लापता- आखिर किसकी तलाश है... पार्ट 3


लापता- आखिर किसकी तलाश है... पहला पार्ट यहां पढ़े

कमिश्नर के घर से निकलकर मिहिर सीधे अपने घर पर आ जाता है। वह घर पर उस फाइल को बहुत बारिकी से पढ़ता है, जो फाइल उसे कमिश्नर ने दी थी। इस फाइल में केतु के गायब होने सेलेकर अब तक उसकी तलाश के लिए क्या किया गया और क्या मिला इसकी पूरी जानकारी थी। इस फाइल में उन लोगों के नाम भी शामिल थे, जो इससे पहले इस केस को देख चुके हैं। मिहिर काफी देर तक उस फाइल को पढ़ता है। फिर वह तय करता है कि केतु की तलाश के लिए वह अकेला ही निकलेगा। हालांकि केतु के साथ ही उसे यह भी पता करना था कि बस में विस्फोट किसने कराया था। क्योंकि सरकार का प्लान फेल हुआ और किसी और ने बस में विस्फोट कराया, इसका मतलब साफ है कि सरकार के अलावा कोई और भी है  या था, जो उन कमांडो के बारे में जानता था। या हो सकता है कि उसे मिशन सौरम के बारे में भी पूरी जानकारी हो। ऐसे में ये संभावना भी बनती है कि अगर उसे कमांडो और मिशन सौरम के बारे में जानकारी हो, उसने ही बस में विस्फोट कराया हो तो उसे उन देशों की खुफिया जानकारी भी हासिल कर ली हो, जिस देश वो कमांडो तैनात किए गए थे। यह भी संभव है कि केतु ने ही विस्फोट कराया हो और खुद विस्फोट से पहले बचकर भाग निकला हो। ऐसी कई संभावनाओं और आशंकाओं के बारे में मिहिर सोच रहा था। 

अगले दिन मिहिर मिशन केलिए तैयार था। हालांकि अब सोचना यह था कि मिशन की शुरूआत कहां से करना है। पहले वह केतु के बारे में जानकारी जुटाए या उस व्यक्ति के बारे में जिसने उस बस में विस्फोट कराया था। यदि मिहिर उस विस्फोट को कराने वाले व्यक्ति का पता लगाता है तो संभावना है कि उसे उस व्यक्ति से केतु के बारे में भी कोई जानकारी मिल जाए। पर सवाल यहां यह भी था कि यदि वह व्यक्ति केतु ही है तो फिर तो उसके दोनों मिशन एक साथ पूरे हो सकते हैं। यह भी हो सकता है कि केतु और विस्फोट करने वाला व्यक्ति अलग-अलग हो और केतु और वह दोनों आपस में मिले हो? केतु केमिल जाने से उस व्यक्ति के बारे में भी जानकारी मिल जाए? इसलिए मिहिर अब केतु को पहले तलाश करने का तय करता है। हालांकि उसके सामने अब एक सवाल और आकर खड़ा हो गया था कि आखि रवह केतु की तलाश कहां से शुरू करें क्योंकि उसके पास केतु के नाम के अलावा कुछ नहीं है। उसकी कोई सूरत भी उसके सामने नहीं है। काफी सोचने के बाद वह तय करता है कि जहां विस्फोट हुआ था मिशन की शुरूआत भी वहीं से करना चाहिए। यह सोचकर वह उस जगह के लिए निकल जाता है जहां 15 साल पहले उस बस में विस्फोट हु आ था। हालांकि उस जगह पर निकलने से पहले वह कमिश्नर आनंद सुपात्रे को फोन कर सूचना दे देता है।

लंबा सफर तय करने के बाद मिहिर आखिर उस जगह पर पहुंच जाता है जहां 15 साल पहले उस बस में विस्फोट हुआ था। हालांकि हादसे को 15 साल हो चुके थे तो अब वहां उस विस्फोट से जुड़ा कोई भी सुराग मिलने की उम्मीद लगभग न के बराबर थी। बस यही बात को सोचकर मिहिर उस जगह को एक बार देखता है और फिर से वहां से आगे निकल जाता है। कुछ दूर चलने के बाद वह सड़क से नीचे की ओर चला जाता है। वहां भी वो कुछ दूर चलता है, तब उसे एक आदमी दिखाई पड़ता है। वह उसके पास जाता है। 


लापता- आखिर किसकी तलाश है... दूसरा पार्ट यहां पढ़े 

मिहिर- आप यही रहते हैं क्या ? 

