रही है। ऐसा नहीं है कि यह बस किसी पिकनिक के लिए जा रही है, पर बस से किसी प्रकार कोई आवाज भी नहीं आ रही है। पहाड़ी रास्तों को चीरने के बाद बस एक सुनसान जगह पर जाकर खड़ी हो जाती है, तभी एक तेज धमाके के साथ बस के परखच्चे उड़ जाते हैं। जिस तरह से धमाका हुआ है, उससे लगता नहीं है कि बस में सवार कोई भी व्यक्ति जिंदा बचा होगा। तेज धमाके के साथ ना जाने कितनी ही जिंदगी खत्म हो गई थी।
10 साल बाद...
गृह मंत्रालय में मुख्यमंत्री अनिल देशमुख, गृह मंत्री विश्वास मोहिते, कमिश्नर आनंद सुपात्रे और विदेश मंत्री निहारिका मूले की महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। मीटिंग हॉल के माहौल को देखकर ही समझा जा सकता है कि मीटिंग का मुद्दा बहुत गंभीर है।
मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- 10 साल हो गए हैं मिशन सोरम को बंद हुए, पर भी ये हमारे गले की हड्डी बना हुआ है। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि आखिर क्या उपाय किया जाए इसके लिए।
गृहमंत्री विश्वास मोहिते- मुझे लगता है कि इस पर हमें एक बार फिर से सोचना होगा। इसे ऐसे ही छोड़ देने से काम नहीं चलेगा। केंद्र से इतना प्रेशर है कि हम अपने ही राज्य में पराए हुए जा रहे हैं।
विदेश मंत्री निहारिका मूले - ऐसी कई मीटिंग हम कर चुके हैं, हर मीटिंग का नतीजा जीरो ही रहता है। समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। पुलिस का कोई प्रयास ही नजर नहीं आ रहा है। विश्वास जी आप तो बड़ी उम्मीदों और विश्वास के साथ आनंद जी को यहां लेकर आए थे, पर ये भी आपके विश्वास पर खरे नहीं उतरे हैं।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- पुलिस ने कोई काम नहीं किया, ऐसा नहीं है मेडम। मैंने और मेरी फोर्स ने हर संभव प्रयास कर लिया है, पर कोई सुराग ही नहीं मिल रहा है। हमें एक सुराग मिले तो हम आगे बढ़े।
मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- देखिए ये आपसी मतभेद का समय नहीं है। हमें इस समस्या के बारे में हर हाल में कोई हल निकालना ही होगा। इसलिए यहां मतभेद छोड़िए और मसले पर आकर उसका कोई समाधान बताइए।
गृहमंत्री विश्वास मोहिते- मोहिते साहब क्या हमारी फोर्स में ऐसा कोई काबिल ऑफिसर नहीं है, जो इस केस को सॉल्व कर सके?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- है सर बिल्कुल है। पर वो थोड़ा सा सनकी है। उसका कोई केस आज तक पेंडिंग नहीं है। वह अपने हर काम को इतने परफेक्ट तरीके से करता है कि पर किंतु की कोई गुंजाइश ही नहीं रहती है। उसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि वह अपने काम को करने के लिए कोई रूल फॉलो नहीं करता है। अपने काम को करने के लिए वो खुद अपने रूल्स बनाता है और उसी के आधार पर काम को खत्म करता है। उसका हर काम अंजाम तक पहुंचता है, इसलिए मैंने आज तक उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया है, हां वार्न जरूर करता रहता हूं।
मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- क्या आपको लगता है कि आपका यह ऑफिसर हमारे इस काम को भी निपटा सकता है?
