गलती - द मिस्टेक
पार्ट 5
दोस्तों अब तक आपने मेरी कहानी गलती द मिस्टेक के चार पार्ट को
बहुत प्यार दिया है। अब मैं इस कहानी का पांचवा पार्ट प्रस्तुत कर रहा हूं। उम्मीद
करता हूं कि इस पार्ट को भी आपका प्यार मिलेगा और आप अपने शब्दों से मेरी
हौंसलाअफजाई करेंगे। चार पार्ट होने के कारण एक रिमांइडर के तौर पर कहानी के कुछ
अंश भी आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं।
अब तक आपने पढ़ा....
मुंबई-गोवा हाइवे पर एक पुरानी हवेली में एक साथ चार लोगों की
हत्या हुई है। शहर का एसीपी भौमिक और उसका सहायक परमार मामले की जांच कर रहे हैं।
जिनसकी हत्या हुई है वह शहर का नामी हार्ट सर्जन है, उसके साथ ही उसके बेटे और बेटी तथा उसकी पत्नी की
भी हत्या कर दी गई है। पुलिस ने इस मामले में 8 लोगों को संदिग्ध माना है। ये सभी भी शहर के कई
बड़े नामी लोगों के बच्चे हैं। जांच के दौरान भौमिक और परमार को हत्या और कातिल से
संबंधित कोई सुराग हाथ नहीं लग रहा है। पुलिस जब संदिग्धों से पूछताछ करती है तो
उनका व्यवहार बहुत अजीब हो जाता है। सभी बहुत जल्द गुस्से में आ जाते हैं और फिर
बेहोश हो जाते है। खास बात यह है कि सभी हत्या कबूल कर रहे हैं और अपने बाकि
साथियों को बेगुनाह बता रहे हैं। भौमिक और परमार को अब हवेली मालिक के आने का
इंतजार है, ताकि वे उससे बात कर कोई सुराग निकाल सके और जांच को आगे बढ़ा
सके।
पिछली कहानी से आगे ......
विशाल और सुमित की तरह ही शिवानी का भी चेहरा गुस्से में आने
लगा। हालांकि उसने अभी तक अपना आपा नहीं खोया था। परंतु उसके चेहरे के भाव बदलने
लगे थे। अब वो भौमिक को घूरकर देखने लगी
थी। उसके चेहरे डर पूरी तरह से गायब हो गया था और वह गुस्से से भर चुकी थी। भौमिक
इस बात को भी गौर से नोट कर रहा था। पहले भी उसके दिमाग यह बात थी कि इन आठ लोगों
में से किसी से भी हवेली में हुई हत्या के संबंध में कोई बात करो या प्रश्न करो तो
इनके हाव-भाव बदल जाते हैं। इस बार भी वहीं हुआ था। अब तक डरी और चुप बैठी शिवानी
एक दम से गुस्से से भर गई थी। भौमिक को लगने लगा था कि विशाल और सुमित की तरह यह
भी जोर से चिल्लाने लगेगी। हालांकि शिवानी ने ऐसा कुछ नहीं किया ,परंतु वह भौमिक को लगातार घूरे जा रही थी।
भौमिक- शिवानी तुमने मेरे प्रश्न का कोई जवाब नहीं दिया?
शिवानी- नहीं मेरे किसी दोस्त ने कोई बुरा काम नहीं किया है।
मैंने मारा है डाॅक्टर को। मेरे सारे दोस्तों को छोड़ दो।
शिवानी ने यह बात एक दम गुस्से में और तेज आवाज में कही। इस पर
भौमिक भी थोड़ा सा चौंक गया था। विशाल और सुमित की तरह शिवानी भी खुद को कातिल और
अपने बाकि सभी दोस्तों को निर्दोष करार दे रही थी।
भौमिक- ओके, ओके शिवानी! रिलेक्स। मान लिया कि तुम्हारे किसी दोस्त ने न तो
कोई बुरा काम किया है और न ही किसी की हत्या की है। तुम शांत हो जाओ।
शिवानी- मेरे दोस्तों को छोड़ दो।
शिवानी अब भी भौमिक को लगातार घूरे जा रही थी।
भौमिक- ठीक है शिवानी छोड़ दूंगा। पर तुम्हें ये बताना होगा कि
तुमने उस डाॅक्टर और उसके परिवार के लोगों को क्यों मारा ?
भौमिक के इस प्रश्न के बाद शिवानी एक दम खामोश हो गई। धीरे-धीरे
वह नाॅर्मल होने लगी थी। हालांकि उसके चेहरे पर गुस्से के भाव अब भी देखे जा सकते
थे।
भौमिक- देखो शिवानी अगर तुम चाहती हो कि मैं तुम्हारे सभी
दोस्तों को छोड़ दूं तो तुम मुझे बताओं कि तुमने डाॅक्टर और उसके परिवार को क्यों
मारा ?
शिवानी ने अब भी कुछ नहीं कहा। भौमिक ने एक बार फिर अपना सवाल
दोहराया।
भौमिक- शिवानी, मुझे बताओ तुमने डाॅक्टर को क्यों मारा ?
