मरीचिका : कहानी जो कर देगी आपको सोचने पर मजबूर : पार्ट 4
पारूल श्लोक की बातों को समझने का प्रयास करती है और समय अधिक हो जाने के कारण वहां से उठकर चली जाती है। अगले दिन फिर वह श्लोक सामने होती है। इस बार श्लोक अपनी ओर से बात की कोई शुरूआत नहीं करता है वह खिड़की के बाहर ही देखता रहता है। कुछ देर उस कमरे में खामोशी ही रहती है और पारूल उसे तोड़ते हुए कहती है कि मैंने कल रात को आपकी बातों के बारे में सोचा और काफी सोचा। आपकी कुछ बातें सही भी है और तर्क संगत भी है। हम इन बातों पर और भी बातें कर सकते हैं, पर मुझे आपकी खामोशी की वजह जानना है। आखिर ऐसी कौन सी बात है जो किसी इंसान को तीन सालों तक खामोश रख सकती है। तीन सालों में आप न जाने कितने ही लोगों से मिले हो, पर आपकी खामोशी हमेशा रही है। आखिर वो कौन सी बात है? पारूल की बातें सुनकर श्लोक पारूल के सामने रखी कुर्सी पर आकर बैठ जाता है। श्लोक पारूल से कहता है कि आपकी नजर में लोगों की अहमियत क्या है? पारूल कुछ चौंकने वाले अंदाज में लोग कौन से लोग। अरे, वहीं लोग जो हमेशा कुछ न कुछ कहते रहते हैं। श्लोक ने पारूल के सवाल का जवाब देते हुए कहा। हालांकि मैं उन लोगों को बहुत ज्यादा माइंड नहीं करती हूं, पर....। श्लोक ने इस बार पारूल को बीच में ही टोकते हुए कहा कि पर उनका डर तो रहता है। क्योंकि लोग क्या कहेंगे। है ना? जी हां, पारूल ने जवाब दिया। पर क्या आपको लगता है कि लोग क्या कहेंगे इसलिए हम अपनी आजादी खो दें, या हम जो चाहते वह न करें क्योंकि लोग क्या कहेंगे? हम जिस समाज में रहते हैं वहां यह सब देखना पड़ता है, पारूल ने कहा।
पारूल की इस बात पर श्लोक ने तुरंत कहा पड़ता है, मतलब आप चाहती नहीं है, पर एक डर है, जो यह सब आपसे करा रहा है? पारूल ने श्लोक की बात का जवाब देते हुए कहा कि अब आप इसे डर कहे या एक सामाजिक दायरा कहे, पर यह कहीं न कहीं है। क्या आप जानती है कि ये लोग कौन है? पारूल ने एक बार फिर कहा मतलब? मतलब यह पारूल जी की ये आपके आसपास के ही लोग है, जो आपको जानते हैं, पहचानते हैं। ये लोग रास्ते पर रिक्शा चलाने वाले, चाय बेचने वाले, आपके दोस्त या आपके खास रिश्तेदारों की शक्ल में आपके सामने आते हैं और कुछ कहकर आपका विश्वास हिला जाते हैं साथ ही आपके जीवन को भी प्रभावित कर देते हैं। आपके निर्णय को बदल देते हैं, आपसे आपकी आजादी तक छीनकर ले जाते हैं ये लोग। आप जैसे लोग लोग क्या कहेंगे सोचकर ही इन जैसे लोगों को बढ़ावा देते हैं और ये लोग न सिर्फ आपको बल्कि आप जैसे ही ना जाने कितने लोगों को प्रभावित करते हैं। ये वो लोग है, जिनके लिए और लोग भी बात करते हैं। आपको इनकी बातों का फर्क पड़ता है, परंतु इन्हें लोगों की बातों का फर्क नहीं पड़ता है। ये वहीं करते है, जो ये करते चले आ रहे हैं, श्लोक ने अपनी बात कही। पारूल ने कहा, जी मैं मानती हूं कि ये लोग ऐसे ही होते हैं, पर इन सभी बातों का आपसे और आपकी खामोशी से क्या लेना-देना है? आप मुद्दे की बात क्यों नहीं कर रहे हैं? मरीचिका, लोग, भ्रम इन बातों से आप क्या जताना चाह रहे हैं? फिलहाल आप सोच सकती है कि ये बातें फालतु है या मैं इन बातों को करके आपका समय बर्बाद कर रहा हूं, पर ये बातें बहुत अहम हैं। अब तक आपकी और मेरी जो भी बातें हुई हैं वे कहीं न कही आपकी और मेरी जिंदगी से जुड़ी है। और कई लोग है, जो इन बातों से प्रभावित है। इसलिए मैं आपके माध्यम से इन बातों को उन लोगों को पहुंचाना चाहता हूं जो मेरी पहुंच से दूर या सीधे तौर पर मुझसे जुड़े नहीं है या मैं या वो आमने सामने बात नहीं कर सकते हैं।

इन बातों को सुनने के बाद पारूल कहती है कि आप अब बस सीधे मुद्दे पर आ जाइए और आपकी खामोशी की वजह बताइए। कुछ देर चुप रहने के बाद श्लोक ने कहा कि आपको ऐसा लगता है कि मेरी बातें फालतु है या मैं आपका वक्त खराब कर रहा हूं, आपको मेरी खामोशी की वजह जानना है ताकि आप अपना केस सॉल्व कर सके, आपकी वाहवाही हो सके। आप बता सके कि जो कोई नहीं कर सका वो आपने कर दिखाया। बस इतना ही है ना। श्लोक की बात को सुनकर पारूल कुछ नहीं कहती बस अपनी गर्दन नीचे झुका लेती है। श्लोक अपनी बात जारी रखते हुए कहता है कि पहले भी तो आपने यही किया था और अब भी आप वहीं कर रही है। श्लोक की यह बात सुनने के बाद पारूल वहां से तुरंत चली जाती है। श्लोक फिर अपनी कुर्सी से उठता है और हमेशा की तरह खिड़की से बाहर की ओर देखने लगता है। पारूल आज समय से पहले ही चली गई थी, इसलिए श्लोक एक बार फिर बाकि लोगों के लिए उसी खामोशी में था।

