एक दिन अचानक 
पार्ट 3

अब तक आपने पढ़ा... 
विशाखा एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की है। उसके अपने सपने और अरमान है, जिसे वह पूरा करना चाहती है। वह अपने परिवार से बहुत प्यार करती है। उसका एक दोस्त है प्रभात है, जो कि एक अखबार के लिए काम करता है और उसके और विशाखा के बीच काफी बातें होती है। एक दिन विशाखा को सपना आता है कि वह अपने किसी परिचित को मिलने के लिए हॉस्पीटल जाती है और वहां एक बच्चा आता है और उससे कहता है कि उसकी मां उसका कसाना गांव में इंतजार कर रही है। इसके बाद प्रभात और विशाखा उस गांव के बारे में पता करते हैं। कसाना गांव एक समय क्राइम सिटी के रूप में विख्यात था। यहां चार गैंग सक्रिय थे, जो लोगों में दहशत फैलाकर अपना वर्चस्व बनाने के लिए आपस में लड़ा करते थे। दिलवर, राणा, पंडित और अनवर की गैंग आपस में लड़ती थी और इस गैंगवार में कई गांव वाले मारे जाते थे। एक दिन दिलावर के कुछ आदमी पंडित के घर पर बम फैंक देते हैं, हालांकि पंडित इसमें बच जाता है। 
अब आगे....
घर पर हुए हमले के बाद पंडित कुछ बौखला सा जाता है और वह मन ही मन तय कर लेता है कि अब दिलावर का वह खात्मा करके रहेगा। दूसरी ओर पंडित के घर पर दिलावर के आदमी ने बम फेंका था, इसकी जानकारी अनवर की गैंग को मिल जाती है और वह दिलावर और पंडित दोनों को एक साथ खत्म करने की योजना बनाने में जुट जाता है। इधर राणा अब तक खामोश ही था। हालांकि वह भी मौके की तलाश में था कि उसे मौका मिले तो वह तीनों में से किसी का भी खात्मा कर सके। पंडित सीधे तौर पर दिलावर से नहीं लड़ना चाहता था, वह चाहता था कि कहीं दिलावर उसे अकेला मिल जाए तो वह उसे खत्म कर देगा। दूसरी अनवर सोच रहा था कि पंडित और दिलावर जब एक-दूसरे के सामने हो तो वह अचानक हमला कर उन दोनों को खत्म कर देगा। 

वहीं दिलावर इस बात से बेखबर था कि उसके खिलाफ षडयंत्र बनाया जा रहा है। वह अपने परिवार के साथ समय बीता रहा था। उसके परिवार में भी उसकी मां, उसके दो छोटे बच्चे थे। हालांकि उसकी गैंग के सदस्य उसके घर के बाहर हमेशा रहते थे, फिर भी दिलावर को अपने परिवार की चिंता हमेशा सताती रहती थी। जिस तरह पंडित अपने परिवार से बहुत प्यार करता था, उसी तरह दिलावर भी अपने परिवार को अपना सब कुछ मानकर चलता था। हालांकि वह दूसरे लोगों के लिए जल्लाद से कम ना था, परंतु घर में एक अच्छा बेटा होने के साथ ही एक अच्छा पिता भी था। इसके साथ ही वह अपनी गैंग के साथियों के भी हर सुख-दुख में खड़ा रहता था। उसकी एक ही कमी थी वह थी कभी भी आवेश में आकर कोई फैसला कर लेता था और जब तक वह उसे अमल में नहीं ले आता चैन से नहीं बैठता था। इस कारण उसका कई बार नुकसान भी हुआ है और कई बार वह अपनी जान को भी जोखिम में डाल चुका है।दिलावर अक्सर अपने साथियों के घर चला जाया करता था और उनके परिवार के साथ ही कुछ समय बीताता था। यहीं कारण था कि उसके लोग अपनी जान की परवाह भी नहीं करते थे और उसे अपना बड़ा भाई समझते थे। उसकी गैंग के साथी उसे भाईजी कहकर ही बुलाते थे। 

इधर अनवर सोचता है कि यदि दिलावर को खत्म करना है तो पंडित को उकसाना होगा, ताकि पंडित दिलावर का खात्मा कर दे और फिर वह पंडित को खत्म कर दे। इसके बाद मौका देखकर राणा को रास्ते से हटाकर कसाना पर अपना पूरा वर्चस्व बना सके। इसके लिए वह एक योजना बनाता है कि अपने कुछ लोगों को पंडित के घर पर एक बार फिर हमला करने के लिए कहता है। इस दौरान वह अपने साथियों से कहता है कि हमले के दौरान वे दिलावर का नाम ले कि दिलावर से पंगा बहुत महंगा पड़ेगा। इससे पंडित अपने होश खो बैठैगा और दिलावर को मारने के लिए निकल जाएगा। हम उसके पीछे जाएंगे और जैसे ही पंडित दिलावर को खत्म करेगा, हम उसे खत्म कर देंगे। योजना के अनुसार वेष बदलकर पंडित के घर पहुंच जाते हैं। इधर पंडित को शक था कि कोई भी एक गैंग बम फेंकने की घटना का फायदा उठाकर एक बाद फिर उसके घर पर हमला कर सकते हैं, इस कारण वह भी तैयार था। रात के समय अनवर के साथी पंडित के घर पर हमला करने के लिए जाते हैं, परंतु वह पंडित के जाल में फंस जाते हैं। वो लोग घर पर हमला करते उसके पहले ही पंडित के लोग उन लोगों को पकड़ लेते हैं। पकड़े जाने के बाद वे अनवर की सारी योजना पंडित को बता देते हैं, परंतु पंडित उन सभी को खत्म कर देता है। अब पंडित दिलावर और अनवर दोनों से ही बदला लेने के लिए योजना बनाने में जुट जाता है। हालांकि वह कई बार दोनों को मारने के लिए प्रयास करता है, परंतु सही मौका और समय न मिल पाने के कारण वह उन पर हमला नहीं कर पाता है। 

दिलावर अब तक अपने खिलाफ होने वाले षडयंत्र से अंजान था, वहीं अब अनवर के लिए भी पंडित से लड़ाई खुलकर होने की आशंका बन गई थी। अनवर को भी इस बात की जानकारी मिल चुकी थी कि पंडित ने उसके आदमियों को पकड़ लिया था पूरी योजना जानने के बाद उनकी हत्या कर दी थी। उसे इस बात का भी पता था कि पंडित अब उस पर कभी हमला कर सकता है। ऐसे में वह भी इस मौके की तलाश में था कि वह पंडित को खत्म कर सके। इसके लिए वह एक बार फिर योजना बनाता है और इस बाद पंडित और दिलावर को खत्म करने के लिए राणा से हाथ मिलाने की पेशकश करता है। वह राणा से कहता है कि हम दोनों मिलकर उन दोनों को खत्म कर देते हैं और दोनों मिलकर शहर पर राज करेंगे। शहर को दो हिस्सों में बांट लेंगे और कोई भी किसी के हिस्से में नहीं आएगा। इस बात पर राणा अनवर से हाथ मिला लेता है। वह अनवर से पूछता है कि पंडित और दिलावर को एक साथ कैसे मारेंगे। दोनों एक साथ हमें मिलेंगे कैसे? इसके लिए अनवर कहता है कि वो काम तुम मुझ पर छोड़ दो दोनों एक ही समय एक ही जगह पर आ जाएंगे। तुम बस तैयार रहना कि दोनों में से कोई भी उस समय बचकर जाने ना पाए। इस पर राणा उसे हामी भर देता है। 
क्रमशः 

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