आदमी- जी हां, साहब और हमारा नाम बिसवा है। 

मिहिर- तो बिसवा तुम यहां कब से रह रहे हो? 

बिसवा- हम तो पैदा ही यही हुए है साहब। पर आप यह क्यों पूछ रहे हैं? रास्ता भटक गए हो क्या ?

मिहिर- अभी कैसे भटक सकता हूं रास्ता, अभी तो रास्ते पर चलना शुरू ही किया है। 

बिसवा- क्या मतलब साहब, हम कुछ समझे नहीं।

मिहिर- वो छोड़ो ये बताओ यहां कोई बस्ती या गांव है क्या? जहां तुम रहते हो? 

बिसवा- हां साहब, ये छोटी पहाड़ी के पीछे हमारा एक छोटा सा गांव है। 

मिहिर- कितने लोग रहते हैं वहां ? 

बिसवा- यही कोई 40-45 घर है साहब, ज्यादा लोग नहीं रहते हैं।

मिहिर- अच्छा ये बताओ आज से करीब 15 साल पहले यहां एक बस में धमाका हुआ था, उसके बारे में तुम्हें कुछ पता है ?

बिसवा- 15 साल पहले... हमें तो कुछ याद नहीं है साहब। और उस समय तो हम इस ओर आते भी नहीं थे। 

मिहिर- कोई ऐसा है जो मुझे उस धमाके के बारे में कुछ बता सके ?

बिसवा- पर साहब आप 15 साल पहले हुए धमाके के बारे में अब क्यों पूछ रहे हैं ?

मिहिर- अरे, जो पूछ रहा हूं वो बताओ। 

बिसवा- हमें कुछ नहीं पता साहब, जय राम जी की। 

मिहिर- अरे तुम तो गुस्सा हो गए। मैं तो ऐसे ही कह रहा था। बताओ कोई है ऐसा जो मुझे उस धमाके के बारे में बता सके ?

बिसवा- गुस्सा कहां साहब। हम कहां गुस्सा करेंगे। ढोर चराने वाले गुस्सा करके कर भी क्या लेंगे। 

मिहिर- हां तो फिर बताओ। 

बिसवा- हमारे गांव में एक जंबो काका है, शायद वो आपको कुछ बता दे। 

मिहिर- जंबो काका ?

बिसवा- हां साहब जंबो काका। 

मिहिर- पर ये कैसा नाम है। 

बिसवा- वो क्या है ना साहब एक तो वो बहुत बुढ़े हैं और बहुत लंबे भी है, इस कारण सब उन्हें जंबो काका ही कहते हैं। 

मिहिर- अच्छा तो फिर तुम्हारे गांव का रास्ता कौन सा है ?

बिसवा- ये सामने जो आप छोटी पहाड़ी देख रहे हैं ना साहब, इसके पास से एक पगडंडी गई है, बस उस पर सीधे चलते जाओ, हमारे गांव पहुंच जाओगे। 

मिहिर- कितनी दूर है तुम्हारा गांव ?

बिसवा- बस यही कोई 10 या 12 किलोमीटर। 

मिहिर- 10 या 12 किलोमीटर बस ?

बिसवा- हां, साहब, हम तो रोज जानवरों को लेकर आते हैं। 

मिहिर- ठीक है बिसवा। आपका बहुत बहुत धन्यवाद। 

बिसवा- अरे साहब धन्यवाद काहे का। हम कहां कुछ करे हैं? अच्छा हम भी चलते हैं, देखे हमारे जानवर कहां हैं ?

