गलती - द मिस्टेक

                                Final part


रात बढ़ती जा रही थी, परंतु भौमिक नींद नहीं आ रही थी। अब उसने फिर घड़ी की ओर देखा तो घड़ी में 2.30 का समय हो रहा था। अचानक ही भौमिक को पता नहीं क्या हुआ और वह सीधे बाहर की ओर गया और अपनी कार लेकर सीधे हवेली पहुंच गया। हवेली में वह काफी देर तक घूमता रहा। हर तरफ वह कुछ तलाश करने की कोशिश करता रहा। फिर वह उस हाॅल में भी पहुंचा, जहां उन चारों लोगों की हत्या की गई थी। वह हवेली में सुबह 9 बजे तक रहा और फिर सीधे अपने ऑफिस के लिए निकल गया। उसके हालात देखकर कोई भी कह सकता था कि वह रात भर सोया नहीं है। वह सीधे अपने केबिन में गया और बैठकर कुछ सोचने लगा। फिर उसने परमार को फोन लगाया। 
भौमिक- हेलो, परमार कहां हो
परमार- सर, अभी तो घर पर ही था, बस ऑफिस के लिए निकल रहा हूं। आप बताए, कुछ जरूरी काम हो तो आपके घर आ जाता हूं। 
भौमिक- परमार मैं घर पर नहीं ऑफिस में हूं। तुम एक काम करो, जितनी जल्दी हो सके ऑफिस आ जाओ। 
परमार- जी, सर। बस अभी आया। 
इधर परमार सोच रहा था कि ऐसा क्या हुआ जो सर इतनी जल्दी ऑफिस पहुंच गए और मुझे में जल्दी आने का कह रहे हैं। वहीं दूसरी ओर ऑफिस में भौमिक अपनी चेयर पर बैठकर मुस्कुरा रहा था। उसके चेहरे को देखकर लग रहा था कि उसे हवेली में हत्या से जुड़ा कोई बड़ा सुराग हाथ लगा है। अब वह केस में आगे बढ़ सकता है। कुछ ही देर में परमार भी ऑफिस पहुंच गया। परमार को देखकर भौमिक ने उसे बैठने के लिए कहा। 
भौमिक- परमार, कितनी देर करते हो? मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। एक काम करो जल्दी से दो काॅफी बोलो। आज हम साथ में काॅफी पीते हैं। 
परमार- जी, सर। अभी बोल देता हूं। 
परमार काॅफी का बोलकर फिर से केबिन में आ जाता है। 
परमार- क्या बात है सर? काफी खुश नजर आ रहे हैं। केस में कोई सुराग हाथ लग गया है क्या
भौमिक- परमार वो सब तो तुम्हें बाद में बताउंगा। फिलहाल एक काम करो। अपनी कस्टडी में वो जो आठों बच्चे हैं, उन्हें छोड़ दो। या उनके माता-पिता को फोन कर कह दो कि वे यहां आए और अपने बच्चों को ले जाए। 
परमार- पर सर अभी तो हमने केवल तीन से ही पूछताछ की है, पांच से तो बाकि है। हालांकि तीन से भी कोई खास जानकारी नहीं मिली है, पर हो सकता हे कि बाकि पांच में से कोई कुछ सुराग तक हमें पहुंचा दें। 


