अच्छे नहीं बहुत बुरे बनों...



शीर्षक को पढ़कर आप सभी आश्चर्य कर रहे होंगे कि ये कैसा विषय है और या क्या सलाह दी जा रही है। घर परिवार के लोगों के साथ ही दुनियां भर के लोग जहां अच्छा बनने की बात कहते हैं वहीं मैं बुरा और बहुत बुरा बनने के लिए कह रहा हूं या सलाह दे रहा हूं। पर शायद आज की आवश्यकता ही यही है कि हम अच्छे नहीं बहुत बुरे बनें। अच्छा बनने में कोई नुकसान नहीं है, परंतु बहुत बुरा बनने में फायदे बहुत ज्यादा है। अगर आप बुरे बनते हो तो कोई आपका इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। क्योंकि अगर आप अच्छे हैं तो आपका इस्तेमाल होना तय है। इसके साथ ही आपका इतना इस्तेमाल किया जाएगा कि आप अपने लायक ही नहीं रहेंगे। अगर बुरे हैं तो लोग आपका इस्तेमाल करने से पहले डरेंगे। तो फिर बुरा बनना ही अच्छा है ना। 

आज के माहौल में अच्छा होना एक तरह से अपशब्द है खासकर उसके लिए जो सच में अच्छा इंसान है। वह जो दूसरों की तकलीफ को समझकर उनके साथ खड़ा होता है, वह जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता है। वह जो किसी का दिल दुखाने से डरता है, वह जो किसी को चोट देने से पहले उस चोट के दर्द को महसूस करता है। ऐसा इंसान उन लोगों को न्यौता देता है कि मैं इस्तेमाल होने के लिए तैयार हूं, आप मेरा इस्तेमाल कर सकते हैं। आज की दुनिया की भाषा में ऐसे इंसान को अच्छा इंसान नहीं बल्कि मुर्ख कहा जाता है और उसका भरपूर इस्तेमाल करने के बाद उसे इस तरह से फेंक दिया जाता है, जैसे कि दूध में पड़ी मक्खी को निकालकर फेंक दिया जाता है। इसलिए बुरे बनों, दूसरों की तकलीफ को देखो, उस पर बात करो, उसकी तकलीफ के लिए उसे ही दोष दो, पर जब मदद करने की बात आए तो इतने बुरे बन जाओं कि कोई भी आपसे मदद मांगने से पहले दो बार तो सोचे। 

बुरा बनने का मतलब मैं यह नहीं करता कि आप अपराध करने लग जाओ। मीठा बोलों, अपना काम निकलवाओ, कोई अच्छा इंसान मिला है तो उसका भरूपर इस्तेमाल करो, अपना काम निकलवाओ और फिर चल दो। छोड़ दो उसे उसके हाल पर। उसे भी तो अहसास होने दो कि अच्छे इंसान के साथ क्या होता है, अगर समझ गया तो वह भी आपकी जमात में शामिल हो जाएगा, नहीं एक बार फिर किसी ओर को मौका देगा अपना इस्तेमाल करने के लिए। चापलूसी, जलन रखना, शिकायत करना, तरक्की करने वाले की टांग खिंचना ये एक समय तक अवगुण थे, परंतु आज के समय में ये आपकी विशेष कला है, जिनके बल पर आप तरक्की का आसमान छू सकते हैं। उदाहरण के तौर पर एक व्यक्ति अपने ऑफिस में लगातार आठ घंटे काम करता है। वह अपना काम ईमानदारी और बहुत अच्छे से करता है ताकि उसकी तरक्की हो और वह खुश रह सके। उसी ऑफिस में एक और व्यक्ति है जो कि काम न करने के बहाने खोजता है, टाइम पास करता है फिर भी तरक्की कर जाता है। क्योंकि उस काम करने वाले व्यक्ति के आठ घंटे के बेहतर काम पर उस काम न करने वाले के आठ सेंकड भारी पड़ जाते हैं। ऑफिस के बॉस आते हैं काम करने वाला व्यक्ति अपने काम में व्यस्त था और काम न करने वाले व्यक्ति ने बॉस की शर्ट की तारिफ कर दी तो वह आठ घंटे बेकार हो जाते हैं। उसके ये आठ सेंकड काम करने वाले व्यक्ति पर हमेशा भारी रहेंगे क्योंकि वह अपनी चापलूसी से एक दिन तरक्की पर होगा और काम करने वाला व्यक्ति ईमानदारी से कार्य करता ही रहेगा, इस उम्मीद में कि एक दिन उसे भी तरक्की मिलेगी। 