शिवानी अब बिल्कुल चुप हो गई थी। उसकी नजरें टेबल के एक सिरे पर
थम सी गई थी। वह न तो अब भौमिक को देख रही थी और न ही कोई हरकत कर रही थी। भौमिक
को लगने लगा था कि कहीं शिवानी भी विशाल और सुमित की तरह बेहोश न हो जाए, इसलिए उसने शिवानी को फिर से
स्पेशल सेल में पहुंचा दिया था। अपने ऑफिस में आकर भौमिक फिर से विशाल, सुमित और शिवानी के बिहेवियर के
बारे में सोचने लगा था। वह फिर से यहीं सोच रहा था कि आखिर हवेली में हुई घटना या
हत्या के संबंध में सवाल करते ही इन लोगों का व्यवहार क्यों बदल जाता है? यह एक ऐसी गुत्थी थी जो कि उससे
सुलझ ही नहीं थी। वह एक बार से पूरे केस के बारे में सोचने लगा। कि कैसे वो उसे
दिन एक पार्टी में था और अचानक ही उसे परमार का काॅल आया था। फिर वो हवेली पहुंचा था। हवेली में चार लोगों की बेहरमी से चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। आठ संदिग्धों
को परमार ने हिरासत में रखा था। ये सभी शहर के बड़े लोगों के बच्चे थे। इसलिए केस
काफी सेंसेटिव हो गया था। सबसे बड़ी बात यह थी कि आठों लोग खुद को कातिल कह रहे थे
और बाकि सात को बेगुनाह बता रहे थे। हवेली में कत्ल से जुड़ा कोई सुराग न तो उसे
मिला था और न ही फोरेंसिक टीम को मिला था। वहीं चाकू पर भी किसी की भी उंगलियों के
निशान नहीं मिले थे। उसने और परमार ने तीन बार हवेली को चेक किया था, परंतु कातिल से जुड़ा कोई भी
सुराग उनके हाथ नहीं लगा था। अब भौमिक को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार था,
जो कि उसकी जांच को आगे बढ़ा सके।
हालांकि काफी सोचने के बाद भी उसे केस में आगे बढ़ने के लिए कुछ नहीं मिल पा रहा
था। फिलहाल वह एक जगह थम सा गया था और बस केस के बारे में सोच रहा था। उसे अब
हवेली के मालिक के आने का इंतजार था। तभी उसके ऑफिस में परमार आता है।
परमार- सर मेरी हवेली मालिक से बात हो गई है और वो दिन बाद यहां
आने का बोल रहे हैं।
भौमिक- ओके परमार। परमार मुझे एक बात बिल्कुल भी समझ नहीं आ रही
है कि ये आठों बच्चे यू तो डरे हुए रहते हैं, परंतु जैसे ही उन लोगों से हत्या के संबंध में
बात करो तो ये भड़क जाते हैं।
परमार- जी सर इस पर हमने पहले भी बात की थी और तब भी यह सवाल एक
सवाल बनकर ही रह गया था। वैसे आज आपने किससे बात की है सर ?
भौमिक- शिवानी से बात की है परमार। हालांकि वो बेहोश तो नहीं
हुई विशाल और सुमित की तरह पर भड़क जरूर गई थी। वो मुझे ऐसे घूरकर देख रही थी जैसे
कि मेरी भी हत्या कर देगी।
परमार- तो क्या बताया सर उसने ?
भौमिक- कुछ नहीं बताया परमार उसने भी। विशाल और सुमित बेहोश हो
गए थे, इसलिए उन्होंने कुछ नहीं बताया। और ये चुप होकर बैठ गई तो इससे
भी कुछ पता नहीं चला। मैंने कई बार उससे हत्या का कारण पूछा पर वो तो टेबल को एकटक
देखे जा रही थी। वो तो ऐसे रिएक्ट कर रही थी जैसे कोई मूर्ति हो।
परमार- सर बस यही बातें तो समझ नहीं आ रही है कि इन लोगों को
अचानक इतना गुस्सा क्यों आ जाता है, और इन लोगों के चेहरे के हावभाव, व्यवहार सब बदल जाता है।
भौमिक- हां, परमार। अब इनमें से कोई कुछ बोले तो ही बात बने। हमें तो अब तक
ये भी नहीं पता कि कातिल कौन है? जब कातिल का ही नहीं पता तो पकड़े किसे ?
परमार- जी सर। ये बात तो है। तो फिर आगे के लिए आपने क्या सोचा
है सर ?
भौमिक- क्या सोचूं परमार। आगे बढ़ने के लिए कोई लीड ही नहीं मिल
रही है। देखते हुए हवेली का मालिक यहां आकर क्या कहानी बताता है?
इसके बाद दोनों अपने घर के लिए निकल पड़ते हैं।







good move on
ReplyDeleteजाने क्या होगा रामा रे ...
ReplyDeleteSuch a great and mysterious story
ReplyDeleteस्टोरी काफी रोचक है उम्मीद करता हूं आगे भी ऐसे ही अच्छा काम होगा।
ReplyDeleteSuper writing. Bro keep it up.
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