विदेश मंत्री निहारिका मूले - जी, हां मोहिते जी, क्योंकि अब इस मसले में किंतु, परंतु की कोई गुंजाइश नहीं बची है। अब इस समस्या का रिजल्ट चाहिए ही।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- मैं उस पर आंख बंद करके यकीन कर सकता हूं, बस मुझे चिंता है तो उसके काम करने के तरीके से। वो अपनी टीम खुद चुनता है और खुद ही उसे हैंडल भी करता है।
मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- ठीक है आप उसे बुलाइए, मैं खुद उससे बात करूंगा। वैसे है कौन आपका ये ऑफिसर?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- मिहिर राजपूत। पिछले पांच सालों में ही उसने ऐसे-ऐसे काम कर दिए हैं, जिसे हमारे कई काबिल ऑफिसर्स पिछले कई सालों से पूरे नहीं कर पाए थे। दुनिया में उसका कोई नहीं है। इसलिए कभी डरता नहीं है। खुद पर इतना यकीन करता है कि हर मुश्किल उसे डरा नहीं पाती है। अपने तरीके से ही काम करता है, इस कारण हर काम में सफल होता है, क्योंकि इसे यह पता कि किसी भी काम को उसे किस तरीके से करना है।
गृहमंत्री विश्वास मोहिते- मोहिते जी हमें तारीफ नहीं मिशन सोरम का केतु चाहिए। हालांकि ये मिशन मिहिर के लिए बहुत मुश्किल होगा, क्योंकि मिशन सोरम को भी 10 साल हो चुके हैं और उस घटना को भी। केतु अब कहां होगा, क्या कर रहा होगा, किस हाल में होगा, जिंदा होगा भी या नहीं। कुछ नहीं पता और उससे भी बड़ी बात यह है कि 10 साल पहले वो दिखता कैसा था, हमें यह भी नहीं पता है।
विदेश मंत्री निहारिका मूले - हां, क्योंकि जो अधिकारी उस मिशन को पूरी तरह से हैंडल कर रहा था वह भी अब इस दुनियां में नहीं है। इसलिए उससे भी कोई जानकारी नहीं मिल सकती है कि आखिर केतु दिखता कैसा था ?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- मैं ये सारी बातें जानता हूं, इसलिए ही मैंने मिहिर का नाम लिया है। इन परिस्थितियों में बस एक वो ही है, जो इस काम को किसी भी हाल में अंजाम तक पहंचाकर रहेगा। वो या तो हमें केतु के मारे जाने की खबर देगा या फिर केतु को हमारे सामने जिंदा लाकर खड़ा कर देगा।
मुख्यमंत्री अनिल देशमुख- तो फिर ठीक है, आप उसे जल्दी से यहां बुलवाइए। हालांकि मैं दो दिनों के लिए दिल्ली जा रहा हूं, उसके बाद आप खुद उसे लेकर मेरे पास आ जाना। मैं खुद उससे बात करना चाहता हूं।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- जी, सर। मैं दो दिन बाद मिहिर को लेकर हाजिर हो जाउंगा।
इतना कहने के बाद कमिश्नर आनंद सुपात्रे वहां से चला जाता है और कुछ देर बात करने के बाद सीएम देशमुख, गृहमंत्री मोहिते और विदेश मंत्री निहारिका भी वहां से रवाना हो जाते हैं।
दूसरी ओर मिहिर ब्लैंक जींस और ब्लू शर्ट में घूटनों के बल बैठा हुआ है। उसे कुछ लोगों ने घेर रखा है और सभी के हाथों में हथियार है। एक व्यक्ति ने मिहिर की सिर के बीचो बीच पिस्टल लगा रखी है। वो कभी भी मिहिर पर गोली सकता है, पर मिहिर के चेहरे में कोई डर, कोई घबराहट नजर नहीं आ रही है। जिस व्यक्ति ने मिहिर के सिर पर पिस्टल तानी हुई है, उसका नाम बिलावल है और वह हथियारों का बहुत बड़ा डीलर है। वह कई देशों में अपराधियों को हथियार सप्लाई करता है। मिहिर करीब छह महीने से उसे पकड़ने के लिए कोशिश कर रहा था। मिहिर को यह पता चल गया था कि बिलावल भारत आने वाला है और यहां उसकी एक बहुत बड़ी डील होने वाली है। इस कारण आज मिहिर और बिलावल आमने-सामने हैं।
बिलावल- अगर तू यह समझ रहा है कि मिहिर कि सिर्फ तुझे पता था कि मैं भारत आने वाला हूं तो यह तेरी गलतफहमी है। तू छह महीने से मेरा पीछा कर रहा है यह मुझे पता है। यहां भी तू आया नहीं है, यहां तुझे आने दिया गया है। अब तू बता तू चाहता क्या है?
