मरीचिका : कहानी जो कर देगी आपको सोचने पर मजबूर : पार्ट 2
अगले दिन पारूल फाइल लेकर डॉक्टर मिहिर से मिलती है और उन्हें बताती है कि फाइल में उस व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं है। खास बात बस यह लिखी है कि वह पिछले तीन साल से एक भी शब्द नहीं बोला है। पहले के डॉक्टर भी उसके लिए कुछ नहीं कर सके क्योंकि जब वे उसके साथ होते थे, तब भी वह कुछ नहीं बोला और हमेशा खामोश ही रहा है। डॉक्टर मिहिर ने कहा कि फाइल वह भी देख चुके हैं, इस कारण उन्होंने इस केस को एक चैलेंज के रूप में लिया है और यह केस उसे सौंपा है। मिहिर ने कहा कि पारूल हमें ये केस हर हाल में सॉल्व करना है, हमें उसकी सच्चाई, उसकी पहचान, उसका अतीत, उसकी खामोशी का राज चाहिए। ये तुम कैसे करती हो, यह तुम जानो, पर मुझे इसका रिजल्ट चाहिए और वो भी पॉजिटिव। पारूल ने एक बार फिर मिहिर से कहा कि वह अपनी ओर से पूरी कोशिश करेगी। इतना करने के बाद वह वहां से चली जाती है। अगले दिन पारूल उस व्यक्ति की फाइल लेकर हॉस्पिटल पहुंचती है और वहां अपना परिचय देने के बाद उस व्यक्ति से मिलने की बात कहती है। कुछ ही देर में उसे एक कमरे की ओर भेज दिया जाता है। कमरे की ओर जाते हुए उसका दिल जोर से धड़क रहा था। वह थोड़ा नर्वस हो रही थी और थोड़ी घबराहट भी थी। वह कमरे तक पहुंचती है, दरवाजा खोलकर अंदर देखती है उसे एक व्यक्ति खिड़की की ओर मुंह किए खड़ा नजर आता है। वह खुद को नॉर्मल करने का प्रयास करती है और एक गहरी सांस लेकर कमरे के अंदर चली जाती है। उसके कमरे में आने और दरवाजा बंद होने की आवाज होने के बाद भी खिड़की के पास खड़ा व्यक्ति पलटकर नहीं देखता है। पारूल उसे हैलो कहती है, पर इसके बाद भी वह उसे पलटकर नहीं देखता है। पारूल कहती है वह एक डॉक्टर है और उससे बात करने के लिए यहां आई है। इस बार वह व्यक्ति एक बार उसे पलटकर देखता है और फिर से उसी मुद्रा में खड़ा हो जाता है।
पारूल फिर अपनी बात आगे बढ़ाती है और कहती है कि लगता है कि आप किसी बात से बहुत ज्यादा नाराज है। यहां सभी कह रहे थे कि आप यहां तीन साल है और इन तीन सालों में आपने किसी से कोई बात नहीं की? इस पर भी वह व्यक्ति पहले की तरह ही खड़ा रहता है। उसकी ओर से कोई पतिक्रिया न देखकर पारूल एक बार फिर उसे कहती है कि यदि आपकी कोई नाराजगी है तो मुझे बताए, हो सकता है कि मैं आपकी कुछ मदद कर सकूं? इस बात एक बार फिर वह व्यक्ति उसकी ओर पलटकर देखता है। इस बार पारूल की नजर उससे मिलती है और वह एकदम अवाक सी रह जाती है। वह बिना कुछ बोले वहां से चली जाती है। अस्पताल से वह सीधे मिहिर के पास जाती है और उससे कहती है कि वह इस केस पर काम नहीं कर सकती। हालांकि मिहिर उसे साफ मना कर देता है और वह केस पारूल के पास ही रहता है। अगले दिन पारूल फिर अस्पताल जाती है औ कमरे में जाकर उस व्यक्ति से कहती है कि अब ना मैं कुछ कहूंगी ना ही शायद आप, पर आप जब तक कुछ नहीं कहेंगे मैं यहां रोज आउंगी और बैठी रहूंगी। देखती हूं कि आप कब तक कुछ नहीं बोलते। इतना कहने के बाद पारूल वहीं बैठ जाती है और वह व्यक्ति पूरे समय खिड़की ओर मुंह करके खड़ा रहता है।
अब हर रोज पारूल वहां आती और आकर बैठ जाती और वह शख्स रोज की तरह खिड़की की ओर देखता रहता। ऐसे ही करीब 15 दिन बीत जाते हैं, पर वह व्यक्ति कोई बात नहीं करता। आखिर 16वें दिन पारूल उससे एक बार फिर कहती है कि 15 दिन हो गए हैं, मैं रोज आती हूं और सोचती हूं कि आप आज कुछ बोलेंगे, पर आप कुछ कहते ही नहीं है। आखिर ऐसी कौन सी बात है जो आपके होंठों पर इतनी गहरी खामोशी को छोड़ दिया है। डॉक्टर न सही अपनी एक दोस्त समझकर ही मुझे कुछ बताएं। वह व्यक्ति एक बार फिर उसे पलटकर देखता है, पर इस बार भी वह कुछ नहीं कहता। पारूल फिर चुप हो जाती है। ऐसे ही 15 दिन और बीत जाते हैं। एक दिन पारूल ऐसे ही उस कमरे में बैठी थी और वह शख्स हमेशा की तरह खिड़की की ओर देख रहा था। तब पारूल उससे कहती है कि हो सकता है कि अब मैं यहां न आउं। क्योंकि एक महीना हो गया है, आप कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है और मेरा पहला केस ही मुझे सफलता नहीं दिला सका है। अब मेरा कैरियर भी खत्म हो जाएगा। इसलिए कल मैं आपकी फाइल