भौमिक- परमार, मैं कह रहा हूं ना, उन्हें छोड़ दो। 
परमार- जी, सर। मैं अभी सभी के माता-पिता को फोन कर देता हूं कि वे आकर बच्चों को ले जाए। 
भौमिक- हां परमार। उसके बाद तुम्हें एक काम और करना है। 
परमार- वो क्या सर
भौमिक- मीडिया को बुला लेना। उन्हें केस के संबंध में जानकारी देते हैं। 
परमार- क्या जानकारी सर? अभी तो हमारे पास ही कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। 
भौमिक- परमार, आज तुम्हें क्या हो गया है? आज तुम इतने सवाल क्यों कर रहे हो
परमार- साॅरी सर। मैं तो बस पूछ रहा था। 
भौमिक- पूछना भी तो सवाल ही है परमार। 
परमार- साॅरी सर। 
भौमिक- अब तुमसे जो कह रहा हूं वो करते जाओ। और देखों अपने सर का कमाल। 
परमार- सर अब मुझे लग रहा है कि आपने केस साॅल्व कर लिया है। तभी आप इतने खुश भी नजर आ रहे हैं। 
भौमिक- कुछ ऐसा ही समझ लो परमार। 
परमार- तो सर किसने की थी ये हत्या? कौन है कातिल? और आपकों कैसे उसके बारे में पता चला। क्या सुराग हाथ लग गया सर जो आप कातिल तक पहुंच गए
भौमिक- अरे, अरे परमार। एक बार में इतने सवाल। तुम्हें भी जवाब मिल जाएगा। तुम बस मीडिया को बुला लो। और हां मीडिया को बुलाने से पहले बच्चों को रवाना करा देना। 
परमार- जी, सर। मैं अभी उनके माता-पिता को फोन कर देता हूं कि वे जल्द से जल्द आए और अपने बच्चों को ले जाए। 
इतना कहकर परमार केबिन से बाहर चला जाता है और भौमिक अपनी कुर्सी पर बैठकर टेबल पर रखे पेपपरवेट को घुमाने लगता है। ऐसा उसकी आदत में था, जब भी वह कोई केस साॅल्व कर लेता था, तो कुछ देर अपने केबिन में अकेला बैठा रहता था और टेबल पर रखे पेपरवेट को घुमाता था। आज भी वह ऐसा ही कर रहा था, इसका मतलब कुछ घंटों पहले तक जो केस उसे उलझा रहा था और उसकी नींद उड़ा चुका था, वह अब उसे साॅल्व कर चुका था। पर आखिर एक ही रात में उसके हाथ ऐसा क्या लग गया, जो केस साॅल्व हो गया। उसने एक बार फिर काॅफी मंगाई और पीने लगा। काॅफी पीते हुए उसके चेहरे में खास मुस्कार बिखरी हुई थी। अधिकारियों और मीडिया का जो प्रेशर उस पर था, वह अब हट चुका था। कुछ ही देर में परमार फिर से उसके केबिन में आता है। 
परमार- सर, मैंने सभी बच्चों के घर पर फोन कर दिया है वे बस आते ही होंगे। 
भौमिक- ओके परमार। 
परमार- और सर मीडिया को 2 बजे की सूचना दे दी है। 
भौमिक- गुड परमार। 
परमार- सर, अब तो बताइए कि आखिर कातिल कौन है? और आपकों उसके बारे में कैसे सुराग हाथ लगा
भौमिक- बताता हूं परमार, सब बताता हूं। दो बजे मीडिया के सामने सब बताउंगा, तब तुम भी तो वहीं रहोंगे। तब ही सारी कहानी सुन लेना। 
परमार- जी, सर। 
कुछ ही देर में मीडिया भौमिक के ऑफिस तक पहुंच गई थी। शहर में हुए हाईप्रोफाइल मर्डर केस के बारे में जानने के लिए उत्सुक था। हालांकि मीडिया को भी अंदाजा नहीं था कि पुलिस उन्हें क्या बताने वाली है? भौमिक के ऑफिस में पहुंचे मीडियाकर्मी आपस में यही बात करने में लगे थे कि अचानक क्यों बुला लिया है और पुलिस क्या बताना चाह रही है। इस बीच भौमिक परमार के साथ वहां पहंुच जाता है। साथ पुलिस कमिश्नर भी मीडिया के सामने आ जाते हैं। 
कमिश्नर- मीडिया के सभी साथियों का मैं स्वागत करता हूं। 
मीडिया पर्सन 1- सर, अचानक बुलाने की वजह ? क्या आपने मर्डर में कुछ खास कर दिखाया है। 
कमिश्नर- कुछ खास नहीं किया होता तो आपको यहां तक बुलाने की तकलीफ क्यों देते? आप बस हमें पांच मिनट दीजिए, आपके सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा। 
इसके बाद कमिश्नर भौमिक की ओर इशारा करता है और भौमिक मीडिया से मुखातिब होता है। 
भौमिक- साथियों मैं जानता हूं आपके मन में कई सवाल उठ रहे हैं। पहले मैं आपको कुछ बता देना चाहता हूं, उसके बाद आपके जो भी सवाल होंगे हम उसका जवाब आपको देंगे। 
इसके बाद भौमिक अपनी बात कहना शुरू करता है। इस दौरान कमिश्नर, मीडिया के लोग और खासकर परमान बड़े गौर से उसकी बात सुनने को तैयार हो जाते हैं। भौमिक भी अपनी बात कहना शुरू करता है। 

