एक दिन अचानक 
पार्ट 4

राणा से मुलाकात कर अनवर वापस आ जाता है। राणा के साथ मिलकर दिलावर और पंडित को एक साथ खत्म करने की योजना पर काम शुरू करता है। अनवर की योजना के अनुसार अनवर पंडित की बहन और राणा दिलावर के बेटे का अपहरण कर लेता है। अनवर और राणा मिलकर पंडित और दिलावर को एक ही समय और एक ही जगह पर बुलाते है, ताकि दोनों मिलकर उन दोनों का खात्मा कर दें। राणा दिलावर के बेटे का और अनवर पंडित की बहन का अपहरण कर लेता है। अपनों के अपहरण की खबर सुनते ही दोनों आग बबूला हो जाते हैं और अपनों को लाने के लिए अनवर और राणा के बताए ठिकाने पर पहुंचने के लिए निकल पड़ते हैं। दोनों ही ठीक समय पर बताए गए स्थान पर पहुंचते हैं और जैसे ही वे लोग वहां पहुंचते हैं उन पर अनवर और राणा के आदमी हमला कर देते हैं। पंडित और दिलावर इस हमले से खुद को बचाने का प्रयास करते हैं। इस हमले के दौरान ही पंडित के लोग भी वहां पहुंच जाते हैं और एक बार फिर उनके बीच गैंगवार शुरू हो जाती है। इस गैंगवार में राणा मारा जाता है और अचानक हुए हमले के कारण अनवर को वहां से भागना पड़ता है। 

सबकुछ शांत होने के बाद दिलावर पंडित से पूछता है कि तुम्हारे आदमी यहां अचानक कैसे आ गए। तो पंडित उसे बताता है कि ये लोग अचानक नहीं आए हैं, ये लोग पहले से ही यहां थे। बस मौके का इंतजार कर रहे थे। करीब पांच दिन पहले ही मुझे अनवर की इस पूरी साजिश के बारे में पता चल गया था। तब दिलावर कहता है कि अच्छा तो इसलिए ही तुमने यहां आते समय रास्ते में मुझे हथियार दिया था। पंडित कहता हां, बिल्कुल क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि तुम इस तरह से साजिश का शिकार हो जाए और तुम्हारे बच्चे को भी कोई नुकसान पहुंचे। इस पर दिलावर पूछता है कि तुम्हें पांच दिन पहले ही इस साजिश का पता चल गया था, तो तुमने बच्चों को बचाया क्यों नही। पंडित कहता बचा तो लिया, यदि मैं उस समय ही कुछ करता तो शायद आज राणा ऐसे नहीं पड़ा होता। हालांकि मैं चाहता था कि राणा की जगह यहां अनवर होता, पर वो बचकर भाग निकला। राणा एक बार फिर उससे पूछता है कि तुम्हें साजिश का पता कैसे चला। तब पंडित कहता है कि ये तो तुम्हें पता ही है कि अनवर ने मेरे घर पर हमला कराया था। हालांकि उसमें कोई ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। मैं जानता था कि अनवर एक बार फिर मुझ पर हमला करेगा। इसलिए मैंने अपने कुछ आदमी अनवर के आदमियों के पीछे लगा दिए थे। इस दौरान उसका एक आदमी मेरे हत्थे लग गया और फिर उससे पूरी कहानी उगलवाना मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं थी। वो हमें एक साथ लाकर हमें मारने का प्लान बना रहे थे, तो मैंने भी उन दोनों को एक साथ मारने की योजना बना ली थी। अफसोस कायर अनवर भाग निकला, वरना आज वो भी मेरे हाथों मारा जाता। दिलावर उसके बच्चों को बचाने के लिए पंडित शुक्रिया कहता है और फिर दोनों वहां से बच्चों को लेकर निकल जाते हैं। 
दूसरी ओर अनवर अपनी योजना के फेल हो जाने से परेशान हो गया था। अब इसे यह भी डर था कि दिलावर और पंडित अब साथ मिलकर उसके खिलाफ जंग लड़ेंगे, जो उसके लिए ठीक नहीं है। फिलहाल वह छिपकर रहना चाहता था, परंतु इस गांव में उसके लिए ऐसी कोई जगह नहीं थी। वह सोच नहीं पा रहा था, कि अब उसे क्या करना चाहिए। वहीं हमले के बाद उसके कुछ आदमी भी अब तक वापस नहीं आए थे। वह ये तो समझ चुका था कि अब उसका बच निकल पाना मुश्किल हैं इसलिए उसने एक बार फिर से सोचना शुरू किया। इस बार फिर उसने कुछ सोचा और उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान तैरने लग गई थी।  

