सौदा 

पार्ट 1

इंसान अपनी परेशानियों और समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए क्या कुछ नहीं करता है। सबसे बड़ी बात यह है कि वह इन समस्याओं से कितना घिरा है या परेशान है उस पर भी निर्भर करता है कि वह अपनी परेशानियों और समस्याओं से निजात पाने के लिए कौन सा और किस प्रकार का रास्ता इख्तियार करता है। कई परेशानियां ऐसी भी होती है, जिनका हल निकलता ही नहीं है या वह परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है। इस कारण इंसान कुछ ऐसा कर जाता है, जो उसे नहीं करना चाहिए था। कार्तिक भी कुछ ऐसी ही परेशानियों से घिरा था। उसके जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा था। वह चाह रहा था कि सब कुछ सामान्य रहे और वह परिवार के साथ हमेशा खुश और सुखी जीवन जी सके। कभी उसे नौकरी में परेशानी आती थी, तो कभी वह आर्थिक रूप से परेशान रहता था। कभी परिवार में ही कभी बीमारी, कभी कोई दुर्घटना या कोई अनहोनी होने से भी वह विचलित हो जाता था।

ऑफिस में उसे उसके कलिग का कोई सहयोग नहीं मिलता था। उसका बॉस उसे अक्सर छोटी सी गलती पर भी पूरे स्टॉफ के सामने बेइज्जत कर दिया करता था। लंबे समय से उसका प्रमोशन रूका हुआ था। कभी बार उसकी पेमेंट भी काट ली जाती है। ऐसी कई परेशानियों से वह निजात पाना चाहता था। कार्तिक अक्सर जब भी अकेला होता तो वह सोचता था कि उसके जीवन में कोई परेशानी नहीं है और वह अपने पूरे परिवार के साथ बहुत अच्छी जिंदगी जी रहा है। वह परिवार के साथ बाहर घूमने के लिए भी जाता है, अपने बेटे को अच्छे स्कूल में पढ़ा रहा है। उसके लिए रोज नई चीजे लेकर जाता है। पत्नी को भी वह हर तरह से खुश रख रहा है। परंतु जब उसका यह सपना टूटता था, तो उसे फिर हकीकत में उन सभी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। ऐसे ही एक दिन वह अपने ऑफिस से घर के लिए निकल ही रहा था कि उसकी पत्नी का फोन आता है। 
कार्तिक- हैलो, हां ऑफिस से घर के लिए ही निकल रहा हूं। बताओं कुछ लाना है क्या? 
साक्षी - जी, लाना तो है। 
कार्तिक- हां, तो बोलो क्या लाना है? 
साक्षी- कुछ रूपए लेकर आईए। अनुज साइकिल चलाते हुए गिर गया है और उसे बहुत चोट आई है। शायद उसके पैर फ्रेक्चर भी हो सकता है। मैं उसे हॉस्पिटल लेकर जा रही हूं, आप रूपए लेकर हॉस्पिटल ही आ जाइए। 
कार्तिक- चौंकते हुए अरे, कैसे गिर गया? और तुम कहां थी? 
साक्षी- मैं घर पर थी और वह बाहर सोसायटी के कंपाउड में साइकिल चला रहा था। वह तो उसके रोने की आवाज आई तो मुझे पता चला। 
कार्तिक- अच्छा ठीक है, तुम उसे जल्दी से हॉस्पिटल लेकर जाओ, मैं विनय से कुछ रूप्ए लेकर सीधे हॉस्पिटल ही आ रहा हूं। 