भौमिक- जैसा कि आप सभी जानते हैं कि आज से करीब 20 दिन पहले गोवा-मुंबई हाइवे पर एक हवेली में शहर के नामी डाॅक्टर अविनाश सक्सेना और उनके परिवार की किसी ने हत्या कर दी थी। मामले में शहर के कुछ बड़े बिजनेस मैन और कुछ मंत्रियों के बच्चों के नाम भी सामने आए थे, इस कारण यह केस हाईप्रोफाइल बन गया था। मेरे अधिकारियों ने इस केस की जिम्मेदारी मुझे दी थी। केस को जल्द सॉल्व करने का प्रेशर मुझ पर था और आप लोगों ने भी प्रेशर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। 
मीडिया पर्सन 2- तो क्या आपने केस साॅल्व कर लिया है
भौमिक- जैसे कि मैंने कहा कि पहले मुझे मेरी बात कह लेने दीजिए, फिर हम आपके हर सवाल का जवाब देंगे। वैसे आपके सवाल का जवाब दिए देता हूं कि हां, मैंने केस साॅल्व कर लिया है। 
मीडिया पर्सन 3- पर कल दिन तक तो आपने कोई अपडेट नहीं दी थी। एक रात में अचानक कोई कातिल आपके हाथ कैसे लग गया
भौमिक- जी, कल दिन तक मैंने इस केस के संबंध में कोई अपडेट नहीं दी थी, क्योंकि उस समय मेरे पास भी कोई अपडेट नहीं थी। जो कुछ भी हुआ है वह शाम के बाद हुआ है। 
मीडिया पर्सन 4 - तो फिर बताइए कौन है कातिल? किसने डाॅक्टर और उसकी फैमिली को मारा और क्यों मारा
भौमिक- जी, वहीं बताने के लिए मैं यहां खड़ा हूं। 
भौमिक की बात सुनकर हाॅल में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। भौमिक ने फिर बोलना शुरू किया। 
भौमिक- डाॅ. सक्सेना और उनके परिवार की हत्या खुद डाॅ. अविनाश सक्सेना ने ही की है। 
भौमिक की यह बात सुनकर हर कोई आश्चर्य में पड़ गया था। खासकर कमिश्नर और परमार को मानों झटका लगा हो। वहीं मीडिया के लोग भी भौमिक की इस बात को सुनकर हैरान रह गए थे। 
भौमिक- मैं जानता हूं कि फिलहाल आप सभी को मेरी बात पर यकीन नहीं हो रहा है, परंतु हमारे पास ऐसे सबूत है, जिससे यह साबित होता है कि पूरे परिवार की हत्या करने के बाद डाॅ. अविनाश ने भी आत्महत्या कर ली। उन्होंने परिवार की हत्या क्यों की यह राज उस परिवार की मौत के साथ ही दफन हो गया है। 
मीडिया पर्सन 1- कैसे सबूत है आपके पास
