सौदा 

पार्ट 2

साया- कार्तिक, कार्तिक नाम है ना तुम्हारा? 
कार्तिक- हां मैं ही कार्तिक हूं। तुम... तुम कौन हो? और यहां कैसे आ गए और ये सब क्या हो रहा है? 
साया- (हंसते हुए) ये मान लो कि मैं तुम्हारी किस्मत हूं। 
कार्तिक- किस्मत? मेरी किस्मत? ये सब क्या मजाक है? सच-सच बताओं कौन हो तुम और ये सब क्या हो रहा है? 
साया- अरे, तुम्हारी किस्मत तुम्हारे सामने हैं और तुम बस एक ही सवाल किए जा रहे हो? अगर तुम्हें अपनी किस्मत से बात नहीं करना है तो मैं चला जाता हूं। मैं तो ये सोचकर आया था कि कई दिनों से तुम काफी परेशान हो तो क्यों न तुम्हारी कुछ मदद कर दी जाए। 
कार्तिक- रूको, मेरी मदद? तुम मेरी मदद कैसे कर सकते हो? और यदि सच में मेरी मदद करना चाहते  हो तो अपना परिचय क्यों नहीं देते? ऐसे छिपे हुए क्यों हो तुम? 
साया- बताया तो, मैं तुम्हारी किस्मत हूं। और मैं सच में तुम्हारी मदद ही करना चाहता हूं। 
कार्तिक- अच्छा, बताओ तो मेरी इन सारी परेशानियों का समाधान कैसे होगा? 
साया- वो तो मुझे नहीं पता। 
कार्तिक- तुम तो कह रहे थे कि तुम मेरी मदद करने आए हो। 
साया- हां, मैं तुम्हारी मदद करने ही आया हूं। अगर तुम अपनी सारी परेशानियों से छुटकारा चाहते हो तो तुम्हें मेरे साथ एक सौदा करना होगा। 
कार्तिक- सौदा? कैसा सौदा। 
साया- तुम्हारी सारी परेशानी खत्म करने के बदले मुझे भी तो कुछ मिलना चाहिए। 
कार्तिक- हां, तो बताओ क्या चाहिए तुम्हें? 
साया- पहले ये बताओ क्या तुम मेरे साथ सौदा करने के लिए तैयार हो? 
कार्तिक- पहले मुझे ये बताओ कि मेरी परेशानियों को खत्म करने के बदले तुम्हें क्या चाहिए? 