अच्छा इंसान कभी दोस्ती में, कभी रिश्तेदारी में तो कभी प्यार में इस्तेमाल ही होता रहेगा। इसलिए बहुत बुरे बनो और अपना अपना इस्तेमाल होने से पहले ही सबका इस्तेमाल कर सुकुन की जिंदगी जिओ। अच्छे इंसान हो तो भी लोग बोलेंगे ही और बुरे इंसान रहोंगे तो भी बोलेंगे ही। एक हिंदी फिल्म का गीत भी है कि कुछ तो लोग कहेंगे... लोगों का काम है कहना...। तो फिर ऐसे लोगों की बातों पर क्या गौर करना, जो हर हाल में कुछ न कुछ कहेंगे ही। पर बुरा बनने का फायदा यह होगा कि कोई आपका इस्तेमाल नहीं कर पाएगा, चाहे वह आपका दोस्त हो, रिश्तेदार हो या प्यार हो। आपकी बुराई उन्हें कुछ तो डराकर रखेगी ही। बुरा बनने से एक फायदा और है कि इस्तेमाल होने के बाद आपको पछतावा, मायूसी, अकेलापन, शर्मिंदगी, डिप्रेशन जैसी परेशानियां भी नहीं होगी, क्योंकि अच्छा होकर अगर आप इस्तेमाल होते हैं तो ये बातें कहीं न कहीं आप पर हावी हो ही जाती है। हो सकता है कि आपको एक बार में इन सभी का अनुभव न हो पाए, परंतु जब आप बार बार लगातार इस्तेमाल होते रहेंगे तो आप इनको अनुभव करने लगेंगे। इसलिए बुरे बनिये और बहुत बुरे बनिये। छल, कपट, धोखा, मक्कारी, चालाकी ये वो बातें है जो आपको आज के समय में होशियार बनाते हैं। इनके बिना आज का इंसान इंसान नहीं बल्कि मुर्ख है। ये सभी विशेषताएं एक तरह से श्रंगार है, जो कि आपको परिपक्व बनाते हैं। इनके बिना आपके अस्तित्व की कोई व्याख्या नहीं है। ये सभी बातें ही बुरे इंसान की विशेष पहचान होती है और इनके बिना अप बुरे होने का सोच भी सकते हैं। 



फिर भी अगर आपको लगता है कि नहीं आप बुरे नहीं है और न ही बन सकते हैं और आपको धैर्य, संयम, सहनशीलता रखना होगी। क्योंकि अच्छा होने का एक फायदा जरूर है कि एक न एक दिन आपकी अच्छाई सभी के सामने आएगी ही। जैसे एक फूल को कितना भी दबा लिया जाए पर ज बवह खिलता है तो उसकी खुशबू और उसकी सुंदरता चारों और नजर आती है। आपका इस्तेमाल करने वाले लोग ही एक दिन आपकी अच्छाई की कीमत को समझेंगे और तब वह समझेंगे कि गलत आप नहीं वो थे जो कि अपने अच्छे साथी को पहचान नहीं सकें। ऑफिस में काम न करने वाला व्यक्ति काम न करने की आदत के कारण एक दिन बॉस की नजर में आएगा ही फिर उसकी वो तरक्की भी किसी काम की नहीं होगी और आपकी आठ घंटे की मेहनत और आपका अच्छा कार्य आपको आपकी तरक्की पर ले जाएगा। फिर यह तरक्की आपकी सफलता की सीढ़ी होगी और खुशियों का आसमान होगा, जो सिर्फ आपका होगा। पर तब तक आपको धैर्य रखना ही होगा, विचलित नहीं होगा, अपने आपको हमेशा अच्छा रखना होगा, कई बार खुद का इस्तेमाल भी होते रहने देना होगा। लोगों की बातों को सुनकर अनसुना करना होगा। अगर आप ये सब कर सकते हैं तो अप अच्छे बनिये, नहीं तो....। 


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