भौमिक- हमारे पास कुछ फोटोग्राफ है, जिसमें डाॅ. सक्सेना एक-एक कर अपने परिवार के सदस्यों की हत्या करते हुए साफ नजर आ रहे हैं। 
मीडिया पर्सन 3- ये फोटोग्राफ आपको कहां और कैसे मिले
भौमिक- कल रात को मैं हवेली में गया था, वहीं मुझे ये फोटोग्राफ मिले है। 
मीडिया पर्सन 2- पहले भी तो आप कई बार हवेली में गए हैं, तो पहले आपको ये फोटोग्राफ क्यों नहीं मिले
भौमिक- हम भी इंसान है, हमसे भी चूक हो जाती है। कल रात को एक बार फिर मैंने हवेली का मुआयना किया तो मुझे यह फोटोग्राफ मुझे मिल गए। 
मीडिया पर्सन 4- ये फोटोग्राफ किसने खीेंचे थे
भौमिक- कुछ देर तक चुप रहने के बाद - मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। 
मीडिया पर्सन 1- इसका मतलब है कि ये केस अब बंद हो चुका है
भौमिक- मेरे हिसाब से तो अब इस केस में कुछ बचा नहीं है। क्योंकि लाशों से तो नहीं पूछ सकता कि डाॅक्टर ने अपने पूरे परिवार की हत्या क्यों की थी
इसके बाद सभी मीडिया के लोग वहां से चले जाते हैं और उनके बाद कमिश्नर भी भौमिक से केस के संबंध में कुछ बात करके चले जाते हैं। इसके बाद भौमिक और परमार एक बार फिर भौमिक के केबिन में आज जाते हैं। भौमिक एक बार फिर अपनी आदत के अनुसार अपनी चेयर पर बैठकर टेबल पर रखे पेपरवेट को घुमाने लगता है। परमार अभी खड़ा था। भौमिक उसे बैठने का इशारा करता है और परमार वहीं रखी दूसरी चेयर पर बैठ जाता है। भौमिक उसे देखकर मुस्कुराता है। 
भौमिक- मैं जानता हूं परमार अब भी तुम्हारे मन में कई सवाल उठ रहे हैं। और तुम चाहते हो कि मैं जल्दी से पूरी बात तुम्हें बता दूं। 
परमार- जी, सर। 
भौमिक- वैसे भी तुम इस केस से शुरू से जुड़े हो तो तुम्हें हर बात जानने का हक भी है। 
परमार- जी, सर। अब बताइए ना कि सिर्फ एक रात में ही आपने केस कैसे साॅल्व कर लिया
भौमिक- देखा जाए तो बहुत कुछ खास नहीं हुआ, पर सोचा जाए तो यह बहुत आश्चर्यजनक था। 
परमार- मतलब सर। 
भौमिक- मतलब ये परमार कि कल यहां से जाने के बाद भी मेरे दिमाग में इस केस को लेकर बातें चल रही थी, जो हम कई दिनों से सोच रहे हैं। ऐसे ही मैं कल भी सोच रहा था। मुझे रात को नींद नहीं आ रही थी, इस कारण गाड़ी उठाई और रात को करीब 2.30 बजे मैं हवेली पहुंच गया।

