एक दिन अचानक 
पार्ट 1

रिश्ते और यादें, ये दो शब्द ऐसे हैं, जो एक से न होते हुए भी आपस में जुड़े लगते हैं। रिश्तों की याद हो या यादों में कोई रिश्ता हो, इंसान को एक अलग ही अनुभव देता है। ऐसे ही एक अनुभव से गुजरने वाली थी एक छोटे से शहर की लड़की विशाखा। इस वक्त उसे नहीं पता था कि आगे कि जिंदगी में उसके साथ क्या होने वाला है। भविष्य के गर्त में छिपी बातों से अंजान विशाखा एक आम जिंदगी जी रही थी। परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों के साथ उसकी जिंदगी के 30 साल ऐसे ही गुजर गए थे। कुछ सपने और कुछ अरमान उसकी आंखों में थे और वह उन्हें पूरा करने का हमेशा प्रयास करती रहती थी। अपने परिवार से प्यार करने वाली विशाखा हमेशा खुश रहती और दूसरों को खुश रखने का प्रयास करती थी। यूं तो उसके कई दोस्त थे, परंतु उनसे उसका मिलना कम ही होता था। उसका एक दोस्त था प्रभात, जो कि एक अखबार में नौकरी करता था। विशाखा की अक्सर उससे बात हुआ करती थी। विशाखा अपनी कई बातें प्रभात को बताती थी। विशाखा को किसी भी प्रकार की मदद चाहिए होती तो वो प्रभात को ही याद करती थी। एक आम इंसान की जिंदगी की तरह विशाखा की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए थे, जिनका उसने डटकर मुकाबला किया था। 

परिवार के संस्कार उसके व्यवहार में नजर आते थे। विशाखा यूं तो बहुत सुलझी हुई लड़की थी, परंतु गुस्सा हमेशा उसकी नाक पर बैठा रहता था। प्रभात उसे कई बार इसके लिए टोकता भी था, परंतु वह बस हां कर प्रभात की बात को टाल दिया करती थी। कभी कहती थी कि मैं गुस्से पर कंट्रोल करूंगी, पर उसने शायद कभी प्रयास ही नहीं किया। विशाखा की एक बात और थी वह हर बात में अपने दिमाग का उपयोग करती थी, कोई भी बात उसके लिए कितने फायदे या नुकसान की है, यह उसके दिमाग में हमेशा रहता था। उसने अपनी जिंदगी में कुछ ही ऐसी बातें होगी, जिसमें उसने दिल से फैसला लिया हो। शायद यहीं कारण है कि उसके दोस्त कम थे, और ज्लद ही उसके रिश्ते टूट जाया करते थे। उसकी नजर में सिर्फ उसका परिवार ही अहमियत रखता था, बाकि रिश्ते उसके लिए परिवार के बाद ही आते थे। इसलिए उसने कभी रिश्तों को समझने का प्रयास ही नहीं किया। इसी कारण उसकी कई बार प्रभात से भी लड़ाई हुई है। 

वक्त ऐसे ही बीत रहा था और आने वाले समय अंजान विशाखा अपनी जिंदगी को आराम से जी रही थी। परंतु आने वाला वक्त न सिर्फ उसके लिए बल्कि उसके परिवार के लिए परेशानी का सबब बनने वाला था। विशाखा को एक रात सपना आया कि वह अपने किसी परिचित से मिलने के लिए हॉस्पिटल गई है। वह परिचित से मिलने के लिए वार्ड के गेट पर खड़े होकर इंतजार कर रही थी, तभी एक छोटा सा लड़का वहां आता है और उसका हाथ पकड़ कर कहता है तुम्हारी मां वहां इंतजार कर रही है। जबकि विशाखा की मां अंदर वार्ड में अपने परिचित से बात कर रही थी। विशाखा उस लड़के से पूछा कि कहां, तो उसने सिर्फ एक शब्द कहा कसाना। विशाखा उस लड़के से कुछ और पूछ पाती उसके पहले ही वह लड़का वहां से भाग गया। ऐसे कुछ सपने पहले भी विशाखा को आए हैं, जिसमें वह या तो खुद को कहीं कैद पाती थी, या किसी महल या किले में अकेली रह जाती थी। तब वह अक्सर डर जाती थी और उसकी नींद खुल जाती थी। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। उसकी नींद खुली, उसे कुछ डर भी लगा, परंतु इसके बाद वह फिर से सो गई। सुबह उसने अपनी मां को सपने के बारे में बताया तो उसकी मां ने कहा कि हां, हमारे दिमाग में काफी कुछ चलता है और वह हमें सपने में दिख जाता है। विशाखा ने भी अपनी मां की बात मान ली और उस पर अधिक ध्यान नहीं दिया। हालांकि उसने सपने से पहले कभी कसाना के बारे में नहीं सुना था। दिन में उसने इंटरनेट पर कसाना के बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास किया तो वह आश्चर्यचकित रह गई क्योंकि ऐसा एक गांव उत्तरप्रदेश में था। इसके साथ ही यह गांव एक समय अपराध का सबसे बड़ा गढ़ हुआ करता था। 

उसने यह बात अपने दोस्त प्रभात को भी बताई। प्रभात ने भी विशाखा की बात को बड़े ध्यान से सुना और उसने भी अपने स्तर पर कसाना के बारे में पता किया। यह उत्तर प्रदेश का एक छोटा कस्बा था। यहां अपराध का ग्राफ काफी अधिक था। इंटरनेट से मिली जानकारी के अनुसार एक समय यहां कई गैंग हुआ करते थे, जिनमें अक्सर विवाद होते थे और कई लोगों की जान उस गैंगवार में चली जाती थी। वर्चस्व की लड़ाई में यह गैंगवार काफी अधिक होती थी और तहसील के लोग चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते थे। इस गांव में अपराध और गैंग का असर यह था कि यदि कोई किसी गेंग के सदस्य के बारे में बात भी कर ले या उनके संबंध में कोई जानकारी निकालने का प्रयास भी करें तो उस गैंग के सदस्य उस व्यक्ति की हत्या कर देते थे। इस क्षेत्र में पुलिस भी आने से डरती थी, क्योंकि यहां करीब 4 गैंग मुख्य रूप से सक्रिय थे, जो पुलिसकर्मियों पर भी हमला करने से नहीं डरते थे। कुछ राजनीतिक लोगों का इन गैंग को आसरा था, जिसके कारण ये गैंग क्षेत्र में काफी सक्रिय रहती थी। जब भी पुलिस इन पर कार्रवाई करना चाहती किसी ना किसी राजनीतिक पार्टी के नेता का फोन पुलिस के पास पहुंच जाता था। इसके कारण पुलिस अपनी कार्रवाई नहीं कर पाती थी। चारों ही गैंग के लोग क्षेत्र के लोगों को दहशत में रखते थे। किसी भी गैंग के किसी भी सदस्य के खिलाफ कोई आवाज उठाने की हिम्मत नहीं करता था। यदि करता भी था, उसे मिलती थी मौत। गैंग के इस आतंक के कारण कई लोग क्षेत्र छोड़कर दूसरे शहरों में रहने के लिए भी चले गए थे। उनके घर अब भी कसाना में ही थे, परंतु वे उन्हें बेचने के लिए भी यहां नहीं आते थे। ऐसे खाली पड़े घरों पर इन गैंग के सदस्य अपना कब्जा कर लिया करते थे और वहीं से वे अपनी गतिविधि को संचालित किया करते थे। 
क्रमशः 

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