मिहिर- ठीक है बिसवा। 


मिहिर यहां से बिसवा केबताए रास्ते की ओर चल पड़ता है। पहाड़ी रास्ता होने के कारण वह पैदल उस रास्ते पर गया था इस कारण उसे रात हो जाती है। गांव में पहुंचने के बाद उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करें। इस कारण एक खाली जगह पर वह रूक जाता है और रात को वहीं सो जाता है। दिन भर के सफर के कारण उसे थकान हो चुकी थी, इस कारण वह जल्दी ही सो जाता है। अगले दिन वह सुबह उठता है और फिर अपने मिशन के लिए चल पड़ता है। गांव में वह कुछ लोगों से जंबो काका का पता पूछता है। पर कोई उसे ठीक नहीं बता पाता कि आखिर जंबो काका कहां मिलेंगे। फिर एक गांव का ही बंदा उसे कहता है कि छोटी पहाड़ी पर जाकर देख लो अगर गांव में नहीं है तो जंबो काका पहाड़ी पर ही बैठे होंगे। मिहिर फिर पहाड़ी पर चढ़ता है। पहाड़ी पर पहुंचने के बाद उसे दूर एक बुजुर्ग नजर आता है वह समझ जाता है कि हो न हो यही जंबो काका है। मिहिर उनके पास जाकर उन्हें आवाज देता है। करीब दो या तीन आवाज के बाद वह बुजुर्ग व्यक्ति उसे पलटकर देखता है। जंबो काका काफी बुढ़े हो चुके थे। फिर भी वे पहाड़ी पर चढ़ जाते थे, यह सोचकर मिहिर को कुछ आश्चर्य होता है। फिर वह उनसे बात करने की कोशिश करता है। वो कोई जवाब नहीं देते हैं। हालांकि गांव वालों ने बताया था कि जंबो काका हमेशा गुस्से में रहते हैं। किसी से ठीक से बात नहीं करते हैं। खासकर अंजान लोगों से तो बिल्कुल ही बात नहीं करते हैं। मिहिर भी बात करता ही रहता है।  

मिहिर- काका कैसे हो? 

जंबो काका- कौन है तू ? क्यों परेशान कर रहा है ?

मिहिर- काका मैं बहुत दूर से आया हूं। 

जंबो काका- तो ?

मिहिर- मुझे आपसे कुछ बात करना है। 

जंबो काका- मुझे कोई बात नहीं करना, तू जा यहां से। इतना कहकर वह एक छोटा सा पत्थर उठाकर मिहिर पर फेंक देते हैं। 

मिहिर- काका बहुत जरूरी बात करना है। 

इस अब बार जंबो काका मिहिर को घूरकर देखते हैं। 

मिहिर- हां, काका बहुत जरूरी बात है। इसलिए तो इतनी दूर से आया हूं। गांव में किसी ने बताया था कि बस आप ही मेरी मदद कर सकते हो। 

जंबो काका- क्या है ?

मिहिर- काका करीब 15 साल पहले आपके गांव के बाहर वाली सड़क पर एक बस में धमाका हुआ था। उसके बारे में आपको क्या पता है ?

मिहिर की बात को सुनकर जंबो काका एकदम से उसका चेहरा देखते हैं। फिर वह सोचने लगते हैं, पर वह बोलते कुछ नहीं है। मिहिर एक बार फिर उनके सामने अपना सवाल दोहराता है, पर इस बार भी काका कुछ नहीं बोलते हैं। मिहिर कई बा रवह सवाल करता है। 

जंबो काका- मुझे कुछ नहीं पता तू जा यहां से। 


मिहिर- नहीं काका। आपकी खामोशी ने मुझे बता दिया है कि आप कुछ तो जानते हो उस हादसे के बारे में। आप बता नहीं रहे हो। 

जंबो काका- नहीं मुझे कुछ नहीं पता। 

मिहिर- काका मैं बहुत दूर से आया हूं। उस हादसे के बारे में पता करना मेरे लिए बहुत जरूरी है। मैं तो आपके बेटे जैसा हूं आप मेरी मदद नहीं करोगे ?

मिहिर की इस बात को सुनकर कुछ देर के लिए चुप हो जाते हैं। फिर वह उठते हैं और वहां से चलना शुरू कर देते हैं। मिहिर भी उनके पीछे चल देता है। पहाड़ी की चोटी पर पहुंचकर जंबो काका उस सड़क की ओर देखने लगते हैं, जहां 15 साल वो हादसा हुआ था। काफी देर तक देखने के बाद बाबा मिहिर को देखते हैं। 

जंबो काका- हां, बहुत जोर का धमाका हुआ था। आग निकल रही थी। वैसी आग मैंने आज तक नहीं देखी। कोई नहीं बचा होगा उसमें। 

मिहिर- याद करो काका। शायद कोई बचा हो ?

जंबो काका- तुझे पता है कि उसमें कोई बचा था ?

मिहिर- ऐसा मुझे लगता है काका कि उस धमाके में कोई तो बचा था। 


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