परमार- अकेले ही सर? मुझे काॅल कर देते तो मैं भी आपके साथ आ जाता। 
भौमिक- पहले मैंने सोचा था परमार कि तुम्हें काॅल करूं, पर रात ज्यादा हो गई थी, इसलिए मैंने काॅल नहीं किया और अकेले ही हवेली पहुंच गया।
परमार- फिर क्या हुआ सर
भौमिक- हवेली तो पहुंच ही गया था, तो हमेशा की तरह सुराग की खोज में लग गया, ये सोचकर कि शायद हर बार कि तरह हमारी नजर से कुछ चूक तो नहीं गया। मैंने हवेली के हर कमरे को बड़े गौर से देखा, पर मुझे कुछ नहीं मिला। इसके बाद मैं उस हाॅल में आया, जहां हमें सारी लाशें मिली थी। 
परमार- फिर सर
भौमिक- हाॅल को भी मैंने बड़े गौर से देखा पर मुझे कुछ नजर नहीं आया। मुझे उस वक्त बहुत गुस्सा आ रहा था, मैंने गुस्से में हाॅल की एक दीवार पर मुक्का मारा। 
परमार- ओह, सर ये क्या किया आपने
भौमिक- परमार वो एक मुक्का इतने काम का रहा कि केस चुटकी बजाते हुए साॅल्व हो गया। 
परमार- क्या मतलब सर? आपके मुक्के ने ऐसा क्या दिखा दिया आपको
भौमिक- मुझे क्या दिखा दिया वो तुम खुद भी देख लो। 
भौमिक अपने टेबल की दराज से एक कैमरा निकालकर टेबल पर रख देता है। 
परमार- ये तो कोई कैमरा लगता है सर
भौमिक- हां, परमार ये कैमरा ही है। और इसी कैमरे ने बस चुटकी बजाते हुए इस अनसुलझे से लग रह केस को साॅल्व कर दिया। 
परमार- अरे वाह सर। 
भौमिक- इसके बाद जब मैंने इसे देखा तो मुझे पूरा केस समझ आ गया। 
परमार- तो मामला क्या था सर? डाॅक्टर ने परिवार की हत्या क्यों की
भौमिक- वहीं बता रहा हूं परमार। और सबसे चौंकाने वाली बात भी इस केस की यही है। मैं मीडिया को भी कारण बता सकता था, पर उसके बाद लोगों का मेडिकल और फिर डाॅक्टरी पेशे से भरोसा उठ जाता, इसलिए मैंने कह दिया कि यह राज तो डाॅक्टर के साथ ही खत्म हो गया। 
परमार- ओके, सर। वैसे आपको क्या पता चला कि उसने क्यों मारा?
भौमिक- जैसा कि हम जानते हैं परमार कि डाॅक्टर सक्सेना मनो विज्ञान में भी रूचि रखते थे। लंदन में उन्होंने इसकी डिग्री भी ली है और वे कुछ प्रयोग भी कर रहे थे। 
परमार- जी, सर। 
भौमिक- मुझे लगता है परमार कि ये डाॅक्टर अपने प्रयोग को लेकर कुछ ज्यादा ही जुनूनी हो गया था।