इस मुस्कान का मतलब यह था कि एक बार फिर अनवर ने पंडित और दिलावर को मारने के लिए कोई साजिश रची है, उसे उसके कामयाब होने का यकीन भी है, इस कारण ही उसके चेहरे पर यह कुटिल मुस्कान आई थी। दूसरी ओर राणा की मौत के बाद उसकी गैंग लगभग बिखर गई थी। सभी अनवर के पास थे। अनवर ने भी उन्हें अपनी गैंग में शामिल कर लिया था। इससे उसकी ताकत और भी अधिक बढ़ गई थी। वहीं इस गैंगवार और राणा की मौत से पूरे गांव में दहशत का माहौल बना हुआ था। हर कोई डर कर जी रहा था और आपस में बातें कर रहे थे कि अब क्या होगा। क्योंकि इस बार जो हुआ है, वो इससे पहले कभी नहीं हुआ था। इस बार अनवार और राणा ने सीधे तौर पर पंडित और दिलावर के घर पर हमला किया है। इससे ये दोनों भी चुप नहीं बैठने वाले थे। वहीं राणा की मौत के बाद अनवर और भी ज्यादा खतरनाक हो जाएगा, क्योंकि अब उसे दिलावर और पंडित दोनों का एक साथ सामना करना था। ऐसे में वह मौके की तलाश में था कि दोनों में किसी को भी जल्द से जल्द वह अपने रास्ते से हटा सके। किस्मत भी शायद अनवर के साथ ही चल रही थी। एक रात पंडित पास के ही एक गांव में शादी से वापस घर लौट रहा था। उसके साथ उसका पूरा परिवार भी था। लौटते समय ही अचानक ही उसकी गाड़ी खराब हो गई और उसके साथी दूसरी गाड़ी में थे वो लोग आगे निकल गए। उन्हें पता ही नहीं चला कि पंडित की गाड़ी खराब होने के कारण वहां रूक गई है। अनवर का एक आदमी लगातार पंडित पर नजर रखे था, उसने यहां सूचना तत्काल ही अनवर को दी और अनवर भी पंडित के खात्मे का सोचकर हथियारों और कुछ आदमियों के साथ वहां पहुंच जाता है। पंडित अनवर को देखकर कुछ समझ पाता उससे पहले ही अनवर और उसके आदमी पंडित की कार पर गोलियों की बौछार कर देते हैं। पंडित साथ उसका पूरा परिवार भी वहीं मारा जाता है। 


इतनी ही देर में पंडित के आदमी वापस आते नजर आते हैं, तब तक अनवर वहां से भाग निकलता है। पंडित के साथी कुछ नहीं कर पाते हैं। अगले दिन सुबह तक यह खबर पूरे गांव में फैल गई थी। पूरे गांव में एक पंडित ही था, जो इस गैंगवार को खत्म कर गांव में शांति लाना चाहता था। पंडित की मौत हो जाने से गांव वालों की यह उम्मीद भी खत्म होती नजर आ रही थी। गांव वालों को यह पता था कि अब अनवर के हौंसले और भी बढ़ जाएंगे और दिलावर से उसकी जंग अब खुलकर होने वाली है। इधर पंडित के घर पर मातम था। उसके साथी अब पंडित की मौत का हर हाल में बदला लेना चाहते थे। उन्होंने पंडित की मौत के बाद कुछ दिन इंतजार किया और फिर अनवर की तलाश में जुट गए। उनकी मदद अब दिलावर कर रहा था। हालांकि दिलावर पंडित की तरह गांव में शांति के लिए नहीं लड़ रहा था, परंतु बच्चों के अपहरण के मामले में पंडित ने उसका साथ दिया था, इस कारण वह अपनी ओर से पंडित के साथियों को हर मदद भी दे रहा था।
क्रमशः

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