फिर से अपने सीनियर को देकर चली जाउंगी। मुझे नहीं पता कि आप किस बात पर नाराज है, पर मुझे ये पता है कि आपके कारण मेरा एक सपना हमेशा के लिए टूट जाएगा। पारूल की यह बात सुनने के बाद वह शख्स फिर उसे पलटकर देखता है। पारूल की उसकी नजरों में देखती है, पर उस शख्स पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह फिर खिड़की की ओर देखने लगता है। अगले दिन पारूल मिहिर के पास जाती है और पूरी बात उसे बताती है। पर मिहिर केस को छोड़ने से मना कर देता है। पारूल फिर अगले दिन वहां पहुंच जाती है। इस बा रवह उस शख्स के लिए फूल लेकर भी जाती है, पर इस बात का भी उस शख्स पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह रोज की ही तरह व्यवहार करता है। इधर पारूल का धैर्य अब जवाब देने लगता है। वह उस शख्स पर चिल्लाती है कि आखिर आप अपने आप को समझते क्या हो? एक महीने से ज्यादा समय हो गया है मुझे यहां आते हुए। मैं यहां रोज आपसे बात करने के लिए आती हूं। आप है कि बस खिड़की की ओर देखते रहते हैं, आखिर है क्या उस खिड़की में जो आपको दिखता है मुझे या किसी ओर को नहीं। आखिर किस बात का अहंकार है आपको कि आप किसी से कोई बात नहीं करते। आखिर ऐसी कौन सी बात है जो आपको इतने लंबे समय से खामोश रखे हुए हैं। आप खुद से ही नाराज है या किसी और से नाराज है। आखिर आप कब तक नहीं बोलेंगे। कभी तो आपको बोलना ही होगा, और अगर बोला ही है तो फिर आ ही क्यों नहीं। प्लीज कुछ बोलिए।
कुछ देर के लिए रूम में खामोशी छा जाती है। वह शख्स एक बार फिर पलटता है और पारूल को देखता है। इस बार वह पारूल को कुछ देर तक देखता रहता है और फिर उसकी ओर बढ़ता है। पारूल की नजर भी उस पर ठहर जाती है। वह पारूल के पास आता है और उसके सामने रखी कुर्सी पर बैठ जाता है। अपने हाथ से उसे कुर्सी पर बैठने का इशारा करता है। पारूल भी कुर्सी पर बैठ जाती है। कुछ देर तक ऐसे ही बैठे रहने के बाद वह शख्स जो पिछले तीन सालों से एक शब्द नहीं बोला था तीन साल बाद पहला शब्द बोला मरीचिका....। पारूल एकटक उसे देखती रहती है। फिर वह उसका शब्द दोहराती है मरीचिका? ये क्या है? वह शख्स बोला एक भ्रम, एक माया, एक धोखा। मरीचिका सिर्फ रेगिस्तान में ही नहीं दिखती है यह आपकी, मेरी, हम सभी की जिंदगी में शामिल है। कुछ लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और कुछ लोग इसके जाल में फंस जाते हैं। जो लोग इसके जाल में फंस जाते हैं वे फिर कभी इससे बाहर नहीं आ पाते, क्योंकि फिर उन्हें इस धोखे के साथ जीने में ही मजा आता है। हंसते हैं, रोते हैं, तड़पते हैं, पर इस मरीचिका में उलझे रहते हैं। जिंदगी की मरीचिका को देखने और समझने के लिए जिंदगी को एक नए नजरिए से देखने की जरूरत होती है, जो हर कोई नहीं देख पाता। देखता भी है तो उसे स्वीकार नहीं कर पाता। कुछ अगर उसे स्वीकार भी कर ले तो भी उस भ्रम से बाहर निकलना नहीं चाहते हैं। कभी कभी ये मरीचिका आपको खामोश कर देती है और कभी आपको इतने लोगों के बीच ले जाकर खड़ा कर देती है, जहां आप अपनी ही आवाज को सुन नहीं पाते हैं। पारूल एकटक उसे देखते हुए उसकी बातों को बड़े ध्यान से सुन रही थी। हालांकि यह भी तय था कि वह शख्स क्या कह रहा है उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। पर फिर भी वह उसकी बातों को बड़े ध्यान से सुन रही थी। मरीचिका, मरीचिका, मरीचिका। इतना कहने के बाद वह शख्स एक बार फिर से खामोश हो जाता है। कुछ देर चुप रहने के बाद पारूल उससे कहती है कि आपकी खामोशी का राज ये मरीचिका है? आपका नाम क्या है?, आप कहां से है? आपके परिवार में कौन है और कहां है? पारूल के इन सवालों जवाब में एक बार फिर वह शख्स खड़ा होता है और फिर उसी खिड़की के पास जाकर खड़ा हो जाता है। वह बाहर को देखता है और पारूल से पूछता है कि क्या आप मरीचिका का मतलब जानती है? अगर हां तो ही आप मेरी बात को समझ सकती है और यदि नहीं तो पहले आप मरीचिका का मतलब समझकर आना उसके बाद हम बात करेंगे। इतना कहने के बाद वह शख्स एक बार फिर खिड़की की ओर देखने लगता है। इसके बाद पारूल वहां से अपना बैग, किताबें और फाइल लेकर वहां से चली जाती है।









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