परमार- मतलब सर
भौमिक- मतलब ये परमार कि ये डाॅक्टर अपने प्रयोग को सही करने के लिए कुछ भी कर सकता था और उसने वहीं किया भी। इस डाॅक्टर ने अपने मनोविज्ञान को सहीं साबित करने के लिए हवेली में पहुंचे आठों बच्चों को हिप्नोटाइज यानि कि सम्मोहित किया। इसके साथ ही उसने इनके सम्मोहन में हवेली की पूरी दास्तां याद ना रहे इसके लिए कुछ की वर्ड भी दिए, जिससे की जब भी कोई उन शब्दों को उनके सामने दोहराए या कहे तो ये जैसा रिएक्शन यहां कर रहे थे, वैसा ही करें। इसके साथ ही उन सब के दिमाग में यह भी बैठा दिया कि कत्ल उन्हीं लोगों ने किया है। 
परमार- ओह, ये तो बहुत खतरनाक प्रयोग था डाॅक्टर का। 
भौमिक- नहीं परमार। ये तो कुछ नहीं। डाॅक्टर ने इसके बाद जो किया वो इससे भी ज्यादा खतरनाक था। 
परमार- इससे ज्यादा क्या किया डाॅक्टर ने
भौमिक- इससे ज्यादा ये किया उसने कि पहले उसने अपने परविार के हर व्यक्ति को और फिर खुद को भी सम्मोहित किया। सम्मोहन भी ऐसा कि सम्मोहन के दौरान उन्हें दर्द महसूस न हो। शायद वह यही प्रयोग करना चाह रहा था। ताकि ऑपरेशन के समय किसी मरीज को बेहोश ना करना पड़े। 
परमार- ये कैसा प्रयोग है सर
भौमिक- जो भी है परमार। पर मुझे लगता है कि ये डाॅक्टर अपने प्रयोग के लिए पागल हो गया था। उसने सभी को सम्मोहित करने के बाद ये देखने के लिए कि उन्हें दर्द हो रहा है या नहीं सब पर चाकू से वार किए। उसने सभी पर चार से पांच बार वार किए। जिससे सभी की मौत हो गई। इसके बाद उसने खुद पर भी यही प्रयोग किया और खुद पर भी वार किए, ज्यादा खून बह जाने के कारण वह बेहोश हो गया और फिर उसकी भी मौत हो गई। चुंकि वो डाॅक्टर था, इस कारण उसने गल्ब्स पहले हुए थे, इस कारण हमें चाकू पर किसी की उंगलियों के निशान नहीं मिले। और कोई चीखा या चिल्लाया भी इसलिए नहीं कि वे सभी सम्मोहित थे। एक तरह से यूं कह सकते हैं कि डाॅक्टर का प्रयोग सफल हो गया था। 
परमार- ओह, ये डाॅक्टर तो सचमूच ही पागल था सर। 
भौमिक- हां परमार। 
परमार- पर सर ये कैमरा कैसे था
भौमिक- मैंने इसका भी पता लगाया है परमार। ये सब एक गलती द मिस्टेक के कारण हुआ है।परमार- मतलब सर। 
भौमिक- तुम्हें याद है कि शाह ने बताया कि वो हवेली को एक रिसोर्ट के रूप में तैयार कर रहा था
परमार- जी, सर। 
भौमिक- इस दौरान वही रिसोर्ट या यूं कहे कि हवेली की दीवारों पर लाइट और कुछ खास जगहों पर कैमरे लगवा रहा था। दोनों काम एक साथ चल रहे थे। इस दौरान लाइट वाला लाइट लगाकर चला गया था और कैमरे वाला अपना काम कर रहा था। उनमें से एक ने कैमरा ठीक से काम कर रहा है या नहीं यह देखने के लिए उसका कनेक्शन किया था। जो वह बाद में निकालना भूल गया। उसकी यहीं गलती हमारे केस के लिए सबसे बड़ा प्लस प्वांइट साबित हुई है। 
परमार- क्या किसी की एक गलती ने इस अद्भूत केस को साॅल्व कर दिया सर
भौमिक- हां, परमार अद्भूत केस एक अद्भूत तरीके से ही साॅल्व हुआ है। 
परमार- हां, सर आपने बिल्कुल सही कहा। 
इसके बाद दोनों एक बार फिर साथ ऑफिस से बाहर निकलते हैं और अपने घरों की ओर चल देते हैं। भौमिक को संतोष था कि उसके पास जो केस आया वो आखिर साॅल्व हो गया। वो मन ही मन उसे कैमरे वाले को एक गलती करने के लिए धन्यवाद दे रहा था। वहीं परमार यह सोच रहा था कि भौमिक के पास जो भी केस आता है वह कभी अधुरा नहीं रहता। 
गलती द मिस्टेक कहानी आपको कैसी लगी आप कमेंट बाॅक्स में जाकर जरूर बताइगा। आपके शब्द मेरे लिए अनमोल है और मेरी लेखनी को और भी आगे जाने के लिए प्रेरित करेंगे। 
आप सभी का धन्यवाद 
                                                        प्रशांत शर्मा 

Comments/disqusion
6 comments

  1. Finally Dr. Hi hatyaara nikla.. Accha raha romanch.. Good job prashant ji.

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  2. बहुत बढ़िया कहानी है सर,लास्ट तक सस्पेन्स बरकरार रहा।

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  3. अच्छी कहानी थीं 👍

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  4. Keep it up very nice....good story and suspense.

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