एक दिन अचानक 
 Final पार्ट 

अनवर की कुटिल मुस्का का रहस्य अब खुलने जा रहा था। उसने अपने संपर्कों से मुंबई से एक ऐसे व्यक्ति को बुला लिया था, जो योजना बनाने, घात लगाने और निशाना लगाने में माहिर था। उसने आते ही अपना काम शुरू कर दिया और वह एक-एक कर दिलावर के लोगों को अपना निशाना बनाने लगा। इघर दिलावर परेशान था कि उसके आदमियों को मारा जा रहा है, परंतु अनवर कहीं भी नजर नहीं आता है और न ही उसका कोई आदमी वहां होता है, तो अब यह कौन है जो उसके आदमियों को मार रहा है। एक दिन अनवर अपनी पूरी ताकत के साथ दिलावर को मारने की योजना बनाता है और खोज शुरू कर देता है। इसकी जानकारी दिलावर को भी मिल जाती है। उसे लगता है कि यदि वह अनवर को नहीं मिला तो उसके परिवार को निशाना बना सकता है। इसलिए वह सीधे अपने घर की ओर निकल पड़ता हैं। घर पहुंचते ही वह अपनी मां और दोनों बच्चों को घर के पीछे वाले रास्ते से दूसरे गांव में निकल जाने के लिए भेज देता है। जैसे ही वह घर में आता है, उस पर हमला हो जाता है। वह सामने वाले दरवाजे ही भागता हुआ बाहर आता है। बड़े से मैदान पर वह लगातार भाग रहा था। गांव वाले भी छिपकर यह सब देख रहे थे। वहीं अनवर के आदमी लगातार उसका पीछा कर रहे थे। कुछ ही देर बाद पूरे गांव में शांति हो जाती है। गांव को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिलती कि आखिर क्या हुआ। लगभग एक माह का समय गुजर जाने के बाद दिलावर का पूरा परिवार एक बार फिर अपने घर पर आ जाता है। एक माह में गांव वाले भी शांति से जीवन जी रहे थे। उन्हें इस एक माह में न तो कोई गैंगवार देखने को मिली थी और न ही गैंगवार में गांव को कोई व्यक्ति मारा गया था। गांव में अचानक सब कुछ शांत हो गया था। 


लगभग 40 साल पहले हुई इसकी पूरी घटना की जानकारी प्रभात विशाखा को देता है। इस पूरी जानकारी को सुनकर विशाखा एक शून्य में खो सी जाती है। प्रभात उससे कई बार बात करने की कोशिश करता है, पर वह बिना कोई जवाब दिए वहां से चली जाती है। कुछ दिन बाद विशाखा का प्रभात के पास फोन आता है और वह उससे कहती है कि उसे कसाना जाना है। कुछ प्रयासों के बाद वह अपने घर के लोगों को भी कसाना जाने के लिए मना लेती है। हालांकि इस दौरान उसका भाई उसके साथ था। प्रभात, विशाखा और विशाखा का भाई एक दिन कसाना गांव पहुंच जाते थे। गांव में पहुंचते ही विशाखा को लगने लगता है कि जैसे वह पहले इस गांव में आ चुकी है। विशाखा पूरे गांव को देखते हुए आगे बढ़ती जाती है और प्रभात और विशाखा का भाई उसके पीछे चलता रहते हैं। एक बड़े से घर के सामने विशाखा रूक जाती है। जो काफी सुनसान और उजड़ा हुआ लग रहा था। यह पंडित का घर था। वह पंडित के बारे में याद करती है, जैसा कि प्रभात ने कसाना के इतिहास के बारे में बताते हुए उसे कहा था। तभी वहां से गांव का एक व्यक्ति गुजरता है वह विशाखा को देखता है और उससे पूछता है कि इस घर को क्या देख रही हो बिटिया। ये 40 साल से ऐसा ही है। विशाखा बिना कुछ बोले आगे चल देती है। इस बार वह सीधे दिलावर के घर के सामने पहुंच जाती है। प्रभात उससे पूछता है कि यहां क्यों रूक गई तो विशाखा कहती है, यही तो मेरी मां मेरा इंतजार कर रही है। वह अंदर चली जाती है। इधर प्रभात को समझते देर नहीं लगती कि विशाखा का सपना महज एक इत्तेफाक नहीं था। उसका इससे संबंध था। वह अंदाजा लगता है कि दिलावर का विशाखा के रूप में पुर्नजन्म हुआ है और अब करीब 40 साल बाद वह अपने घर पर आया है। इधर विशाखा जब अंदर जाती है तो करीब 70 वर्षीय एक महिला उससे पूछती है कि कौन, किससे मिलना है। विशाखा कुछ नहीं कहती, बस वह उस बुर्जुग महिला को एक टक निहारती रहती है। वह महिला दोबार उससे पूछती है तो उससे मुंह से बस एक शब्द निकलता है ऐ बाजी। ये शब्द सुनकर वो महिला भी एक दम से रो पड़ती है और फिर उससे पूछती है कि ये तुने क्या बोला। और तुझे कैसे पता कि कोई मुझे इस नाम से भी बुलाता था। विशाखा कहती है कि ए बाजी तुझे ये शब्द याद है, पर जो कहता था वो याद नहीं है। विशाख कहती है ए बाजी मैं तेरा दिलावर। फिर कुछ ऐसी बातें उस महिला को बताती है जिससे उसे यकीन हो जाता है कि सामने जो लड़की खड़ी है वहीं उसका बेटा दिलावर है। फिर प्रभात और अपने भाई से अपनी मां को मिलाती है। 