साया- तुम सवाल मत करो, ये बताओ तुम मेरे साथ सौदा करना चाहते हो? अपनी सारी परेशानियों का अंत चाहते हो? 
कार्तिक- हां, मुझे मेरी सारी परेशानियों का अंत चाहिए। पर ये भी जानना चाहता हूं कि उसके बदले तुम्हें क्या चाहिए? 
साया- सौदा करना चाहते हो तो करो, नहीं तुम्हारे जैसे मेरे पास कई लोग है, और वो सौदा करने के लिए कोई सवाल भी नहीं करेंगे। 
कार्तिक कुछ देर सोचता है और फिर उस साये से सौदा करने के लिए तैयार हो जाता है। 
कार्तिक- ठीक है मैं सौदा करने के लिए तैयार हूं। 
कार्तिक की बात सुनकर साया उसकी ओर एक कागज फेंकता है। 
साया- अच्छी बात है। तुमने ठीक सोचा। इस कागज को उठाओ और इस पर अपने साइन कर दो। 
कार्तिक वह कागज उठाता है और देखता है तो वह खाली कागज था। उस पर कहीं कुछ भी नहीं लिखा था। 
कार्तिक- ये तो ब्लैंक पेपर है, इस पर मैं कैसे साइन कर सकता हूं। तुम ये भी नहीं बता रहे हो कि तुम्हें क्या चाहिए? 
साया- तुम्हारे पास सिर्फ दो ही ऑप्शन है, या तो अपनी परेशानियों के साथ जीओ, या फिर इस पेपर पर साइन करो और अपनी सारी परेशानियों का अंत कर दो। अगर तुम्हें मुझ पर यकीन नहीं है तो कागज मुझे दो, मैं किसी ओर से सौदा कर लूंगा। 
कार्तिक एक बार फिर सोच में पड़ जाता है। उसके दिमाग सभी परेशानियां एक साथ घूमने लगती है। उसे उसका वह सपना भी याद आता है। वह कई साल से परेशान है वह यह भी सोचता है और फिर काफी देर सोचने के बाद वह कागज पर साइन कर देता है।
कार्तिक- ठीक है मैं तुम पर यकीन करता हूं। ये लो मैंने कागज पर साइन कर दिए हैं। 
साया- बहुत अच्छे, मैं जानता था तुम साइन जरूर करोगे। अब उस कागज को एक बार पढ़ भी लो। 
कार्तिक- (झल्लाते हुए) क्या पढ़ूं तुमने उस पर कुछ लिखा ही कहां है? 
कार्तिक जैसे ही वो कागज दोबारा खोलता है तो उस पर काफी कुछ लिखा होता है।
कागज में लिखा होता है कि मैं कार्तिक अपने पूरे होश हवाश में अपनी जानकारी में बिना किसी दबाव और बिना किसी शर्त के अपनी किस्मत का सौदा कर रहा हूं। इस सौदे के बदले मिस्टर लक मुझसे जो भी और जब भी मांगेंगे मैं उन्हें देने के लिए बाध्य रहूंगा। हस्ताक्षर कार्तिक। 
कार्तिक यह सब लिखा देकर चौक जाता है कि दो मिनट पहले तो इस कागज पर कुछ नहीं लिखा था, उसके साइन करते ही यह सब कैसे लिखा हुआ है। इसके बाद वह साया उससे वह कागज मांगता है। 
साया- कार्तिक, मुझे लगता है तुमने वह कागज पढ़ लिया है और अब वो कागज मुझे दे दो। 

