अश्कों का भार
कभी बस यूं ही मुस्कुरा दिया करती थीं आंखें,
कभी यूं ही खिलखिला दिया करती थी आंखें।
खो गई है चमक, खो गया है इनका हर सपना,
अब हर पल हर वक्त बहती रहती है ये आंखें।।
कभी हजारों ख्वाबों को बुनती थी आंखें,
कभी लाखों ख्वाबों को जीती थी आंखें।
अब न कोई ख्वाब, न नींद ही होती है,
अब सिर्फ अश्कों को समेटती है आंखें।।
कभी दिल की जुबां बन जाती थी आंखें,
कभी कुछ न कहकर भी सब कह जाती थी आंखें।
अब न कोई शब्द है, न जज्बात बयां करती है,
अब तो सिर्फ वीरान सी हो गई है आंखें।।
यूं तो कई बार छलकी है आंखें,
यूं तो कई बार बह भी चुकी है आंखें।
पर इस बार शायद बात ही कुछ और है,
इस बार कुछ ज्यादा ही बोझिल है आंखें।।
समेट रही है अश्कों के मोती आंखें,
ना जाने कैसे एक सीप बन गई है आंखें।
कुछ कहते कहते अक्सर चुप हो जाती है,
ना जाने अब कैसे बेजुबां हो गई है आंखें।।
यूं तो सोचा कई बार एक सवाल ही कर लूं,
जवाब भी देती तो आखिर क्या देती आंखें।
अब नहीं संभाल पा रही है भार अश्कों का,
महसूस कर रहा हूं कितनी कमजोर हो गई है आंखें।।
कोई चुरा ले जाए मेरे अश्कों के मोती,
शायद कुछ संभल जाएगी ये आंखें।
ऐसा न हो कि बढ़ जाए भार अश्कों का,
कहीं हमेशा के लिए बंद न हो जाए ये आंखें।।
कभी बस यूं ही मुस्कुरा दिया करती थीं आंखें,
कभी यूं ही खिलखिला दिया करती थी आंखें।
खो गई है चमक, खो गया है इनका हर सपना,
अब हर पल हर वक्त बहती रहती है ये आंखें।।
कभी हजारों ख्वाबों को बुनती थी आंखें,
कभी लाखों ख्वाबों को जीती थी आंखें।
अब न कोई ख्वाब, न नींद ही होती है,
अब सिर्फ अश्कों को समेटती है आंखें।।
कभी दिल की जुबां बन जाती थी आंखें,
कभी कुछ न कहकर भी सब कह जाती थी आंखें।
अब न कोई शब्द है, न जज्बात बयां करती है,
अब तो सिर्फ वीरान सी हो गई है आंखें।।
यूं तो कई बार छलकी है आंखें,
यूं तो कई बार बह भी चुकी है आंखें।
पर इस बार शायद बात ही कुछ और है,
इस बार कुछ ज्यादा ही बोझिल है आंखें।।
समेट रही है अश्कों के मोती आंखें,
ना जाने कैसे एक सीप बन गई है आंखें।
कुछ कहते कहते अक्सर चुप हो जाती है,
ना जाने अब कैसे बेजुबां हो गई है आंखें।।
यूं तो सोचा कई बार एक सवाल ही कर लूं,
जवाब भी देती तो आखिर क्या देती आंखें।
अब नहीं संभाल पा रही है भार अश्कों का,
महसूस कर रहा हूं कितनी कमजोर हो गई है आंखें।।
कोई चुरा ले जाए मेरे अश्कों के मोती,
शायद कुछ संभल जाएगी ये आंखें।
ऐसा न हो कि बढ़ जाए भार अश्कों का,
कहीं हमेशा के लिए बंद न हो जाए ये आंखें।।







बहुत खूब बहुत ही उम्दा...
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