कुछ ही देर में पारूल भी अपने घर पर आ जाती है। अब भी पारूल के कानों में श्लोक की बातें गूंज रही थी। पहले भी तो आपने यही किया था और अब भी आप वहीं कर रही है। वह खुद को शांत रखने का प्रयास करती है, पर श्लोक की बातें जैसे उसके दिमाग में घर कर गई थी। बार बार वहीं बातें उसे सुनाई दे रही थी। वह श्लोक की बातों से अपने मन और दिमांग को हटा नहीं पा रही थी। इसी उलझन के बीच वह एक बार अपने अतीत में चली जाती है। पारूल के इस अतीत की शुरूआत करीब 7 साल पहले हुई थी जब सड़क पर घायल पड़े पपी को दोनों ने एक साथ देखा था और दोनों ही उस पपी को इलाज के लिए उठाने के लिए एक साथ उसकी ओर बढ़ गए थे। दोनों एक साथ ही उस पपी के पास पहुंचे थे। दोनों ही उसके घायल होने पर दुख जता रहे थे। इसके बाद दोनों उसे एक क्लीनिक में ले गए और वहां उसका इलाज कराया। श्लोक उस पपी को अपने साथ उसके घर ले गया और उसकी देखरेख करने लगा। यह पारूल और श्लोक की पहली मुलाकात थी। हालांकि इस मुलाकात में दोनों की बहुत बात नहीं हुई थी। फिर भी दोनों एक दूसरे को अच्छा इंसान समझने लगे थे कि बेजुबान के दर्द को दोनों ही समझा था। इसके बाद इन दोनों की दूसरी मुलाकात कुछ दिन बाद हुई जब इंटर कॉलेज डिबेट कॉप्टिशिन में पारूल और श्लोक का आमना-सामना हुआ था। तर्क-वितर्क के इस आयोजन में दोनों को ही संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया गया था। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को बधाई भी दी थी। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे के नंबर ले लिए थे। बस यही से दोनों के जीवन में एक नया मोड़ आ गया था। पहले सोशल मीडिया पर और फिर दोनों की कॉल पर भी बातें होने लगी थी। शुरूआती दोस्ती कब प्यार में बदल गई थी शायद दोनों को ही पता नहीं चला था।

एक दिन दोनों मिले और दोनों ने एक दूसरे को प्रपोज किया और उनका प्यार परवान चढ़ने लगा। वक्त बीतता गया और कॉलेज लाइफ खत्म होने के साथ ही दोनों अपने कैरियर को आगे बढ़ाने के लिए निकल गए थे। हालांकि इस दौर में भी दोनों एक-दूसरे के लिए समय निकाल लेते थे। एक-दूसरे के सुख और दुख को साझा किया करते थे। पारूल की हर परेशानी में श्लोक सबसे आगे खड़ा रहता था। पर कहते है कि जिंदगी पता नहीं कब कौन सा इम्तिहान ले कोई कह नहीं सकता। एक नौकरी के सिलसिले में श्लोक को दूसरे शहर जाना पड़ता है। नए शहर में नई नौकरी के साथ एक ओर जहां श्लोक पारूल के साथ अपनी जिंदगी के सपने देख रहा था, वहीं पारूल अब भी अपने कैरियर को बनाने के लिए अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए थी। वक्त के साथ अब दोनों एक-दूसरे को कम समय दे पा रहे थे। हालांकि श्लोक अब भी पारूल के साथ जिंदगी जीना चाहता था, वहीं पारूल अब श्लोक कोअपने लायक नहीं समझ रही थीं। पारूल की बेरूखी को अब श्लोक समझने लगा था। उसने कई बार पारूल से इस संबंध में बात भी करना चाही, परंतु पारूल ने हमेशा उसे टाल दिया।
वक्त और बीता और अब दोनों के बीच बस औपचारिक बातें होने लगी। एक दिन बात ही बात में पारूल ने श्लोक को कह दिया कि वह उसके लायक नहीं है। वह एक छोटी नौकरी के साथ उसे जीवन की हर खुशी नहीं दे सकता। जबकि श्लोक को लगता था कि वह जो कर रहा है वह इतना है कि पारूल और वह दोनों की एक बहुत अच्छी जिंदगी साथ में गुजार सकते हैं। हालांकि पारूल का यह रवैया श्लोक के लिए एक मरीचिका ही साबित हो रहा था। वह हर कोशिश कर रहा था कि पारूल एक बार फिर उसके प्यार पर भरोसा करें पर शायद पारूल ने तय कर लिया था कि अब श्लोक से उसका कोई वास्ता नहीं है। वह उसे लगातार नजर अंदाज किए जा रही थी। पारूल को श्लोक ने कई बार समझाने का प्रयास किया, परंतु शायद पारूल ने एक जिद पाल ली थी कि वह श्लोक से कोई वास्ता नहीं रखना। शायद उसने अपने मन में ही ऐसा तय कर लिया था कि श्लोक उसके लायक नहीं है। इसके अलावा लोग, घर परिवार की बातें करते हुए वह श्लोक को हमेशा इग्नोर करती थी। वहीं श्लोक उसे जी जान से प्यार करता था और उसके साथ ही जिंदगी के सपने देख रहा था।
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