मिहिर- (नजर उठाकर उसे देखते हुए) बस तेरी मौत, इससे कम में परवडे़गा नहीं।
बिलावल- (जोर से हंसते हुए) तू मुझे मारना चाहता है। पर शायद तू भूल गया कि तू यहां बिना किसी हथियार के आया था और फिलहाल हम सभी के हाथों में हथियार है। बिलावल जब लोगों को हथियार दे सकता है, तो सोच कि बिलावल के पास कितने हथियार होंगे।
मिहिर- मैं दुश्मन के इलाके में बिना हथियार ही घुसता हूं और दुश्मन के ही हथियार से दुश्मन का खात्मा कर बाहर आ जाता हूं। और फिर तेरे पास हथियार की कोई कमी नहीं है, तो तू खुद तय कर ले तू अपने कौन से हथियार से मरना पसंद करेगा। तू मरेगा ये तो पक्का है।
बिलावल- (पिस्टल का जोर मिहिर के माथे पर बढ़ते हुए) सिर्फ एक सेंकड और तेरी खोपड़ी यहां खुल जाएगी। पर फिर भी तेरी बातें सुनकर मुझे हंसी आ रही है।
मिहिर- हंस ले बिलावल, जोर से और जितना चाहे उतना हंस ले, क्योंकि ये तेरी आखिरी हंसी है।
बिलावल- पिस्टल को लोड करता है और फिर से मिहिर पर तान देता है, तभी मिहिर के मोबाइल की रिंग बजती है। मिहिर कॉल उठाता है और कॉल था कमिश्नर आनंद सुपात्रे का।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- कहां हो मिहिर?
मिहिर- एक मिशन पर हूं सर।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- कितनी देर लगेगी?
मिहिर- कुछ बहुत जरूरी है क्या सर?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- हां, बहुत जरूरी। अब बताओं कितनी देर लगेगी?
मिहिर- बहुत जरूरी है तो 30 मिनिट मान लीजिए सर। 30 मिनिट में यहां काम खत्म कर निकल जाउंगा।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- ठीक है, काम खत्म होते ही तुरंत मुझे मेरे ऑफिस में आकर मिलो।
मिहिर- ठीक है सर, आप 30 मिनिट की उल्टी गिनती शुरू कर दीजिए, मैं आ ही रहा हूं।
मिहिर फोन कट कर फिर से जेब में रखता है और एक बार नजर उठाकर बिलावल को देखता है। इसके बाद वहीं होता है, जिसके लिए मिहिर को जाना जाता है। करीब 15 मिनट में ही मिहिर बिलावल और उसकी गैंग का खात्मा कर देता है। फिर से जेब से फोन निकालकर हथियारों को जब्त करने के लिए कह देता है। इसके बाद वह बिलावल की बॉडी पर उसकी गन फैंकता है और कहता है कि तेरे हथियार तो अच्छे हैं, पर तुझे ही नहीं बचा सके। इसके बाद मिहिर वहां से सीधे कमिश्नर ऑफिस के लिए निकल जाता है। कुछ ही देर में मिहिर कमिश्नर के ऑफिस पहुंच जाता है।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- ये क्या हाल बना रखा है मिहिर ?
मिहिर- सर आपको बताया था ना कि एक मिशन पर हूं। आपने कहा जल्दी से मरे ऑफिस पहुंचो, तो आ गया। बताइए क्या काम है?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- हां, पर कम से कम हुलिया तो ठीक करके आते।
मिहिर- अब जाकर कर लूंगा सर। आप पहले काम बताएं।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- तुम्हें चीफ मिनिस्टर ने बुलाया है।
मिहिर- क्या चीफ मिनिस्टर ने? उन्हें मुझसे क्या काम आ गया?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- एक बहुत जरूरी काम है। और तुम्हारा नाम मैंने ही उन्हें बताया है, इसलिए वो तुमसे मिलना चाहते हैं।
मिहिर- ठीक है सर। कब मिलना है उनसे?
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- आज ही वो 2 दिन के लिए दिल्ली गए हैं, जैसे ही आएंगे मैं खुद तुम्हें उनके पास लेकर चलूंगा।
मिहिर- ठीक है सर।
कमिश्नर आनंद सुपात्रे- अभी घर जाओ और अपना हुलिया सुधारों। वैसे तुम ऐसे कौन से मिशन पर थे कि तुम्हारा ये हाल हो गया।
मिहिर- कुछ ही देर में आपको पूरी खबर मिल जाएगी सर। अब मैं चलता हूं।









Bahut khub
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