कार्तिक यहां से अपने ऑफिस में उसके साथ काम करने वाले अपने दोस्त विनय के पास जाता है और उसे अनुज के एक्सीडेंट के बारे में बताते हुए उससे रूपए मांगता है। विनय उसे तत्काल रूपए देता है और कार्तिक उसे बाद में मिलने का कहकर हॉस्पिटल आ जाता है। हॉस्पिटल में वह फीस जमा करता है और उसके बाद साक्षी और अनुज के साथ वापस घर आ जाता है। रास्तें में उसके दिमाग में यही बात चल रही थी, एक परेशानी खत्म नहीं होती है और दूसरी परेशानी आकर खड़ी हो जाती है। कई सालों से यही सिलसिला चला आ रहा था। ऐसी समस्याओं और परेशानी के कारण अब उसके व्यवहार में भी परिवर्तन आ रहा था। अब उसे अधिक गुस्सा आता था। वह लोगों से कम बात करता था। वह हंसता कम था। छोटी-छोटी बातों में पर उसे झल्लाते हुए देखा जा सकता था। लोगों से ठीक से बात नहीं करता था और न ही वह अपने काम को ठीक से कर पा रहा था। इन सबके कारण भी उसकी परेशानियों में इजाफा हो रहा था। वह सोच रहा था कि अब बहुत समय हो गया है और इन परेशानियों से निजात मिलना ही चाहिए। ऐसे ही सोचते हुए तीनों घर पहुंच जाते हैं। साक्षी भी घर में जाकर किचिन में पहुंच जाती है। सबसे पहले वह कार्तिक के लिए चाय बनाती है और फिर अनुज के लिए कुछ पकाने चली जाती है। कुछ ही देर में वह सभी के लिए खाना भी बना लेती है। फिर साक्षी और कार्तिक खाना खाने के लिए बैठ जाते हैं। 
साक्षी- कितने रूपए लिए हैं विनय भैया से? 
कार्तिक- क्यों तुम्हें क्या करना है? जितने भी लिए हो, तुम्हारा काम चल रहा है ना? 
साक्षी- अरे, कार्तिक ऐसे क्यों जवाब दे रहे हो? एक सिंपल सा सवाल ही तो किया है? 
कार्तिक- हां, मैं तो ऐसे ही जवाब देता हूं। और तुमने सवाल किया ही क्यों? तुमने कहां रूपए लेकर आना मैं लेकर आ गया। अब कहां से, कैसे, किससे, कितने उन सबसे तुम्हें क्या मतलब? 
साक्षी-कार्तिक मुझे पता है कि तुम परेशान हो, पर घर में तो अच्छे रहो और बात करो। 
कार्तिक- अब तुम मुझे लेक्चर मत दो प्लीज। 
इसके बाद वह खाना छोड़कर उठ जाता है और बाहर निकल जाता है। बाहर निकलने के बाद भी वह उन्हीं बातों के बारे में सोचता रहता है कि आखिर उसकी जिंदगी से इन सभी परेशानियों का अंत कैसे होगा? वह अपने आसपास के लोग, कलिग और जिन्हें वो जानता है उन लोगों से अपनी जिंदगी का कम्पेरिजन करने लगा है। वह सोचता है कि मुझसे अच्छी तो उन लोगों की किस्मत है, उनकी परेशानी कितनी जल्दी हल हो जाती है। वे सभी लोग कभी-कभी ही परेशान नजर आते है। उसके ऑफिस में ही एक और बंदा काम करता है जिसका नाम ऋषभ है। वह उसके बारे में सोचता है कि ऋषभ की किस्मत कितनी अच्छी है। अच्छी नौकरी, हाई सैलरी, खूबसूरत गर्लफ्रेंड, प्यार करने वाले लोग, ऑफिस में इज्जत क्या कुछ नहीं है उसके पास। और एक वह है जो हर वक्त परेशानियों से घिरा रहता है। काफी देर तक वह इन्हीं ख्यालों में टहलता रहता और फिर एक ठेले में जाकर कुछ खाने की सोचता है, क्योंकि घर पर तो गुस्से में खाना छोड़कर आ गया था, पर अब उसे भूख लग रही थी। वह एक ठेले पर पहुंचता है और वहां से कुछ खाने का ऑर्डर देकर पास ही खड़ा हो जाता है। पास ही दो छोटे बच्चे वहां बैठे थे। वह उन्हें देखता है। बच्चे उससे खाने के लिए मांगते हैं, जो वह अपना ऑर्डर उन्हें दे देता है। साथ ही कहता है कि मुझसे अच्छी तो तुम्हारी किस्मत है। तुमने खाने को मांगा और तुम्हें मैं मिला और मैंने दे दिया। काश ऐसे ही मुझे भी कोई मेरी खुशियां इस तरह से दे देता। उनमें से एक बच्चा कहता है तो आप मेरी किस्मत ले लो अंकल। कार्तिक उसे देखकर बस एक हल्की मुस्कान देता है और उसके सिर पर हाथ फिराते हुए वापस अपने घर की ओर चल देता है। 

घर आकर वह बाहर वाले कमरे में ही सोफे पर लेट जाता है। कुछ ही देर में उसे नींद भी आ जाती है। रात को अचानक उसे किसी की आवाज आती है। उसे ऐसा लगता है जैसे कोई उसे कह रहा है कि आप मेरी किस्मत ले लो अंकल। वह उठकर देखता है तो उसे कोई नजर नहीं आता है। वह फिर से सो जाता है, परंतु उसे एक बार फिर वहीं आवाज आती है, आप मेरी किस्मत ले लो अंकल। वह एक बार फिर से उठकर पूरे कमरे में देखता है मगर उसे इस बार भी कोई नजर नहीं आता है। कुछ ही देर में कार्तिक को अहसास होता है कि जैसे पूरे कमरे में कोई धुंध सी छा गई है और उसे कुछ नजर नहीं आ रहा है। उस धुंध में भी वह आवाज उसे बार-बार सुनाई दे रही थी। थोड़ी ही देर में उसे उस धुंध में एक साया नजर आता है। वह साया धीरे-धीरे कार्तिक की ओर बढ़ता है। कार्तिक उससे बार-बार पूछ रहा है कि कौन, कौन हो तुम? वह साया कोई जवाब नहीं देता और धीरे-धीरे कार्तिक के पास आ जाता है।

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