कार्तिक- हां, पर अब आपको मुझसे क्या चाहिए। और यह कागज पर सबकुछ अचानक कैसे लिखा गया? 
साया- कार्तिक तुम सवाल बहुत करते हो। किस्मत का सौदा करने जा रहे हो, तो अब किस्मत को ही आजमाओ। इतने सवाल करने से क्या मतलब निकलेगा? 
कार्तिक- पर आपने यह भी नहीं बताया कि अब आपको क्या चाहिए? 
साया- मुझे अभी कुछ नहीं चाहिए, जब मुझे जरूरत होगी, तब मैं तुमसे मांग लूंगा। 
कार्तिक- पर मेरी किस्मत का क्या? मेरी सारी परेशानियां कैसे खत्म होगी? 
साया- हां, पहली बार तुमने बिल्कुल सही सवाल किया है। अच्छा एक बात बताओ तुम्हें क्या लगता है कि तुम्हारे आस-पास के लोगों में सबसे अच्छी किस्मत किसकी है? 
कार्तिक- ऐसे तो कई लोग है, जिनकी किस्मत मेरी किस्मत कही ज्यादा अच्छी है। 
साया- तो फिर ठीक है, तुम किसी एक का नाम तय कर लो, जिसकी किस्मत सबसे अच्छी है, मैं तुम्हारी किस्मत उससे बदल दूंगा। 
कार्तिक- (जोर से हंसते हुए) क्या मजाक कर रहे हैं आप। ऐसे कोई किसी से अपनी किस्मत बदल सकता है क्या?
साया- हंसो मत कार्तिक यह सच है। 
कार्तिक- मैं नहीं मानता। 
साया- तो मत मानों। कल से जब तुम्हारी किस्मत बदल जाए तब मान लेना। पर एक बात का ध्यान रखना, सिर्फ एक आदमी का नाम तय करना, जिससे तुम अपनी किस्मत बदलना चाहते हो। 
इतना कहकर वह साया एक बार फिर धुंध में गायब हो जाता है। कार्तिक अचानक ही अपने बिस्तर पर उठकर बैठ जाता है। उसे लगता है कि उसने कोई सपना देखा है। वह उठता है और पानी पीकर आता है और फिर से एक बार सपने के बारे में सोचने लगता है। सोचते हुए उसे उस साए की बात याद आती है कि आसपास का कोई ऐसा व्यक्ति जिसकी किस्मत सबसे अच्छी हो। ऐसे में उसे सिर्फ एक ही नाम याद आता है और वह है ऋषभ का। जिसके बारे में वह कुछ दिन पहले ही सोच रहा था। अब वह सोच रहा था कि यह सच में हो सकता है कि किसी से अपनी किस्मत बदल ली जाए? फिर मन ही मन वह यह सोचता है कि नहीं ऐसा संभव नहीं है। फिर पता नहीं उसे क्या होता है और वह तय करता है कि एक बार सपने की बात को सच मानकर देखा जाए, सच भी हुआ तो उसका क्या नुकसान होगा। अच्छा है उसे सभी परेशानियों से मुक्ति मिल जाएगी। इतना सोचकर वह मन ही मन में ऋषभ का नाम तय कर लेता है, जिससे वह अपनी किस्मत बदलना चाहता है। ऐसा सोचकर वह फिर से सो जाता है। 
अगले दिन वह सोकर उठता है तो उसे कुछ बदलाव नजर तो नहीं आता है, परंतु वह सपने को याद करता रहता है। एक बार के लिए वह सोचता है कि वह साक्षी को रात के सपने के बारे में बताए, पर यह सोचकर वह चुप रह जाता है कि यदि वह सपने के बारे में किसी को भी बताएगा तो शायद वह उसका मजाक ही उड़ाएगा। इस कारण वह साक्षी को कुछ नहीं बताता और तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल पड़ता है। गाड़ी चलाते हुए भी वह सपने के बारे में ही सोच रहा था कि काश सपना सच हो जाए तो कितना अच्छा होगा। ऐसे ही कुछ ही देर में वह ऑफिस पहुंच जाता है। ऑफिस पहुंचते ही ऑफिस में उसके साथ काम करने वाले सभी लोग उसका तालियां बजाकर स्वागत करते हैं। कार्तिक यह सब देखकर चौंक जाता है। उसे कुछ समझ नहीं आता है कि ऑफिस के सभी लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं? वह कुछ बोलता उसके पहले ही उसका बॉस उसके पास आता है और उसके हाथ में एक लेटर देता है। कार्तिक हाथ में लेटर लेता है। 

कार्तिक- यह क्या है बॉस?
बॉस - खुद ही खोलकर देख लो। 
कार्तिक- ये सब क्या हो रहा है, मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है बॉस? 
बॉस - तुम्हारे हर सवाल का जवाब इस लिफाफे में है कार्तिक। इसे खोलो और अपने हर सवाल का जवाब तुम्हें मिल जाएगा। 
कार्तिक उस लिफाफे को खोलता है तो उसमें उसका प्रमोशन लेटर था। प्रमोशन के साथ ही उसकी सैलरी भी बढ़ा दी गई थी। कार्तिक को अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसका प्रमोशन हो गया है और उसकी सैलरी भी बढ़ गई है। 
कार्तिक- बॉस, ये प्रमोशन लेटर? 
बॉस- हां कार्तिक, मैंने काफी सोचकर यह फैसला लिया है। तुम लंबे समय से इस ऑफिस में काम कर रहे हो, परंतु आज तक तुम्हें प्रमोशन नहीं मिला था। हां, तुमसे कुछ गलतियां होती है, पर वो तो सभी करते हैं। कुछ की गलतियां उजागर हो जाती है और कुछ की दब जाती है। तुम्हारी उजागर हो जाती थी। पर इसका मतलब यह नहीं है कि तुम प्रमोशन के हकदार नहीं हो। सो विश यू गुड लक, एण्ड कीप गोइंग। 
कार्तिक- थैक्यू वैरी मच सर। आपने मुझ पर यकीन किया। 

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