देखते ही देखते पूरे गांव में यह खबर फैल जाती है कि दिलावर एक लड़की के रूप में वापस आ गया है। फिर गांव के कुछ पुराने लोगों को पहचानती है, तो सभी उसकी बात पर यकीन करने लगते है। गांव के कुछ पुराने लोग अब इस बारे में जानना चाहते हैं कि उस दि आखिर क्या हुआ था, जब दिलावर अपने घर से भागा था और उसके बाद गांव में कभी किसी का खून नहीं बहा। तब विशाखा उन्हें बताती है कि उसे एक सपने ने गांव के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद उसने और उसके दोस्त प्रभात ने गांव में बारे में पूरी बात पता की। जब प्रभात ने अनवर, राणा, दिलावर और पंडित के बारे में सब कुछ बताया तो मुझे भी पूरी बात याद आ गई। उस दिन मैं यहां से भाग रहा था और अनवर के आदमी उसका पीछा कर रहे थे। जैसे ही वह गांव के बाहर पहुंचा तो वहां अनवर पहले से तैयार खड़ा था। उसने देखते ही उस पर गोली चलाना शुरू कर दिया। गोली लगने से दिलावर घायल हो गया और पास के ही नाले में गिर पड़ा। अनवर और उसके साथियों ने समझा कि दिलावर मर गया है। सभी लोग पास के ही एक खेत में जश्न में डूब गए थे। अनवर भी वहीं पर मौजूद था। कुछ देर बाद दिलावर को होश आता है और वह देखता है कि वे सभी वहां जश्न मना रहे हैं। घायल होने के बाद भी वह एक-एककर सभी मारना शुरू कर देता हैं सबसे आखिर में वह अनवर के सामने जा खड़ा होता है। दोनों के बीच लड़ाई भी होती है और दोनों ही हथियार लेकर एक-दूसरे के सामने आ खड़े होते हैं और एक दूसरे पर गोली चला देते हैं। दोनों वहीं गिर पड़ते हैं। 

तभी वहां दिलावर का एक आदमी पहुंच जाता है। दिलावर मरने से पहले उसे कहता है कि यहां जो कुछ भी हुआ किसी को पता नहीं चलना चाहिए। उसने कहा कि यहां से सारी लाशें हटा देना। और कभी मां मिले तो कहना मैं ठीक हूं और एक दिन उससे मिलने के लिए जरूर आउंगा। बच्चों का ध्यान रखना। इतना कहकर वह दम तोड़ देता हैं। दिलावर का साथी उसके कहे अनुसार सब कुछ ठीक कर देता है। गांव में किसी को भी पता नहीं चलता कि अनवर और दिलावर दोनों मारे जा चुके हैं। गांव वाले अब तक यही समझ रहे थे कि दोनों फिलहाल कहीं और निकल गए हैं। वहीं दिलावर का बेटा बड़ा होने के बाद पुलिस में भर्ती हो गया था और उसकी बेटी ने भी डॉक्टरी की पढ़ाई की थी। कुछ ही समय पहले उसकी शादी हुई थी। अब गांव के सभी लोग दिलावर के एक लड़की के रूप में लौट आने को लेकर चर्चा कर रहे थे। वहीं दिलावर का बेटा और बेटी भी विशाखा से मिलने के लिए गांव पहुंचते हैं। कुछ दिन गांव में रहने के बाद विशाखा, प्रभात और विशाखा का भाई वापस लौट जाते हैं। विशाख लगभग रोज ही अपनी दूसरी मां यानि कि दिलावर की मां से फोन पर बात करती रहती है। 
दोस्तों इस कहानी के माध्यम से मैं पुर्नजन्म की बात को बढ़ावा नहीं देना चाहता हूं। बस मेरे एक दोस्त को इस प्रकार का एक सपना आया था, जिसमें कसाना गांव का नाम सुना था। फिर उसे गांव के कुछ दृश्य भी दिखाई दिए थे। इसी के आधार पर मैंने एक काल्पनिक कहानी लिखी है। इस कहानी में कोई किरदार या कोई घटना सच में हुई हो तो उसे में अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा इत्तेफाक ही समझूंगा। 

Comments/disqusion
5 comments

  1. बहुत शानदार है आप कहानी

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  2. Rebirth hota he. .Kabhi kabhar hame magic me logic nahi dhoodhna chahiye . Acchi story he prashant ji.. .

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  3. Bahut badiya likha dear kp it up..

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